Posted in जीवन चरित्र

शिवाजी का बुद्धि चातुर्य


शिवाजी का बुद्धि चातुर्य
नरकेसरी वीर शिवाजी आजीवन अपनी मातृभूमि भारत की स्वतन्त्रता के लिए लड़ते रहे। वे न तो स्वयं कभी प्रमादी हुए और न ही उन्होंने दुश्मनों को चैन से सोने दिया। वे कुशल राजनीतिज्ञ तो थे ही साथ ही उनका बुद्धि चातुर्य भी अदभुत था। वीरता के साथ विद्वता का संगम यश देने वाला होता है।
शिवाजी के जीवन में कई ऐसे प्रसंग आये जिनमें उनके इन गुणों का संगम देखने को मिला। इसमें से एक मुख्य प्रसंग है – आदिलशाह के सेनापति अफजल खाँ के विनाश का।

Like our Page - https://www.facebook.com/BalsanskarSewa
Follow us on - https://twitter.com/Balsanskarsewa
Subscribe our channel - https://www.youtube.com/BaalSanskar

शिवाजी के साथ युद्ध करके उन्हें जीवित पकड़ लेने के उद्देश्य से इस खान सरदार ने बहुत बड़ी सेना को साथ में लिया था। तीन साल चले इतनी युद्ध-सामग्री लेकर वह बीजापुर से निकला था। इतनी विशाल सेना के सामने टक्कर लेने हेतु शिवाजी के पास इतना बड़ा सैन्य बल न था।
शिवाजी ने खान के पास संदेश भिजवायाः
'मुझे आपके साथ नहीं लड़ना है। मेरे व्यवहार से आदिलशाह को बुरा लगा हो तो आप उनसे मुझे माफी दिलवा दीजिए। मैं आपका आभार मानूँगा और मेरे अधिकार में आनेवाला मुल्क भी मैं आदिलशाह को खुशी से सौंप दूँगा।'

Like our Page - https://www.facebook.com/BalsanskarSewa
Follow us on - https://twitter.com/Balsanskarsewa
Subscribe our channel - https://www.youtube.com/BaalSanskar

अफजल खान समझ गया कि शिवाजी मेरी सेना देखकर ही डर गया है। उसने अपने वकील कृष्ण भास्कर को शिवाजी के साथ बातचीत करने के लिए भेजा। शिवाजी ने कृष्ण भास्कर का सत्कार किया और उसके द्वारा कहलवा भेजाः
'मुझे आपसे मिलने आना तो चाहिए लेकिन मुझे आपसे डर लगता है। इसलिए मैं नहीं आ सकता हूँ।'
इस संदेश को सुनकर कृष्ण भास्कर की सलाह से ही खान ने स्वयं शिवाजी से मिलने का विचार किया और इसके लिए शिवाजी के पास संदेश भी भिजवा दिया।
शिवाजी ने इस मुलाकात के लिए खान का आभार माना और उसके सत्कार के लिए बड़ी तैयारी की। जावली के किले के आस पास की झाड़ियाँ कटवाकर रास्ता बनाया तथा जगह-जगह पर मंडप बाँधे। अफजलखान जब अपने सरदारों के साथ आया तब शिवाजी ने पुनः कहला भेजाः
'मुझे अब भी भय लगता है। अपने साथ दो सेवक ही रखियेगा। नहीं तो आपसे मिलने की मेरी हिम्मत नहीं होगी।'
खान ने संदेश स्वीकार कर लिया और अपने साथ के सरदारों को दूर रखकर केवल दो तलवारधारी सेवकों के साथ मुलाकात के लिए बनाये गये तंबू में गया। शिवाजी को तो पहले से ही खान के कपट की गंध आ गयी थी, अतः अपनी स्वरक्षा के लिए उन्होंने अपने अँगरखे की दायीं तरफ खंजर छुपाकर रख लिया था और बायें हाथ में बाघनखा पहनकर मिलने के लिए तैयार खड़े रहे।
जैसेही खान दोनों हाथ लंबे करके शिवाजी को आलिंगन करने गया, त्यों ही उसने शिवाजी के मस्तक को बगल में दबा लिया। शिवाजी सावधान हो गये। उन्होंने तुरंत खान के पार्श्व में खंजर भोंक दिया और बाघनखे से पेट चीर डाला।
खान के दगा... दगा... की चीख सुनकर उसके सरदार तंबू में घुस आये। शिवाजी एवं उनके सेवकों ने उन्हें सँभाल लिया। फिर तो दोनों ओर से घमासान युद्ध छिड़ गया।
जब खान के शव को पालकी में लेकर उसके सैनिक जा रहे थे, तब उनके साथ लड़कर शिवाजी के सैनिकों ने मुर्दे का सिर काट लिया और धड़ को जाने दिया !
खान का पुत्र फाजल खान भी घायल हो गया। खान की सेवा की बड़ी बुरी हालत हो गयी एवं शिवाजी की सेना जीत गयी।

