Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

चित्तौड़ का पहला जौहर (26 अगस्त)


चित्तौड़ का पहला जौहर (26 अगस्त)
___________________________

जोधा अकबर सीरियल और फिल्म बनाने वालों धूर्त,झूठे,बेईमानों अगर हिम्मत है तो रानी पद्मिनी पर फिल्म या सीरियल बना कर दिखाओ..............

जौहर की गाथाओं से भरे पृष्ठ भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर हैं। ऐसे अवसर एक नहीं, कई बार आये हैं, जब हिन्दू ललनाओं ने अपनी पवित्रता की रक्षा के लिए ‘जय हर-जय हर’ कहते हुए हजारों की संख्या में सामूहिक अग्नि प्रवेश किया था। यही उद्घोष आगे चलकर ‘जौहर’ बन गया। जौहर की गाथाओं में सर्वाधिक चर्चित प्रसंग चित्तौड़ की रानी पद्मिनी का है, जिन्होंने 26 अगस्त, 1303 को 16,000 क्षत्राणियों के साथ जौहर किया था।

पद्मिनी का मूल नाम पद्मावती था। वह सिंहलद्वीप के राजा रतनसेन की पुत्री थी। एक बार चित्तौड़ के चित्रकार चेतन राघव ने सिंहलद्वीप से लौटकर राजा रतनसिंह को उसका एक सुंदर चित्र बनाकर दिया। इससे प्रेरित होकर राजा रतनसिंह सिंहलद्वीप गया और वहां स्वयंवर में विजयी होकर उसे अपनी पत्नी बनाकर ले आया। इस प्रकार पद्मिनी चित्तौड़ की रानी बन गयी।

पद्मिनी की सुंदरता की ख्याति मुगल हमलावर अलाउद्दीन खिलजी ने भी सुनी थी। वह उसे किसी भी तरह अपने हरम में डालना चाहता था। उसने इसके लिए चित्तौड़ के राजा के पास धमकी भरा संदेश भेजा; पर राव रतनसिंह ने उसे ठुकरा दिया। अब वह धोखे पर उतर आया। उसने रतनसिंह को कहा कि वह तो बस पद्मिनी को केवल एक बार देखना चाहता है।

रतनसिंह ने खून-खराबा टालने के लिए यह बात मान ली। एक दर्पण में रानी पद्मिनी का चेहरा अलाउद्दीन को दिखाया गया। वापसी पर रतनसिंह उसे छोड़ने द्वार पर आये। इसी समय उसके सैनिकों ने धोखे से रतनसिंह को बंदी बनाया और अपने शिविर में ले गये। अब यह शर्त रखी गयी कि यदि पद्मिनी अलाउद्दीन के पास आ जाए, तो रतनसिंह को छोड़ दिया जाएगा।

यह समाचार पाते ही चित्तौड़ में हाहाकार मच गया; पर पद्मिनी ने हिम्मत नहीं हारी। उसने कांटे से ही कांटा निकालने की योजना बनाई। अलाउद्दीन के पास समाचार भेजा गया कि पद्मिनी रानी हैं। अतः वह अकेले नहीं आएंगी। उनके साथ पालकियों में 800 सखियां और सेविकाएं भी आएंगी।

अलाउद्दीन और उसके साथी यह सुनकर बहुत प्रसन्न हुए। उन्हें पद्मिनी के साथ 800 हिन्दू युवतियां अपने आप ही मिल रही थीं; पर उधर पालकियों में पद्मिनी और उसकी सखियों के बदले सशस्त्र हिन्दू वीर बैठाये गये। हर पालकी को चार कहारों ने उठा रखा था। वे भी सैनिक ही थे। पहली पालकी के मुगल शिविर में पहुंचते ही रतनसिंह को उसमें बैठाकर वापस भेज दिया गया और फिर सब योद्धा अपने शस्त्र निकालकर शत्रुओं पर टूट पड़े।

कुछ ही देर में शत्रु शिविर में हजारों मुगलों की लाशें बिछ गयीं। इससे बौखलाकर अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ पर हमला बोल दिया। इस युद्ध में राव रतनसिंह तथा हजारों सैनिक मारे गये। जब रानी पद्मिनी ने देखा कि अब हिन्दुओं के जीतने की आशा नहीं है, तो उसने जौहर का निर्णय किया।

रानी और किले में उपस्थित सभी नारियों ने सम्पूर्ण शृंगार किया। हजारों बड़ी चिताएं सजाई गयीं। ‘जय हर-जय हर’ का उद्घोष करते हुए सर्वप्रथम पद्मिनी ने चिता में छलांग लगाई और फिर क्रमशः सभी हिन्दू वीरांगनाएं अग्नि प्रवेश कर गयीं। जब युद्ध में जीत कर अलाउद्दीन पद्मिनी को पाने की आशा से किले में घुसा, तो वहां जलती चिताएं उसे मुंह चिढ़ा रही थीं।

चित्तौड़ का पहला जौहर (26 अगस्त)
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जोधा अकबर सीरियल और फिल्म बनाने वालों धूर्त,झूठे,बेईमानों अगर हिम्मत है तो रानी पद्मिनी पर फिल्म या सीरियल बना कर दिखाओ…………..

जौहर की गाथाओं से भरे पृष्ठ भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर हैं। ऐसे अवसर एक नहीं, कई बार आये हैं, जब हिन्दू ललनाओं ने अपनी पवित्रता की रक्षा के लिए ‘जय हर-जय हर’ कहते हुए हजारों की संख्या में सामूहिक अग्नि प्रवेश किया था। यही उद्घोष आगे चलकर ‘जौहर’ बन गया। जौहर की गाथाओं में सर्वाधिक चर्चित प्रसंग चित्तौड़ की रानी पद्मिनी का है, जिन्होंने 26 अगस्त, 1303 को 16,000 क्षत्राणियों के साथ जौहर किया था।

पद्मिनी का मूल नाम पद्मावती था। वह सिंहलद्वीप के राजा रतनसेन की पुत्री थी। एक बार चित्तौड़ के चित्रकार चेतन राघव ने सिंहलद्वीप से लौटकर राजा रतनसिंह को उसका एक सुंदर चित्र बनाकर दिया। इससे प्रेरित होकर राजा रतनसिंह सिंहलद्वीप गया और वहां स्वयंवर में विजयी होकर उसे अपनी पत्नी बनाकर ले आया। इस प्रकार पद्मिनी चित्तौड़ की रानी बन गयी।

पद्मिनी की सुंदरता की ख्याति मुगल हमलावर अलाउद्दीन खिलजी ने भी सुनी थी। वह उसे किसी भी तरह अपने हरम में डालना चाहता था। उसने इसके लिए चित्तौड़ के राजा के पास धमकी भरा संदेश भेजा; पर राव रतनसिंह ने उसे ठुकरा दिया। अब वह धोखे पर उतर आया। उसने रतनसिंह को कहा कि वह तो बस पद्मिनी को केवल एक बार देखना चाहता है।

रतनसिंह ने खून-खराबा टालने के लिए यह बात मान ली। एक दर्पण में रानी पद्मिनी का चेहरा अलाउद्दीन को दिखाया गया। वापसी पर रतनसिंह उसे छोड़ने द्वार पर आये। इसी समय उसके सैनिकों ने धोखे से रतनसिंह को बंदी बनाया और अपने शिविर में ले गये। अब यह शर्त रखी गयी कि यदि पद्मिनी अलाउद्दीन के पास आ जाए, तो रतनसिंह को छोड़ दिया जाएगा।

यह समाचार पाते ही चित्तौड़ में हाहाकार मच गया; पर पद्मिनी ने हिम्मत नहीं हारी। उसने कांटे से ही कांटा निकालने की योजना बनाई। अलाउद्दीन के पास समाचार भेजा गया कि पद्मिनी रानी हैं। अतः वह अकेले नहीं आएंगी। उनके साथ पालकियों में 800 सखियां और सेविकाएं भी आएंगी।

अलाउद्दीन और उसके साथी यह सुनकर बहुत प्रसन्न हुए। उन्हें पद्मिनी के साथ 800 हिन्दू युवतियां अपने आप ही मिल रही थीं; पर उधर पालकियों में पद्मिनी और उसकी सखियों के बदले सशस्त्र हिन्दू वीर बैठाये गये। हर पालकी को चार कहारों ने उठा रखा था। वे भी सैनिक ही थे। पहली पालकी के मुगल शिविर में पहुंचते ही रतनसिंह को उसमें बैठाकर वापस भेज दिया गया और फिर सब योद्धा अपने शस्त्र निकालकर शत्रुओं पर टूट पड़े।

