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मांसाहार उचित या अनुचित ?


मांसाहार उचित या अनुचित ?

प्रोफेसर आर्य एवं मौलाना साहिब की भेंट आज बाज़ार में हो जाती हैं. मौलाना साहिब जल्दी में थे बोले की ईद आने वाली हैं इसलिए क़ुरबानी देने के लिए बकरा खरीदने जा रहा हूँ. आर्य साहिब के मन में तत्काल उन लाखो निर्दोष बकरों, बैलो, ऊँटो आदि का ख्याल आया जिनकी गर्दनो पर अल्लाह के नाम पर तलवार चला दी जाएगी. वे सब बेकसूर जानवर धर्म के नाम पर क़त्ल कर दिए जायेगे.

आर्य जी से रहा न गया और वे मौलाना साहिब से बोले की -यह क़ुरबानी मुस्लमान लोग क्यों देते हैं .

यूँ तो मौलाना जल्दी में थे पर जब इस्लाम का प्रश्न हो तो समय निकल ही आया. अपनी लम्बी बकरा दारी पर हाथ फेरते हुए बोले- इसके पीछे एक पुराना किस्सा हैं. हज़रत इब्राहीम से एक बार सपने में अल्लाह ने उनकी सबसे प्यारी चीज़ यानि उनके बेटे की क़ुरबानी मांगी, अगले दिन इब्राहीम जैसे ही अपने बेटे इस्माइल की क़ुरबानी देने लगे तभी अल्लाह ने उन के बेटे को एक मेदे में तब्दील कर दिया और हज़रत इब्राहीम ने उसकी क़ुरबानी दे दी . अल्लाह उन पर बहुत मेहरबान हुआ और बस उसके बाद से हर साल मुस्लमान इस दिन को बकर ईद के नाम से बनते हैं और इस्लाम को मानने वाले बकरा, मेदा, बैल आदि की क़ुरबानी देंते हैं और उस बकरे के मांस को गरीबो में बांटा जाता हैं जिससे पुण्य मिलता हैं.

आर्य जी- जनाब अगर अनुमति हो तो में कुछ पूछना चाहता हू

मौलाना जी – बेशक से

आर्य जी- पहले तो यह की बकर का असली मतलब गाय होता हैं न की बकरा फिर बकरे, बैल, ऊंट आदि की क़ुरबानी क्यों दी जाती हैं ?

दूसरे बकर ईद के स्थान पर इसे गेंहू ईद कहते तो अच्छा होता क्योंकि एक किलो गौशत में तो दस किलो के बराबर गेंहू आ जाता हैं और वो ना केवल सस्ता पड़ता हैं अपितु खाने के लिए कई दिनों तक काम आता हैं.

आपका यह हजरत इब्राहीम वाला किस्सा कुछ कम जँच रहा हैं क्योंकि अगर इसे सही माने तो अल्लाह अत्याचारी होने के साथ साथ क्रूर भी साबित होता हैं.
आज अल्लाह किसी मुस्लमान के खवाबो में क़ुरबानी की प्रेरणा देने के लिए क्यों नहीं आते और आज के मुसलमानों को भी क्या अल्लाह पर विश्वास नहीं हैं की वे अपने बेटो की क़ुरबानी नहीं देते बल्कि एक निरपराध पशु के कत्ल के गुन्हेगार बनते हैं. यह संभव ही नहीं हैं क्योंकि जो अल्लाह या भगवान प्राणियों की रक्षा करता हैं वह किसी के सपने में आकर उन्हें मारने की प्रेरणा देगा . मुस्लमान लोगो की बुद्धि को क्या हो गया हैं अगर हज़रत इब्राहीम को किसी लड़की के साथ बलात्कार करने को अल्लाह कहते तो वे उसे नहीं मानते तो फिर अपने इकलोते लड़के को मारने के लिए कैसे तैयार हो गए. मुसलमानों को तत्काल इस प्रकार का कत्लेंआम बंद कर देना चाहिए.मुसलमानों के सबसे पाक किताब कुरान-ए-शरीफ के अल हज २२:३७ में कहा गया हैं न उनके मांस अल्लाह को पहुँचते हैं और न उनके रक्त , किन्तु उसे तुम्हारा तकवा (धर्मप्रयाणता) पहुँचता हैं. यहीं बात अल- अनआम ६: ३८ में भी कहीं गयी हैं. हदीसो में भी इस प्रकार के कई प्रमाण मिलते हैं.यहाँ तक की मुसलमानों में सबसे पवित्र समझी जाने वाली मक्का की यात्रा पर किसी भी प्रकार के मांसाहार यहाँ तक की जूं तक को मारने की अनुमति नहीं होती हैं तो फिर अल्लाह के नाम पर इस प्रकार कत्लेआम क्यों होता हैं.

मौलाना जी- आर्य जी यहाँ तक तो सब ठीक हैं पर मांसाहार करने में क्या बुराई हैं?

