Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक साधु नदी किनारे एक धोबी के कपड़े धोने के पत्थर पर खड़े-खड़े ध्यान करने लगे।


एक साधु नदी किनारे एक धोबी के कपड़े धोने के पत्थर पर खड़े-खड़े ध्यान करने लगे। 
इतने में धोबी गधे पर कपड़े लादे वहां आया। 
उसने साधु को देखा तो वह प्रतीक्षा करने लगा कि उसके पत्थर से साधु हटें तो वह अपना काम शुरू करे। 

कुछ देर प्रतीक्षा करने पर भी जब साधु नहीं हटे तो उसने प्रार्थना की- महात्माजी, आप पत्थर से उतरकर किनारे खड़े हो जाएं तो मैं अपने काम में लगूं।

साधु ने धोबी की बात अनसुनी कर दी। 

धोबी ने फिर प्रार्थना की, किंतु साधु ने इस बार भी ध्यान नहीं दिया। 

अब धोबी ने धीरे से साधु का हाथ पकड़कर उन्हें पत्थर से उतारने की कोशिश की।

एक धोबी के हाथ पकड़ने में साधु को अपना अपमान नजर आया उन्होंने धोबी को धक्का दे दिया। 

साधु का क्रोध देखकर धोबी की श्रद्धा भी समाप्त हो गई। 
उसने भी साधु को धक्का देकर पत्थर से हटा दिया। 

अब तो साधु धोबी से भिड़ गए। 
धोबी बलवान था, अत: उसने साधु को उठाकर पटक दिया।

साधु भगवान से प्रार्थना करने लगा- हे भगवान, मैं इतने भक्तिभाव से रोज आपकी पूजा करता हूं, फिर भी आप मुझे इस धोबी से छुड़ाते क्यों नहीं? 

जवाब में साधु ने आकाशवाणी सुनी, तुम्हें हम छुड़ाना चाहते हैं किंतु समझ नहीं आता कि दोनों में साधु कौन है और धोबी कौन? 

यह सुन साधु का घमंड चूर हो गया। 
उसने धोबी से क्षमा मांगी और वह सच्चा साधु बन गया। 

दरअसल, साधु का वेष धारण करने से नहीं, बल्कि सद्गुणों को आचरण में उतारने से साधुता आती है।
अत: गेरुए वस्त्र पहनने के पूर्व अपना मन निर्मल गुणों से युक्त करें।

एक साधु नदी किनारे एक धोबी के कपड़े धोने के पत्थर पर खड़े-खड़े ध्यान करने लगे।
इतने में धोबी गधे पर कपड़े लादे वहां आया।
उसने साधु को देखा तो वह प्रतीक्षा करने लगा कि उसके पत्थर से साधु हटें तो वह अपना काम शुरू करे।

कुछ देर प्रतीक्षा करने पर भी जब साधु नहीं हटे तो उसने प्रार्थना की- महात्माजी, आप पत्थर से उतरकर किनारे खड़े हो जाएं तो मैं अपने काम में लगूं।

साधु ने धोबी की बात अनसुनी कर दी।

धोबी ने फिर प्रार्थना की, किंतु साधु ने इस बार भी ध्यान नहीं दिया।

अब धोबी ने धीरे से साधु का हाथ पकड़कर उन्हें पत्थर से उतारने की कोशिश की।

एक धोबी के हाथ पकड़ने में साधु को अपना अपमान नजर आया उन्होंने धोबी को धक्का दे दिया।

साधु का क्रोध देखकर धोबी की श्रद्धा भी समाप्त हो गई।
उसने भी साधु को धक्का देकर पत्थर से हटा दिया।

अब तो साधु धोबी से भिड़ गए।
धोबी बलवान था, अत: उसने साधु को उठाकर पटक दिया।

साधु भगवान से प्रार्थना करने लगा- हे भगवान, मैं इतने भक्तिभाव से रोज आपकी पूजा करता हूं, फिर भी आप मुझे इस धोबी से छुड़ाते क्यों नहीं?

जवाब में साधु ने आकाशवाणी सुनी, तुम्हें हम छुड़ाना चाहते हैं किंतु समझ नहीं आता कि दोनों में साधु कौन है और धोबी कौन?

यह सुन साधु का घमंड चूर हो गया।
उसने धोबी से क्षमा मांगी और वह सच्चा साधु बन गया।

दरअसल, साधु का वेष धारण करने से नहीं, बल्कि सद्गुणों को आचरण में उतारने से साधुता आती है।
अत: गेरुए वस्त्र पहनने के पूर्व अपना मन निर्मल गुणों से युक्त करें।

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