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“Transfer of Power Agreement” को जाने और दुसरो को बताएं


हरामजादों की साजीश

“Transfer of Power Agreement” को जाने और दुसरो को बताएं
14 अगस्त 1947 कि रात को आजादी नहीं आई बल्कि ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर का एग्रीमेंट हुआ था

सत्ता के हस्तांतरण की संधि ( Transfer of Power Agreement ) यानि भारत के आज़ादी की संधि | ये इतनी खतरनाक संधि है की अगर आप अंग्रेजों द्वारा सन 1615 से लेकर 1857 तक किये

गए सभी 565 संधियों या कहें साजिस को जोड़ देंगे तो उस से भी ज्यादा खतरनाक संधि है ये | 14 अगस्त 1947 की रात को जो कुछ हुआ है वो आजादी नहीं आई बल्कि ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर का

एग्रीमेंट हुआ था पंडित नेहरु और लोर्ड माउन्ट बेटन के बीच में | Transfer of Power और Independence ये दो अलग चीजे है | स्वतंत्रता और सत्ता का हस्तांतरण ये दो अलग चीजे है |

और सत्ता का हस्तांतरण कैसे होता है ? आप देखते होंगे क़ि एक पार्टी की सरकार है, वो चुनाव में हार जाये, दूसरी पार्टी की सरकार आती है तो दूसरी पार्टी का प्रधानमन्त्री जब शपथ ग्रहण करता है,

तो वो शपथ ग्रहण करने के तुरंत बाद एक रजिस्टर पर हस्ताक्षर करता है, आप लोगों में से बहुतों ने देखा होगा, तो जिस रजिस्टर पर आने वाला प्रधानमन्त्री हस्ताक्षर करता है, उसी रजिस्टर को

ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर की बुक कहते है और उस पर हस्ताक्षर के बाद पुराना प्रधानमन्त्री नए प्रधानमन्त्री को सत्ता सौंप देता है | और पुराना प्रधानमंत्री निकल कर बाहर चला जाता है | यही

नाटक हुआ था 14 अगस्त 1947 की रात को 12 बजे | लार्ड माउन्ट बेटन ने अपनी सत्ता पंडित नेहरु के हाथ में सौंपी थी, और हमने कह दिया कि स्वराज्य आ गया | कैसा स्वराज्य और काहे का

स्वराज्य ? अंग्रेजो के लिए स्वराज्य का मतलब क्या था ? और हमारे लिए स्वराज्य का मतलब क्या था ? ये भी समझ लीजिये | अंग्रेज कहते थे क़ि हमने

स्वराज्य दिया, माने अंग्रेजों ने अपना राज तुमको सौंपा है ताकि तुम लोग कुछ दिन इसे चला लो जब जरुरत पड़ेगी तो हम दुबारा आ जायेंगे |

ये अंग्रेजो का interpretation (व्याख्या) था | और हिन्दुस्तानी लोगों की व्याख्या क्या थी कि हमने स्वराज्य ले लिया | और इस संधि के अनुसार ही भारत के दो टुकड़े किये गए और भारत और

पाकिस्तान नामक दो Dominion States बनाये गए हैं | ये Dominion State का अर्थ हिंदी में होता है एक बड़े राज्य के अधीन एक छोटा राज्य, ये शाब्दिक अर्थ है और भारत के सन्दर्भ में इसका

असल अर्थ भी यही है | अंग्रेजी में इसका एक अर्थ है “One of the self-governing nations in the British Commonwealth” और दूसरा “Dominance or power through legal authority “|

Dominion State और Independent Nation में जमीन आसमान का अंतर होता है | मतलब सीधा है क़ि हम (भारत और पाकिस्तान) आज भी अंग्रेजों के अधीन/मातहत ही हैं | दुःख तो ये होता

है की उस समय के सत्ता के लालची लोगों ने बिना सोचे समझे या आप कह सकते हैं क़ि पुरे होशो हवास में इस संधि को मान लिया या कहें जानबूझ कर ये सब स्वीकार कर लिया | और ये जो

तथाकथित आज़ादी आयी, इसका कानून अंग्रेजों के संसद में बनाया गया और इसका नाम रखा गया Indian Independence Act यानि भारत के स्वतंत्रता का कानून | और ऐसे धोखाधड़ी से अगर इस

देश की आजादी आई हो तो वो आजादी, आजादी है कहाँ ? और इसीलिए गाँधी जी (महात्मा गाँधी) 14 अगस्त 1947 की रात को दिल्ली में नहीं आये थे | वो नोआखाली में थे | और कोंग्रेस के बड़े नेता

गाँधी जी को बुलाने के लिए गए थे कि बापू चलिए आप | गाँधी जी ने मना कर दिया था | क्यों ? गाँधी जी कहते थे कि मै मानता नहीं कि कोई आजादी आ रही है | और गाँधी जी ने स्पस्ट कह दिया

था कि ये आजादी नहीं आ रही है सत्ता के हस्तांतरण का समझौता हो रहा है | और गाँधी जी ने नोआखाली से प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी |

उस प्रेस स्टेटमेंट के पहले ही वाक्य में गाँधी जी ने ये कहा कि मै हिन्दुस्तान के उन करोडो लोगों को ये सन्देश देना चाहता हु कि ये जो तथाकथित आजादी (So Called Freedom) आ रही है ये मै नहीं

लाया | ये सत्ता के लालची लोग सत्ता के हस्तांतरण के चक्कर में फंस कर लाये है | मै मानता नहीं कि इस देश में कोई आजादी आई है | और 14 अगस्त 1947 की रात को गाँधी जी दिल्ली में नहीं थे

नोआखाली में थे | माने भारत की राजनीति का सबसे बड़ा पुरोधा जिसने हिन्दुस्तान की आज़ादी की लड़ाई की नीव रखी हो वो आदमी 14 अगस्त 1947 की रात को दिल्ली में मौजूद नहीं था | क्यों ?