आर्य जी -पहले तो शाकाहार विश्व को बुखमरी से बचा सकता हैं. आज विश्व की तेजी से फैल रही जनसँख्या के सामने खाने की बड़ी समस्या हैं .एक कैलोरी मांस को तैयार करने में १० कैलोरी के बराबर शाकाहारी पदार्थ की खपत हो जाती हैं अगर सारा विश्व मांसाहार को छोड़ दे तो धरती के सीमित संसाधनों का उपयोग अच्छी प्रकार से हो सकता हैं और कोई भी भूखा नहीं रहेगा क्यूंकि दस गुना मनुष्यो का पेट भरा जा सकेगा. अफ्रीका में तो कई मुस्लिम देश बुखमरी के शिकार हैं. अगर ईद के नाम की जकात में उन्हें शाकाहारी भोजन दिया जाये तो कईयों का पेट भर जायेगा.

दुसरे मांसाहार बीमारियों की जड़ हैं. इससे दिल के रोग, गोउट, कैंसर जैसे अनेको रोगों की वृद्धि देखी गयी हैं और एक मिथक यह हैं की मांसाहार खाने से ज्यादा ताकत मिलती हैं इसका प्रबल प्रमाण पहलवान सुशील कुमार हैं जो विश्व के नंबर एक पहलवान हैं और पूर्ण रूप से शाकाहारी हैं. आपसे ही पूछते हैं की क्या आप अपना मांस किसी को खाने देंगे. नहीं ना तो फिर आप कैसे किसी का मांस खा सकते हैं.

मौलाना जी – आर्य जी आप शाकाहार की बात कर रहे हैं क्या पोंधो में आत्मा नहीं होती हैं , क्या उसे खाने से पाप नहीं लगता हैं, महान वैज्ञानिक जगदीश चन्द्र बासु के मुताबिक तो पोंधो में जान होती हैं

आर्य जी- पोंधो में आत्मा की स्थिति सुषुप्ति की होती हैं अर्थात सोये हुए के समान, अगर किसी पशु का कत्ल करे तो उसे दर्द होता हैं, वो रोता हैं, चिल्लाता हैं मगर किसी पोंधे को कभी दर्द होते, चिल्लाते नहीं देखा जाता ,जैसे कोमा के मरीज को दर्द नहीं होता हैं उसे प्रकार पोंधो को भी उखाड़ने पर दर्द नहीं होता हैं . उसकी उत्पत्ति ही खाने के लिए ईश्वर ने की हैं. जगदीश बासु का कथन सही हैं की पोंधो में प्राण होते हैं पर उसमे आत्मा की क्या स्थिती हैं और पोंधो को दर्द नहीं होता हैं इस बात पर वैज्ञानिक मौन हैं. सबसे महतव्पूर्ण बात हैं की शाकाहारी भोजन प्रकृति के लिए हानिकारक नहीं हैं.

मौलाना जी- परन्तु हिन्दुओ में कोलकता की काली और गुवहाटी की कामख्या के मंदिर में पशु बलि दी जाती हैं और तो और वेदों में भी हवन आदि में तो पशु बलि का विधान हैं.

आर्य जी- जो स्वयं अंधे हैं वे दूसरो को क्या रास्ता दीखायेंगे. हिन्दू जो पशु बलि में विश्वास रखते हैं खुद ही वेदों के विरुद्ध कार्य कर रहे हैं. पशु बलि देने से केवल और केवल पाप लगता हैं, भला किसी को मारकर आपको सुख कैसे मिल सकता हैं. जहाँ तक वेदों का सवाल हैं मध्यकाल में कुछ अज्ञानी लोगो ने हवन आदि में पशु बलि देना आरंभ कर दिया था और उसे वेद संगत दिखाने के लिए महीधर, सायण आदि ने वेदों के कर्म कांडी अर्थ कर दियें जिससे पशु बलि का विधान वेदों से सिद्ध किया जा सके. बाद में माक्स्मुलर , ग्रिफीथ आदि पाश्चात्य लोगो ने उसका अंग्रेजी में अनुवाद कर दिया जिससे पूरा विश्व यह समझे की वेदों में पशु बलि का विधान हैं. आधुनिक काल में ऋषि दयानंद ने जब देखा की वेदों के नाम पर किस प्रकार से घोर प्रपंच किया गया हैं तो उन्होंने वेदों का एक नया भाष्य किया जिससे फैलाई गयी भ्रांतियों को मिटाया जा सके. देखो वेदों में पशु आदि के बारे में कितनी सुंदर बात कहीं गयी हैं-

ऋगवेद ५/५१/१२ में अग्निहोत्र को अध्वर यानि जिसमे हिंसा की अनुमति नहीं हैं कहाँ गया हैं.
यजुर्वेद १२/३२ में किसी को भी मारने से मनाही हैं
यजुर्वेद १६/३ में हिंसा न करने को कहाँ गया हैं
अथर्ववेद १९/४८/५ में पशुओ की रक्षा करने को कहाँ गया हैं
अथर्ववेद ८/३/१६ में हिंसा करने वाले को मारने का आदेश हैं
ऋगवेद ८/१०१/१५ में हिंसा करने वाले को राज्य से निष्काषित करने का आदेश हैं

इस प्रकार चारो वेदों में अनेको प्रमाण हैं जिनसे यह सिद्ध होता हैं की वेदों में पशु बलि अथवा मांसाहार का कोई वर्णन नहीं हैं.
मौलाना जी – हमने तो सुना हैं की अश्वमेध में घोड़े की , अज मेध में बकरे की, गोमेध में गों की और नरमेध में आदमी की बलि दी जाती थी.