कुछ ही देर में शत्रु शिविर में हजारों मुगलों की लाशें बिछ गयीं। इससे बौखलाकर अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ पर हमला बोल दिया। इस युद्ध में राव रतनसिंह तथा हजारों सैनिक मारे गये। जब रानी पद्मिनी ने देखा कि अब हिन्दुओं के जीतने की आशा नहीं है, तो उसने जौहर का निर्णय किया।

रानी और किले में उपस्थित सभी नारियों ने सम्पूर्ण शृंगार किया। हजारों बड़ी चिताएं सजाई गयीं। ‘जय हर-जय हर’ का उद्घोष करते हुए सर्वप्रथम पद्मिनी ने चिता में छलांग लगाई और फिर क्रमशः सभी हिन्दू वीरांगनाएं अग्नि प्रवेश कर गयीं। जब युद्ध में जीत कर अलाउद्दीन पद्मिनी को पाने की आशा से किले में घुसा, तो वहां जलती चिताएं उसे मुंह चिढ़ा रही थीं।

Posted in गौ माता - Gau maata

कुछ लोग कहते है की मांसाहार सही है क्यो की वनस्पति में भी प्राण होता है ,


 

कुछ लोग कहते है की मांसाहार सही है क्यो की वनस्पति में भी प्राण होता है ,feelings और दर्द होता है ।इसलिए वो भी जिव हत्या हुई।

उत्तर– बात सही है वनस्पति में भी feelings होता है वो भी जिव हत्या हुई ।
पर :- तर्क
1) पर जब हम वनस्पति को काटते है तो वो
**( हमारे सामने )**
1) तड़पता नहीं ,
2) हमसे दूर भागता नहीं ,
3) उसमे से खून नहीं बहता,
4) उसके आँखों से आँसू नहीं गिरता ,
5) वह अपने जीवन की भीख नहीं मांगता ।

पर हम जब किसी निर्दोष जानवर को काटते है तो यह सब होता है ।

( plants की feeling को हम देख तो नहीं सकते जानवरों की तरह । )

और यह देख कर भी अगर हमें उसपर दया नहीं आती है तो हमें मनुष्य कहलाने का कोई हक़ नहीं ।

और आज जब हम एक मासूम जानवर पर दया नहीं कर सकते तो कल किसी मनुष्य पर कैसे करेंगे ।

गाय को हमारे समाज में माँ का स्थान इसलिए दिया गया है क्यों की जिसका हम दूध पीते है वो हमारी माँ होती है और दूध पीकर ही हमें जीवन मिलता है ।

अतः गाय जीवन दायनी हुई क्यों की एक बच्चे का मुख्य भोजन दूध ही होता है और हर बच्चा गाय का दूध पीकर ही बड़ा होता है ।

तो फिर जो लोग इस जीवन दायनी को मार कर खा सकते है वो किसको छोड़ेंगे ? क्या ये कार्य शैतान तुल्य नहीं ।

2) दूसरा तर्क है की हम वनस्पति को पकने के बाद यानि उसका जीवन पूर्ण होने के बाद काटते है ।
अगर आज हम फल तोड़ कर नहीं खाते है तो कल को वो वनस्पति सड़ जायेगा ,
पर अगर गाय को काट कर नहीं खाया जाये तो वो कल से 10 साल तक दूध देगी ,गोबर देगी ।

अगर मछली को नहीं खाया जाये तो वो पानी साफ़ करेगी और दुसरे मांसाहारी जीवो का भोजन भी बनेगी ।

मुर्गा नहीं खाया जाये तो वो कीड़े मकौड़े खा कर वातावरन को स्वच्छ रखेंगे ।
सुवर को नहीं खाया जाये तो वो नाली का गन्दगी खायेगा ।

3)मनुष्य के शाकाहारी होने के कुदरती लक्षण ।
कोई भी ऐसा मांस खाने वाला जानवर नहीं है :—

*)जिसके काटने से rabies नहीं होता हो ।
*)जो पानी चाट कर नहीं पिता हो ।
*)जिसके पास 2 बड़े बड़े नुकीले दांत नहीं हो।
*)जिसके नाख़ून नुकीले नहीं हो ।
*)जो अपने बचाओ के लिए नहीं काटता हो बल्कि मारता हो ।

पर मनुष्य और सारे शाकाहारी प्राणी में ऐसे कोई भी लक्षण नहीं होते ।

बन्दर के कुछ प्रजाति कीड़े भी खाते हैं, तो सिर्फ इतना से ही बन्दर में मांसाहारी होने के सारे गुण है पर फिर भी बन्दर मांस नहीं खाता है ।
पर ऐसा कोई भी जानवर नहीं जिसमे शाकाहारी के गुण हो और वो मांसाहार खाता हो ।

#विज्ञान भी कहता है की मनुष्य एक शुद्ध शाकाहारी प्राणी है ।

1) Facial Muscles:——–
*Carnivore:–
-Reduced to allow wide mouth gape
*Herbivore:–
-Well-developed
*Omnivore:–
-Reduced
*Human:–
-Well developed

2)Jaw Type——————
*Carnivore:–
-Angle not expanded
*Herbivore:–
-Expanded angle
*Omnivore:–
-Angle not expanded
*Human:–
-Expanded angle

3) Jaw Joint Location——–
*Carnivore:–
-On same plane as molar teeth
*Herbivore:–
-Above the plane of the molars
*Omnivore:–
-On same plane as molar teeth
*Human:–
-Above the plane of the molars

4)Jaw Motion:—————
*Carnivore:–
-Shearing; minimal side-to-side motion
*Herbivore:–
-No shear; good side-to-side, front-to-back
*Omnivore:–
-Shearing; minimal side-to-side
*Human:–
-No shear; good side-to-side, front-to-back

5)Major Jaw Muscles:——-
*Carnivore:–
-Temporalis
*Herbivore:–
-Masseter and pterygoids
*Omnivore:–
-Temporalis
*Human:–
-Masseter and pterygoids

6) Mouth Opening vs. Head Size————————-
*Carnivore:–
-Large
*Herbivore:–
-Small
*Omnivore:–
-Large
*Human–
-Small

7) Teeth (Incisors)———–
*Carnivore:–
-Short and pointed *Herbivore:–
-Broad, flattened and spade shaped
*Omnivore:–
-Short and pointed
*Human:–
-Broad, flattened and spade shaped

8) Teeth (Canines)———-
*Carnivore:–
-Long, sharp and curved
*Herbivore:–
-Dull and short or long (for defense), or none
*Omnivore:–
-Long, sharp and curved
*Human:–
-Short and blunted

9) Teeth (Molars)———–
*Carnivore:–
-Sharp, jagged and blade shaped
*Herbivore–
-Flattened with cusps vs complex surface
*Omnivore:–
-Sharp blades and/or flattened
*Human:–
-Flattened with nodular cusps

10)Chewing—————-
*Carnivore:–
-None; swallows food whole
*Herbivore:–
-Extensive chewing necessary
*Omnivore:–
-Swallows food whole and/or simple crushing
*Human:–
-Extensive chewing necessary

11) Saliva——————-
*Carnivore:–
-No digestive enzymes *Herbivore:–
-Carbohydrate digesting enzymes
*Omnivore:–
-No digestive enzymes
*Human:–
-Carbohydrate digesting enzymes

12)Stomach Acidity———
*Carnivore:–
-Less than or equal to pH 1 with food in stomach
*Herbivore:–
-pH 4 to 5 with food in stomach
*Omnivore:–
-Less than or equal to pH 1 with food in stomach
*Human:–
-pH 4 to 5 with food in stomach

13) Stomach Capacity——-
*Carnivore:–
-60% to 70% of total volume of digestive tract
*Herbivore:–
-Less than 30% of total volume of digestive tract
*Omnivore:–
-60% to 70% of total volume of digestive tract
*Human:–
-21% to 27% of total volume of digestive tract

14) Length of Small
Intestine ——————
*Carnivore:–
-3 to 6 times body length
*Herbivore:–
-10 to more than 12 times body length
*Omnivore:–
-4 to 6 times body length
*Human:–
-10 to 11 times body length

15)Colon(large intestine)———
*Carnivore:–
-Simple, short and smooth
*Herbivore:–
-Long, complex; may be sacculated
*Omnivore:–
-Simple, short and smooth
*Human:–
-Long, sacculated

16)Liver———————
*Carnivore:–
-Can detoxify vitamin A
*Herbivore:–
-Cannot detoxify vitamin A
*Omnivore:–
-Can detoxify vitamin A
*Human:–
-Cannot detoxify vitamin A

17)Kidney——————-
*Carnivore:–
-Extremely concentrated urine
*Herbivore:–
-Moderately concentrated urine
*Omnivore:–
-Extremely concentrated urine
*Human:–
-Moderately concentrated urine

18)Nails———————
*Carnivore:–
-Sharp claws
*Herbivore:–
-Flattened nails or blunt hooves
*Omnivore:–
-Sharp claws
*Human:–
-Flattened nails

http://www.vegsource.com/news/2009/11/the-comparative-anatomy-of-eating.html

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Posted in हिन्दू पतन

क्या आप जानते है कि….. “”मेहर”” क्या है ….?????


