Posted in संस्कृत साहित्य

मलमास – हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक तीन वर्ष पर आने वाला अधिक मास


“मलमास” ,,, हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक तीन वर्ष पर आने वाला अधिक मास

अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से 12 महीने होते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि हिंदुओं
की मान्यता के अनुसार प्रत्येक तीन साल में एक साल 13 महीनों का होता है ?

आपको यकीन भले न हो, लेकिन यह सच है।
चलिए हम आपको बताते हैं इससे जुड़ी सच्चाई।
हर तीसरे साल जो तेरहवां महीना आता है, उस महीने को मलमास कहा जाता है।
अंग्रेजी में इस माह का जिक्र नहीं है,लेकिन हिंदुओं की मान्यता के अनुसार एक माह
मलमास का होता है।

पौराणिक भारतीय ग्रंथ वायु पुराण के अनुसार मगध सम्राट बसु द्वारा बिहार के राजगीर
में ‘वाजपेयी यज्ञ’ कराया गया था।
उस यज्ञ में राजा बसु के पितामह ब्रह्मा सहित सभी देवी-देवता राजगीर पधारे थे।
यज्ञ में पवित्र नदियों और तीर्थों के जल की जरूरत पड़ी थी।

कहा जाता है कि ब्रह्मा के आह्वान पर ही अग्निकुंड से विभिन्न तीर्थों का जल प्रकट
हुआ था।
उस यज्ञ का अग्निकुंड ही आज का ब्रह्मकुंड (राजगीर,बिहार) है।
उस यज्ञ में बड़ी संख्या में ऋषि-महर्षि भी आए थे।
पुरुषोत्तम मास, सर्वोत्तम मास में यहां अर्थ,धर्म, काम और मोक्ष की प्राप्ति की महिमा है।

किंवदंती है कि भगवान ब्रह्मा से राजा हिरण्यकश्यपु ने वरदान मांगा था कि रात-दिन, सुबह-शाम और उनके द्वारा बनाए गए बारह मास में से किसी भी मास में उसकी मौत
न हो।
इस वरदान को देने के बाद जब ब्रह्मा को अपनी भूल का अहसास हुआ,तब वे भगवान
विष्णु के पास गए।
भगवान विष्णु ने विचारोपरांत हिरण्यकश्यपु के अंत के लिए तेरहवें महीने का निर्माण
किया।
धार्मिक मान्यता है कि इस अतिरिक्त एक महीने को मलमास या अधिक मास कहा
जाता है।

वायु पुराण एवं अग्नि पुराण के अनुसार इस अवधि में सभी देवी-देवता यहां आकर
वास करते हैं।
इसी अधिक मास में मगध की पौराणिक नगरी राजगीर में प्रत्येक ढाई से तीन साल पर
विराट मलमास मेला लगता है।
यहां लाखों श्रद्धालु पवित्र नदियों प्राची,सरस्वती और वैतरणी के अलावा गर्म जलकुंडों,
ब्रह्मकुंड,सप्तधारा,न्यासकुंड,मार्कंडेय कुंड,गंगा-यमुना कुंड,काशीधारा कुंड,अनंत
ऋषि कुंड,सूर्य-कुंड,राम-लक्ष्मण कुंड,सीता कुंड,गौरी कुंड और नानक कुंड में
स्नान कर भगवान लक्ष्मी नारायण मंदिर में आराधना करते हैं।

वर्ष भर इन कुंडों में निरंतर उष्ण जल गिरता रहता है,,इस जल का श्रोत अज्ञात है।

राजगीर में इस अवसर पर भव्य मेला भी लगता है।
राजगीर में मलमास के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में दिखती है गंगा-यमुना
संस्कृति की झलक।
मोक्ष की कामना और पितरों के उद्धार के लिए जुटते हैं श्रद्धालु।
इस माह विष्णु पुराण ज्ञान यज्ञ का आयोजन करके सत्‌,चित व आनंद की प्राप्ति की
जा सकती है।

कैसे पहुंचें राजगीर:-

सड़क परिवहन द्वारा राजगीर जाने के लिए पटना, गया, दिल्ली से बस सेवा उपलब्ध है।
इसमें बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम अपने पटना स्थित कार्यालय से नालंदा एवं
राजगीर के लिए टूरिस्ट बस एवं टैक्सी सेवा भी उपलब्ध करवाता है।
इसके जरिए आप आसानी से राज‍गीर पहुंच सकते हैं।

वहीं, दूसरी तरफ यहां पर वायु मार्ग से पहुंचने के लिए निकटतम हवाई-अड्डा पटना है,
जो राजगीर से करीब 107 किमी की दूरी पर है।
रेल मार्ग के लिए पटना एवं दिल्ली से सीधी रेल सेवा उपलब्ध है।
राजगीर जाने के लिए बख्तियारपुर से अलग रेल लाइन गई है,,जो नालंदा होते हुए राजगीर
में समाप्त हो जाती है।