आर्य जी- आपकी शंका अच्छी हैं. मेध शब्द का अर्थ केवल मात्र मरना नहीं हैं, मेधावी शब्द का प्रयोग जिस प्रकार से श्रेष्ठ अथवा बुद्धिमान के लियें किया जाता हैं उसी प्रकार से मेध शब्द का प्रयोग श्रेष्ठ कार्यो के लिए किया जाता हैं. शतपथ १३/१/६/३ एवं १३/२/२/३ में कहाँ गया हैं की जो कार्य राष्ट्र उत्थान के लियें किया जाये उसे अश्वमेध कहते हैं , निघंटु १/१ एवं शतपथ १३/१५/३ के अनुसार अन्न को शुद्ध रखना, संयम रखना, सूर्य की रौशनी से धरती को शुद्ध रखने में उपयोग करना आदि कार्य गोमेध कहलाते हैं. शांति पर्व ३३७/१-२ के अनुसार हवन में अन्न आदि का प्रयोग करना अथवा अन्न आदि की उत्पादन क्षमता को बढाना अजमेध कहलाता हैं, मनुष्य के मृत शरीर का उचित प्रकार से दाह कर्म करना नरमेध कहलाता हैं .

मौलाना जी – हमने तो सुना हैं की श्री राम जी मांस खाते थे एवं महाभारत वनपर्व २०७ में रांतिदेव राजा ने गाय को मारने की अनुमति दी थी.

आर्य जी- रामायण , महाभारत आदि पुस्तकों में उन्हीं लोगो ने मिलावट कर दी हैं जो हवन में पशु बलि एवं मांसाहार आदि मानते थे. वेद स्मृति परंपरा से
सुरक्षित हैं इसलिए वेदों में कोई मिलावट नहीं हो सकती उसमे से एक शब्द अथवा एक मात्रा तक को बदला नहीं जा सकता.रामायण में सुंदर कांड स्कन्द ३६ श्लोक ४१ में
स्पष्ट कहाँ गया हैं की श्री राम जी मांस नहीं लेते वे तो केवल फल अथवा चावल लेते हैं.महाभारत अनुशासन पर्व ११५/४० में रांतिदेव को शाकाहारी बताया गाय हैं.
शांति पर्व २६२/४७ में गाय और बैल को मारने वाले को पापी कहाँ गाय हैं.इस प्रकार के अन्य प्रमाण भी मिलते हैं जिनसे यह भी सिद्ध होता हैं की रामायण एवं
महाभारत में मांस खाने की अनुमति नहीं हैं और जो भी प्रमाण मिलते हैं वे सब मिलावट हैं.

मौलाना जी – तो क्या आर्य जी हमे किसी को भी मारने की इजाजत नहीं हैं.

आर्य जी – बिलकुल मौलाना साहिब यहाँ तक की कुरान के उस अल्लाह को ही मानना चाहिए जो अहिंसा, सत्य,प्रेम, भाईचारे की बात करे क़ुरबानी, मारना, जलना,घृणा
करना, पाप करना आदि सिखाने वाली बातें ईश्वरकृत नहीं हो सकती.

हदीस ज़द अल-माद में इब्न क़य्यिम ने कहाँ हैं की “गाय के दूध- घी का इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकी यह सेहत के लिए फायदेमंद हैं और गाय का मांस सेहत के लिए नुकसानदायक हैं”.
मौलाना जी- आर्य जी आपकी बातों में दम बहुत हैं और साथ ही साथ वे मुझे जाच भी रही हैं.अब मैं कभी भी जीवन भर मांस नहीं खाऊंगा , ईद पर बकरा नहीं काटूँगा और साथ ही साथ अपने अन्य मुस्लिम भाइयों को भी इस सत्य के विषय में बताऊंगा. आर्य जी आपका सही रास्ता दिखने के लिए अत्यंत धन्यवाद.
डॉ विवेक आर्य

Posted in राजनीति भारत की - Rajniti Bharat ki

TMC कार्यालयों में IM के आतंकी बम बना रहे है .. आज ब्लास्ट में


TMC कार्यालयों में IM के आतंकी बम
बना रहे है .. आज ब्लास्ट में
दो आतंकी खुदा को प्यारे भी हो गये ..
मीडिया और कांग्रेसी, TMC कार्यालयों में IM के आतंकी बम
बना रहे है .. आज ब्लास्ट में
दो आतंकी खुदा को प्यारे भी हो गये ..
मीडिया और कांग्रेसी, आपीए जैसे सेकुलर
सूअर एकदम खामोश है ..यदि ये
घटना किसी हिंदूवादी सन्गठन के ऑफिस में
हुई होती तो ओम थानवी, पिग्गी, केजरीवाल,
जैसे सेकुलर सूअर अपनी छाती कूट कूटकर
किसी खजेले कुत्ते की तरह तडपत ‪#‎आपीए‬ जैसे सेकुलर
सूअर एकदम खामोश है ..यदि ये
घटना किसी हिंदूवादी सन्गठन के ऑफिस में
हुई होती तो ओम थानवी, पिग्गी, केजरीवाल,
जैसे सेकुलर ‪#‎सूअर‬ अपनी छाती कूट कूटकर
किसी खजेले कुत्ते की तरह तडपत

