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ज्योतिषशास्त्र में गुण मिलान की अधिकतम संख्या 36 बताई गई।


ज्योतिषशास्त्र में गुण मिलान की अधिकतम संख्या 36 बताई गई। गुण मिलान में आठ तरह के गुण मिलाए जाते हैं वर्ण, वश्य, तारा, योनी, ग्रह मैत्री, गण, भकूट और नाड़ी।

अगर वर वधू की कुण्डली में यह सभी गुण अनुकूल मिलते हैं तो 36 के 36 गुणांक प्राप्त होते हैं। अगर इनमें कोई गुण नहीं मिलता है तो अंक कम होता जाता है।

आमतौर ऐसा माना जाता है कि वर-वधू की कुंडली में 36 के 36 गुण मिले तो बड़ा ही शुभ होता है। लेकिन इस मामले में भगवान राम और सीता का उदाहरण भी दिया जाता है। कहते हैं कि राम और सीता की कुण्डली में 36 के 36 गुण मिले थे।

इसके बावजूद भी राम और सीता कभी सुखी वैवाहिक जीवन का आनंद नहीं ले सके। दोनों के जीवन में अलगाव बना रहा। इसलिए 36 के 36 गुणों का मिलना भी ठीक नहीं माना जाता है। अगर 30 गुणों का मिलना उत्तम माना जाता है।

तिषशास्त्र के अनुसार गुण मिलान की कुल संख्या 36 है। अगर किसी वर वधू की कुण्डली मिलाने पर 18 या इससे अधिक गुणांक प्राप्त होते हैं तो इसे विवाह के लिए अनुकूल माना जाता है।

18 से कम गुण मिले तो इसे शुभ नही माना जाता है। साथ ही नाड़ी भी नहीं मिले तो ऐसे विवाह में कई समस्याएं आती हैं, ऐसा ज्योतिषशास्त्र का मत है।

परंतु आधुनिक मत मे कुण्डली मे गुण यदि कम भी मिल रहे हो और कुंडली के गृह एक दूसरे को सहायक हो तो कम गुण मिलने पर भी विवाह किया जा सकता है । क्योंकि मंगली होने या न होने जैसे दोषो का पता केवल कुंडली से चलता है न कि गुण मिलन से ।

इति शुभम् –
विकास खुराना ( कुंडली, हस्तरेखा और वास्तु विशेषज्ञ )
09999735924,09212172998,09219656820

ज्योतिषशास्त्र में गुण मिलान की अधिकतम संख्या 36 बताई गई। गुण मिलान में आठ तरह के गुण मिलाए जाते हैं वर्ण, वश्य, तारा, योनी, ग्रह मैत्री, गण, भकूट और नाड़ी।

अगर वर वधू की कुण्डली में यह सभी गुण अनुकूल मिलते हैं तो 36 के 36 गुणांक प्राप्त होते हैं। अगर इनमें कोई गुण नहीं मिलता है तो अंक कम होता जाता है।

आमतौर ऐसा माना जाता है कि वर-वधू की कुंडली में 36 के 36 गुण मिले तो बड़ा ही शुभ होता है। लेकिन इस मामले में भगवान राम और सीता का उदाहरण भी दिया जाता है। कहते हैं कि राम और सीता की कुण्डली में 36 के 36 गुण मिले थे।

इसके बावजूद भी राम और सीता कभी सुखी वैवाहिक जीवन का आनंद नहीं ले सके। दोनों के जीवन में अलगाव बना रहा। इसलिए 36 के 36 गुणों का मिलना भी ठीक नहीं माना जाता है। अगर 30 गुणों का मिलना उत्तम माना जाता है।

 तिषशास्त्र के अनुसार गुण मिलान की कुल संख्या 36 है। अगर किसी वर वधू की कुण्डली मिलाने पर 18 या इससे अधिक गुणांक प्राप्त होते हैं तो इसे विवाह के लिए अनुकूल माना जाता है।

18 से कम गुण मिले तो इसे शुभ नही माना जाता है। साथ ही नाड़ी भी नहीं मिले तो ऐसे विवाह में कई समस्याएं आती हैं, ऐसा ज्योतिषशास्त्र का मत है।

परंतु आधुनिक मत मे कुण्डली मे गुण यदि कम भी मिल रहे हो और कुंडली के गृह एक दूसरे को सहायक हो तो कम गुण मिलने पर भी विवाह किया जा सकता है । क्योंकि मंगली होने या न होने जैसे दोषो का पता केवल कुंडली से चलता है न कि गुण मिलन से । 

इति शुभम् - 
 विकास खुराना ( कुंडली, हस्तरेखा और वास्तु विशेषज्ञ )
 09999735924,09212172998,09219656820

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