Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

पन्नाधाय के नाम को कौन नहीं जानता


#पन्नाधाय :- पन्नाधाय के नाम को कौन नहीं जानता? वे राजपरिवार की सदस्य नहीं थीं। राणा सांगा के पुत्र उदयसिंह को मा¡ के स्थान पर दूध पिलाने के कारण पन्ना धाय मा¡ कहलाई। पन्ना का पुत्र व राजकुमार साथ-साथ बड़े हुए। उदयसिंह को पन्ना ने अपने पुत्र के समान पाला अत: उसे पुत्र ही मानती थी।

दासी पुत्र बनवीर चित्तौड़ का शासक बनना चाहता था। उसने एक-एक कर राणा के वंशजों को मार डाला। एक रात महाराजा विक्रमादित्य की हत्या कर, बनवीर उदयसिंह को मारने के लिए उसके महल की ओर चल पड़ा। एक विश्वस्त सेवक द्वारा पन्ना धाय को इसकी पूर्व सूचना मिल गई।

पन्ना राजवंश के प्रति अपने कर्तव्यों के प्रति सजग थी व उदयसिंह को बचाना चाहती थी। उसने उदयसिंह को एक बांस की टोकरी में सुलाकर उसे झूठी पत्तलों से ढककर एक विश्वास पात्र सेवक के साथ महलों से बाहर भेज दिया। बनवीर को धोखा देने के उद्देश्य से अपने पुत्र को उसके पलंग पर सुला दिया। बनवीर रक्तरंजित तलवार लिए उदयसिंह के कक्ष में आया और उदयसिंह के बारे में पूछा। पन्ना ने उदयसिंह के पलंक की ओर संकेत किया जिस पर उसका पुत्र सोया था। बनवीर ने पन्ना के पुत्र को उदयसिंह समझकर मार डाला।

पन्ना अपनी आंखों के सामने अपने पुत्र के वध को अविचलित रूप से देखती रही। बनवीर को पता न लगे इसलिए वह आंसू भी नहीं बहा पाई। बनवीर के जाने के बाद अपने मृत पुत्र की लाश को चूमकर राजकुमार को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए निकल पड़ी। धन्य है स्वामिभक्त वीरांगना पन्ना! जिसने अपने कर्तव्य-पूर्ति में अपनी आ¡खों के तारे पुत्र का बलिदान देकर मेवाड़ राजवंश को बचाया।

‪#‎पन्नाधाय‬ :- पन्नाधाय के नाम को कौन नहीं जानता? वे राजपरिवार की सदस्य नहीं थीं। राणा सांगा के पुत्र उदयसिंह को मा¡ के स्थान पर दूध पिलाने के कारण पन्ना धाय मा¡ कहलाई। पन्ना का पुत्र व राजकुमार साथ-साथ बड़े हुए। उदयसिंह को पन्ना ने अपने पुत्र के समान पाला अत: उसे पुत्र ही मानती थी।

दासी पुत्र बनवीर चित्तौड़ का शासक बनना चाहता था। उसने एक-एक कर राणा के वंशजों को मार डाला। एक रात महाराजा विक्रमादित्य की हत्या कर, बनवीर उदयसिंह को मारने के लिए उसके महल की ओर चल पड़ा। एक विश्वस्त सेवक द्वारा पन्ना धाय को इसकी पूर्व सूचना मिल गई।

पन्ना राजवंश के प्रति अपने कर्तव्यों के प्रति सजग थी व उदयसिंह को बचाना चाहती थी। उसने उदयसिंह को एक बांस की टोकरी में सुलाकर उसे झूठी पत्तलों से ढककर एक विश्वास पात्र सेवक के साथ महलों से बाहर भेज दिया। बनवीर को धोखा देने के उद्देश्य से अपने पुत्र को उसके पलंग पर सुला दिया। बनवीर रक्तरंजित तलवार लिए उदयसिंह के कक्ष में आया और उदयसिंह के बारे में पूछा। पन्ना ने उदयसिंह के पलंक की ओर संकेत किया जिस पर उसका पुत्र सोया था। बनवीर ने पन्ना के पुत्र को उदयसिंह समझकर मार डाला।

पन्ना अपनी आंखों के सामने अपने पुत्र के वध को अविचलित रूप से देखती रही। बनवीर को पता न लगे इसलिए वह आंसू भी नहीं बहा पाई। बनवीर के जाने के बाद अपने मृत पुत्र की लाश को चूमकर राजकुमार को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए निकल पड़ी। धन्य है स्वामिभक्त वीरांगना पन्ना! जिसने अपने कर्तव्य-पूर्ति में अपनी आ¡खों के तारे पुत्र का बलिदान देकर मेवाड़ राजवंश को बचाया।