क्या आप जानते है कि….. “”मेहर”” क्या है ….?????

दरअसल… समुचित जानकारी के अभाव में … अधिकांश लोगों का ऐसा सोचना है कि….. “”निकाह”” एवं “”विवाह”” …… दोनों एक ही हैं ….और, दोनों शब्दों में सिर्फ भाषा का अंतर है….!

जबकि ऐसा नहीं है …. और, निकाह तथा विवाह में आसमान-जमीन ….. या कहूँ तो….. गधे और घोड़े का सा अंतर है…..!

जहाँ हम हिन्दुओं में…. विवाह को एक पवित्र बंधन मान कर उसे सात जन्मों तक निभाने की कसमें खायी जाती है ….. वहीँ, “निकाह” ….. शादी नहीं…. बल्कि, “”महज एक सौदा”” होता है …!

असलियत में होता ये है कि…. जब कोई मुस्लिम लड़का…. किसी लड़की से निकाह करता है, तो मौलवी …… लड़का और लड़की दोनों से पूछते है…
“क्या आपको इतनी “”मेहर”” में फलाने से निकाह मंजूर है”……. ???????”

और….. लड़का और लड़की… दोनों के द्वारा तीन बार “कबूल है” ………बोलने पर निकाह मंज़ूर हो जाता है….!

इसीलिए…. इस्लाम में निकाह को समझने के लिए….. इस “मेहर नाम की बला” को समझना बेहद जरुरी हो जाता है….!

दरअसल….. मेहर एक राशि या रकम होती है ………..जो, लड़का……… तलाक के बाद लड़की को चुकाता है… या, देना तय करता है…

दूसरे शब्दों में आप इसे ………लड़की की कीमत भी बोल सकते हो….!

और, यह आसानी से समझा जा सकता है कि….. अगर लड़की अत्यधिक खूबसूरत हो… या किसी बड़े घर से सम्बन्ध रखती हो तो….. उसके मेहर की राशि ( उसकी कीमत) … ज्यादा होगी….
वहीँ, सामान्य रूप-रंग एवं परिवार वाले लड़की के मेहर की राशि ………कम…… अर्थात, महज कुछ सौ रूपये से लेकर ….. कुछेक हजार रुपये तक भी हो सकती है….!

कहने का मतलब कि….
तलाक के बाद …. एक बार मेहर की राशि चुका देने के बाद ….. उस तलाकशुदा लड़की की तरफ से ……. मुस्लिम लड़के की पूरी जिम्मेदारी ख़त्म मानी जाती है…. और, उसके बाद वो तलाकशुदा लड़की…. अपने भूतपूर्व पति अथवा उसकी संपत्ति पर किसी तरह का कोई दावा करने की अधिकारिणी नहीं रह जाती है….!

इस तरह…. इस्लाम में “निकाह””…….. शादी के नाम पर खुलेआम “सौदेबाजी” है….

और, सबसे मजे की बात यह है कि….. शरियत के हिसाब से {इस्लामिक कानून}……. “निकाह”” नामक ये सौदा रद्द करने की….. हर मुसलमान को खुली छुट है……..

अर्थात…. उसके सिर्फ तीन बार — तलाक-तलाक-तलाक – बोलते ही सौदा खत्म |

साथ ही…. किसी भी मौलवी और गवाहों के सामने तय – मेहर की – राशि का भुगतान किया…. और, मामला हमेशा के लिए साफ…!

ध्यान रखें कि……
इस्लाम में …….हिन्दू समाज की तरह तलाकशुदा लड़की गुजारे भत्ते की हकदार नही होती है …, क्योंकि, हमारे हिन्दू में “”मुस्लिम पर्सनल लॉ”” लागू है ……
जिसके तहत …निकाह के मामले में ….. भारतीय कानून की जगह …..मुस्लिमों का शरियत कानून ही मान्य होता है …. और, शरीयत के हिसाब से … मुस्लिम महिला ….. किसी भी तरह के गुजारे भत्ते की हकदार नही होती ..
बल्कि…. वो सिर्फ सिर्फ पहले से तय – मेहर – की ही हकदार होती है …! ( शाहबानो प्रकरण आप सब को याद ही होगा )

और तो और…..

सिर्फ मजाक में भी कहे गए….. “तीन बार तलाक” …………. भी “निकाह खारिज” करने के लिए मान्य माने जाते है …..( कई फतवों के अनुसार अब तो मोबाइल SMS भी मान्य हैं )

इस तरह….. मुस्लिम कानून अथवा शरियत के अनुसार मुस्लिम लड़का .. जितनी चाहे निकाह कर सकता है … सिर्फ उसके पास मेहर की रकम चुकाने का पैसा मौजूद होना चाहिए….!

अर्थात ……..
मुस्लिम समाज में घर की स्थिति हरम जैसी होती है…. जहाँ मुस्लिम जितनी चाहे उतनी लड़कियां खरीदकर ला सकते है……..और, उन्हें पत्नी बना कर घर में रख सकता है…
क्योकि, इस्लाम……. हर मुसलमान को कई पत्नियां रखने की अधिकार देता है… तथा, अरब देशों में कई घरों में आज भी कई-कई औरतें मिल जायेगी..!

इसीलिए …..इन सबसे तंग आकर भारतीय अदालत भी ये मान चुकी है कि— हिन्दुओ की शादी एक “संस्कार” है……. जबकि, मुसलमानों की “निकाह एक सौदा” है…..!

ज्ञातव्य है की…… हिन्दुओं के “संस्कार सात पीढ़ियों” तक निभाये जाते है,

विवाह…… हम हिन्दुओं के भारतीय संस्कृति में हमारे “16 संस्कारों मे से एक संस्कार” है………. और, हम हिन्दुओं के ये “संस्कार सात पीढ़ियों” तक निभाये जाते है…. इसीलिए , हमारे विवाह जन्म जन्मान्तर का रिश्ता होते है ..!

हम हिन्दुओं में तो….. विवाह को इतना अटूट बंधन माना जाता है कि…… भाषा के तौर पर “”हिंदी और संस्कृत”” के इतने समृद्ध होने के बावजूद भी….. “तलाक और डिवोर्स के लिए कोई हिंदी या संस्कृत शब्द मौजूद नहीं है””

यही कारण है कि……. हमारे हिन्दू सनातन धर्म में…….. तथाकथित…. तलाक अथवा डिवोर्स के लिए….. कोई “”विधि या कर्मकांड तक भी निर्धारित नहीं”” किए गए हैं….!

यहाँ तक कि….. “”हिन्दू विवाह अधिनियम”” (सरकारी कानून )… के अंतर्गत भी….. कोई हिन्दू लड़का अपनी पत्नी को ….. बिना उसकी सहमति के “किसी भी हालत में नहीं” छोड़ सकता है….. और, दुर्लभतम रूप से शादी टूटने के बाद भी…. वो हिन्दू लड़की जीवनपर्यन्त …….. अपने पूर्व पति के आधे तनख्वाह …. एवं, आधी संपत्ति की अधिकारिणी होती है…!!

इसीलिए … कोई भी कूल डूड एवं सब धर्म समभाव के कुत्सित मानसिकता से ग्रसित…… हिन्दू लडकियों को किसी मुस्लिम लड़के से……… प्यार की पींगे बढ़ाने…. अथवा, उसके साथ शादी करने के सपने संजोने से पहले….. हजार बार जरूर सोच लेना चाहिए …. क्योंकि….

ये कभी ना भूलें कि…..
“”मुस्लिम पर्सनल लॉ”” लागू होने के कारण ……. भारतीय अदालत तक में …. मुस्लिमो के केस में ……. मुस्लिमो का “शरियत कानून” ही मान्य है।

जय महाकाल…!!!