इसका अर्थ है कि गाँधी जी इससे सहमत नहीं थे | (नोआखाली के दंगे तो एक बहाना था असल बात तो ये सत्ता का हस्तांतरण ही था) और 14 अगस्त 1947 की रात को जो कुछ हुआ है वो आजादी

नहीं आई …. ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर का एग्रीमेंट लागू हुआ था पंडित नेहरु और अंग्रेजी सरकार के बीच में | अब शर्तों की बात करता हूँ , सब का जिक्र करना तो संभव नहीं है लेकिन कुछ महत्वपूर्ण

शर्तों की जिक्र जरूर करूंगा जिसे एक आम भारतीय जानता है और उनसे परिचित है
इस संधि की शर्तों के मुताबिक हम आज भी अंग्रेजों के अधीन/मातहत ही हैं | वो एक शब्द आप सब

सुनते हैं न Commonwealth Nations | अभी कुछ दिन पहले दिल्ली में Commonwealth Game हुए थे आप सब को याद होगा ही और उसी में बहुत बड़ा घोटाला भी हुआ है | ये Commonwealth

का मतलब होता है समान सम्पति | किसकी समान सम्पति ? ब्रिटेन की रानी की समान सम्पति | आप जानते हैं ब्रिटेन की महारानी हमारे भारत की भी महारानी है और वो आज भी भारत की

नागरिक है और हमारे जैसे 71 देशों की महारानी है वो | Commonwealth में 71 देश है और इन सभी 71 देशों में जाने के लिए ब्रिटेन की महारानी को वीजा की जरूरत नहीं होती है क्योंकि वो अपने

ही देश में जा रही है लेकिन भारत के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को ब्रिटेन में जाने के लिए वीजा की जरूरत होती है क्योंकि वो दुसरे देश में जा रहे हैं | मतलब इसका निकाले तो ये हुआ कि या तो

ब्रिटेन की महारानी भारत की नागरिक है या फिर भारत आज भी ब्रिटेन का उपनिवेश है इसलिए ब्रिटेन की रानी को पासपोर्ट और वीजा की जरूरत नहीं होती है अगर दोनों बाते सही है तो 15 अगस्त

1947 को हमारी आज़ादी की बात कही जाती है वो झूठ है | और Commonwealth Nations में हमारी एंट्री जो है वो एक Dominion State के रूप में है न क़ि Independent Nation के रूप में| इस

देश में प्रोटोकोल है क़ि जब भी नए राष्ट्रपति बनेंगे तो 21 तोपों की सलामी दी जाएगी उसके अलावा किसी को भी नहीं | लेकिन ब्रिटेन की महारानी आती है तो उनको भी 21 तोपों की सलामी दी जाती

है, इसका क्या मतलब है? और पिछली बार ब्रिटेन की महारानी यहाँ आयी थी तो एक निमंत्रण पत्र छपा था और उस निमंत्रण पत्र में ऊपर जो नाम था वो ब्रिटेन की महारानी का था और उसके नीचे

भारत के राष्ट्रपति का नाम था मतलब हमारे देश का राष्ट्रपति देश का प्रथम नागरिक नहीं है | ये है राजनितिक गुलामी, हम कैसे माने क़ि हम एक स्वतंत्र देश में रह रहे हैं | एक शब्द आप सुनते होंगे

High Commission ये अंग्रेजों का एक गुलाम देश दुसरे गुलाम देश के यहाँ खोलता है लेकिन इसे Embassy नहीं कहा जाता | एक मानसिक गुलामी का उदहारण भी देखिये ……. हमारे यहाँ के

अख़बारों में आप देखते होंगे क़ि कैसे शब्द प्रयोग होते हैं – (ब्रिटेन की महारानी नहीं) महारानी एलिज़ाबेथ, (ब्रिटेन के प्रिन्स चार्ल्स नहीं) प्रिन्स चार्ल्स , (ब्रिटेन की प्रिंसेस नहीं) प्रिंसेस डैना (अब

तो वो हैं नहीं), अब तो एक और प्रिन्स विलियम भी आ गए है |
भारत का नाम INDIA रहेगा और सारी दुनिया में भारत का नाम इंडिया प्रचारित किया जायेगा और

सारे सरकारी दस्तावेजों में इसे इंडिया के ही नाम से संबोधित किया जायेगा | हमारे और आपके लिए ये भारत है लेकिन दस्तावेजों में ये इंडिया है | संविधान के प्रस्तावना में ये लिखा गया है

“India that is Bharat ” जब क़ि होना ये चाहिए था “Bharat that was India ” लेकिन दुर्भाग्य इस देश का क़ि ये भारत के जगह इंडिया हो गया | ये इसी संधि के शर्तों में से एक है | अब हम

भारत के लोग जो इंडिया कहते हैं वो कहीं से भी भारत नहीं है | कुछ दिन पहले मैं एक लेख पढ़ रहा था अब किसका था याद नहीं आ रहा है उसमे उस व्यक्ति ने बताया था कि इंडिया का नाम बदल के

भारत कर दिया जाये तो इस देश में आश्चर्यजनक बदलाव आ जायेगा और ये विश्व की बड़ी शक्ति बन जायेगा अब उस शख्स के बात में कितनी सच्चाई है मैं नहीं जानता, लेकिन भारत जब तक

भारत था तब तक तो दुनिया में सबसे आगे था और ये जब से इंडिया हुआ है तब से पीछे, पीछे और पीछे ही होता जा रहा है |

भारत के संसद में वन्दे मातरम नहीं गया जायेगा अगले 50 वर्षों तक यानि 1997 तक | 1997 में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने इस मुद्दे को संसद में उठाया तब जाकर पहली बार इस तथाकथित

आजाद देश की संसद में वन्देमातरम गाया गया | 50 वर्षों तक नहीं गाया गया क्योंकि ये भी इसी संधि की शर्तों में से एक है | और वन्देमातरम को ले के मुसलमानों में जो भ्रम फैलाया गया वो