Posted in रामायण - Ramayan

IRAN & IRAQ – THE RAMAYANA CONNECTION


A search team in the time of Lord Rama had gone to IRAQ- IRAN for search of SITA
read the full article here
https://www.facebook.com/acaci.official/photos/a.263205057077947.61212.262762497122203/745822288816219/?type=1&theater

IRAN & IRAQ – THE RAMAYANA CONNECTION
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When Sita was held in captive, four vanara brigades were readied to be sent out in four different directions for the search of ‘Goddess’ Sita
The search-party is given a route-map by Sugreeva the vanara chief, which leads them right up to what was known as the Asta Mountain

Sage Valmiki traces the route of the vanaras going in the western direction. An easily identifiable location that he mentions in the Ramayana is the geographical point where the Sindhu, that is the Indus falls into the Arabian Sea. That would be close to present day Karachi

During the course vanaras are told that they will come across in succession ,many mountain peaks which are named as Varaha, Meghavanta and finally Meru. These appear to be mountain peaks of the Zagros range, located across the Arabian Sea in Iran, extending to Iraq.

Valmiki also mentions a city by the name of Pragjyotisha. If we assume that the sea-levels during the Ramayana era were higher than they are today many of the mountains of the Zagros range in Iran would be water-logged.
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India ruled the whole world before 7000 BC
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SOURCE : http://vediccafe.blogspot.in/2013/05/iran-ramayana-connection.html
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Posted in हिन्दू पतन

आज करवाचौथ का व्रत है ।


कैसा और किसके लिए:- “व्रत”
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शबाना-सुनैना से बोली- आज क्या बात है ? नई नवेली दुल्हन की तरह सजी हुई है ।
सुनैना बोली- क्या तुझे नही मालूम ? आज करवाचौथ का व्रत है ।
शबाना बोली- ये क्या होता है ?
सुनैना बोली- इस दिन महिलायें पति की लम्बी उम्र के लिए व्रत रखती हैं ।
जिसे करवाचौथ कहते हैं | लेकिन क्या तुम ऐसा कोई व्रत नही रखती हो ?
शबाना बोली- नहीं |
सुनैना बोली- क्यों ?
शबाना बोली- जब हमारे यहाँ ये ही पता नही होता कि पति कब तीन बार तलाक तलाक तलाक कहकर तलाक दे दे तो फिर कैसा और किसके लिए व्रत ?