नोट : “सामान आचार संहिता” में … मुस्लिमों के इसी “पर्सनल लॉ” को ख़त्म कर …. मुस्लिम महिलाओं को भी इज्जत की जिंदगी देने के बात हो रही है…. परन्तु, आश्चर्यजनक तौर पर … खुद मुस्लिम ही इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं…!

Reference : 1. केरल हाईकोर्ट ने कहा :मुसलमानों की “निकाह एक सौदा” है…..!http://timesofindia.indiatimes.com/india/Muslim-marriage-is-a-civil-contract-rules-high-court/articleshow/20500887.cms

क्या आप जानते है कि..... ""मेहर"" क्या है ....?????

दरअसल... समुचित जानकारी के अभाव में ... अधिकांश लोगों का ऐसा सोचना है कि..... ""निकाह"" एवं ""विवाह"" ...... दोनों एक ही हैं ....और, दोनों शब्दों में सिर्फ भाषा का अंतर है....!

जबकि ऐसा नहीं है .... और, निकाह तथा विवाह में आसमान-जमीन ..... या कहूँ तो..... गधे और घोड़े का सा अंतर है.....!

जहाँ हम हिन्दुओं में.... विवाह को एक पवित्र बंधन मान कर उसे सात जन्मों तक निभाने की कसमें खायी जाती है ..... वहीँ, "निकाह" ..... शादी नहीं.... बल्कि, ""महज एक सौदा"" होता है ...!

असलियत में होता ये है कि.... जब कोई मुस्लिम लड़का.... किसी लड़की से निकाह करता है, तो मौलवी ...... लड़का और लड़की दोनों से पूछते है…
"क्या आपको इतनी ""मेहर"" में फलाने से निकाह मंजूर है"....... ???????"

और..... लड़का और लड़की... दोनों के द्वारा तीन बार "कबूल है" .........बोलने पर निकाह मंज़ूर हो जाता है....!

इसीलिए.... इस्लाम में निकाह को समझने के लिए..... इस "मेहर नाम की बला" को समझना बेहद जरुरी हो जाता है....!

दरअसल..... मेहर एक राशि या रकम होती है ...........जो, लड़का......... तलाक के बाद लड़की को चुकाता है... या, देना तय करता है...

दूसरे शब्दों में आप इसे .........लड़की की कीमत भी बोल सकते हो....!

और, यह आसानी से समझा जा सकता है कि..... अगर लड़की अत्यधिक खूबसूरत हो... या किसी बड़े घर से सम्बन्ध रखती हो तो..... उसके मेहर की राशि ( उसकी कीमत) ... ज्यादा होगी....
वहीँ, सामान्य रूप-रंग एवं परिवार वाले लड़की के मेहर की राशि .........कम...... अर्थात, महज कुछ सौ रूपये से लेकर ..... कुछेक हजार रुपये तक भी हो सकती है....!

कहने का मतलब कि....
तलाक के बाद .... एक बार मेहर की राशि चुका देने के बाद ..... उस तलाकशुदा लड़की की तरफ से ....... मुस्लिम लड़के की पूरी जिम्मेदारी ख़त्म मानी जाती है.... और, उसके बाद वो तलाकशुदा लड़की.... अपने भूतपूर्व पति अथवा उसकी संपत्ति पर किसी तरह का कोई दावा करने की अधिकारिणी नहीं रह जाती है....!

इस तरह.... इस्लाम में "निकाह""........ शादी के नाम पर खुलेआम "सौदेबाजी" है....

और, सबसे मजे की बात यह है कि..... शरियत के हिसाब से {इस्लामिक कानून}....... "निकाह"" नामक ये सौदा रद्द करने की..... हर मुसलमान को खुली छुट है........

अर्थात.... उसके सिर्फ तीन बार -- तलाक-तलाक-तलाक – बोलते ही सौदा खत्म |

साथ ही.... किसी भी मौलवी और गवाहों के सामने तय – मेहर की – राशि का भुगतान किया.... और, मामला हमेशा के लिए साफ...!

ध्यान रखें कि......
इस्लाम में .......हिन्दू समाज की तरह तलाकशुदा लड़की गुजारे भत्ते की हकदार नही होती है ..., क्योंकि, हमारे हिन्दू में ""मुस्लिम पर्सनल लॉ"" लागू है ......
जिसके तहत ...निकाह के मामले में ..... भारतीय कानून की जगह .....मुस्लिमों का शरियत कानून ही मान्य होता है .... और, शरीयत के हिसाब से ... मुस्लिम महिला ..... किसी भी तरह के गुजारे भत्ते की हकदार नही होती ..
बल्कि.... वो सिर्फ सिर्फ पहले से तय - मेहर - की ही हकदार होती है ...! ( शाहबानो प्रकरण आप सब को याद ही होगा )

और तो और.....

सिर्फ मजाक में भी कहे गए..... "तीन बार तलाक" ............. भी "निकाह खारिज" करने के लिए मान्य माने जाते है .....( कई फतवों के अनुसार अब तो मोबाइल SMS भी मान्य हैं )

इस तरह..... मुस्लिम कानून अथवा शरियत के अनुसार मुस्लिम लड़का .. जितनी चाहे निकाह कर सकता है ... सिर्फ उसके पास मेहर की रकम चुकाने का पैसा मौजूद होना चाहिए....!

अर्थात ........
मुस्लिम समाज में घर की स्थिति हरम जैसी होती है.... जहाँ मुस्लिम जितनी चाहे उतनी लड़कियां खरीदकर ला सकते है........और, उन्हें पत्नी बना कर घर में रख सकता है...
क्योकि, इस्लाम....... हर मुसलमान को कई पत्नियां रखने की अधिकार देता है... तथा, अरब देशों में कई घरों में आज भी कई-कई औरतें मिल जायेगी..!

इसीलिए .....इन सबसे तंग आकर भारतीय अदालत भी ये मान चुकी है कि— हिन्दुओ की शादी एक “संस्कार” है....... जबकि, मुसलमानों की “निकाह एक सौदा” है.....!

ज्ञातव्य है की...... हिन्दुओं के "संस्कार सात पीढ़ियों" तक निभाये जाते है,

विवाह...... हम हिन्दुओं के भारतीय संस्कृति में हमारे "16 संस्कारों मे से एक संस्कार" है.......... और, हम हिन्दुओं के ये "संस्कार सात पीढ़ियों" तक निभाये जाते है.... इसीलिए , हमारे विवाह जन्म जन्मान्तर का रिश्ता होते है ..!

हम हिन्दुओं में तो..... विवाह को इतना अटूट बंधन माना जाता है कि...... भाषा के तौर पर ""हिंदी और संस्कृत"" के इतने समृद्ध होने के बावजूद भी..... "तलाक और डिवोर्स के लिए कोई हिंदी या संस्कृत शब्द मौजूद नहीं है""

यही कारण है कि....... हमारे हिन्दू सनातन धर्म में........ तथाकथित.... तलाक अथवा डिवोर्स के लिए..... कोई ""विधि या कर्मकांड तक भी निर्धारित नहीं"" किए गए हैं....!

यहाँ तक कि..... ""हिन्दू विवाह अधिनियम"" (सरकारी कानून )... के अंतर्गत भी..... कोई हिन्दू लड़का अपनी पत्नी को ..... बिना उसकी सहमति के "किसी भी हालत में नहीं" छोड़ सकता है..... और, दुर्लभतम रूप से शादी टूटने के बाद भी.... वो हिन्दू लड़की जीवनपर्यन्त ........ अपने पूर्व पति के आधे तनख्वाह .... एवं, आधी संपत्ति की अधिकारिणी होती है...!!

इसीलिए ... कोई भी कूल डूड एवं सब धर्म समभाव के कुत्सित मानसिकता से ग्रसित...... हिन्दू लडकियों को किसी मुस्लिम लड़के से......... प्यार की पींगे बढ़ाने.... अथवा, उसके साथ शादी करने के सपने संजोने से पहले..... हजार बार जरूर सोच लेना चाहिए .... क्योंकि....

ये कभी ना भूलें कि.....
""मुस्लिम पर्सनल लॉ"" लागू होने के कारण ....... भारतीय अदालत तक में .... मुस्लिमो के केस में ....... मुस्लिमो का "शरियत कानून" ही मान्य है।

जय महाकाल...!!!

नोट : "सामान आचार संहिता" में ... मुस्लिमों के इसी "पर्सनल लॉ" को ख़त्म कर .... मुस्लिम महिलाओं को भी इज्जत की जिंदगी देने के बात हो रही है.... परन्तु, आश्चर्यजनक तौर पर ... खुद मुस्लिम ही इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं...!

