Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

मुहम्मद गजनवी भारत पर 17 बार आक्रमण क्यों और कैसे कर पाया ….?मुहम्मद गजनवी भारत पर 17 बार आक्रमण क्यों और कैसे कर पाया ….?


क्या आप जानते हैं कि….

मुहम्मद गजनवी भारत पर 17 बार आक्रमण क्यों और कैसे कर पाया ….?

और सिर्फ… गजनवी ही क्यों… मीर कासिम, तैमूरलंग, बाबर , औरन्जेब से लेकर अंग्रेजों तक ने भारत पर शासन कैसे कर पाये…?

क्या आपने कभी सोचा है कि…. आखिर, तुर्की अथवा मंगोलिया से आये लुटेरों की संख्या कितनी रही होगी…?

और उन लुटेरों के पास रसद- सामग्री या हथियार कितने रहे होंगे..?

जबकि…. हिंदुस्तान हमारा देश था…. यहाँ लाखों करोड़ों की आबादी थी….. फिर भी वे मुठ्ठी भर लोग आये, हमें जमकर लतियाया.. बहन- बेटियों का बलात्कार किया… धन- संपत्ति को लूटा और आराम से चलते बने….!

मुझे क्षमा करें…. लेकिन, ऐसी अजीबोगरीब घटनाएं सिर्फ हमारे हिंदुस्तान में ही हो सकती हैं….!

क्योंकि…. हमारे हिंदुस्तान के लोग “”जरुरत से कुछ ज्यादा ही होशियार””हैं….. और अंग-अंग में स्वार्थ भरा पड़ा है…!

सिर्फ वहीँ तक बात रुकी रह जाती तो…. चलो फिर भी ठीक थी और संतोषप्रद थी….! परन्तु… आज भी स्थिति में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं आ गया है……!

आज भी …… कोई राजपूत है, कोई ब्राह्मण है, तो कोई वैश्य है…… किसी को मराठी होने पर गर्व है ….

तो किसी को गुजराती, मराठी या बंगाली होने पर…..! मुझे कभी कभी बेहद आश्चर्य और दुःख होता है कि…. इतने बड़े देश में कोई … भारतीय नहीं है.. कोई हिन्दू नहीं है…!

और यही कारण है कि….. आज राजनेता से लेकर हर कोई इस देश के बहुसंख्यक को गरियाना और लतियाना अपनी शान समझता है…!

स्थिति तो यह है कि….. यहाँ के अल्पसंख्यक समुदाय सर पर चढ़ कर पेशाब कर रहा है…. और, बहुसंख्यक उसे “बरसात समझ कर” ख़ुशी से नाच रहा है…!

लेकिन लगता है कि….
बहुसंख्यकों को लात खाने और हर किसी से बेइज्जत होते हुए भी आत्मविभोर रहने की आदत
सी पड़ गयी है…!

लेकिन …. एक बात हमेशा याद रखें…….. जो इतिहास से कोई सीख नहीं लेते हैं….
इतिहास फिर से अपने आपको दुहराता है.

जयतु जयतु हिन्दू राष्ट्र,

क्या आप जानते हैं कि....

मुहम्मद गजनवी भारत पर 17 बार आक्रमण क्यों और कैसे कर पाया ....?

और सिर्फ... गजनवी ही क्यों... मीर कासिम, तैमूरलंग, बाबर , औरन्जेब से लेकर अंग्रेजों तक ने भारत पर शासन कैसे कर पाये...?

क्या आपने कभी सोचा है कि.... आखिर, तुर्की अथवा मंगोलिया से आये लुटेरों की संख्या कितनी रही होगी...?

और उन लुटेरों के पास रसद- सामग्री या हथियार कितने रहे होंगे..?

जबकि.... हिंदुस्तान हमारा देश था.... यहाँ लाखों करोड़ों की आबादी थी..... फिर भी वे मुठ्ठी भर लोग आये, हमें जमकर लतियाया.. बहन- बेटियों का बलात्कार किया... धन- संपत्ति को लूटा और आराम से चलते बने....!

मुझे क्षमा करें.... लेकिन, ऐसी अजीबोगरीब घटनाएं सिर्फ हमारे हिंदुस्तान में ही हो सकती हैं....!

क्योंकि.... हमारे हिंदुस्तान के लोग ""जरुरत से कुछ ज्यादा ही होशियार""हैं..... और अंग-अंग में स्वार्थ भरा पड़ा है...!

सिर्फ वहीँ तक बात रुकी रह जाती तो.... चलो फिर भी ठीक थी और संतोषप्रद थी....! परन्तु... आज भी स्थिति में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं आ गया है......!

आज भी ...... कोई राजपूत है, कोई ब्राह्मण है, तो कोई वैश्य है...... किसी को मराठी होने पर गर्व है ....

तो किसी को गुजराती, मराठी या बंगाली होने पर.....! मुझे कभी कभी बेहद आश्चर्य और दुःख होता है कि.... इतने बड़े देश में कोई ... भारतीय नहीं है.. कोई हिन्दू नहीं है...!

और यही कारण है कि..... आज राजनेता से लेकर हर कोई इस देश के बहुसंख्यक को गरियाना और लतियाना अपनी शान समझता है...!

स्थिति तो यह है कि..... यहाँ के अल्पसंख्यक समुदाय सर पर चढ़ कर पेशाब कर रहा है.... और, बहुसंख्यक उसे "बरसात समझ कर" ख़ुशी से नाच रहा है...!

लेकिन लगता है कि....
बहुसंख्यकों को लात खाने और हर किसी से बेइज्जत होते हुए भी आत्मविभोर रहने की आदत
सी पड़ गयी है...!

लेकिन .... एक बात हमेशा याद रखें........ जो इतिहास से कोई सीख नहीं लेते हैं....
इतिहास फिर से अपने आपको दुहराता है.

जयतु जयतु हिन्दू राष्ट्र,

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