Posted in Ebooks & Blogspot

http://www.vedicresearchfoundation.org/category/pdf/


http://www.vedicresearchfoundation.org/category/pdf/

Posted in ज्योतिष - Astrology

Laxmi yoga


दीपावली की रात इन आठ जगहों पर दीपक अवश्य लगाना चाहिए
1. पीपल के पेड़ के नीचे दीपावली की रात एक दीपक जलाकर रखकर वापस उसी पांवोंघर लौट आएं। दीपक को पेड के नीचे रखने के बाद पीछे मुडक़र नहीं देखना चाहिए। अगर ऐसा करते है तो आपकी धन से सम्बन्धित परेशानी दूर हो सकती है।
2. यदि संभव हो सके तो दिवाली की रात के वक्त किसी श्मशान घाट में दीपक लगाएं। यदि यह संभव ना हो तो किसी बिल्कुल शांत क्षेंत्र में स्थित मंदिर मेंदीपक लगा सकते हैं।
3. धन प्राप्ति की कामना करने वाले को अपने घर के मुख्य दरवाजें के दोनों ओरदीपक लगाना चाहिए।
4. अपने घर के नजदीकी वाले चौराहे पर रात के वक्त दीपक लगाना चाहिए। ऐसा करने पर धन से जुड़ी सभी समस्याओं का अन्त होता है।
5. अपने घर के पूजा स्थल में दीपक लगाए, जो पूरी रातभर जलना चाहिए तथा वह बुझना नहीं चाहिए। ऐसा करने पर महालक्ष्मी खुश होती हैं।
6. किसी बिल्व पत्र के पेड़ के नीचे दीपावली की शाम दीपक लगाएं। बिल्व पत्र भगवान शिव का प्रिय वृक्ष है। अत: यहां दीपक लगाने पर शिव की कृपा प्राप्ति होती है।
7. अपने घर के नजदीक जो भी मंदिर हो वहां रात के समय दीपक जरूर लगाएं। इससे सभी देवी-देवताओं के कृपा की प्राप्ति होती है।
8. अपने घर के आंगन में भी दीपक लगाना आवश्यक है। ध्यान रखें यह दीपक भी रातभर जलना चाहिए तथा यह बुझना नहीं चाहिए।
आप सभी मित्रो को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाऐ…….
(कट्ट् हिन्दु भाईयों हमको मित्र बना सकते है धन्यवाद)

Posted in भारतीय मंदिर - Bharatiya Mandir

A 155-year-old Hindu temple in Singapore


A 155-year-old Hindu temple in Singapore was today declared the 67th national monument of the country, becoming the third Hindu temple on the list.

The Sri Thendayuthapani Temple, built in 1859 by the Nattukottai Chettiars, was gazetted by the National Heritage Board (NHB) as a national monument. The board said the temple is socially, culturally, historically and architecturally significant

A 155-year-old Hindu temple in Singapore was today declared the 67th national monument of the country, becoming the third Hindu temple on the list.

The Sri Thendayuthapani Temple, built in 1859 by the Nattukottai Chettiars, was gazetted by the National Heritage Board (NHB) as a national monument. The board said the temple is socially, culturally, historically and architecturally significant
Posted in भारतीय उत्सव - Bhartiya Utsav

शुभ दीपावली


शुभ दीपावली————–

कोई भी राष्ट्र तत्काल अथवा अल्प काल मे नहीं बनता वह एक लंबे समय की परंपरा का एक हिस्सा होता है, हिन्दू समाज मे जब कोई त्यवहार, उत्सव मनाया जाता है तो उसका कोई न कोई उद्देश्य होता है तो इस पवित्र दीपावली पर्व का उद्देश्य क्या है, मनाया ही जाता क्यों है -?