Like our Page - https://www.facebook.com/BalsanskarSewa
Follow us on - https://twitter.com/Balsanskarsewa
Subscribe our channel - https://www.youtube.com/BaalSanskar

इस युद्ध में शिवाजी को करीब 75 हाथी, 7000 घोड़े, 1000-1200 के करीब ऊँट, बड़ा तोपखाना, 2-3 हजार बैल, 10-12 लाख सोने की मुहरें, 2000 गाड़ी भरकर कपड़े एवं तंबू वगैरह का सामान मिल गया था।
यह शिवाजी की वीरता एवं बुद्धिचातुर्य का ही परिणाम था। जो काम बल से असंभव था उसे उन्होंने युक्ति से कर लिया !
Like and share करना ना भूले 

Like our Page - https://www.facebook.com/BalsanskarSewa
Follow us on - https://twitter.com/Balsanskarsewa
Subscribe our channel - https://www.youtube.com/BaalSanskar

शिवाजी का बुद्धि चातुर्य
नरकेसरी वीर शिवाजी आजीवन अपनी मातृभूमि भारत की स्वतन्त्रता के लिए लड़ते रहे। वे न तो स्वयं कभी प्रमादी हुए और न ही उन्होंने दुश्मनों को चैन से सोने दिया। वे कुशल राजनीतिज्ञ तो थे ही साथ ही उनका बुद्धि चातुर्य भी अदभुत था। वीरता के साथ विद्वता का संगम यश देने वाला होता है।
शिवाजी के जीवन में कई ऐसे प्रसंग आये जिनमें उनके इन गुणों का संगम देखने को मिला। इसमें से एक मुख्य प्रसंग है – आदिलशाह के सेनापति अफजल खाँ के विनाश का।

Like our Page – https://www.facebook.com/BalsanskarSewa
Follow us on – https://twitter.com/Balsanskarsewa
Subscribe our channel – https://www.youtube.com/BaalSanskar

शिवाजी के साथ युद्ध करके उन्हें जीवित पकड़ लेने के उद्देश्य से इस खान सरदार ने बहुत बड़ी सेना को साथ में लिया था। तीन साल चले इतनी युद्ध-सामग्री लेकर वह बीजापुर से निकला था। इतनी विशाल सेना के सामने टक्कर लेने हेतु शिवाजी के पास इतना बड़ा सैन्य बल न था।
शिवाजी ने खान के पास संदेश भिजवायाः
‘मुझे आपके साथ नहीं लड़ना है। मेरे व्यवहार से आदिलशाह को बुरा लगा हो तो आप उनसे मुझे माफी दिलवा दीजिए। मैं आपका आभार मानूँगा और मेरे अधिकार में आनेवाला मुल्क भी मैं आदिलशाह को खुशी से सौंप दूँगा।’

Like our Page – https://www.facebook.com/BalsanskarSewa
Follow us on – https://twitter.com/Balsanskarsewa
Subscribe our channel – https://www.youtube.com/BaalSanskar