अंग्रेजों के दिशानिर्देश पर ही हुआ था | इस गीत में कुछ भी ऐसा आपत्तिजनक नहीं है जो मुसलमानों के दिल को ठेस पहुचाये | आपत्तिजनक तो जन,गन,मन में है जिसमे एक शख्स को

भारत भाग्यविधाता यानि भारत के हर व्यक्ति का भगवान बताया गया है या कहें भगवान से भी बढ़कर |

इस संधि की शर्तों के अनुसार सुभाष चन्द्र बोस को जिन्दा या मुर्दा अंग्रेजों के हवाले करना था | यही वजह रही क़ि सुभाष चन्द्र बोस अपने देश के लिए लापता रहे और कहाँ मर खप गए ये आज तक

किसी को मालूम नहीं है | समय समय पर कई अफवाहें फैली लेकिन सुभाष चन्द्र बोस का पता नहीं लगा और न ही किसी ने उनको ढूँढने में रूचि दिखाई | मतलब भारत का एक महान स्वतंत्रता

सेनानी अपने ही देश के लिए बेगाना हो गया | सुभाष चन्द्र बोस ने आजाद हिंद फौज बनाई थी ये तो आप सब लोगों को मालूम होगा ही लेकिन महत्वपूर्ण बात ये है क़ि ये 1942 में बनाया गया था और

उसी समय द्वितीय विश्वयुद्ध चल रहा था और सुभाष चन्द्र बोस ने इस काम में जर्मन और जापानी लोगों से मदद ली थी जो कि अंग्रेजो के दुश्मन थे और इस आजाद हिंद फौज ने अंग्रेजों को

सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाया था | और जर्मनी के हिटलर और इंग्लैंड के एटली और चर्चिल के व्यक्तिगत विवादों की वजह से ये द्वितीय विश्वयुद्ध हुआ था और दोनों देश एक दुसरे के कट्टर

दुश्मन थे | एक दुश्मन देश की मदद से सुभाष चन्द्र बोस ने अंग्रेजों के नाकों चने चबवा दिए थे | एक तो अंग्रेज उधर विश्वयुद्ध में लगे थे दूसरी तरफ उन्हें भारत में भी सुभाष चन्द्र बोस की वजह से

परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था | इसलिए वे सुभाष चन्द्र बोस के दुश्मन थे |
इस संधि की शर्तों के अनुसार भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, अशफाकुल्लाह, रामप्रसाद विस्मिल

जैसे लोग आतंकवादी थे और यही हमारे syllabus में पढाया जाता था बहुत दिनों तक | और अभी एक महीने पहले तक ICSE बोर्ड के किताबों में भगत सिंह को आतंकवादी ही बताया जा रहा था, वो

तो भला हो कुछ लोगों का जिन्होंने अदालत में एक केस किया और अदालत ने इसे हटाने का आदेश दिया है (ये समाचार मैंने इन्टरनेट पर ही अभी कुछ दिन पहले देखा था) |

आप भारत के सभी बड़े रेलवे स्टेशन पर एक किताब की दुकान देखते होंगे “व्हीलर बुक स्टोर” वो इसी संधि की शर्तों के अनुसार है | ये व्हीलर कौन था ? ये व्हीलर सबसे बड़ा अत्याचारी था | इसने

इस देश क़ि हजारों माँ, बहन और बेटियों के साथ बलात्कार किया था | इसने किसानों पर सबसे ज्यादा गोलियां चलवाई थी | 1857 की क्रांति के बाद कानपुर के नजदीक बिठुर में व्हीलर और नील

नामक दो अंग्रजों ने यहाँ के सभी 24 हजार लोगों को जान से मरवा दिया था चाहे वो गोदी का बच्चा हो या मरणासन्न हालत में पड़ा कोई बुड्ढा | इस व्हीलर के नाम से इंग्लैंड में एक एजेंसी शुरू हुई थी

और वही भारत में आ गयी | भारत आजाद हुआ तो ये ख़त्म होना चाहिए था, नहीं तो कम से कम नाम भी बदल देते | लेकिन वो नहीं बदला गया क्योंकि ये इस संधि में है |

इस संधि की शर्तों के अनुसार अंग्रेज देश छोड़ के चले जायेगे लेकिन इस देश में कोई भी कानून चाहे वो किसी क्षेत्र में हो नहीं बदला जायेगा | इसलिए आज भी इस देश में 34735 कानून वैसे के वैसे

चल रहे हैं जैसे अंग्रेजों के समय चलता था | Indian Police Act, Indian Civil Services Act (अब इसका नाम है Indian Civil Administrative Act), Indian Penal Code (Ireland में भी IPC

चलता है और Ireland में जहाँ “I” का मतलब Irish है वही भारत के IPC में “I” का मतलब Indian है बाकि सब के सब कंटेंट एक ही है, कौमा और फुल स्टॉप का भी अंतर नहीं है) Indian

Citizenship Act, Indian Advocates Act, Indian Education Act, Land Acquisition Act, Criminal Procedure Act, Indian Evidence Act, Indian

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आर्यों के मूल ग्रन्थ :-


आर्यों के मूल ग्रन्थ :-

(१) वेद { जिनको श्रुति भी कहते हैं }
ऋग्वेद ( ज्ञान ) = १०५७९ मंत्र
यजुर्वेद ( कर्म ) = १९७५ मंत्र
सामवेद ( उपासना ) = १८७५ मंत्र
अथर्ववेद ( विज्ञान ) = ५९७० मंत्र

कुल मंत्र = २०४१६

वेदों के अर्थों को समझाने के लिए जिन ग्रन्थों का प्रवचन वैदिक ऋषियों ने किया है, उनको शाखा कहते हैं ।
कुल शाखाएँ = ११२७
वर्तमान में में उपलब्ध शाखाएँ = १२

उपलब्ध शाखाओं के नाम :-

{१} ऋग्वेद की उपलब्ध शाखाएँ :——-
(क) शाकल (ख) वाष्कल

{२} यजुर्वेद की उपलब्ध शाखाएँ :——
(क) काण्व (ख) मध्यन्दिनी (ग) तैत्तिरीय संहिता (घ) काठक (ङ) मैत्रायणी

