Posted in Harshad Ashodiya

जो भगवन के साथ है उतने ही हमारे है . जो भगवान के साथ थे वाही बच गए , पांडव, मीराबाई जहर खा के …भक्त प्रह्लाद ..द्रौपदी ….और हम


जिस तरह महाभारत का कर्ण आज सबको महान लगता है उसी प्रकार सेक्युलर कुत्ते आज सब को महान लगते है . (जिस उम्र में बच्चे खेलते थे उस उम्र में मई महाभारत का तार्किक अभ्यास करता था . मुझसे कोई अभ्यास करके ही दलील करे ) कर्ण हमेशा दुर्योधन को प्रोत्शाहित करता था और कर्ण एक ऐसा योद्धा था जिसके सामने समस्त पृत्वी पे कोई सामना नहीं कर सकता . और दुर्योधन को उस बात से पांडवो पे विजय ली अभिलाषा थी . इतनी बात लोगो को समझनी चाहिए .
लोग कहते है रावण महान था. कोई सक नहीं . लईकिन उनके विचार उनके आचार से अलग थे ये लोगो को समझना चाहिए. कित्नाभी महान हो लेकिन वो राक्षशी संस्कृति थी ये मई एक बात में समजाऊगा. सुपर्णखा के नाक कान काट जाने के बाद जब भरी सभा में रावण को फरियाद करने आती है तो ये नहीं कहती के मेरे नाक कण काट दिए पहले ये कहती है के वन में एक सुन्दर कन्या देखि है और सीता माता का वो शारीरिक वर्णन करती है वो भी भरी सभामे. इतनी लोगो के सामने ..वो संस्कृति कैसी होगी ?
मुझे इतनाही कहना है जो भगवन के साथ है उतने ही हमारे है . जो भगवान के साथ थे वाही बच गए , पांडव, मीराबाई जहर खा के …भक्त प्रह्लाद ..द्रौपदी ….और हम

जिस तरह महाभारत का कर्ण आज सबको महान लगता है उसी प्रकार सेक्युलर कुत्ते आज सब को महान लगते है . (जिस उम्र में बच्चे खेलते थे उस उम्र में मई महाभारत का तार्किक अभ्यास करता था . मुझसे कोई अभ्यास करके ही दलील करे ) कर्ण हमेशा दुर्योधन को प्रोत्शाहित करता था और कर्ण एक ऐसा योद्धा था जिसके सामने समस्त पृत्वी पे कोई सामना नहीं कर सकता . और दुर्योधन को उस बात से पांडवो पे विजय ली अभिलाषा थी . इतनी बात लोगो को समझनी  चाहिए .
लोग कहते है रावण महान था.  कोई सक नहीं . लईकिन उनके विचार उनके आचार से अलग थे ये लोगो को समझना चाहिए. कित्नाभी महान हो लेकिन वो राक्षशी संस्कृति थी ये मई एक बात में समजाऊगा. सुपर्णखा के नाक कान काट जाने के बाद जब भरी सभा में रावण को फरियाद करने आती है तो ये नहीं कहती के मेरे नाक कण काट दिए पहले ये कहती है के वन में एक सुन्दर कन्या देखि है और सीता माता का वो शारीरिक  वर्णन करती है वो भी भरी सभामे. इतनी लोगो के सामने ..वो संस्कृति कैसी होगी ? 
मुझे इतनाही कहना है जो भगवन के साथ है उतने ही हमारे है . जो भगवान के साथ थे वाही बच गए , पांडव, मीराबाई जहर खा के ...भक्त प्रह्लाद ..द्रौपदी ....और हम

Author:

Buy, sell, exchange books

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s