वैदिक काल मे राजा-महाराजा और आर्य गृहस्थों द्वारा नियमित यज्ञ किया जाता था यज्ञ चातुर्मास समाप्ती कार्तिक पुर्णिमा पर चतुर्मास्य यज्ञ किए जाते थे, उत्तरायन-दक्षिणायन के आरंभ मे जो यज्ञ होते थे वे नवसस्येष्ठि यज्ञ कहलाते थे जो कालांतर मे दीपावली का पर्व बन गया, वैदिक काल मे उत्तरायन और दक्षिणायन का बृहद विचार था यजुर्वेद और अथर्वेद इसका विस्तार से वर्णन है, दीपावली परिवर्तन से संबन्धित त्यवहार है, इस समय सूर्य दक्षिणायन होते हैं, साथ ही नया फसल धान आता है उसका चिवुरा खाया जाता है तथा दीपोत्सव मनाया जाता है।

हम सभी जानते हैं की जब भक्त प्रहलाद पौत्र महाराजा बलि ने तीनों लोक अपने पराक्रम से विजित कर लिया वे तीनों लोको पर शासन करने लगे महान दानी थे, सारे देवता भगवान विष्णु के पास गए महाराज यह देवलोक, देवभूमि हमे पुनः वापस दिला दीजिये भगवान जानते थे वह तो महान पराक्रमी और दानी है, वे बामन रूप धारण कर वे राजा बलि के पास गए राजा उनके सुंदर स्वरूप को देख भाव विह्वल हो गए, ब्राह्मण बालक ने अपने लिए तीन कदम धरती मागा महाराज बलि के गुरु शुक्राचार्य ने बहुत समझाया ये भगवान विष्णु है तुम्हें ठगने आए है, लेकिन राज़ा बलि ने उनकी अनसुनी कर यज्ञ वेदी पर बैठ उन्होने कहा कि यदि ये विष्णु ही हैं तो इससे बड़ा महान कार्य और क्या हो सकता है! कि भगवान स्वयं ही मेरे यहाँ दान हेतु आए हैं राज़ा ने संकल्प ले उस सुंदर बामन ब्रह्मण बालक को दान देने का संकल्प लिया संकल्प लेते ही वह सुन्दर छोटा सा बालक विशाल के होता दिखाई दिया, उस बामन ने ढाई कदम से ही धरती नाप दी, तीसरा कदम राजा बलि के सिर पर रखा। उसके पश्चात भगवान ने राजा बलि को पाताल लोक का राज्य वापस कर दिया, देवता बहुत प्रसंद हुए पहली बार धरती पर दीपावली मनायी गयी सभी ने अपने- अपने घरों को सजाया खुशियां मनाई ——-!

जब मृत्यु के रहस्य की गुत्थी सुलझाने हेतु तीन दिनो तक नचिकेता यमराज के दरवाजे पर भूखा- प्यासा बैठा रहा, आने पर यमराज को बड़ा ही पश्चाताप हुआ उन्होने उसके बदले तेजस्वी नचिकेता से तीन वर मागने को कहा उसने किसी प्रकार का प्रलोभन स्वीकार नहीं किया, मजबूर हो यमराज ने मृत्यु रहस्य बता, नचिकेता को संतुष्ट कर वापस पृथ्बी पर भेज दिया नचिकेता के वापस आने पर आध्यात्मिक जगत मे ही नहीं बल्कि मानव समाज में भी दीपावली मनाई गयी तब से यह परंपरा पड़ गयी।

रामायण यानी त्रेतायुग काल मे जब भगवान श्रीराम ने रावण का बध कर अयोध्या लौटे तो यह भी दिन वही विजयदशमी के पश्चात अमावस्या का दिन था बड़ी ही धूम-धाम से अयोध्या ही नहीं सम्पूर्ण मानव जगत मे दीपावली मनाई गयी सभी मानवों ने अपने-अपने घरों को सजाया, दीपक ज्ञान का प्रतीक है अंधकार का शमन करने वाला दीपक देवताओं की ज्योतिर्मय शक्ति का प्रतिनिधि है, इसे भगवान का तेजस्वी रूप माना जाता है, बीच मे एक बड़ा घृत दीपक उसके चरो ओर 10-12 दीप प्रज्वलित कर अपने अंतर-मन को ज्ञान के प्रकाश से भर लेते हैं जिससे हृदय और मन ईश्वरीय प्रकाश से जगमगा उठे, इस कारण समस्त भारतवर्ष मे दीपावली राष्ट्रीय पर्व (त्यवहार) के रूप मे मनाया जाता है।