Reference : 1. केरल हाईकोर्ट ने कहा :मुसलमानों की “निकाह एक सौदा” है.....! http://timesofindia.indiatimes.com/india/Muslim-marriage-is-a-civil-contract-rules-high-court/articleshow/20500887.cms
Posted in राजनीति भारत की - Rajniti Bharat ki

क्या भारत की सुरक्षा व्यवस्था की पीठ में छूरा घोंपने का इससे बेशर्म और बेरहम उदाहरण कुछ और हो सकता है.?


 

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ख़ुफ़िया एजेंसियों की स्पष्ट रिपोर्टों के बावजूद देश का गृहमंत्री धृतराष्ट्र क्यों बना हुआ है.? और इस पाकिस्तानी जासूस को गिरफ्तार क्यों नहीं करवा रहा है.?
पश्चिम बंगाल वाली ममता बनर्जी ने अहमद हसन उर्फ़ इमरान नाम के एक ऐसे पाकिस्तानी हरामज़ादे को अपनी पार्टी से देश के सर्वोच्च सदन राज्यसभा का सदस्य बनवा दिया है जो मूलतः पाकिस्तानी नागरिक है. और जो 1971 के भारत पाक युद्ध से पहले पाकिस्तानी जासूस घुसपैठिये के रूप में भारत में घुस आया था.
(तब बांग्लादेश नहीं बना था). अहमद हसन उर्फ़ इमरान भारत में आतंकी संगठन सिमी का महत्वपूर्ण सदस्य बनकर खूब सक्रिय रहा है. सिर्फ यही नहीं, अहमद हसन उर्फ़ इमरान उस हत्यारे राक्षस बाप का कपूत भी है जो पूर्वी पाकिस्तान में हिंदू बुद्धिजीवियों विचारकों को चुन चुन कर मौत के घाट उतारने के लिए बहुत कुख्यात हुआ था.

(पूरी खबर का लिंक http://www.newindianexpress.com/nation/Mystery-Surrounds-Pakistan-Citizens-TMC-MP-Post/2014/09/22/article2442700.ece)

 

Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

हाइफा का युद्ध 23 सितंबर


 

शेयर करे मित्रो ताकि हर हिंदुस्तानी जान सके जय हिन्द !!
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हाइफा डे
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हाइफा का युद्ध 23 सितंबर 1918 को लड़ा गया था। यह युद्ध प्रथम विश्व युद्ध के दौरान शांति के लिए सिनाई और फलिस्तीन के बीच चलाए जा रहे अभियान के अंतिम महीनों में लड़ा गया। इस दिन उस्मानी वंश के तुर्कों की सेनाओं को हाइफा शहर से बाहर कर दिया गया था। मेजर दलपत सिंह (एमसी) को हाइफा को मुक्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए ऐतिहासिक वृतांत में ‘हाइफा के हीरो’ के रूप में याद किया जाता है। उन्हें बहादुरी के लिए मिलिट्री क्रास से सम्मानित किया गया था। इस वजह से इंडियन मिलिट्री प्रति वर्ष हाइफा डे को सेलिब्रेट करती है।

आज ही मेजर दलपत सिंह का 96वां बलिदान दिवस भी है. 23 सितंबर को हुए इस युद्ध में मेजर दलपतसिंह समेत सात हिन्दुस्तानी शहीद हुए। दिल्ली स्थित तीन मूर्ति स्मारक इसी युद्ध के शहीदों को समर्पित है। खास बात यह है कि एक मूर्ति मेजर दलपत सिंह की है, इजरायल 2018 में इस विजय दिवस की शताब्दी मनाएगा। गौर करने लायक तथ्य है कि इस विजय गाथा को इजराइली बच्चे अपने स्कूली पाठ्यक्रम में पढ़ते हैं।

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Posted in Love Jihad

मित्रों ये ईसाई मानसिक गुलाम, “सेकुलर भेड़िये” देश में प्लेटो, अरस्तू, फिलिप्स, के आदर्शों को अपना सम्पूर्ण ज्ञान को मानने वाले


मित्रों ये ईसाई मानसिक गुलाम, “सेकुलर भेड़िये” देश में प्लेटो, अरस्तू, फिलिप्स, के आदर्शों को अपना सम्पूर्ण ज्ञान को मानने वाले, पुरे देश की मानसिकता को अपने अनकूल चलने और बाध्य करने के लिए अपना दानवी, मायावी जाल पिछले 60 वर्षों में किसकदर थोपने पर तुले हैं ? इनके कुचक्र के परिणाम अब देश के सामने कलंक के रूप में दिखाई देने लगें हैं ? मित्रों बहुत ही शर्म की बात है की इतनें शर्मनाक विषय की चर्चा कर रहा हूँ जो देश की प्राचीन वैदिक विज्ञानं और सव्येता को दीमक की तरह खोखला कर बर्बाद कर चुकी हैं ! और हम अन्धे बन इस नासूर बीमारी से ग्रषित हैं इस विषय पर चर्चा बहुत ही जरुरी भी है
“प्रति दिन” पूरेदेश में 450 बलात्कार का शिकार होती है जिनमें 100 बलात्कार की रिपोर्ट करती हैं
“प्रति दिन” पूरेदेश में 1000 लड़कियाँ नशे की सुरुआत करती हैं बीआर, शराब, कुकिन, चारश, की
“प्रति दिन” पूरेदेश में लगभग 700 लड़कियाँ आशकी (LOVE) की सुरुआत करती हैं
“प्रति दिन” पूरेदेश में लगभग 2500 लड़कियाँ शादी से पहले शारीरिक संबन्ध बनती हैं
“प्रति दिन” पूरेदेश में लगभग 400 कुआरी लड़कियां अपने घर को छोड़ कर भाग जाती हैं
“प्रति दिन” पूरेदेश में 10 से 16 वर्ष की लगभग 900 लड़कियाँ वेश्याव्रती की दलदल में आ जाती हैं
“प्रति दिन” पूरेदेश में इस प्रकरण मेँ आशकी और लवजिहाद सामान्य रूप से काम करतें हैं
और बहुत ही आश्चर्य की बात हैं की मीडिया में इसकी चर्चा कभी नहीं करते ! सब दबे पाओं पर्दे के पीछे चलता है इस पुरे नेटवर्क के पीछे जो सेकुलर भेड़ियों का माफिया और नशे का माफिया काम करता है वोह कभी पकड़ा नहीं जाता ? क्योकि उनको बचने देश के अंग्रेजों के अंन्धे कानून और सेकुलर भेड़िये उनकी रक्षः करते है और उस वाशना की मंडी को बहुत ही गुणगान कर मीडिया के सहारे महान बनाया जाता है ? सनिलिओन, जैसे हजारों वैस्यओं को आदर्श का सिम्बल बना युवाओं को आकर्षित कर उनको इस जाल में फ़साने का कुचक्र चलाया जाता है स्कूल, कालेजों, के सभी युवाओं को पता है की आशकी के बाद वाशना में लिप्त अपनी भूख मिटने के लिए कहाँ से कंडोम, शराब, ड्रग्स, सभी स्कूल, कालेजों के आसपास बड़ी ही व्यवस्थित अवं आसानी से सब उप्लब्ध् है सभी महा नगरों में , इंटरनेट अट्सअप, और अश्लील ब्लुफ़िल्में, देश में हमारी बेहेन, बेटियों, की बनने वाली ब्लुफ़िल्में और अश्लील वेबस्इट्स, सभी, सरकार अपनी नाक के नीचे उपलब्द कराती है ? इस भोगवादी ईसाई शिक्षः को अंन्धे बन सभी जानते है, यहाँ से हमारी सुकरात, अरस्तु, प्लेटो,, मेकॉले की ईसाई शिक्षः जिनके प्रचारक सेकुलर कालेअंग्रेज एक वेपन की तरह भारतीय की महान संस्कृति और समाज को ध्वस्त व निस्तनाबूत करने में करते है ? और मोदी सरकार में भी बदस्तूर जारी है ? जहाँ से ईसाई मानसिक गुलामों और भोगवादी विचारधारा का जन्म होता है जहाँ से कोई भी राष्ट्रप्रेमी, देश निर्माण करता जन्म नहीं लेता , बस केवल विदेशी उत्पादों को भोग के लिए कैसे थोपा जाये सोचता हूँ की पूरी दुनिया इतनी खोजों और प्रयोगों के बाद इस महान संष्कृति और इतिहास को नमन कर रही है और अपनाने के लिए लालायित है ,और यह सेकुलर ईसाई पालतू कुत्ते देश को कहाँ ले जाने पर तुले हैं
बाकि अगले अंक मैं ,,, जागिये और अपना महान देश बचाईये ?