{३} सामवेद की उपलब्ध शाखाएँ :——-
(क) जैमिनीया (ख) राणायसीम

{४} अथर्ववेद की उपलब्ध शाखाएँ :——-
(क) शौनक (ख) पिप्पलाद

वेदों में से कुछ लघु वेद भी ऋषियों ने बनाए थे जिनको उपवेद कहते हैं , भिन्न भिन्न विषयों को समझाने के लिए :—
चार उपवेद हैं :———
{१} ऋग्वेद ——————- आयुर्वेद
{२} यजुर्वेद——————- धनुर्वेद
{३} सामवेद —————— गन्धर्ववेद
{४} अथर्ववेद —————– अर्थवेद

चारों वेदों में से विज्ञान के उत्कृष्ट स्वरूप को समझाने के लिए वेदों में से ब्राह्मण ग्रन्थ भी बनाए हैं :—–
{१} ऋग्वेद का ब्राह्मण ————- ऐतरेय
{२} यजुर्वेद का ब्राह्मण ————- शतपथ
{३} सामवेद का ब्राह्मण ———— सामविधान
{४} अथर्ववेद का ब्राह्मण ———– गोपथ

[ इन्हीं ब्राह्मणों को पुराण भी कहते हैं । ]

{ ये भागवत, शिव, देवी, गणेश, सूर्य, आदि १८ नकली और मिथ्या ग्रन्थ होते हैं ये गप्पों की पोथियाँ हैं इनमें अनेकों असम्भव गपोड़े पंडों ने ऋषियों के नाम से लिखे हैं । इनका त्याग करें }

६ वैदिक शास्त्र :—-
(क) न्याय (ख) वैशेषिक
(ग) साङ्ख्य (घ) योग
(ङ) मिमांसा (च) वेदांत

{ ये छः शस्त्र तर्क प्रणाली को प्रस्तुत करते हैं, इनको पढ़ने से तर्क के द्वारा मनुष्य धर्म और अधर्म के भेद को जान सकता है }

६ वेदाङ्ग वे हैं जिनको पढ़कर मनुष्य वेदों का अर्थ करने में समर्थ होता है :———–
(क) शिक्षा
(ख) कल्प
(ग) व्याकरण
(घ) निरुक्त
(ङ) छंद
(च) ज्योतिष

वेदांत शास्त्र को ब्रह्मसूत्र भी कहते हैं और इसको समझने के लिए ११ मुख्य उपनिषदें हैं :-
(१) ईश
(२) कठ
(३) केन
(४) प्रश्न
(५) मुण्डक
(६) माण्डुक्य
(७) ऐतरेय
(८) तैत्तिरीय
(९) छांदोग्य
(१०) बृहदारण्यक
(११) श्वेताश्वतर

ऐतिह्या ( इतिहास ग्रन्थ ) :-
(१) योगवशिष्ठ महारामायण
(२) वेदव्यास कृत महाभारतम्

समृति ग्रन्थ :-
(१) मनुस्मृति ( विशुद्ध — कर्म पर आधारित न कि जन्म पर )
(२) विधुर नीति
(३) चाणक्य नीति

अगले लेख में ये भी बताऊँगा कि ये सारे ग्रन्थ कहाँ से मिलेंगे , क्योंकि ये आर्यवर्त राष्ट्र की धरोहर हैं ।

आर्यों लौट चलो वेदों की ओर ॥
ओ३म् तत् सत् ॥

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THE 2300 YR OLD TEMPLE WHICH HAS NOW BE RENAMED AS TAKHT E SULEIMAN BY MUSLIM MAJORITY OF KASHMIR.


Kashmiri Pandits's photo.
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Kashmiri Pandits added 2 new photos.

THE 2300 YR OLD TEMPLE WHICH HAS NOW BE RENAMED AS TAKHT E SULEIMAN BY MUSLIM MAJORITY OF KASHMIR.

The Shankaracharya Temple (Kashmiri: शंकराचार्य मंदिर (Devanagari), شنکراچاریہ مندر (Nastaleeq)), also known as the Jyesteshwara temple or Pas-Pahar by Buddhists or Takht-e-Sulaiman (Throne of Solomon) by Muslims, is situated in the Zabarwan Mountain in Srinagar, Kashmir. It is dedicated to Lord Shiva. The temple is on the summit of the same name at a height of 1,000 feet (300 m) above the plain and overlooks the city of Srinagar.

HISTORY
The temple dates back to 200 BC, although the present structure probably dates back to the 9th century AD. It was visited by Adi Shankara and has ever since been associated with him; this is how the temple got the name Shankaracharya. It is also regarded as sacred by Buddhists. The Shiv ling was placed inside during the Sikh period in nineteenth century and it became an active Hindu temple when regular services were conducted. Some historians report that the temple was actually a buddhist temple during buddhist era which was then changed into Hindu site of worship by Adi sankaracharya. Persians and Jews call it Bagh-i- sulaiman or the Garden of King Solomon. Persian inscriptions are also found inside the temple.

According to Pandit Anand Koul (1924) the temple was originally built by “Sandiman” (unknown) who, according to Koul, reigned in Kashmir from 2629 to 2564 BC. It was repaired by King Gopaditya (426–365 BC) and by King Lalitaditya (697–734).[2] Its roof was also repaired by Zain-ul-Abidin after an earthquake; later, its dome was repaired by Sheikh Ghulam Mohiuddin, a Sikh governor (1841–1846).

