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लव जिहाद पर चर्चा केरल की मशहूर लेखिका कमला दास उर्फ़ कमला सुरैया की चर्चा किये बिना अधूरी है …


लव जिहाद पर चर्चा केरल की मशहूर
लेखिका कमला दास उर्फ़
कमला सुरैया की चर्चा किये बिना अधूरी है …
हलांकि अब ये कमला दास उर्फ़
कमला सुरैया 72 मुस्टंडो के पास जन्नत में
है …
कमला दास केरल
की जानी मानी लेखिका थी …
जो माधवी कुट्टी के नाम से
लिखती थी …और केरल की रायल परिवार से
थी और नायर थी … पति के निधन के बाद ये
अकेलेपन में थी … पति के निधन के समय
इनकी उम्र 65 साल थी … लेकिन फिर
भी इनके अंदर सेक्सुअल इच्छाए भरी थी …
तीन काफी बड़े बच्चे थे जो बड़ी बड़ी पोस्ट
पर थे ..एक बेटा माधव दास नलपत टाइम्स
ऑफ़ इंडिया का चीफ एडिटर था जो बाद में
यूनेस्को का बड़ा अधिकारी भी बना …
उसकी पत्नी त्रावनकोर स्टेट
की राजकुमारी है ..
एक बेटा चिम्मन दास विदेश
सेवा का अधिकारी है और एक बेटा केरल में
कांग्रेस से विधायक है …
इनके घर पर इनके बेटे का एक मित्र
अब्दुसमद समदानी उर्फ़ सादिक
अली जो मुस्लिम लीग पार्टी का सांसद
था और उनसे उम्र में 32 साल
छोटा था वो आता जाता था … उस मुस्लिम
लीग के सांसद ने अपनी माँ की उम्र
की कमला पर डोरे डाले और उन्हें अपने प्रेम
जाल नही बल्कि सेक्स जाल में फंसा लिया ..
क्योकि खुद कमला ने अपने और समदानी के
बीच के मुलाकातों का वर्णन ऐसे किया है जैसे
“मस्तराम” की सडकछाप किताबो में
होता है .. और कमला ने लिखा है की उम्र
बढने के साथ साथ उनकी सेक्स की चाहत
भी पता नही क्यों बढने लगी है … और मेरे
सेक्स की चाहत को अब्दुसमद समदानी ने
मिटाने को तैयार हुआ इसलिए मै उसकी मुरीद
बन गयी …
फिर बाद में कमला ने इस्लाम स्वीकार करके
अपना नाम कमला सुरैया रख लिखा …
तीनो बेटे अपनी माँ के इस कुकर्मो से इतने
आहत हुए की उन्होंने अपनी माँ से
सभी सम्बन्ध तोड़ लिए …
सबसे चौकाने वाली खबर ये थी की उनके
इस्लाम कुबूल करने पर सऊदी अरब के प्रिंस
ने अपना दूत उनके घर भेजकर उन्हें
गुलदस्ता भेजा था और भारत सरकार ने
इसका विरोध नही किया ..
फिर 2009 में उन्हें कैंसर हुआ .. और केरल
सरकार ने उन्हें पहले मुंबई फिर बाद में पुणे
की एक अस्पताल में भर्ती करवा दिया …
तीनो बेटो और सभी रिश्तेदारों ने पहले
ही उनसे सम्बन्ध तोड़ लिए थे … और
उनका मुस्लिम
पति जिसकी वो तीसरी बीबी थी वो एक बार
भी उनका हालचाल लेने नही गया था … मरने
के पहले उन्होंने लिखा “काश मुझे किसी ने
तभी गोली मार दी होती जब मै समदानी के
सेक्स जाल में फंस गयी थी … मुझे
पता ही नही चला की मुझे सिर्फ राजनीतिक
साजिश के तहत केरल की हिन्दू महिलाओ
को इस्लाम के प्रति आकर्षित करने के लिए
ही फंसाया गया था और इसमें सऊदी अरब के
कई लोग काफी हद तक शामिल है …
पुरे आठ महीने तक अस्पताल में तडप तडप
कर अपने बेटो और पोतो को याद करते करते
उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए .. फिर केरल
सरकार ने उन्हें मालाबार के जामा मस्जिद के
बगल में कब्रिस्तान में दफना दिया
Photo: लव जिहाद पर चर्चा केरल की मशहूर
लेखिका कमला दास उर्फ़
कमला सुरैया की चर्चा किये बिना अधूरी है ...