और दीपावली पर्व भारत का राष्ट्रीय पर्व बन गया जिसे समस्त भारतीय समाज जो भी अपने को भारतीय राष्ट्रीय मानता है सभी भारतीय इस पर्व को राष्ट्रीय पर्व के नाते बड़ी धूमधाम से मनाते हैं ।

Posted in भारतीय मंदिर - Bharatiya Mandir

सन 1940 में पुरातत्वविद श्री एम॰ एस॰ वत्स की देख-रेख में हङप्पा स्थल पर खुदाई के दौरान 3 शिवलिंग मिले। कार्बन पद्दती से काल गणनानुसार ये शिवलिंग 5000 साल पुराने हैं।


सन 1940 में पुरातत्वविद श्री एम॰ एस॰ वत्स की देख-रेख में हङप्पा स्थल पर खुदाई के दौरान 3 शिवलिंग मिले। कार्बन पद्दती से काल गणनानुसार ये शिवलिंग 5000 साल पुराने हैं।

सन 1940 में पुरातत्वविद श्री एम॰ एस॰ वत्स की देख-रेख में हङप्पा स्थल पर खुदाई के दौरान 3 शिवलिंग मिले। कार्बन पद्दती से काल गणनानुसार ये शिवलिंग 5000 साल पुराने हैं।
Posted in भारतीय उत्सव - Bhartiya Utsav

दीपावली


Toshi Dogra updated the group photo in Panchtatv पंचतत्व.

दीपावली की पंचतत्व के सभी सदस्यों को हार्दिक शुभ कामनाये

Wishing Panchtatv Family A very Happy, Prosperous and sparkling Deepawali!!

Deepawali or Diwali is a festival of lights symbolizing the victory of righteousness and the lifting of spiritual darkness. The word “Deepawali” refers to rows of diyas, or clay lamps. This is one of the most popular festivals in the Hindu calendar. It is celebrated on the 15th day of Kartika, according to the Hindu calendar. This festival commemorates Lord Rama’s return to his kingdom Ayodhya after completing his 14-year exile. The myths around Rama and Ravana are told during another holiday, known as Dussehra or Vijaya Dashami.

The Goddess Lakshmi was Vishnu’s consort and she symbolizes wealth and prosperity. She is also worshipped on Diwali. This festival is celebrated in West Bengal as “Kali Puja”, and Kali, Shiva’s consort, is worshipped during Diwali. The Diwali festival in southern India often commemorates the conquering of the Asura Naraka, a king of Assam who imprisoned many people. It is believed that Krishna freed the prisoners.

Many Buddhists in India mark anniversary of the Emperor Ashoka’s conversion to Buddhism around the time of Diwali. Many scholars believe that Ashoka lived between 270BCE and 232 BCE. Many people who observe Jainism mark the anniversary of Mahavira’s (or Lord Mahavir) attainment of nirvana on October 15, 527 BCE. Mahavira established the central spiritual ideas of Jainism. Many Jains celebrate the Festival of Lights in his honor.

Bandi Chhorh Divas, which is the Sikh celebration of the sixth Nanak’s (Guru Har Gobind) return from detention in the Gwalior Fort, coincides with Diwali. This coincidence has resulted in the similarity of celebrating the day among many Sikhs and Hindus.

दीपावली की पंचतत्व के सभी सदस्यों को हार्दिक शुभ कामनाये 

Wishing Panchtatv Family A very Happy, Prosperous and sparkling Deepawali!! 

Deepawali or Diwali is a festival of lights symbolizing the victory of righteousness and the lifting of spiritual darkness.  The word “Deepawali” refers to rows of diyas, or clay lamps. This is one of the most popular festivals in the Hindu calendar. It is celebrated on the 15th day of Kartika, according to the Hindu calendar. This festival commemorates Lord Rama's return to his kingdom Ayodhya after completing his 14-year exile. The myths around Rama and Ravana are told during another holiday, known as Dussehra or Vijaya Dashami.