"मलमास" ,,, हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक तीन वर्ष पर आने वाला अधिक मास अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से 12 महीने होते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि हिंदुओं की मान्यता के अनुसार प्रत्येक तीन साल में एक साल 13 महीनों का होता है ? आपको यकीन भले न हो, लेकिन यह सच है। चलिए हम आपको बताते हैं इससे जुड़ी सच्चाई। हर तीसरे साल जो तेरहवां महीना आता है, उस महीने को मलमास कहा जाता है। अंग्रेजी में इस माह का जिक्र नहीं है,लेकिन हिंदुओं की मान्यता के अनुसार एक माह मलमास का होता है। पौराणिक भारतीय ग्रंथ वायु पुराण के अनुसार मगध सम्राट बसु द्वारा बिहार के राजगीर में 'वाजपेयी यज्ञ' कराया गया था। उस यज्ञ में राजा बसु के पितामह ब्रह्मा सहित सभी देवी-देवता राजगीर पधारे थे। यज्ञ में पवित्र नदियों और तीर्थों के जल की जरूरत पड़ी थी। कहा जाता है कि ब्रह्मा के आह्वान पर ही अग्निकुंड से विभिन्न तीर्थों का जल प्रकट हुआ था। उस यज्ञ का अग्निकुंड ही आज का ब्रह्मकुंड (राजगीर,बिहार) है। उस यज्ञ में बड़ी संख्या में ऋषि-महर्षि भी आए थे। पुरुषोत्तम मास, सर्वोत्तम मास में यहां अर्थ,धर्म, काम और मोक्ष की प्राप्ति की महिमा है। किंवदंती है कि भगवान ब्रह्मा से राजा हिरण्यकश्यपु ने वरदान मांगा था कि रात-दिन, सुबह-शाम और उनके द्वारा बनाए गए बारह मास में से किसी भी मास में उसकी मौत न हो। इस वरदान को देने के बाद जब ब्रह्मा को अपनी भूल का अहसास हुआ,तब वे भगवान विष्णु के पास गए। भगवान विष्णु ने विचारोपरांत हिरण्यकश्यपु के अंत के लिए तेरहवें महीने का निर्माण किया। धार्मिक मान्यता है कि इस अतिरिक्त एक महीने को मलमास या अधिक मास कहा जाता है। वायु पुराण एवं अग्नि पुराण के अनुसार इस अवधि में सभी देवी-देवता यहां आकर वास करते हैं। इसी अधिक मास में मगध की पौराणिक नगरी राजगीर में प्रत्येक ढाई से तीन साल पर विराट मलमास मेला लगता है। यहां लाखों श्रद्धालु पवित्र नदियों प्राची,सरस्वती और वैतरणी के अलावा गर्म जलकुंडों, ब्रह्मकुंड,सप्तधारा,न्यासकुंड,मार्कंडेय कुंड,गंगा-यमुना कुंड,काशीधारा कुंड,अनंत ऋषि कुंड,सूर्य-कुंड,राम-लक्ष्मण कुंड,सीता कुंड,गौरी कुंड और नानक कुंड में स्नान कर भगवान लक्ष्मी नारायण मंदिर में आराधना करते हैं। वर्ष भर इन कुंडों में निरंतर उष्ण जल गिरता रहता है,,इस जल का श्रोत अज्ञात है। राजगीर में इस अवसर पर भव्य मेला भी लगता है। राजगीर में मलमास के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में दिखती है गंगा-यमुना संस्कृति की झलक। मोक्ष की कामना और पितरों के उद्धार के लिए जुटते हैं श्रद्धालु। इस माह विष्णु पुराण ज्ञान यज्ञ का आयोजन करके सत्‌,चित व आनंद की प्राप्ति की जा सकती है। कैसे पहुंचें राजगीर:- सड़क परिवहन द्वारा राजगीर जाने के लिए पटना, गया, दिल्ली से बस सेवा उपलब्ध है। इसमें बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम अपने पटना स्थित कार्यालय से नालंदा एवं राजगीर के लिए टूरिस्ट बस एवं टैक्सी सेवा भी उपलब्ध करवाता है। इसके जरिए आप आसानी से राज‍गीर पहुंच सकते हैं। वहीं, दूसरी तरफ यहां पर वायु मार्ग से पहुंचने के लिए निकटतम हवाई-अड्डा पटना है, जो राजगीर से करीब 107 किमी की दूरी पर है। रेल मार्ग के लिए पटना एवं दिल्ली से सीधी रेल सेवा उपलब्ध है। राजगीर जाने के लिए बख्तियारपुर से अलग रेल लाइन गई है,,जो नालंदा होते हुए राजगीर में समाप्त हो जाती है।
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Hello, Harshad Ashodiya I have 12,000 Hindi, Gujarati ebooks

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