TMC कार्यालयों में IM के आतंकी बम
बना रहे है .. आज ब्लास्ट में
दो आतंकी खुदा को प्यारे भी हो गये ..
मीडिया और कांग्रेसी, TMC कार्यालयों में IM के आतंकी बम
बना रहे है .. आज ब्लास्ट में
दो आतंकी खुदा को प्यारे भी हो गये ..
मीडिया और कांग्रेसी, आपीए जैसे सेकुलर
सूअर एकदम खामोश है ..यदि ये
घटना किसी हिंदूवादी सन्गठन के ऑफिस में
हुई होती तो ओम थानवी, पिग्गी, केजरीवाल,
जैसे सेकुलर सूअर अपनी छाती कूट कूटकर
किसी खजेले कुत्ते की तरह तडपत #आपीए जैसे सेकुलर
सूअर एकदम खामोश है ..यदि ये
घटना किसी हिंदूवादी सन्गठन के ऑफिस में
हुई होती तो ओम थानवी, पिग्गी, केजरीवाल,
जैसे सेकुलर #सूअर अपनी छाती कूट कूटकर
किसी खजेले कुत्ते की तरह तडपत
Posted in हिन्दू पतन

रक्षाबंधन पर मुर्खता


I Request to you , Please read it completly otherwise ignore 😐

आजकल एक बड़ा खतरनाक प्रचलन चला हे हिन्दुओ में वह यह की जेसे ही कोई त्यौहार आनेवाला होता हे खुद हिन्दू ही उस त्यौहार को ऐसे पेश करते हे जेसे वो उनके ऊपर बोझ हे :1) रक्षाबंधन पर मुर्खता :कुछ हिन्दू ऐसे मेसेज भेजते हे की ||कोई भी अनजान चीज को हाथ नहीं लगाये उसमे राखी हो सकती हे !! ||अरे कूल दूध !! तुम्हारे लिए अपनी बहन बोझबन रही हे तुम तो राखी का मजाक बना बेठे हो तुम क्या अपनी माँ बहन की रक्षा करोगे। राखी एक रक्षा सूत्र हे अगर तुम भूल रहे हो तो याद दिलाऊ राजस्थान में औरतो ने अपनी रक्षा के लिए जोहर कर आग में कूद जाती थी।रानी पद्मिनी के साथ 36000 औरते जोहर होगयी थी । एक महिला की रक्षा तुमे मजाक लगती हे ???2) दशहरा पर मुर्खता :यह मेसेज आजकल खूब प्रचलन में हे की || रावण सीता जी को उठा ले गया हे और राम जी लंका पर चढ़ाई करने जा रहे हे उसके लिय बंदरो की आवश्यकता हे जो भी मेसेज पढ़े तुरंत निकल जाये ||वाह !!! आज सीता अपहरण हिन्दुओ के लिए मजाक का विषय हो गया हे। जोरू का गुलाम बनना गर्व का विषय राम का सेनिक बनना मजाक हो रहा हे !!!दूसरा जोक || रावण को कोर्ट ले जाया गया वह कहा गया की गीता पर हाथ रख कसम खाओ तब रावण कहता हे सीता पर हाथ रखा उसमे इतना बवाल हो गया गीता पर रखा तो……||यह बड़े शर्म की बात हे की अग्नि परीक्षादेने के बाद भी आज हिन्दू सीता माता के चरित्र पर सवाल उठाने को मजाक समझते हे। कभी घर पर बेठी माँ से पुछो पिताजी कहा कहा हाथ लगाते हे अगर नहीं तो तुम्हे किसने हक दिया समस्त हिंदुत्व की माता पर हाथ रखने को मजाक बनाने का ????एक हमारा मीडिया पहले ही हिन्दू त्योहारों के पीछे पड़ा हे होली पर पानी बर्बाद होता हे. पर जानवरों की क़ुरबानी धर्म हे , दिवाली पर पटाके छोड़ना प्रदुषण हे पर इसाई नव वर्ष पर आतिशबाजी जश्न हे।नवरात्री पर 10 बजे के बाद गरबा ध्वनी प्रदुषण हो जाती हे वही मोहरम की रात ढोलताशे और नववर्ष की रात जानवरों की तरह 12 बजे तक बाजे बजाना धर्म हे !!करवा चौथ और नाग पंचमी पाखंड हे वही इसा के पुनः मरकर लोटना गुड फ्राइडे विज्ञानिक हे !!!हिन्दुओ को यह लगता हे की अपने पर्व का मजाक बनाना सही हे तो यह गलत हे।हम राखी और सीता अपहरण पर मजाक करते हे इसके पीछे समाज की मानसिकता बनती हे। लोग लड़की की रक्षा से कतराते है क्यों की राखी को हमने मजाक बना दिया हे हमने सीतामाता जेसी पवित्र माँ का मजाक बना दिया हे।आज हमने समाज में महिला का मजाक बना दियाहे उसकी रक्षा और उसकी अस्मिता एक जोक बनकर हमारा हास्य कर रही हे इससे पता चलता हे हम कितने धार्मिक हे।
🚩Jai Shree Ram 🚩