The earliest historical reference to the hill comes from Kalhana. He called the mountain Gopadri. Kalhana also says that King Gopaditya granted the land at the foot of the hill to the Brahmins that had come from the “Araya versh.” The land grant was called “GOPA AGRAHARAS”. This area is now called Gupkar. Kalhana also mentions another village in the vicinity of the hill. It so happens that the King Gopaditya housed some of the Brahmins who had eaten Garlic to a village next door. Kalhana names this village as Bhuksiravatika. That would be Buch’vore today. Kalhana also mentions that King Gopaditya built the temple on the top of the hill as a shrine to Jyesthesvara (Shiva Jyestharuda) around 371 BC.[3] Abul Fazal also mentions that King Gopaditya built the temple. Although many experts believe that the current temple was probably built later but most of them agree that the base of the structure does seem to be very old. It is said that Lalitaditya Muktapida (724-726 AD) of Karakote dynasty did repairs to the temple. According to Srivara Budsah (Zain-ul-Abideen 1420-1470 AD) did major repairs to the temple. He also put the Kalash (spire) and the roof of the structure which had fallen due to an earthquake.The third time the temple was repaired was by the Muslim Governor, Sheikh Mohi-ud-Din (1842 to 1845) during the Sikh rule of Kashmir. The name of the hill was changed from Gopadri to Takhate-Suleiman some time during the period of Sultans. We have no idea why the hill was given that name, as there is no historical evidence whatsoever that King Solomon would have ever come close to our valley. The fact that the mountains in the North West of Pakistan are also called Kohi-Suleiman seems to point to the fact that many mountains were named after Suleiman by Muslim kings. The name Takhate-Suleiman however seems to have persisted during the Mughal, Afghan, Sikh and Dogra periods. In fact if you look at any publication during these periods they all refer to the hill by that name. The name Shankaracharaya for the temple on the hill (not the hill mind you) first appears when Governor Sheikh Mohi-ud-Din made the repairs in the mid-19th century. It had apparently not been used as a temple for centuries. At that time the temple was consecrated as a Shankaracharaya temple and a Shiv Lingam was placed in the temple. It is only during the Sikh period that people started to have prayer services at the temple and the Shravan Poornima started being celebrated at the temple. The current theory that Adi Shankaracharaya came and meditated at this temple is not bourne by any historical sources. Shankaracharaya would have done so in the 8th century and Kalhana would have definitely mentioned it. So the name Shankaracharaya for the hill has as much historical validity as Takhate-Suleiman. The Dogra King Gulab Singh (1846-1857 AD) constructed the steps to the hill from Durga Naag temple side. The Maharaja of Mysore came to Kashmir in 1925 and he made the electrical installtions at the temple. In 1961 Shankaracharaya of Dwarkapeetham put the statue of Adi Shankaracharaya in the temple. In 1974 the Government of J&K constructed the road that goes to the TV antenna near the top of the hill.

ARCHITECTURE
The Jyoteshware temple rests on a solid rock. A 20-foot tall octagonal base supports a square building on top. The terrace around the square temple is reached by a stone staircase enclosed between two walls. A doorway on the opposite side of the staircase leads to the interior, which is a small and dark chamber, circular in plan. The ceiling is supported by four octagonal columns, which surround a Basin containing a Lingam encircled by a snake.

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Bali land of Thousands of temples


Pura Pulaki  a Hindu Temple in Bali highly influenced from Chinese architecture

Bali land of Thousands of temples

Pura Pulaki a Hindu Temple in Bali highly influenced from Chinese architecture

Bali land of Thousands of temples

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औवेसी


अभी आप की अदालत का एक द्श्य देखा जिसमें असद्दुदीन औवेसी से एक लड़की ने सवाल पूछा कि “ज्यादातर मुस्लिम ही आतन्कवादी क्यों होते हैं?”

इस पर असद औवेसी ने जवाब दिया कि…
“गांधी जी की हत्या किसने की” ?

” इन्दिरा गांधी की हत्या किसने की”?

इस तरह इस जवाब से असद औवेसी
ने गोडसे और सतवन्त सिंह, बेअन्त सिंह को मुस्लिम आतन्कवादियो के बराबर बताने की कोशिश की…

लेकिन यहां सोचने वाली बात ये है कि गांधी को मारने वाले गोडसे और इन्दिरा को मारने वाले सतवन्त सिंह, बेअन्त सिंह का कभी बेवजह निर्दोष लोगों की हत्या करने का कोई पूर्व रिकार्ड नहीं था, इसलिए इन्हें आतन्कवादी कैसे ठहराया जा सकता है?…

जबकि इतिहास और वर्तमान गवाह है कि चाहे मुस्लिम हमलावर हो या जिहादी सन्गठन , इनका धर्म के नाम पर काफिरो को मारने रिकार्ड रहा है , तो फिर किसे अपने गिरेबान में झाकने की जरूरत है?

वैसे भी दुनिया की सबसे बड़ी साम्प्रदायिक कौम के लोग जब टीवी चैनलों पर सेकुलरिज़्म की बात करते हैं,तो ऐसा लगता हैं कि मानों कोई वेश्या लोगों को सदाचार पर उपदेश दे रही हो…

अभी आप की अदालत का एक द्श्य देखा जिसमें असद्दुदीन औवेसी से एक लड़की ने सवाल पूछा कि "ज्यादातर मुस्लिम ही आतन्कवादी क्यों होते हैं?" 

इस पर असद औवेसी ने जवाब दिया कि...
"गांधी जी की हत्या किसने की" ?

" इन्दिरा गांधी की हत्या किसने की"?

इस तरह इस जवाब से असद औवेसी 
ने गोडसे और सतवन्त सिंह, बेअन्त सिंह को मुस्लिम आतन्कवादियो के बराबर बताने की कोशिश की... 

लेकिन यहां सोचने वाली बात ये है कि गांधी को मारने वाले गोडसे और इन्दिरा को मारने वाले सतवन्त सिंह, बेअन्त सिंह का कभी बेवजह निर्दोष लोगों की हत्या करने का कोई पूर्व रिकार्ड नहीं था, इसलिए इन्हें आतन्कवादी कैसे ठहराया जा सकता है?...

जबकि इतिहास और वर्तमान गवाह है कि चाहे मुस्लिम हमलावर हो या जिहादी सन्गठन , इनका धर्म के नाम पर काफिरो को मारने रिकार्ड रहा है , तो फिर किसे अपने गिरेबान में झाकने की जरूरत है?