The Goddess Lakshmi was Vishnu’s consort and she symbolizes wealth and prosperity. She is also worshipped on Diwali. This festival is celebrated in West Bengal as "Kali Puja", and Kali, Shiva's consort, is worshipped during Diwali. The Diwali festival in southern India often commemorates the conquering of the Asura Naraka, a king of Assam who imprisoned many people. It is believed that Krishna freed the prisoners.

Many Buddhists in India mark anniversary of the Emperor Ashoka’s conversion to Buddhism around the time of Diwali. Many scholars believe that Ashoka lived between 270BCE and 232 BCE. Many people who observe Jainism mark the anniversary of Mahavira's (or Lord Mahavir) attainment of nirvana on October 15, 527 BCE. Mahavira established the central spiritual ideas of Jainism. Many Jains celebrate the Festival of Lights in his honor.

Bandi Chhorh Divas, which is the Sikh celebration of the sixth Nanak's (Guru Har Gobind) return from detention in the Gwalior Fort, coincides with Diwali. This coincidence has resulted in the similarity of celebrating the day among many Sikhs and Hindus.
Posted in भारतीय उत्सव - Bhartiya Utsav

नरक चतुर्दशी


इसलिए मनाया जाता है नरक चतुर्दशी का त्योहार(राजेन्द्र शर्मा »खण्डवा)
नरक चतुर्दशी का त्योहार हर साल कार्तिक कृष्ण चतुदर्शी को यानी दीपावली के एक दिन पहले मनाया जाता है। इस चतुर्दशी तिथि को छोटी दीपावाली के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन प्रातः काल स्नान करके यम तर्पण एवं शाम के समय दीप दान का बड़ा महत्व है।

पुराणों की कथा के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तिथि को नरकासुर नाम के असुर का वध किया। नरकासुर ने 16 हजार कन्याओं को बंदी बना रखा था।

नरकासुर का वध करके श्री कृष्ण ने कन्याओं को बंधन मुक्त करवाया। इन कन्याओं ने श्री कृष्ण से कहा कि समाज उन्हें स्वीकार नहीं करेगा अतः आप ही कोई उपाय करें। समाज में इन कन्याओं को सम्मान दिलाने के लिए सत्यभामा के सहयोग से श्री कृष्ण ने इन सभी कन्याओं से विवाह कर लिया।

नरकासुर का वध और 16 हजार कन्याओं के बंधन मुक्त होने के उपलक्ष्य में नरक चतुर्दशी के दिन दीपदान की परंपरा शुरू हुई। एक अन्य मान्यता के अनुसार नरक चतुर्दशी के दिन सुबह स्नान करके यमराज की पूजा और संध्या के समय दीप दान करने से नर्क के यतनाओं और अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। इस कारण भी नरक चतु्र्दशी के दिन दीनदान और पूजा का विधान है।

इसलिए मनाया जाता है नरक चतुर्दशी का त्योहार♥(राजेन्द्र शर्मा »खण्डवा)
नरक चतुर्दशी का त्योहार हर साल कार्तिक कृष्ण चतुदर्शी को यानी दीपावली के एक दिन पहले मनाया जाता है। इस चतुर्दशी तिथि को छोटी दीपावाली के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन प्रातः काल स्नान करके यम तर्पण एवं शाम के समय दीप दान का बड़ा महत्व है।

पुराणों की कथा के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तिथि को नरकासुर नाम के असुर का वध किया। नरकासुर ने 16 हजार कन्याओं को बंदी बना रखा था।

नरकासुर का वध करके श्री कृष्ण ने कन्याओं को बंधन मुक्त करवाया। इन कन्याओं ने श्री कृष्ण से कहा कि समाज उन्हें स्वीकार नहीं करेगा अतः आप ही कोई उपाय करें। समाज में इन कन्याओं को सम्मान दिलाने के लिए सत्यभामा के सहयोग से श्री कृष्ण ने इन सभी कन्याओं से विवाह कर लिया।

नरकासुर का वध और 16 हजार कन्याओं के बंधन मुक्त होने के उपलक्ष्य में नरक चतुर्दशी के दिन दीपदान की परंपरा शुरू हुई। एक अन्य मान्यता के अनुसार नरक चतुर्दशी के दिन सुबह स्नान करके यमराज की पूजा और संध्या के समय दीप दान करने से नर्क के यतनाओं और अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। इस कारण भी नरक चतु्र्दशी के दिन दीनदान और पूजा का विधान है।
Posted in रामायण - Ramayan

Wish you all a very happy Hanuman Jayanti


Toshi Dogra shared her photo.