Posted in नहेरु परिवार - Nehru Family

आशीष शुक्ल Sanjay Dwivedi::आपने शोभा ओझा के बारे मे इसमे नही लिखा..जिसे देश मे कोई नही जानता है..जो इन्दौर से दो बार चिनाव हार चुकी है..जिसकी कोई बखत नही है..उसे उठकर कॉंग्रेस की राष्‍ट्रीय महिला अध्यक्ष बना दिया ..कारण ..शादी के पहले शोभा ओझा कवर्टेड इसास्यी है..और उसने रिटायर्ड जस्टिस गोवर्धानलाल ओझा के लड़के से शादी की..आजकल शोभा सिर्फ टीवी चेनलो की बहस मे बकचोदी करती देखी जा सकती है..जबकि शायद ही उसे कोई अनता हो..वो राष्टीर्य पदाधिकारी है ढोंग्रेस की..

 

इसमे केदारनाथ मामला जरूर एड करना चाहिये..क्योंकि सोनिया ने पहले 3- 4 दिनो तक कोई मदद नही जाने दी..खासकर हवा मदद..जबकि उन्ही पहले 3 दिन मे सबसे ज्यादा लोग मरे थे.. मदद के बजाय ये खुद ये देखने पहुंची थी की हमारा मंदिर बहा की नही.. जब देखा की सब बह गया..सिर्फ बाबा बचे हैं..तो झुंझलाहट और गुस्से मे इसने मदद भिजवाने से इंकार कर दिया..पैदल सैनिक तो खुद यात्रियो की यरह बेबस थे वहां..ये हमारा पूरा एक धाम ही खत्म करने पे आ गयी थी.. बाँध उपर किसने बनवाये थे..??उनकी आवश्यकता क्या थी??..आप लोग समझ रहे होंगे..

 

Posted in गौ माता - Gau maata

Ancient Indian Technology


Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

Ibn Batuta describes Ghiyasuddin Dhamgani’s atrocities


Ibn Batuta describes Ghiyasuddin Dhamgani’s atrocities

“ the Hindu prisoners were divided into four sections and taken to each of the four gates of the great catcar. There, on the stakes they had carried, the prisoners were impaled. Afterwards their wives were killed and tied by their hair to these pales. Little children were massacred on the bosoms of their mothers and their corpses left there. Then, the camp was raised, and they started cutting down the trees of another forest. In the same manner did they treat their later Hindu prisoners. This is shameful conduct such as I have not known any other sovereign guilty of. It is for this that God hastened the death of Ghiyath-eddin.
One day whilst the Kadhi (Kazi) and I were having our food with (Ghiyazu-d-din), the Kazi to his right and I to his left, an infidel was brought before him accompanied by his wife and son aged seven years. The Sultan made a sign with his hand to the executioners to cut off the head of this man ; then he said to them in Arabic : ‘ and the son and the wife. ‘ They cut off their heads and I turned my eyes away. When I looked again, I saw their heads lying on the ground.

I was another time with the Sultan Ghiyath-eddin when a Hindu was brought into his presence. He uttered words I did not understand, and immediately several of his followers drew their daggers. I rose hurriedly, and he said to me ; ‘ Where are you going ‘ ? I replied : ‘ I am going to say my afternoon (4 o’clock) prayers. ‘ He understood my reason, smiled, and ordered the hands and feet of the idolater to be cut off. On my return I found the unfortunate swimming in his blood.[10]
http://books.google.co.in/books?id=ZF2spo9BKacC&pg=PA245&lpg=PA245&dq=Ibn+Battuta+madurai&source=bl&ots=W7dSHM5RWR&sig=hxz5dfpBPtIv-9igb_mpZEfT20o&hl=en&sa=X&ei=j0ImUaadD83HrQf484GQAw&redir_esc=y#v=onepage&q=Ibn%20Battuta%20madurai&f=false

Known as the greatest traveler of premodern times, Abu Abdallah ibn Battuta was born in Morocco in 1304 and educated in Islamic law. At the age of twenty-one, he left home to make the holy pilgrimage to Mecca. This was only the first of a series of extraordinary journeys that spanned nearly three de…
BOOKS.GOOGLE.CO.IN
Posted in बॉलीवुड - Bollywood