वैसे भी दुनिया की सबसे बड़ी साम्प्रदायिक कौम के लोग जब टीवी चैनलों पर सेकुलरिज़्म की बात करते हैं,तो ऐसा लगता हैं कि मानों कोई वेश्या लोगों को सदाचार पर उपदेश दे रही हो...
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NDTV की असलियत …………………………!!!


NDTV की असलियत …………………………!!!

रंडीवाजी ..हबाला ..घोटाला….सेक्स …देशद्रोह …घोटाले का खुलासा करने बाले

आयकर अधिकारी का उत्पीडन …एक लंबा सिलसिला NDTV के साथ …….

हिन्दुस्तानी मीडिया चैनलों में एक चैनल NDTV भी है जिसके हिंदी और अंग्रेजी वर्जन को भी देश की जनता समाचारों के लिये देखती है ..पंकज पचौरी ,रवीश कुमार ,प्रणव राय ,वर्खा दत्त .श्रीनिवासन जैन जैसे पत्रकारो से आप सब परचित ही होंगे ..इन सबके बीच आपने ”अभिसार शर्मा ”को भी सुना और देखा होगा |

कई वर्ष से इस चैनल के पत्रकारों के बारे में अंदर की जानकारियाँ चर्चा का बिषय थी ..पिछले समय में चर्चा थी की NDTV ने लगभग पाँच हजार करोड़ का घोटाला किया है जिसमे इस चैनल के पत्रकार अभिसार शर्मा की पत्नी ( आयकर विभाग में कार्यरत ) ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए इस घोटाले को अंजाम देने में भरपूर मदद की है ………….इस घोटाले के तार भारत सरकार में कई मंत्री पदों पर रह चुके पी चिदंबरम से भी जुड़े है …खैर आते है एक आयकर अधिकारी संजय श्रीवास्तव के मुद्दे पर जिन्होंने इस चैनल के घोटाले का पर्दाफास तो किया लेकिन बो कांग्रेस सरकार तथा इसा चैनल की नीच हरकतों का शिकार भी बने उनके उत्पीडन की इतनी इन्त्हायें तोड़ी गयी की साजिश करके उनको पागल घोषित करने का असफल प्रयास किया गया ….!

समय मिलने पर आज आयकर अधिकारी संजय श्रीवास्तव द्वारा अपने बकील को दिए गए बयान का पूरा वीडियो देखता तो कड़ी दर कड़ी एक से एक खौफनाक बातो का सिलसिलेवार खुलासा हुआ !

…आयकर अधिकारी संजय श्रीवास्तव के नीचे दिए बयान में आपको पता चलेगा की मीडिया के पत्रकार ..कांग्रेस सरकार में रहे नेता किस हद तक की साजिशे रच सकते है …कैसे किसी की बीबी किसी नेता और अधिकारी की सेक्स पार्टनर बन सकती है … जिसका पति समाचार चैनल पे नैतिकता की बड़ी बड़ी बाते करता है ..कैसे पत्रकार की बीबी भ्रस्टाचार के पैसो से योरप की यात्रा करती है और हीरो की खरीद के साथ नोएडा में उसका पति अपनी इनकम से जादा का फ़्लैट अरेंज कर लेता है …कौन किस रुम में रुका था ..कौन फर्जी रूप से किसकी बीबी बनके किसके साथ राते गुजार रही थी …….बहुत कुछ है आयकर अधिकारी के बयान में ..अगर आप इस वीडियो को पूरा और ध्यान से देखेगे तभी सारी बात समझने में आसानी रहेगी !!
नोट ….इस पोस्ट के कमेन्ट बाक्स में भी इस चैनल के कुकर्मो और साजिशों के बारे में कुछ तथ्य और मीडिया लिंक देने का प्रयास रखेगा …जो मित्र इस विषय में जानकारी के इच्छुक हो बो कमेन्ट बाक्स में दिए लिंक का भी संज्ञान ले सकते है !

https://www.youtube.com/watch?v=UIEHcitqivk

– पवन अवस्थी

IT Commissioner SK Srivastava’s Battle against Thwarted Probe into Hawala & Tax Evasion Scam by NDTV – Madhu Purnima Kishwar
YOUTUBE.COM
Posted in आओ संस्कृत सीखे.

ईसाईयों को इंग्लिश आती है


ईसाईयों को इंग्लिश आती है
वो बाइबल पढ़ लेते है,
उधर मुस्लिमों को उर्दू आती है
वो कुरान पढ़ लेते है,
सिखों को गुरबानी का पता है
वो श्री गुरु ग्रन्थ पढ़ लेते है,
हिन्दुओ को संस्कृत आती नहीं
वो ना वेद पढ़ पाते है ना
उपनिषद।
इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा
किसी धर्म का?