मित्रों ये ईसाई मानसिक गुलाम, "सेकुलर भेड़िये" देश में प्लेटो, अरस्तू, फिलिप्स, के आदर्शों को अपना सम्पूर्ण ज्ञान को मानने वाले, पुरे देश की मानसिकता को अपने अनकूल चलने और बाध्य करने के लिए अपना दानवी, मायावी जाल पिछले 60 वर्षों में किसकदर थोपने पर तुले हैं ? इनके कुचक्र के परिणाम अब देश के सामने कलंक के रूप में दिखाई देने लगें हैं ? मित्रों बहुत ही शर्म की बात है की इतनें शर्मनाक विषय की चर्चा कर रहा हूँ जो देश की प्राचीन वैदिक विज्ञानं और सव्येता को दीमक की तरह खोखला कर बर्बाद कर चुकी हैं ! और हम अन्धे बन इस नासूर बीमारी से ग्रषित हैं इस विषय पर चर्चा बहुत ही जरुरी भी है "प्रति दिन" पूरेदेश में 450 बलात्कार का शिकार होती है जिनमें 100 बलात्कार की रिपोर्ट करती हैं "प्रति दिन" पूरेदेश में 1000 लड़कियाँ नशे की सुरुआत करती हैं बीआर, शराब, कुकिन, चारश, की "प्रति दिन" पूरेदेश में लगभग 700 लड़कियाँ आशकी (LOVE) की सुरुआत करती हैं "प्रति दिन" पूरेदेश में लगभग 2500 लड़कियाँ शादी से पहले शारीरिक संबन्ध बनती हैं "प्रति दिन" पूरेदेश में लगभग 400 कुआरी लड़कियां अपने घर को छोड़ कर भाग जाती हैं "प्रति दिन" पूरेदेश में 10 से 16 वर्ष की लगभग 900 लड़कियाँ वेश्याव्रती की दलदल में आ जाती हैं "प्रति दिन" पूरेदेश में इस प्रकरण मेँ आशकी और लवजिहाद सामान्य रूप से काम करतें हैं और बहुत ही आश्चर्य की बात हैं की मीडिया में इसकी चर्चा कभी नहीं करते ! सब दबे पाओं पर्दे के पीछे चलता है इस पुरे नेटवर्क के पीछे जो सेकुलर भेड़ियों का माफिया और नशे का माफिया काम करता है वोह कभी पकड़ा नहीं जाता ? क्योकि उनको बचने देश के अंग्रेजों के अंन्धे कानून और सेकुलर भेड़िये उनकी रक्षः करते है और उस वाशना की मंडी को बहुत ही गुणगान कर मीडिया के सहारे महान बनाया जाता है ? सनिलिओन, जैसे हजारों वैस्यओं को आदर्श का सिम्बल बना युवाओं को आकर्षित कर उनको इस जाल में फ़साने का कुचक्र चलाया जाता है स्कूल, कालेजों, के सभी युवाओं को पता है की आशकी के बाद वाशना में लिप्त अपनी भूख मिटने के लिए कहाँ से कंडोम, शराब, ड्रग्स, सभी स्कूल, कालेजों के आसपास बड़ी ही व्यवस्थित अवं आसानी से सब उप्लब्ध् है सभी महा नगरों में , इंटरनेट अट्सअप, और अश्लील ब्लुफ़िल्में, देश में हमारी बेहेन, बेटियों, की बनने वाली ब्लुफ़िल्में और अश्लील वेबस्इट्स, सभी, सरकार अपनी नाक के नीचे उपलब्द कराती है ? इस भोगवादी ईसाई शिक्षः को अंन्धे बन सभी जानते है, यहाँ से हमारी सुकरात, अरस्तु, प्लेटो,, मेकॉले की ईसाई शिक्षः जिनके प्रचारक सेकुलर कालेअंग्रेज एक वेपन की तरह भारतीय की महान संस्कृति और समाज को ध्वस्त व निस्तनाबूत करने में करते है ? और मोदी सरकार में भी बदस्तूर जारी है ? जहाँ से ईसाई मानसिक गुलामों और भोगवादी विचारधारा का जन्म होता है जहाँ से कोई भी राष्ट्रप्रेमी, देश निर्माण करता जन्म नहीं लेता , बस केवल विदेशी उत्पादों को भोग के लिए कैसे थोपा जाये सोचता हूँ की पूरी दुनिया इतनी खोजों और प्रयोगों के बाद इस महान संष्कृति और इतिहास को नमन कर रही है और अपनाने के लिए लालायित है ,और यह सेकुलर ईसाई पालतू कुत्ते देश को कहाँ ले जाने पर तुले हैं बाकि अगले अंक मैं ,,, जागिये और अपना महान देश बचाईये ?
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कुख्यात आतंकिन इशरत


कुख्यात आतंकिन इशरत जहाँ का सियासी बाप सियासी चाचा सियासी ताऊ और सियासी मामू बनकर देश के साथ गद्दारी की शर्मनाक सियासी होड़ का परिणाम कितना खतरनाक हुआ था इसका खुलासा अब हुआ है.

देश के मोस्ट वॉन्टेड आतंकवादी यासीन भटकल को नेपाल के एक दूरस्थ गांव से गिरफ्तार करने वाली ख़ुफ़िया एजेंसी IB की SOG टीम के सदस्यों ने किस तरह अपने उच्चाधिकारियों की प्रारम्भिक अनुमति के बगैर ही, अपने दोस्तों से पैसे क़र्ज़ लेकर, अपनी नौकरी दांव पर लगाकर यासीन भटकल को नेपाल में जाकर घेर लिया था इसका सनसनीखेज विस्तृत विवरण OPEN मैगज़ीन ने छापा है.

विवरण के अनुसार SOG टीम को ऐसा इसलिए करना पड़ा था क्योंकि दिल्ली में बैठे ख़ुफ़िया एजेंसी के अधिकारी यह सोचकर बहुत भयभीत थे कि यदि इस ऑपरेशन में जरा भी चूक हुई तो ख़ुफ़िया एजेंसी के खिलाफ कुछ सियासी नेता देश में उसी तरह गदर मचाएंगे जिस तरह आतंकी इशरत जहां के नाम पर उन्होंने गदर मचाया था. इसलिए वे अनुमति देने से कतरा रहे थे. जबकि SOG टीम के जवान किसी भी कीमत पर देश के सबसे बड़े दुश्मन को अपने हाथों से बचकर नहीं जाने देना चाहते थे. अतः उन्होंने अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया था. उन जवानों को कोटि कोटि प्रणाम.

इस खुलासे से यह साफ़ हो गया है कि आतंकिन इशरत जहाँ का सियासी बाप सियासी चाचा सियासी ताऊ और सियासी मामू बनने की देशघाती बेशर्म होड़ ने किस तरह देश की ख़ुफ़िया एजेंसियों के मनोबल को ध्वस्त कर आतंकवादियों को लाभ पहुँचाने का काम किया था.

पूरी कथा इस लिंक पर जाकर भी पढ़ सकते हैं
http://www.openthemagazine.com/article/nation/thankless-india

कुख्यात आतंकिन इशरत जहाँ का सियासी बाप सियासी चाचा सियासी ताऊ और सियासी मामू बनकर देश के साथ गद्दारी की शर्मनाक सियासी होड़ का परिणाम कितना खतरनाक हुआ था इसका खुलासा अब हुआ है.

देश के मोस्ट वॉन्टेड आतंकवादी यासीन भटकल को नेपाल के एक दूरस्थ गांव से गिरफ्तार करने वाली ख़ुफ़िया एजेंसी IB की SOG टीम के सदस्यों ने किस तरह अपने उच्चाधिकारियों की प्रारम्भिक अनुमति के बगैर ही, अपने दोस्तों से पैसे क़र्ज़ लेकर, अपनी नौकरी दांव पर लगाकर यासीन भटकल को नेपाल में जाकर घेर लिया था इसका सनसनीखेज विस्तृत विवरण OPEN मैगज़ीन ने छापा है. 