भारतीय फिल्म जगत तेजी से इस्लामीकरण की ओर बढ रहा है ।


Jaghindu.blogspot.in – हिन्दू इस पेज से जुड़ें। । सावधान । भारतीय फिल्म जगत तेजी से इस्लामीकरण की ओर बढ रहा है । सूफी संगीत और सेक्यलूरिज्म की आड मे बॉलीवुड का इस्लामीकरण किया जा रहा है । जादातर गानों मे अब अली, मौला , खुदा, रब जैसे इस्लामी शब्द सुनाई देने लगे है । फिल्मों की शादीशुदा नायिकाओं के माथे से भारतीय नारी की शान समझी जाने वाली बिंदी और सिंदूर अब दिखाई नही देते है । फिल्म फंडिंग के जरिये पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI और दाउद इब्राहीम लगभग पूरे बॉलीवुड पर कब्जा जमा चुका है । भारतीय फिल्म जगत मे पाकिस्तानी गायक और कलाकारों की बढती घुसपैठ इसका प्रमाण है । हिंदू संस्कृति और सभ्यता को धीरे धीरे नष्ट करना इनका एकमात्र उद्देश्य है । जिसमे फिलहाल ये लोग कामयाब होते दिख रहे है ।

Posted in Love Jihad

लव जिहाद पर चर्चा केरल की मशहूर लेखिका कमला दास उर्फ़ कमला सुरैया की चर्चा किये बिना अधूरी है …