Wish you all a very happy Hanuman Jayanti
(celebrated today in North India).

May Rama-Bhakta Hanuman, an embodiment of wisdom and supreme devotion to the omnipresent Divinity, enlighten our hearts with the light of devotion and wisdom.

Hanumant symbolizes the monkey-like human mind after it has reached the inner stillness and is filled with love for the omnipresent Divinity and has obtained deep meditative insight into the true nature of reality. He symbolizes the mind which has at its core nothing else than the awareness of universal consciousness (Lord Rama) and universal energy (Devi Sita), the sources of everything that was, is and will come into existence in the universe. This is the Hanuman which is always present at every Rama-Katha and was also present when the Bhagavad Gita was spoken by Lord Krishna to his friend and devotee Arjuna. In the Hatha Yoga traditions Hanumant is commemorated through the Hanumadasana (split pose). May He bless us and bestow us with stillness, awareness and insight in life.

Pictures: Lord Hanuman is a well-recognized figure in most of South Asia, especially in India, Nepal, Sri Lanka, Burma, Laos, Thailand, Cambodia, Singapore and Indonesia.

(Credit:Vedic Sanatana Dharma (Hinduism) – वैदिकः सनातनो धर्मः )

(Hanuman Jayanti is celebrated on different dates in different sates of India. Read here http://www.hindu-blog.com/2009/03/hanuman-jayanthi-2009.html)

Posted in भारतीय उत्सव - Bhartiya Utsav

धनतेरास, किंवा धनत्रयोदशी


धनतेरास, किंवा धनत्रयोदशी ही आश्विन महिन्याच्या १३व्या दिवशी असते. हा दिवशी लक्ष्मी मातेची पुजा केली जाते. दिवाळी उत्सव चालू असताना धनत्रयोदशीस एक आगळेवेगळे स्वरुप येते.

धनत्रयोदशी दंतकथा

धनत्रयोदशी या सणामागे एक मनोवेधक कथा आहे. कथित भविष्यवाणी प्रमाणे हेमा राजाचा पुत्र आपल्या सोळाव्या वर्षी मृत्युमुखी पडणार असतो. आपला पुत्राने जीवनाची सर्व सुख उपभोगावीत म्हणुन राजा व राणी त्याचे लग्न करतात. लग्नानंतर चवथा दिवस हा तो मृत्युमुखी पडण्याचा भयंकर दिवस असतो. या रात्री त्याची पत्नी त्यास झोपू देत नाही. त्याच्या अवतीभवती सोन्या चांदीच्या मोहरा ठेवल्या जातात. महालाचे प्रवेशद्वार ही असेच सोन्या चांदीने भरून रोखले जाते. सर्व महालात मोठमोठ्या दीव्यानी लखलखीत प्रकाश केला जातो. ती त्यास वेगवेगळी गाणी व गोष्टी सांगुन जागे ठेवते. जेव्हा यम राजकुमाराच्या खोलीत सर्परुपात प्रवेश करण्याचा प्रयत्न करतो तेंव्हा त्याचे डोळे सोन्या चांदीने दिपतात. या कारणास्तव यम आपल्या जगात(यमलोकात) परततो. अश्या प्रकारे तिने राजकुमाराचे प्राण वाचवले. म्हणुनच या दिवसास यमदीपदान असेही म्हणतात. या दिवशी सायंकाळी घराबाहेर दिवा लाउन त्याच्या वातीचे टोक दक्षिण दिशेस करतात.त्यानंतर त्या दिव्यास नमस्कार करतात. याने अपमृत्यु टळतो असा समज आहे.