विवरण के अनुसार SOG टीम को ऐसा इसलिए करना पड़ा था क्योंकि दिल्ली में बैठे ख़ुफ़िया एजेंसी के अधिकारी यह सोचकर बहुत भयभीत थे कि यदि इस ऑपरेशन में जरा भी चूक हुई तो ख़ुफ़िया एजेंसी के खिलाफ कुछ सियासी नेता देश में उसी तरह गदर मचाएंगे जिस तरह आतंकी इशरत जहां के नाम पर उन्होंने गदर मचाया था. इसलिए वे अनुमति देने से कतरा रहे थे. जबकि SOG टीम के जवान किसी भी कीमत पर देश के सबसे बड़े दुश्मन को अपने हाथों से बचकर नहीं जाने देना चाहते थे. अतः उन्होंने अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया था. उन जवानों को कोटि कोटि प्रणाम.

इस खुलासे से यह साफ़ हो गया है कि आतंकिन इशरत जहाँ का सियासी बाप सियासी चाचा सियासी ताऊ और सियासी मामू बनने की देशघाती बेशर्म होड़ ने किस तरह देश की ख़ुफ़िया एजेंसियों के मनोबल को ध्वस्त कर आतंकवादियों को लाभ पहुँचाने का काम किया था. 

पूरी कथा इस लिंक पर जाकर भी पढ़ सकते हैं 
http://www.openthemagazine.com/article/nation/thankless-india
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महाराणा प्रताप का नाम लेते समय उनकी आँखों में एक वीरता भरी चमक थी


महाराणा प्रताप का नाम लेते समय उनकी आँखों में एक वीरता भरी चमक थी (y)</p>
<p>वियतनाम एक छोटा सा देश जिसने अमेरिका जैसे बड़े व बलशाली देश को झुका दिया। लगभग बीस वर्षों तक चले युद्ध में अमेरिका पराजित हुआ। अमेरिका पर विजय के बाद वियतनाम के राष्ट्रियाध्यक्ष से पत्रकार ने एक सवाल पूछा। स्पस्ट ही है की यही प्रश्न किया होगा कि आप युद्ध कैसे जीते या अमेरिका को कैसे झुका दिया। पर उस प्रश्न का दिया उत्तर सुनकर आप आश्चर्य चकित रह जायेंगे और महानतम गर्व का अनुभव करेंगे।</p>
<p>वियतनाम के राष्ट्रियाध्यक्ष ने उत्तर दिया :-<br />
सभी देशों में सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका को हराने के लिए मैंने एक महान राजा का चरित्र पढ़ा। और उस जीवनी से मिली प्रेरणा व युद्धनिती का प्रयोग कर सरलता से विजय प्राप्त की। आगे पत्रकार ने पूछा कौन थे वो महान राजा? मित्रों जब मैंने पढ़ा तब जैसे मेरा सीना गर्व से चौड़ा हो गया आपका का भी सीना गर्व से भर जायेगा। वियतनाम के राष्ट्रियाध्यक्ष ने खड़े होकर जवाब दिया “मेवाड़ के महाराजा महाराणा प्रताप सिंह “<br />
महाराणा प्रताप का नाम लेते समय उनकी आँखों में एक वीरता भरी चमक थी। आगे उन्होंने कहा अगर ऐसे राजा ने हमारे देश में जन्म लिया होता तो हमने सारे विश्व पर राज किया होता। कुछ वर्षों के बाद राष्ट्रियाध्यक्ष की मृत्यू हुई उसने अपनी समाधी पर लिखवाया “महाराणा प्रताप के एक शिष्य की समाधी”। कालांतर में वियतनाम के विदेशमंत्री भारत के दौरे पर थे। पूर्वनियोजित कार्यक्रमानुसार उन्हें पहले लालकिला व बाद में गांधीजी की समाधी दिखलाई गई। ये सब दिखलाते हुए उन्होंने पूछा महाराणा प्रताप जी की समाधी कहाँ है ? तब भारत सरकार चकित रह गयी उत्तर में उदयपुर का उल्लेख किया गया । विदेशमंत्री उदयपुर आये वहाँ महाराणा प्रताप जी की समाधी के दर्शन किये। समाधी के दर्शन लेने के बाद समाधी के पास की मिट्टी उठाई व अपने बैग में भर ली इस पर पत्रकार ने मिट्टी रखने का कारण पूछा। मंत्री महोदय ने कहा ये मिट्टी शूरवीरों की है। इस मिट्टी में एक महान् राजा ने जन्म लिया ये मिट्टी मै अपने देश की मिट्टी में मिला दूंगा ताकि मेरे देश में भी ऐसे ही वीर योद्धा जन्म लें । महाराणा प्रताप जी पर भारती ही गर्व नहीं करते हैं अपि विदेशी भी उन पर गर्व करते हैं और उनसे प्रेरणा लेते हैं। मैं अपेक्षा करता हूँ की यह पोस्ट आप बड़े अभिमान के साथ अधिक से अधिक लोगों के मध्य शेयर करेंगे। </p>
<p>भारत रत्न वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप जी की जय!

महाराणा प्रताप का नाम लेते समय उनकी आँखों में एक वीरता भरी चमक थी

वियतनाम एक छोटा सा देश जिसने अमेरिका जैसे बड़े व बलशाली देश को झुका दिया। लगभग बीस वर्षों तक चले युद्ध में अमेरिका पराजित हुआ। अमेरिका पर विजय के बाद वियतनाम के राष्ट्रियाध्यक्ष से पत्रकार ने एक सवाल पूछा। स्पस्ट ही है की यही प्रश्न किया होगा कि आप युद्ध कैसे जीते या अमेरिका को कैसे झुका दिया। पर उस प्रश्न का दिया उत्तर सुनकर आप आश्चर्य चकित रह जायेंगे और महानतम गर्व का अनुभव करेंगे।

वियतनाम के राष्ट्रियाध्यक्ष ने उत्तर दिया :-
सभी देशों में सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका को हराने के लिए मैंने एक महान राजा का चरित्र पढ़ा। और उस जीवनी से मिली प्रेरणा व युद्धनिती का प्रयोग कर सरलता से विजय प्राप्त की। आगे पत्रकार ने पूछा कौन थे वो महान राजा? मित्रों जब मैंने पढ़ा तब जैसे मेरा सीना गर्व से चौड़ा हो गया आपका का भी सीना गर्व से भर जायेगा। वियतनाम के राष्ट्रियाध्यक्ष ने खड़े होकर जवाब दिया “मेवाड़ के महाराजा महाराणा प्रताप सिंह “
महाराणा प्रताप का नाम लेते समय उनकी आँखों में एक वीरता भरी चमक थी। आगे उन्होंने कहा अगर ऐसे राजा ने हमारे देश में जन्म लिया होता तो हमने सारे विश्व पर राज किया होता। कुछ वर्षों के बाद राष्ट्रियाध्यक्ष की मृत्यू हुई उसने अपनी समाधी पर लिखवाया “महाराणा प्रताप के एक शिष्य की समाधी”। कालांतर में वियतनाम के विदेशमंत्री भारत के दौरे पर थे। पूर्वनियोजित कार्यक्रमानुसार उन्हें पहले लालकिला व बाद में गांधीजी की समाधी दिखलाई गई। ये सब दिखलाते हुए उन्होंने पूछा महाराणा प्रताप जी की समाधी कहाँ है ? तब भारत सरकार चकित रह गयी उत्तर में उदयपुर का उल्लेख किया गया । विदेशमंत्री उदयपुर आये वहाँ महाराणा प्रताप जी की समाधी के दर्शन किये। समाधी के दर्शन लेने के बाद समाधी के पास की मिट्टी उठाई व अपने बैग में भर ली इस पर पत्रकार ने मिट्टी रखने का कारण पूछा। मंत्री महोदय ने कहा ये मिट्टी शूरवीरों की है। इस मिट्टी में एक महान् राजा ने जन्म लिया ये मिट्टी मै अपने देश की मिट्टी में मिला दूंगा ताकि मेरे देश में भी ऐसे ही वीर योद्धा जन्म लें । महाराणा प्रताप जी पर भारती ही गर्व नहीं करते हैं अपि विदेशी भी उन पर गर्व करते हैं और उनसे प्रेरणा लेते हैं। मैं अपेक्षा करता हूँ की यह पोस्ट आप बड़े अभिमान के साथ अधिक से अधिक लोगों के मध्य शेयर करेंगे।

भारत रत्न वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप जी की जय!

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यह पढ़ाया जा रहा है आपके बच्चों को…..