लव जिहाद पर चर्चा केरल की मशहूर
लेखिका कमला दास उर्फ़
कमला सुरैया की चर्चा किये बिना अधूरी है …
हलांकि अब ये कमला दास उर्फ़
कमला सुरैया 72 मुस्टंडो के पास जन्नत में
है …
कमला दास केरल
की जानी मानी लेखिका थी …
जो माधवी कुट्टी के नाम से
लिखती थी …और केरल की रायल परिवार से
थी और नायर थी … पति के निधन के बाद ये
अकेलेपन में थी … पति के निधन के समय
इनकी उम्र 65 साल थी … लेकिन फिर
भी इनके अंदर सेक्सुअल इच्छाए भरी थी …
तीन काफी बड़े बच्चे थे जो बड़ी बड़ी पोस्ट
पर थे ..एक बेटा माधव दास नलपत टाइम्स
ऑफ़ इंडिया का चीफ एडिटर था जो बाद में
यूनेस्को का बड़ा अधिकारी भी बना …
उसकी पत्नी त्रावनकोर स्टेट
की राजकुमारी है ..
एक बेटा चिम्मन दास विदेश
सेवा का अधिकारी है और एक बेटा केरल में
कांग्रेस से विधायक है …
इनके घर पर इनके बेटे का एक मित्र
अब्दुसमद समदानी उर्फ़ सादिक
अली जो मुस्लिम लीग पार्टी का सांसद
था और उनसे उम्र में 32 साल
छोटा था वो आता जाता था … उस मुस्लिम
लीग के सांसद ने अपनी माँ की उम्र
की कमला पर डोरे डाले और उन्हें अपने प्रेम
जाल नही बल्कि सेक्स जाल में फंसा लिया ..
क्योकि खुद कमला ने अपने और समदानी के
बीच के मुलाकातों का वर्णन ऐसे किया है जैसे
“मस्तराम” की सडकछाप किताबो में
होता है .. और कमला ने लिखा है की उम्र
बढने के साथ साथ उनकी सेक्स की चाहत
भी पता नही क्यों बढने लगी है … और मेरे
सेक्स की चाहत को अब्दुसमद समदानी ने
मिटाने को तैयार हुआ इसलिए मै उसकी मुरीद
बन गयी …
फिर बाद में कमला ने इस्लाम स्वीकार करके
अपना नाम कमला सुरैया रख लिखा …
तीनो बेटे अपनी माँ के इस कुकर्मो से इतने
आहत हुए की उन्होंने अपनी माँ से
सभी सम्बन्ध तोड़ लिए …
सबसे चौकाने वाली खबर ये थी की उनके
इस्लाम कुबूल करने पर सऊदी अरब के प्रिंस
ने अपना दूत उनके घर भेजकर उन्हें
गुलदस्ता भेजा था और भारत सरकार ने
इसका विरोध नही किया ..
फिर 2009 में उन्हें कैंसर हुआ .. और केरल
सरकार ने उन्हें पहले मुंबई फिर बाद में पुणे
की एक अस्पताल में भर्ती करवा दिया …
तीनो बेटो और सभी रिश्तेदारों ने पहले
ही उनसे सम्बन्ध तोड़ लिए थे … और
उनका मुस्लिम
पति जिसकी वो तीसरी बीबी थी वो एक बार
भी उनका हालचाल लेने नही गया था … मरने
के पहले उन्होंने लिखा “काश मुझे किसी ने
तभी गोली मार दी होती जब मै समदानी के
सेक्स जाल में फंस गयी थी … मुझे
पता ही नही चला की मुझे सिर्फ राजनीतिक
साजिश के तहत केरल की हिन्दू महिलाओ
को इस्लाम के प्रति आकर्षित करने के लिए
ही फंसाया गया था और इसमें सऊदी अरब के
कई लोग काफी हद तक शामिल है …
पुरे आठ महीने तक अस्पताल में तडप तडप
कर अपने बेटो और पोतो को याद करते करते
उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए .. फिर केरल
सरकार ने उन्हें मालाबार के जामा मस्जिद के
बगल में कब्रिस्तान में दफना दिया
Photo: लव जिहाद पर चर्चा केरल की मशहूर
लेखिका कमला दास उर्फ़
कमला सुरैया की चर्चा किये बिना अधूरी है ...
हलांकि अब ये कमला दास उर्फ़
कमला सुरैया 72 मुस्टंडो के पास जन्नत में
है ...
कमला दास केरल
की जानी मानी लेखिका थी ...
जो माधवी कुट्टी के नाम से
लिखती थी ...और केरल की रायल परिवार से
थी और नायर थी ... पति के निधन के बाद ये
अकेलेपन में थी ... पति के निधन के समय
इनकी उम्र 65 साल थी ... लेकिन फिर
भी इनके अंदर सेक्सुअल इच्छाए भरी थी ...
तीन काफी बड़े बच्चे थे जो बड़ी बड़ी पोस्ट
पर थे ..एक बेटा माधव दास नलपत टाइम्स
ऑफ़ इंडिया का चीफ एडिटर था जो बाद में
यूनेस्को का बड़ा अधिकारी भी बना ...
उसकी पत्नी त्रावनकोर स्टेट
की राजकुमारी है ..
एक बेटा चिम्मन दास विदेश
सेवा का अधिकारी है और एक बेटा केरल में
कांग्रेस से विधायक है ...
इनके घर पर इनके बेटे का एक मित्र
अब्दुसमद समदानी उर्फ़ सादिक
अली जो मुस्लिम लीग पार्टी का सांसद
था और उनसे उम्र में 32 साल
छोटा था वो आता जाता था ... उस मुस्लिम
लीग के सांसद ने अपनी माँ की उम्र
की कमला पर डोरे डाले और उन्हें अपने प्रेम
जाल नही बल्कि सेक्स जाल में फंसा लिया ..
क्योकि खुद कमला ने अपने और समदानी के
बीच के मुलाकातों का वर्णन ऐसे किया है जैसे
"मस्तराम" की सडकछाप किताबो में
होता है .. और कमला ने लिखा है की उम्र
बढने के साथ साथ उनकी सेक्स की चाहत
भी पता नही क्यों बढने लगी है ... और मेरे
सेक्स की चाहत को अब्दुसमद समदानी ने
मिटाने को तैयार हुआ इसलिए मै उसकी मुरीद
बन गयी ...
फिर बाद में कमला ने इस्लाम स्वीकार करके
अपना नाम कमला सुरैया रख लिखा ...
तीनो बेटे अपनी माँ के इस कुकर्मो से इतने
आहत हुए की उन्होंने अपनी माँ से
सभी सम्बन्ध तोड़ लिए ...
सबसे चौकाने वाली खबर ये थी की उनके
इस्लाम कुबूल करने पर सऊदी अरब के प्रिंस
ने अपना दूत उनके घर भेजकर उन्हें
गुलदस्ता भेजा था और भारत सरकार ने
इसका विरोध नही किया ..
फिर 2009 में उन्हें कैंसर हुआ .. और केरल
सरकार ने उन्हें पहले मुंबई फिर बाद में पुणे
की एक अस्पताल में भर्ती करवा दिया ...
तीनो बेटो और सभी रिश्तेदारों ने पहले
ही उनसे सम्बन्ध तोड़ लिए थे ... और
उनका मुस्लिम
पति जिसकी वो तीसरी बीबी थी वो एक बार
भी उनका हालचाल लेने नही गया था ... मरने
के पहले उन्होंने लिखा "काश मुझे किसी ने
तभी गोली मार दी होती जब मै समदानी के
सेक्स जाल में फंस गयी थी ... मुझे
पता ही नही चला की मुझे सिर्फ राजनीतिक
साजिश के तहत केरल की हिन्दू महिलाओ
को इस्लाम के प्रति आकर्षित करने के लिए
ही फंसाया गया था और इसमें सऊदी अरब के
कई लोग काफी हद तक शामिल है ...
पुरे आठ महीने तक अस्पताल में तडप तडप
कर अपने बेटो और पोतो को याद करते करते
उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए .. फिर केरल
सरकार ने उन्हें मालाबार के जामा मस्जिद के
बगल में कब्रिस्तान में दफना दिया
Posted in मूर्ति पूजा - Idolatry

“हिन्दू मूर्ति पूजा क्यों करते हैं?