अफजल खान समझ गया कि शिवाजी मेरी सेना देखकर ही डर गया है। उसने अपने वकील कृष्ण भास्कर को शिवाजी के साथ बातचीत करने के लिए भेजा। शिवाजी ने कृष्ण भास्कर का सत्कार किया और उसके द्वारा कहलवा भेजाः
‘मुझे आपसे मिलने आना तो चाहिए लेकिन मुझे आपसे डर लगता है। इसलिए मैं नहीं आ सकता हूँ।’
इस संदेश को सुनकर कृष्ण भास्कर की सलाह से ही खान ने स्वयं शिवाजी से मिलने का विचार किया और इसके लिए शिवाजी के पास संदेश भी भिजवा दिया।
शिवाजी ने इस मुलाकात के लिए खान का आभार माना और उसके सत्कार के लिए बड़ी तैयारी की। जावली के किले के आस पास की झाड़ियाँ कटवाकर रास्ता बनाया तथा जगह-जगह पर मंडप बाँधे। अफजलखान जब अपने सरदारों के साथ आया तब शिवाजी ने पुनः कहला भेजाः
‘मुझे अब भी भय लगता है। अपने साथ दो सेवक ही रखियेगा। नहीं तो आपसे मिलने की मेरी हिम्मत नहीं होगी।’
खान ने संदेश स्वीकार कर लिया और अपने साथ के सरदारों को दूर रखकर केवल दो तलवारधारी सेवकों के साथ मुलाकात के लिए बनाये गये तंबू में गया। शिवाजी को तो पहले से ही खान के कपट की गंध आ गयी थी, अतः अपनी स्वरक्षा के लिए उन्होंने अपने अँगरखे की दायीं तरफ खंजर छुपाकर रख लिया था और बायें हाथ में बाघनखा पहनकर मिलने के लिए तैयार खड़े रहे।
जैसेही खान दोनों हाथ लंबे करके शिवाजी को आलिंगन करने गया, त्यों ही उसने शिवाजी के मस्तक को बगल में दबा लिया। शिवाजी सावधान हो गये। उन्होंने तुरंत खान के पार्श्व में खंजर भोंक दिया और बाघनखे से पेट चीर डाला।
खान के दगा… दगा… की चीख सुनकर उसके सरदार तंबू में घुस आये। शिवाजी एवं उनके सेवकों ने उन्हें सँभाल लिया। फिर तो दोनों ओर से घमासान युद्ध छिड़ गया।
जब खान के शव को पालकी में लेकर उसके सैनिक जा रहे थे, तब उनके साथ लड़कर शिवाजी के सैनिकों ने मुर्दे का सिर काट लिया और धड़ को जाने दिया !
खान का पुत्र फाजल खान भी घायल हो गया। खान की सेवा की बड़ी बुरी हालत हो गयी एवं शिवाजी की सेना जीत गयी।

Like our Page – https://www.facebook.com/BalsanskarSewa
Follow us on – https://twitter.com/Balsanskarsewa
Subscribe our channel – https://www.youtube.com/BaalSanskar

इस युद्ध में शिवाजी को करीब 75 हाथी, 7000 घोड़े, 1000-1200 के करीब ऊँट, बड़ा तोपखाना, 2-3 हजार बैल, 10-12 लाख सोने की मुहरें, 2000 गाड़ी भरकर कपड़े एवं तंबू वगैरह का सामान मिल गया था।
यह शिवाजी की वीरता एवं बुद्धिचातुर्य का ही परिणाम था। जो काम बल से असंभव था उसे उन्होंने युक्ति से कर लिया !
Like and share करना ना भूले

Like our Page – https://www.facebook.com/BalsanskarSewa
Follow us on – https://twitter.com/Balsanskarsewa
Subscribe our channel – https://www.youtube.com/BaalSanskar

Author:

Buy, sell, exchange books

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s