Posted in ज्योतिष - Astrology

सुखी परिवार के लिए कुछ लाभदायक उपाय :-


सुखी परिवार के लिए कुछ लाभदायक उपाय :-
– सदा स्वस्थ बने रहने के लिये रात्रि को पानी किसी लोटे या गिलास में सुबह उठ कर पीने के लिये रख दें। उसे पी कर बर्तन को उल्टा रख दें तथा दिन में भी पानी पीने के बाद बर्तन (गिलास आदि) को उल्टा रखने से यकृत सम्बन्धी परेशानियां नहीं होती तथा व्यक्ति सदैव स्वस्थ बना रहता है।
– हृदय विकार, रक्तचाप के लिए एकमुखी या सोलहमुखी रूद्राक्ष श्रेष्ठ होता है। इच्छित रूद्राक्ष को लेकर श्रावण माह में किसी प्रदोष व्रत के दिन, अथवा सोमवार के दिन, गंगाजल से स्नान करा कर शिवजी पर चढाएं, फिर सम्भव हो तो रूद्राभिषेक करें या शिवजी पर “ॐ नम: शिवाय´´ बोलते हुए दूध से अभिषेक कराएं। इस प्रकार अभिमंत्रित रूद्राक्ष को काले डोरे में डाल कर गले में पहनें।
– घर में नित्य घी का दीपक जलाना चाहिए। दीपक जलाते समय लौ पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर हो या दीपक के मध्य में (फूलदार बाती) बाती लगाना शुभ फल देने वाला है।
– रात्रि के समय शयन कक्ष में कपूर जलाने से बीमारियां, दु:स्वपन नहीं आते, पितृ दोष का नाश होता है एवं घर में शांति बनी रहती है।
– पूर्णिमा के दिन चांदनी में खीर बनाएं। ठंडी होने पर चन्द्रमा और अपने पितरों को भोग लगाएं। कुछ खीर काले कुत्तों को दे दें। वर्ष भर पूर्णिमा पर ऐसा करते रहने से गृह क्लेश, बीमारी तथा व्यापार हानि से मुक्ति मिलती है।
– रोग मुक्ति के लिए प्रतिदिन अपने भोजन का चौथाई हिस्सा गाय को तथा चौथाई हिस्सा कुत्ते को खिलाएं।
– घर में कोई बीमार हो जाए तो उस रोगी को शहद में चन्दन मिला कर चटाएं।
– पुत्र बीमार हो तो कन्याओं को हलवा खिलाएं। पीपल के पेड़ की लकड़ी सिरहाने रखें।
– पत्नी बीमार हो तो गोदान करें। जिस घर में स्त्रीवर्ग को निरन्तर स्वास्थ्य की पीड़ाएँ रहती हो, उस घर में तुलसी का पौधा लगाकर उसकी श्रद्धापूर्वक देखशल करने से रोग पीड़ाएँ समाप्त होती है।
– मंदिर में गुप्त दान करें।
– सदैव पूर्व या दक्षिण दिषा की ओर सिर रख कर ही सोना चाहिए। दक्षिण दिशा की ओर सिर कर के सोने वाले व्यक्ति में चुम्बकीय बल रेखाएं पैर से सिर की ओर जाती हैं, जो अधिक से अधिक रक्त खींच कर सिर की ओर लायेंगी, जिससे व्यक्ति विभिन्न रोंगो से मुक्त रहता है और अच्छी निद्रा प्राप्त करता है।
– अगर परिवार में कोई परिवार में कोई व्यक्ति बीमार है तथा लगातार औषधि सेवन के पश्चात् भी स्वास्थ्य लाभ नहीं हो रहा है, तो किसी भी रविवार से आरम्भ करके लगातार 3 दिन तक गेहूं के आटे का पेड़ा तथा एक लोटा पानी व्यक्ति के सिर के ऊपर से उबार कर जल को पौधे में डाल दें तथा पेड़ा गाय को खिला दें। अवश्य ही इन 3 दिनों के अन्दर व्यक्ति स्वस्थ महसूस करने लगेगा। अगर तीन दिन की अवधि में रोगी ठीक हो जाता है, तो भी प्रयोग को पूरा करना है, बीच में रोकना नहीं चाहिए।
– किसी तालाब, कूप या समुद्र में जहां मछलियाँ हों, उनको शुक्रवार से शुक्रवार तक आटे की गोलियां, शक्कर मिला कर, चुगावें।
– थोड़ा सा गंगाजल नहाने वाली बाल्टी में डाल कर नहाएं।
– गाय के गोबर का कण्डा जलाये।
– हरिद्रा कल्प – काले रंग की हल्दी की गांठ सही होना जरुरी हें, यह गांठ ऊपर से काली और अंदर से कत्थई रंग की होती हें | इसकी जड़ से कपूर के जैसी सुगंध आती हें | काली हल्दी के पोंधो पर गुछेदार पीले रंग का पुष्प खिलता है.
यह काली हल्दी दिखने में जितनी कुरूप, अनाकर्षक और अनुपयोगी हें उतनी ही अधिक मूल्यवान दुर्लभ और दिव्य गुण युक्त होती हें | उसे घर लाकर उसे पूजा के स्थान पर रख ले, काली हल्दी जहां भी रहती हें वहा सहज ही श्री समृद्धि का आगमन होने लगता हें | इस दिव्य काली हल्दी को कोई नए वस्त्र में चावल और चांदी के सिक्के या टुकड़े के साथ रख कर उसका पंचोपचार पूजन कर उस कपडे को गांठ बांध ले और उसे जहां आप पैसे रखते है वहां किसी बक्से में रख दे तो अवश्य आपको आश्चर्य जनक अर्थलाभ प्राप्त होगा, कृपया लाभ उठाये.