विवेक बर्नवाल….
“हिन्दू मूर्ति पूजा क्यों करते हैं?
स्वामी विवेकानंद को एक
राजा ने अपने भवन में बुलाया और
बोला, “तुम हिन्दू लोग
मिट्टी,पीतल, पत्थर
की मूर्तिकी पूजा करते हाे ?? पर
मैं ये सब नही मानता। ये तो केवल
एक पदार्थ है।” उस राजा के
सिंहासन के पीछे
किसी आदमी की तस्वीर
लगी थी। विवेकानंद जी की नजर
उस तस्वीर पर पड़ी। विवेकानंद
जी ने राजा से पूछा,”राजा जी,
येतस्वीर किसकी है?”राजा बोला,
“मेरे
पिताजी की।”स्वामी जी बोले,
“उस तस्वीर को अपने हाथ में
लीजिये।” राजा तस्वीर को हाथ
मे ले लेता है।स्वामी जी राजा से :
“अब आप उस तस्वीर पर
थूकिए!”राजा : “ये आप क्या बोल
रहे हैंस्वामी जी?स्वामी जी : “मैंने
कहा उस तस्वीर पर
थूकिए..!”राजा (क्रोध से) :
“स्वामी जी, आप होश मे तो हैं
ना? मैं ये काम नही कर
सकता।”स्वामी जी बोले, “क्यों?
ये तस्वीर तो केवल एक कागज
काटुकड़ा है, और जिस पर कूछ रंग
लगा है। इसमे ना तो जान है,
ना आवाज, ना तो ये सुन
सकता है, और ना ही कूछ बोल
सकता है।” और स्वामी जी बोलते
गए,”इसमें ना ही हड्डी है और
ना प्राण।फिर भी आप इस पर
कभी थूक नही सकते। क्योंकि आप
इसमे अपने पिता का स्वरूप देखते
हो और आप इस तस्वीर का अनादर
करना अपने पिता का अनादर
करना ही समझते हो।” थोड़े मौन
के बाद स्वामी जीआगे कहा, “वैसे
ही, हम हिंदू भी उन पत्थर, मिट्टी,
या धातु की पूजा भगवान
का स्वरूप मानकर करते हैं।भगवान
तो कण-कण मे है, पर एक आधार
माननेके लिए और मन को एकाग्र
करने के लिए हम मूर्ति पूजा करते
हैं।” स्वामी जी की बात सुनकर
राजा ने स्वामी जी से
क्षमा माँगी |….

Posted in Harshad Ashodiya

सब लोग भगवान से मांगते है .


सब लोग भगवान से मांगते है . बुरा नहीं है . लेकिन हम को भगवान से हमारी हेसियत के अनुसार मिलता है। रिस्ता बना के भगवान से मांगोगे तो उसमे सुगंध रहेगी। जैसे गाड़ी मे सेठ बैठा है और बाहर भिखारी कुछ पैसा मांगता है तो सेठ गाड़ी का काँच तोडा नीचे करके उनको एक रुपिया दे देता है।… वही सेठ के पास उसका लड़का पैसे मांगता है तो कहना नहीं पड़ता मुनीम से कह कर ले लेता है। दोनो मे फर्क देखो. आप भगवान से कौन सा रिस्ता बना के मांगोगे ?
कृष्णा ने गीता मे कहा है आप किनसे भी मांगोगे तो सब विनंती मेरे पास ही आती है। आप की पत्नी आप से साडी मांगती है सायद उसको अगले महीने देना चाहते है तो वो पड़ोसी के भाई से मांगती है तो आपको कैसा लगेगा ? आप भगवान को छौड कर दरगाह और साई के पास मांगोगे मतलब पत्नी का पड़ोसी के पास मांगना. एक बार दरगाह का इतिहास तो पढ़ो …साई का इतिहास तो पढ़ो।…..फिर माथा टेकना. मेरा ये कहना है आज लोग भगवान राम और कृष्णा से मांगना चाहिये रिस्ता बनाके। पति होते हुए पड़ोसी से मॅग्ना मतलब। कोई दरगाह मे जाके माथा टेकना। साई के पास मांगना…

सब लोग भगवान से मांगते है . बुरा नहीं है . लेकिन हम को भगवान से हमारी हेसियत के अनुसार मिलता है। रिस्ता बना के भगवान से मांगोगे तो उसमे सुगंध रहेगी। जैसे गाड़ी मे सेठ बैठा है और बाहर भिखारी कुछ पैसा मांगता है तो सेठ गाड़ी का काँच तोडा नीचे करके उनको एक रुपिया दे देता है।... वही सेठ के पास उसका लड़का पैसे मांगता है तो कहना नहीं पड़ता मुनीम से कह कर ले लेता है। दोनो मे फर्क देखो. आप भगवान से कौन सा रिस्ता बना के मांगोगे ? 
कृष्णा ने गीता मे कहा है आप किनसे भी मांगोगे तो सब विनंती मेरे पास ही आती है। आप की पत्नी आप से साडी मांगती है सायद उसको अगले महीने देना चाहते है तो वो पड़ोसी के भाई से मांगती है तो आपको कैसा लगेगा ? आप भगवान को छौड कर दरगाह और साई के पास मांगोगे मतलब पत्नी का पड़ोसी के पास मांगना. एक बार दरगाह का इतिहास तो पढ़ो ...साई का इतिहास तो पढ़ो।.....फिर माथा टेकना.  मेरा ये कहना है आज लोग भगवान राम और कृष्णा से मांगना चाहिये रिस्ता बनाके। पति होते हुए पड़ोसी से मॅग्ना मतलब। कोई दरगाह मे जाके माथा टेकना। साई के पास मांगना...