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

ये पोस्ट उन सभी को समर्पित करता हु जो जानबुझ कर या फिर


ये पोस्ट उन सभी को समर्पित करता हु जो जानबुझ कर या फिर
अनजाने में अपनों पर वहम (शक) करके अपनी और अपने
ही लोगो की जिन्दगी में जहर घोल रहे है…!
साथियो…..एक गाँव में एक परिवार रहता था….! परिवार में
पति और पत्नी थे….वे एकदूसरे से बहुत प्रेम करते थे…पर वे
हमेशा दुखी रहा करते थे….शादी के चार साल बाद भी उनके कोई
औलाद नहीं थी….एक दिन पत्नी कुछ सामान लेने बाहर गई
की उसे रास्ते में एक कुतिया मरी पड़ी देखी..उसका एक
बच्चा इस बात से अनजान की उसकी माँ इस दुनिया में
नहीं है…अपनी माँ के स्तन मुह में लेकर अपनी भूख मिटाने
की असफल कौशिश कर रहा था…..पत्नी ये दृश्य देख कर
दुखी हुई और उस कुत्ते के बच्चे को अपने साथ घर ले
आई….पति उसे देख कर गुस्साया…..पर पत्नी की मिन्नतें सुन
कर और मन मार कर उसे घर में रखने की इजाजत दे दी..!
ईश्वर की कृपा से कुछ एक साल बाद उनके घर में वो ख़ुशी भी आ
गई जिसका वो इंतजार कर रहे थे…उनके घर में एक बहुत
ही सुन्दर बच्चे का जन्म हुआ….सभी बहुत ही खुश थे…वे
येही समझते थे की ये उस माँ की दुआ से हुआ है जिसके अनाथ
बच्चे को उन्होंने पनाह दी और इतना दुलार दिया….! समय
बीतता गया…कुत्ते का बच्चा भी अपने घर आये नए मेहमान
की अपने तरीके से बहुत साल संभाल करता था…जब घर में कोई
नहीं होता था तो वो उसका बेहद ख्याल रखता था…!
एक दिन पति-पत्नी कुछ काम से बाहर गए…..जब वापस घर
लौटे तो वह का मंजर देख कर उनकी रूह काँप गई…घर के बाहर
बरामदे में ही उनका कुत्ता देखा जिसके मुह से खून टपक
रहा था….पति-पत्नी को देखते ही ख़ुशी के मारे वो उनकी तरफ
लपका…पर पति को कुछ भी समझते देर नही लगी वो गुस्से में
आग बबूला हो उठा और पास ही पड़ी कुल्हाड़ी कुत्ते के सर पर दे
मारी….कुत्ता वही पे ढेर हो गया….दोनों भाग कर कमरे में
गये…..बच्चे को ढूंढने लगे…पर बच्चा कही नहीं दिखा….पर
तभी अचानक बच्चे के रोने की आवाज आई…दोनों उस तरफ दौड़े
जहा से आवाज आई थी…..वहा जो भी उन्होंने देखा…पाँव के
नीचे से जमीन खिसकाने के लिए काफी थी….!
वहा पर एक काला और बहुत ही लंबा सांप खून से लथपथ
मरा पड़ा था….पति अपने सर पर हाथ रख कर रोने
लगा….वो समझ गया था की उसके बच्चे को बचाने के लिए
कुत्ता इस सांप से अपनी जान की परवाह किये बिना लड़ा…और
उसी ने बिना सोचे समझे उसकी हत्या कर दी….वो बहुत
पछताया पर…..सब खत्म हो चुका था…! मात्र एक वहम ने एक
बेजुबान की बलि चढ़ा दी…!
कई बार आँखों देखी चीजे भी झूठ साबित हो जाती है…..!
जैसा की कुत्ते के मुह से टपकते खून को देख कर
पति को गलतफहमी हो गई थी….!
साथियों…ये तो सिर्फ एक कहानी है….पात्र बदल जाते
है…कहानिया बदल जाती है…बस नहीं बदलता तो वो है इंसान
का “वहम”….! इस कहानी में कुत्ता नहीं मरा….सही मायने में
देखे तो मरी थी उस पति की “आत्मा”….उसका “धेर्य”…!
कभी किसी पर भी शक ना करे जब तक पुख्ता प्रमाण ना हो…!
वरना बाद में सिवाय पश्चाताप के कुछ हासिल
नहीं होगा….हो सकता है कुछ अनमोल रिश्ते आप हमेशा के लिए
खो दे….!