धनत्रयोदशी बद्दल अजून एक दंतकथा आहे. ती म्हणजे समुद्र मंथन. जेव्हा असुरांबरोबर इंद्रदेव यांनी महर्षि दुर्वास यांच्या शाप निवाराणास समुद्र मंथन केले, तेव्हा त्यातुन देवी लक्ष्मी प्रगट झाली.

तसेच समुद्र मंथनातून धन्वंतरी अमृतकुंभ बाहेर घेऊन आला. म्हणून धन्वंतरीचीही या दिवशी पुजा केली जाते. या दिवसास धन्वंतरी जयंती असेही म्हणतात

Posted in रामायण - Ramayan

Koenraad Elst on the Ram Janbhoomi Temple:


Koenraad Elst on the Ram Janbhoomi Temple:

“…It is not often that intellectuals play a crucial role in politics, but this time they did. After the locks had been removed, India’s Marxist intellectuals unchained all their devils in order to prevent the full restoration of the site as a Hindu pilgrimage centre. In particular, they started insisting that there had never been a Hindu temple at the site before a mosque had been imposed on it.

This was a strange claim to make, for two reasons. Firstly, it was untrue. Until then, all parties concerned had agreed that the mosque had been built in forcible replacement of a temple. What is nowadays rubbished as “the VHP claim” was in fact the consensus view. Thus, in court proceedings in the 1880s, the Muslim claimants and the British rulers agreed with the Hindu claimants on the historical fact of the temple demolition, but since it had happened centuries earlier, they decided that time had sanctioned the Muslim usurpation and nullified the Hindus’ legal claim. Further, numerous documents and several archaeological excavations confirmed the history of the temple demolition (with the court-ordered excavations of spring 2003 removing the last possible doubts). The sudden denial of this history by a circle of Marxist historians was not based on any new evidence but purely on political compulsions. It seems that their long enjoyment of a hegemonic power position in academe had gone to their heads, so they thought they could get away with crude history falsification.

Secondly, the question of the site’s history was beside the point. The decisive consideration for awarding the site to the Hindus, both for the Hindu campaigners themselves and for Rajiv Gandhi, was not the site’s sacred status in the Middle Ages, but its sacredness for Hindus today. It is the Hindus of 1986 or indeed of 2004 who have been going on pilgrimage to Ayodhya, and they are as much entitled to find a Hindu atmosphere there, complete with Hindu architecture, as Muslims are entitled to find an Islamic atmosphere in Mecca. The VHP has been blamed for politicising history, but it was its opponents who complicated matters by bringing in history, and false history at that.

Rajiv Gandhi didn’t give up, though. In 1989, he allowed the Shilanyas ceremony, in which the first stone of the planned temple was put in place. In 1990, as opposition leader, he made Chandra Shekhar’s minority government organize a scholars’ debate on the history of the site, obviously on the assumption that this would confirm the Hindu claim. And so it did, for the anti-temple historians showed up empty-handed when they were asked to provide evidence for an alternative scenario to the temple demolition. In a normal course of events, i.e. without the interference of secularist shrieks and howls, this would have set the stage for the peaceful construction of a new temple in the 1990s, with some compensation for the Muslim community, and the conflict would have been forgotten by now. Instead, the sore has continued to fester. In 1991 Rajiv Gandhi was murdered, and his successors didn’t have the good sense to continue his equitable and pragmatic Ayodhya policy.”

Arun Upadhyay It is peculiar that all Muslim historians from 1000 to 1750 AD have described with great pride mass-murders, kidnapping and rapes of women, forced conversion with threats of most cruel death and destruction of temples. But now the same are termed as angels of peace. There can be doubt about exact spot of birth of Ram whether it was 20 meters or 200 meters from centre or Rama-janmabhumi temple. But there is no doubt about birth place of Babur-that was at least 3000 kms from Ayodhya. While history books by muslims take pride in destruction of temples as victory of Islam, Koran specifically prohibits usurping places of worship of other sects. In fact Jajiya tax was collected only for protection of religious places & rights.
6 hrs · Unlike · 2