हलांकि अब ये कमला दास उर्फ़
कमला सुरैया 72 मुस्टंडो के पास जन्नत में
है ...
कमला दास केरल
की जानी मानी लेखिका थी ...
जो माधवी कुट्टी के नाम से
लिखती थी ...और केरल की रायल परिवार से
थी और नायर थी ... पति के निधन के बाद ये
अकेलेपन में थी ... पति के निधन के समय
इनकी उम्र 65 साल थी ... लेकिन फिर
भी इनके अंदर सेक्सुअल इच्छाए भरी थी ...
तीन काफी बड़े बच्चे थे जो बड़ी बड़ी पोस्ट
पर थे ..एक बेटा माधव दास नलपत टाइम्स
ऑफ़ इंडिया का चीफ एडिटर था जो बाद में
यूनेस्को का बड़ा अधिकारी भी बना ...
उसकी पत्नी त्रावनकोर स्टेट
की राजकुमारी है ..
एक बेटा चिम्मन दास विदेश
सेवा का अधिकारी है और एक बेटा केरल में
कांग्रेस से विधायक है ...
इनके घर पर इनके बेटे का एक मित्र
अब्दुसमद समदानी उर्फ़ सादिक
अली जो मुस्लिम लीग पार्टी का सांसद
था और उनसे उम्र में 32 साल
छोटा था वो आता जाता था ... उस मुस्लिम
लीग के सांसद ने अपनी माँ की उम्र
की कमला पर डोरे डाले और उन्हें अपने प्रेम
जाल नही बल्कि सेक्स जाल में फंसा लिया ..
क्योकि खुद कमला ने अपने और समदानी के
बीच के मुलाकातों का वर्णन ऐसे किया है जैसे
"मस्तराम" की सडकछाप किताबो में
होता है .. और कमला ने लिखा है की उम्र
बढने के साथ साथ उनकी सेक्स की चाहत
भी पता नही क्यों बढने लगी है ... और मेरे
सेक्स की चाहत को अब्दुसमद समदानी ने
मिटाने को तैयार हुआ इसलिए मै उसकी मुरीद
बन गयी ...
फिर बाद में कमला ने इस्लाम स्वीकार करके
अपना नाम कमला सुरैया रख लिखा ...
तीनो बेटे अपनी माँ के इस कुकर्मो से इतने
आहत हुए की उन्होंने अपनी माँ से
सभी सम्बन्ध तोड़ लिए ...
सबसे चौकाने वाली खबर ये थी की उनके
इस्लाम कुबूल करने पर सऊदी अरब के प्रिंस
ने अपना दूत उनके घर भेजकर उन्हें
गुलदस्ता भेजा था और भारत सरकार ने
इसका विरोध नही किया ..
फिर 2009 में उन्हें कैंसर हुआ .. और केरल
सरकार ने उन्हें पहले मुंबई फिर बाद में पुणे
की एक अस्पताल में भर्ती करवा दिया ...
तीनो बेटो और सभी रिश्तेदारों ने पहले
ही उनसे सम्बन्ध तोड़ लिए थे ... और
उनका मुस्लिम
पति जिसकी वो तीसरी बीबी थी वो एक बार
भी उनका हालचाल लेने नही गया था ... मरने
के पहले उन्होंने लिखा "काश मुझे किसी ने
तभी गोली मार दी होती जब मै समदानी के
सेक्स जाल में फंस गयी थी ... मुझे
पता ही नही चला की मुझे सिर्फ राजनीतिक
साजिश के तहत केरल की हिन्दू महिलाओ
को इस्लाम के प्रति आकर्षित करने के लिए
ही फंसाया गया था और इसमें सऊदी अरब के
कई लोग काफी हद तक शामिल है ...
पुरे आठ महीने तक अस्पताल में तडप तडप
कर अपने बेटो और पोतो को याद करते करते
उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए .. फिर केरल
सरकार ने उन्हें मालाबार के जामा मस्जिद के
बगल में कब्रिस्तान में दफना दिया

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