Posted in Harshad Ashodiya

आज ग़ांधी जयंती है


Gandhi-Jayanti-Celebration . कुछ विदेशी लेखक ने ग़ांधी के कपडे निकल दिए और भारत वासी उनको लाइक पे लाइक करते रही उनकी किताबो की विचारधारा फैलाते रहे . तो कोई गोडसे को हीरो बनाकर वंदन करते रहे . इनसे परे एक बात कहूँगा . हम चाहे ग़ांधी को कितनी ही गाली दे लेकिन बहार का आदमी क्यों गाली दे ? छोड़ो..
इतनाही मै कहता हु कोई भी “महात्मा” को कभी नेता नहीं बनाना चाहिए उनकी दैत्यों तरफी मानवता वादी बाते समाज को नष्ट कर देती है . जो ख़राब चीजो का खून करता है वो सच्चा मानवता वादी है …अहिसक वादी है . न्यायाधीश जब एक मुजरिम को फाशी देता है तो दरअसल में न्यायाधीश के हाथो किसी माँ का एकलौते बेटे का खून ही है . लेकिन उनकी फाशी के बाद दूसरे कुछ मानवी अपराध करने से रुक जाते है . यही अहीसा है. यही मानवता है . समजो मानवता के नाम लादेन को छोड़ दिया तो वो कितने मासूमो की जान लेगा ? उनसे अच्छा है उनको ही मार दे . साप हमें मरने आता है तो उनको ही मार दो छोड़ डोज तो वो बहुत लोगो की जान लेगा !! उनका गर जंगल में है सहर में आता है तो जहर को मार दो.
सच्ची श्रद्धांजैली ग़ांधी को देनी हो तो फाशी का मंच उनकी समाधी पैर बनाओ और सारे देस द्रोही को वहिसे फाशी दो . यही सच्ची अहीसा है . और पितृ तर्पण है .

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