इस रोमिला थापर महीला का बहिष्कार करे…..
ये लोग हमारे बच्चों को जहर दे रहे है……
यह पढ़ाया जा रहा है आपके बच्चों को…..

indian eaducation act के द्वारा तो कहा से ये धरती करोडो देश भक्तो को पैदा करेगी।
==========================
वैदिक काल में विशिष्ट अतिथियों के लिए गोमांस का परोसा जाना सम्मान सूचक माना जाता था।
(कक्षा 6-प्राचीन भारत, पृष्ठ 35, लेखिका- रोमिला थापर)
महमूद गजनवी ने मूर्तियों को तोड़ा और इससे वह धार्मिक नेता बन गया।
…(कक्षा 7-मध्यकालीन भारत, पृष्ठ 28)
1857 का स्वतंत्रता संग्राम एक सैनिक विद्रोह था।
(कक्षा 8-सामाजिक विज्ञान भाग-1, आधुनिक भारत, पृष्ठ 166 , लेखक-अर्जुन देव, इन्दिरा अर्जुन देव)
महावीर 12 वर्षों तक जहां-तहां भटकते रहे। 12 वर्ष की लम्बी यात्रा के दौरान उन्होंने एक बार भी अपने
वस्त्र नहीं बदले। 42 वर्ष की आयु में उन्होंने वस्त्र का एकदम त्याग कर दिया।
(कक्षा 11, प्राचीन भारत, पृष्ठ 101, लेखक-रामशरण शर्मा)
तीर्थंकर, जो अधिकतर मध्य गंगा के मैदान में उत्पन्न हुए और जिन्होंने बिहार में निर्वाण प्राप्त
किया, की मिथक कथा जैन सम्प्रदाय की प्राचीनता सिद्ध करने के लिए गढ़ ली गई।
(कक्षा 11-प्राचीन भारत, पृष्ठ 101, लेखक-रामशरण शर्मा)
जाटों ने, गरीब हो या धनी, जागीरदार हो या किसान, हिन्दू हो या मुसलमान, सबको लूटा।
(कक्षा 12 – आधुनिक भारत, पृष्ठ 18-19, विपिन चन्द्र)
रणजीत सिंह अपने सिंहासन से उतरकर मुसलमान फकीरों के पैरों की धूल अपनी लम्बी सफेद
दाढ़ी से झाड़ता था। (कक्षा 12 -पृष्ठ 20, विपिन चन्द्र)
आर्य समाज ने हिन्दुओं, मुसलमानों, पारसियों, सिखों और ईसाइयों के बीच पनप रही राष्ट्रीय
एकता को भंग करने का प्रयास किया।
(कक्षा 12-आधुनिक भारत, पृष्ठ 183, लेखक-विपिन चन्द्र)
तिलक, अरविन्द घोष, विपिनचन्द्र पाल और लाला लाजपतराय जैसे नेता उग्रवादी तथा आतंकवादी थे
(कक्षा 12-आधुनिक भारत-विपिन चन्द्र, पृष्ठ 208)
400 वर्ष ईसा पूर्व अयोध्या का कोई अस्तित्व नहीं था। महाभारत और रामायण कल्पित महाकाव्य हैं।
(कक्षा 11, पृष्ठ 107, मध्यकालीन इतिहास, आर.एस. शर्मा)
वीर पृथ्वीराज चौहान मैदान छोड़कर भाग गया और गद्दार जयचन्द गोरी के खिलाफ युद्धभूमि में लड़ते हुए मारा गया। (कक्षा 11, मध्यकालीन भारत, प्रो. सतीश चन्द्र)
औरंगजेब जिन्दा पीर थे।(मध्यकालीन भारत, पृष्ठ 316, लेखक- प्रो. सतीश चन्द्र)
राम और कृष्ण का कोई अस्तित्व ही नहीं था। वे केवल काल्पनिक कहानियां हैं।
(मध्यकालीन भारत, पृष्ठ 245, रोमिला थापर)

इस रोमिला थापर महीला का बहिष्कार करे.....
ये लोग हमारे बच्चों को जहर दे रहे है......
यह पढ़ाया जा रहा है आपके बच्चों को.....

indian eaducation act के द्वारा तो कहा से ये धरती करोडो देश भक्तो को पैदा करेगी।
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वैदिक काल में विशिष्ट अतिथियों के लिए गोमांस का परोसा जाना सम्मान सूचक माना जाता था।
(कक्षा 6-प्राचीन भारत, पृष्ठ 35, लेखिका- रोमिला थापर)
महमूद गजनवी ने मूर्तियों को तोड़ा और इससे वह धार्मिक नेता बन गया।
...(कक्षा 7-मध्यकालीन भारत, पृष्ठ 28)
1857 का स्वतंत्रता संग्राम एक सैनिक विद्रोह था।
(कक्षा 8-सामाजिक विज्ञान भाग-1, आधुनिक भारत, पृष्ठ 166 , लेखक-अर्जुन देव, इन्दिरा अर्जुन देव)
महावीर 12 वर्षों तक जहां-तहां भटकते रहे। 12 वर्ष की लम्बी यात्रा के दौरान उन्होंने एक बार भी अपने
वस्त्र नहीं बदले। 42 वर्ष की आयु में उन्होंने वस्त्र का एकदम त्याग कर दिया।
(कक्षा 11, प्राचीन भारत, पृष्ठ 101, लेखक-रामशरण शर्मा)
तीर्थंकर, जो अधिकतर मध्य गंगा के मैदान में उत्पन्न हुए और जिन्होंने बिहार में निर्वाण प्राप्त
किया, की मिथक कथा जैन सम्प्रदाय की प्राचीनता सिद्ध करने के लिए गढ़ ली गई।
(कक्षा 11-प्राचीन भारत, पृष्ठ 101, लेखक-रामशरण शर्मा)
जाटों ने, गरीब हो या धनी, जागीरदार हो या किसान, हिन्दू हो या मुसलमान, सबको लूटा।
(कक्षा 12 - आधुनिक भारत, पृष्ठ 18-19, विपिन चन्द्र)
रणजीत सिंह अपने सिंहासन से उतरकर मुसलमान फकीरों के पैरों की धूल अपनी लम्बी सफेद
दाढ़ी से झाड़ता था। (कक्षा 12 -पृष्ठ 20, विपिन चन्द्र)
आर्य समाज ने हिन्दुओं, मुसलमानों, पारसियों, सिखों और ईसाइयों के बीच पनप रही राष्ट्रीय
एकता को भंग करने का प्रयास किया।
(कक्षा 12-आधुनिक भारत, पृष्ठ 183, लेखक-विपिन चन्द्र)
तिलक, अरविन्द घोष, विपिनचन्द्र पाल और लाला लाजपतराय जैसे नेता उग्रवादी तथा आतंकवादी थे
(कक्षा 12-आधुनिक भारत-विपिन चन्द्र, पृष्ठ 208)
400 वर्ष ईसा पूर्व अयोध्या का कोई अस्तित्व नहीं था। महाभारत और रामायण कल्पित महाकाव्य हैं।
(कक्षा 11, पृष्ठ 107, मध्यकालीन इतिहास, आर.एस. शर्मा)
वीर पृथ्वीराज चौहान मैदान छोड़कर भाग गया और गद्दार जयचन्द गोरी के खिलाफ युद्धभूमि में लड़ते हुए मारा गया। (कक्षा 11, मध्यकालीन भारत, प्रो. सतीश चन्द्र)
औरंगजेब जिन्दा पीर थे।(मध्यकालीन भारत, पृष्ठ 316, लेखक- प्रो. सतीश चन्द्र)
राम और कृष्ण का कोई अस्तित्व ही नहीं था। वे केवल काल्पनिक कहानियां हैं।
(मध्यकालीन भारत, पृष्ठ 245, रोमिला थापर)
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नवरात्रि


इमाम हुसैन के तीखे बोल, “राक्षसों के मनोरंजन का साधन है गरबा”

खेड़ा गांव के इमाम हुसैन ने कहा कि गरबा कोई धार्मिक त्यौहार नहीं है बल्कि राक्षसों के मनोरंजन का साधन है।

2011 में गुजरात के तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी को धार्मिक टोपी पहनने को देने वाले सूफी इमाम मेहदी हुसैन ने कहा है कि गरबा को राक्षसों ने अपने कब्जे में ले लिया है।

क्या कहना चाहोगे मित्रों इस सेक्युलर के बारे मे..??

इमाम हुसैन के तीखे बोल, "राक्षसों के मनोरंजन का साधन है गरबा"

खेड़ा गांव के इमाम हुसैन ने कहा कि गरबा कोई धार्मिक त्यौहार नहीं है बल्कि राक्षसों के मनोरंजन का साधन है।

2011 में गुजरात के तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी को धार्मिक टोपी पहनने को देने वाले सूफी इमाम मेहदी हुसैन ने कहा है कि गरबा को राक्षसों ने अपने कब्जे में ले लिया है।

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