ये पोस्ट उन सभी को समर्पित करता हु जो जानबुझ कर या फिर
अनजाने में अपनों पर वहम (शक) करके अपनी और अपने
ही लोगो की जिन्दगी में जहर घोल रहे है...!
साथियो.....एक गाँव में एक परिवार रहता था....! परिवार में
पति और पत्नी थे....वे एकदूसरे से बहुत प्रेम करते थे...पर वे
हमेशा दुखी रहा करते थे....शादी के चार साल बाद भी उनके कोई
औलाद नहीं थी....एक दिन पत्नी कुछ सामान लेने बाहर गई
की उसे रास्ते में एक कुतिया मरी पड़ी देखी..उसका एक
बच्चा इस बात से अनजान की उसकी माँ इस दुनिया में
नहीं है...अपनी माँ के स्तन मुह में लेकर अपनी भूख मिटाने
की असफल कौशिश कर रहा था.....पत्नी ये दृश्य देख कर
दुखी हुई और उस कुत्ते के बच्चे को अपने साथ घर ले
आई....पति उसे देख कर गुस्साया.....पर पत्नी की मिन्नतें सुन
कर और मन मार कर उसे घर में रखने की इजाजत दे दी..!
ईश्वर की कृपा से कुछ एक साल बाद उनके घर में वो ख़ुशी भी आ
गई जिसका वो इंतजार कर रहे थे...उनके घर में एक बहुत
ही सुन्दर बच्चे का जन्म हुआ....सभी बहुत ही खुश थे...वे
येही समझते थे की ये उस माँ की दुआ से हुआ है जिसके अनाथ
बच्चे को उन्होंने पनाह दी और इतना दुलार दिया....! समय
बीतता गया...कुत्ते का बच्चा भी अपने घर आये नए मेहमान
की अपने तरीके से बहुत साल संभाल करता था...जब घर में कोई
नहीं होता था तो वो उसका बेहद ख्याल रखता था...!
एक दिन पति-पत्नी कुछ काम से बाहर गए.....जब वापस घर
लौटे तो वह का मंजर देख कर उनकी रूह काँप गई...घर के बाहर
बरामदे में ही उनका कुत्ता देखा जिसके मुह से खून टपक
रहा था....पति-पत्नी को देखते ही ख़ुशी के मारे वो उनकी तरफ
लपका...पर पति को कुछ भी समझते देर नही लगी वो गुस्से में
आग बबूला हो उठा और पास ही पड़ी कुल्हाड़ी कुत्ते के सर पर दे
मारी....कुत्ता वही पे ढेर हो गया....दोनों भाग कर कमरे में
गये.....बच्चे को ढूंढने लगे...पर बच्चा कही नहीं दिखा....पर
तभी अचानक बच्चे के रोने की आवाज आई...दोनों उस तरफ दौड़े
जहा से आवाज आई थी.....वहा जो भी उन्होंने देखा...पाँव के
नीचे से जमीन खिसकाने के लिए काफी थी....!
वहा पर एक काला और बहुत ही लंबा सांप खून से लथपथ
मरा पड़ा था....पति अपने सर पर हाथ रख कर रोने
लगा....वो समझ गया था की उसके बच्चे को बचाने के लिए
कुत्ता इस सांप से अपनी जान की परवाह किये बिना लड़ा...और
उसी ने बिना सोचे समझे उसकी हत्या कर दी....वो बहुत
पछताया पर.....सब खत्म हो चुका था...! मात्र एक वहम ने एक
बेजुबान की बलि चढ़ा दी...!
कई बार आँखों देखी चीजे भी झूठ साबित हो जाती है.....!
जैसा की कुत्ते के मुह से टपकते खून को देख कर
पति को गलतफहमी हो गई थी....!
साथियों...ये तो सिर्फ एक कहानी है....पात्र बदल जाते
है...कहानिया बदल जाती है...बस नहीं बदलता तो वो है इंसान
का “वहम”....! इस कहानी में कुत्ता नहीं मरा....सही मायने में
देखे तो मरी थी उस पति की “आत्मा”....उसका “धेर्य”...!
कभी किसी पर भी शक ना करे जब तक पुख्ता प्रमाण ना हो...!
वरना बाद में सिवाय पश्चाताप के कुछ हासिल
नहीं होगा....हो सकता है कुछ अनमोल रिश्ते आप हमेशा के लिए
खो दे....!
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हैदराबाद के निजाम


हैदराबाद के निजाम ने खुद को भारत से अलग होने का एलान कर दिया था,
सरदार पटेल ने उसे संधि के लिए दिल्ली बुलाया,
निजाम ने अपने दीवान को उनसे मिलने भेजा, जब निजाम का दीवान पटेल जी से मिलने आया तो पटेल जी ने पहले उसका पूरा आदर सत्कार किया, उसके बाद मंत्रणा करने बैठे,
पटेल जी ने पूछा की जब हैदराबाद के 80% हिन्दू भारत में मिलना चाहते है तो आपके निजाम क्यों पाकिस्तान के बहकावे में आ रहे है,
दीवान ने बताया कि निजाम ने कहा की आप हमारे बीच में न पड़े, हम अपनी मर्जी के मालिक है, और रही हिन्दुओ की बात तो इन 1 करोड़ हिन्दुओ की हम लाशें बिछा देंगे, एक भी हिन्दू आपको जिन्दा नहीं मिलेगा, तब किसकी राय पूछेंगे??
पटेल जी ने कहा - आप जाइए वापिस हैदराबाद,
दीवान चला जाता है,
अगली सुबह उसके हैदराबाद पहुँचने से पहले ही भारतीय सेना हैदराबाद पर धावा बोल देती है,
ऐसे कठोर समय में भी बिना समय गँवाए सही निर्णय लेकर खंड खंड देश को हिमाचल से कन्याकुमारी तक एक करने वाले सरदार पटेल को कोटि कोटि नमन,
और एकमात्र कश्मीर की समस्या को सुलझाने की बात कह कर उसे अंतर्राष्ट्रीय समस्या बता कर भारत के लिए नासूर बना देने वाले धूर्त, कपटी , छदम पंडित, मियां नेहरु को कोटि कोटि जुतांजलि

 था,दराबाद के हैम ने खुद को भारत से अलग होने का एलान कर दियानिजा
सरदार पटेल ने उसे संधि के लिए दिल्ली बुलाया,
निजाम ने अपने दीवान को उनसे मिलने भेजा, जब निजाम का दीवान पटेल जी से मिलने आया तो पटेल जी ने पहले उसका पूरा आदर सत्कार किया, उसके बाद मंत्रणा करने बैठे,
पटेल जी ने पूछा की जब हैदराबाद के 80% हिन्दू भारत में मिलना चाहते है तो आपके निजाम क्यों पाकिस्तान के बहकावे में आ रहे है,
दीवान ने बताया कि निजाम ने कहा की आप हमारे बीच में न पड़े, हम अपनी मर्जी के मालिक है, और रही हिन्दुओ की बात तो इन 1 करोड़ हिन्दुओ की हम लाशें बिछा देंगे, एक भी हिन्दू आपको जिन्दा नहीं मिलेगा, तब किसकी राय पूछेंगे??
पटेल जी ने कहा – आप जाइए वापिस हैदराबाद,
दीवान चला जाता है,
अगली सुबह उसके हैदराबाद पहुँचने से पहले ही भारतीय सेना हैदराबाद पर धावा बोल देती है,
ऐसे कठोर समय में भी बिना समय गँवाए सही निर्णय लेकर खंड खंड देश को हिमाचल से कन्याकुमारी तक एक करने वाले सरदार पटेल को कोटि कोटि नमन,
और एकमात्र कश्मीर की समस्या को सुलझाने की बात कह कर उसे अंतर्राष्ट्रीय समस्या बता कर भारत के लिए नासूर बना देने वाले धूर्त, कपटी , छदम पंडित, मियां नेहरु को कोटि कोटि जुतांजलि

Posted in संस्कृत साहित्य

MAITRAKAS DYNASTY OF ” VALLABHI ” (SAURASHTRA) .


Dashrath Varotariya added 5 new photos.

MAITRAKAS DYNASTY OF ” VALLABHI ” (SAURASHTRA) .

KINGS :—

1. SHRI BHATARKA ( 470 TO 493 AD )
( after asserting his independence from Gupta kings , BHATARKA seems to have transferred his capital from GIRINAGAR to VALLABHI .)

2. DHARASENA 1 (493 AD. TO 499 AD. )

3. DRONASIMHA ( 499 TO 519 AD.)

4. DHRUVASENA 1 ( 519 TO 549 AD )

5. DHARAPATTA ( 549 TO 553 AD)

6. GUHASENA ( 553 TO 569 AD)

7. DHARASENA-2 ( 569 TO 589-90 AD )

8. SHILADITYA-1 ( 590 TO 615 AD)

9. KHARAGRAHA-1 (615 TO 621 AD)

10. DHARASENA-3 ( 621 TO 627 AD)

11. DHRUVSENA-2(BALADITYA)
(627 TO 641 AD)

12. DHARASENA-4 ( 641 TO 650 AD)

13. DHRUVASENA-3. ( 650 TO 654-55 AD )

14. KHARAGRAHA-2 ( 655 TO 658 AD)

15. SHILADITYA-2 ( 658 TO 685 AD)

16. SHILADITYA-3. ( 685 TO 710 AD )

17. SHILADITYA-4. ( 710 TO 740 AD )

18. SHILADITYA-5. ( 740 TO 762 AD )

19. SHILADITYA-6 ( 762 TO 777 AD )

Dashrath Varotariya's photo.
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Posted in Sai conspiracy

हर अवतार में प्रभु ने किसी न किसी दत्य को मरा या मानव के हितार्थ कार्य किए l

साई के तथाकित अवतार पाँखड की लीला में देखे तो साई ने ज्यादा बीडी चिलम पी पर यह बुराई नही मरी

लेकिन र्मोडन कहे जाने वाले का यह तथाकित पाँखड खुद ही बीडी चिलम आदि के सेवन से दमे के कारण खांसते खांसते मर गया

यहाँ पर दमा नाम की बिमारी जीत गई और र्मोडन भगवान दर्दनाक मोत मर गया

हुआ हुआ हुहुहु
लगा दम मिटा साई

वेघानिक चेतावनी :- घुम्रपान जानलेवा हैं इससे र्मोडन अवतार पाँखंड भी नही बचा l

जय सियाराम
धर्मो रक्षति रक्षितः
धर्म की रक्षा करो धर्म तुम्हारी रक्षा करेगा
धर्म की जय हो अधर्म का नाश हो |

‪#‎ExposeShirdisai‬ ‪#‎Bhaktijihad‬ ‪#‎FraudSai‬
‪#‎बहरूपिया_साई‬ ‪#‎शिर्डी_साई_बेनकाब‬ ‪#‎भक्ति_जिहाद‬

Shirdi Sai Baba – भारत के इतिहास का सबसे बड़ा पाखंड

Shirdi Sai Baba - भारत के इतिहास का सबसे बड़ा पाखंड's photo.
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