सुखी परिवार के लिए कुछ लाभदायक उपाय :-
- सदा स्वस्थ बने रहने के लिये रात्रि को पानी किसी लोटे या गिलास में सुबह उठ कर पीने के लिये रख दें। उसे पी कर बर्तन को उल्टा रख दें तथा दिन में भी पानी पीने के बाद बर्तन (गिलास आदि) को उल्टा रखने से यकृत सम्बन्धी परेशानियां नहीं होती तथा व्यक्ति सदैव स्वस्थ बना रहता है।
- हृदय विकार, रक्तचाप के लिए एकमुखी या सोलहमुखी रूद्राक्ष श्रेष्ठ होता है। इच्छित रूद्राक्ष को लेकर श्रावण माह में किसी प्रदोष व्रत के दिन, अथवा सोमवार के दिन, गंगाजल से स्नान करा कर शिवजी पर चढाएं, फिर सम्भव हो तो रूद्राभिषेक करें या शिवजी पर “ॐ नम: शिवाय´´ बोलते हुए दूध से अभिषेक कराएं। इस प्रकार अभिमंत्रित रूद्राक्ष को काले डोरे में डाल कर गले में पहनें।
- घर में नित्य घी का दीपक जलाना चाहिए। दीपक जलाते समय लौ पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर हो या दीपक के मध्य में (फूलदार बाती) बाती लगाना शुभ फल देने वाला है।
- रात्रि के समय शयन कक्ष में कपूर जलाने से बीमारियां, दु:स्वपन नहीं आते, पितृ दोष का नाश होता है एवं घर में शांति बनी रहती है।
- पूर्णिमा के दिन चांदनी में खीर बनाएं। ठंडी होने पर चन्द्रमा और अपने पितरों को भोग लगाएं। कुछ खीर काले कुत्तों को दे दें। वर्ष भर पूर्णिमा पर ऐसा करते रहने से गृह क्लेश, बीमारी तथा व्यापार हानि से मुक्ति मिलती है।
- रोग मुक्ति के लिए प्रतिदिन अपने भोजन का चौथाई हिस्सा गाय को तथा चौथाई हिस्सा कुत्ते को खिलाएं।
- घर में कोई बीमार हो जाए तो उस रोगी को शहद में चन्दन मिला कर चटाएं।
- पुत्र बीमार हो तो कन्याओं को हलवा खिलाएं। पीपल के पेड़ की लकड़ी सिरहाने रखें।
- पत्नी बीमार हो तो गोदान करें। जिस घर में स्त्रीवर्ग को निरन्तर स्वास्थ्य की पीड़ाएँ रहती हो, उस घर में तुलसी का पौधा लगाकर उसकी श्रद्धापूर्वक देखशल करने से रोग पीड़ाएँ समाप्त होती है।
- मंदिर में गुप्त दान करें।
- सदैव पूर्व या दक्षिण दिषा की ओर सिर रख कर ही सोना चाहिए। दक्षिण दिशा की ओर सिर कर के सोने वाले व्यक्ति में चुम्बकीय बल रेखाएं पैर से सिर की ओर जाती हैं, जो अधिक से अधिक रक्त खींच कर सिर की ओर लायेंगी, जिससे व्यक्ति विभिन्न रोंगो से मुक्त रहता है और अच्छी निद्रा प्राप्त करता है।
- अगर परिवार में कोई परिवार में कोई व्यक्ति बीमार है तथा लगातार औषधि सेवन के पश्चात् भी स्वास्थ्य लाभ नहीं हो रहा है, तो किसी भी रविवार से आरम्भ करके लगातार 3 दिन तक गेहूं के आटे का पेड़ा तथा एक लोटा पानी व्यक्ति के सिर के ऊपर से उबार कर जल को पौधे में डाल दें तथा पेड़ा गाय को खिला दें। अवश्य ही इन 3 दिनों के अन्दर व्यक्ति स्वस्थ महसूस करने लगेगा। अगर तीन दिन की अवधि में रोगी ठीक हो जाता है, तो भी प्रयोग को पूरा करना है, बीच में रोकना नहीं चाहिए।
- किसी तालाब, कूप या समुद्र में जहां मछलियाँ हों, उनको शुक्रवार से शुक्रवार तक आटे की गोलियां, शक्कर मिला कर, चुगावें। 
- थोड़ा सा गंगाजल नहाने वाली बाल्टी में डाल कर नहाएं।
- गाय के गोबर का कण्डा जलाये। 
- हरिद्रा कल्प - काले रंग की हल्दी की गांठ सही होना जरुरी हें, यह गांठ ऊपर से काली और अंदर से कत्थई रंग की होती हें | इसकी जड़ से कपूर के जैसी सुगंध आती हें | काली हल्दी के पोंधो पर गुछेदार पीले रंग का पुष्प खिलता है.
यह काली हल्दी दिखने में जितनी कुरूप, अनाकर्षक और अनुपयोगी हें उतनी ही अधिक मूल्यवान दुर्लभ और दिव्य गुण युक्त होती हें | उसे घर लाकर उसे पूजा के स्थान पर रख ले, काली हल्दी जहां भी रहती हें वहा सहज ही श्री समृद्धि का आगमन होने लगता हें | इस दिव्य काली हल्दी को कोई नए वस्त्र में चावल और चांदी के सिक्के या टुकड़े के साथ रख कर उसका पंचोपचार पूजन कर उस कपडे को गांठ बांध ले और उसे जहां आप पैसे रखते है वहां किसी बक्से में रख दे तो अवश्य आपको आश्चर्य जनक अर्थलाभ प्राप्त होगा, कृपया लाभ उठाये.
Posted in PM Narendra Modi

और अंत में मोदीजी पर विश्वाश करो. उन्होंने जो जो कहा था. वो सब कुछ पूरा करेंगे..


दिखावे पे ना जाओ……
अपनी अकल लगाओ……….
जब से मोदीजी का मुसलमानों पर बयान आया है. मेरे कुछ कट्टर हिन्दू भाई और हिंदुस्तान के सभी नासमझ कट्टर हिन्दू नाराज है. मोदीजी के खिलाफ बकबक कर रहे है.उनके लिए ये करारा जवाब. पूरा पढ़े और ज्यादा से ज्यादा शेयर कर के सभी हिन्दुओ तक पहुचाये. खुद समझे, सभी हिन्दुओ को भी समझाए……
मोदीजी के मुस्लिमों पर दिए बयान पर रंडी रोना मचाने वाले अधिकतर वही हिन्दु है. जो पिछले 67 साल से चिरनिद्रा में लीन थे और आज ही इनका सारा राष्ट्रवाद, हिंदुत्ववाद और देशप्रेम एक दम फट के बाहर निकल पड़ा है………
सभी भुल चुके हैं कि वाराणसी के इस शेर और माँ भारती के इस सपुत्र ने सबसे पहले महादेव की पुजा कर दुनिया को संकेत दे दिये कि अब किसका सिक्का चलने वाला है??…..
गीता भेंट कर विश्व को यह भी संदेश पहुचा दिया कि हिंदुस्तान के पास देने के लिए गीता से बडा कुछ भी नही और सांकेतिक भाषा मे यह भी समझा दिया कि आक्रमण की भाषा हमे भी आती है…….
पर कुछ लोगों को मुसलमानों का देशभक्त कहलाना हजम नही हुआ. मित्रों, उनमें से मैं भी हूँ. लेकिन क्या हमारे देश में कोई एपीजे अब्दुल कलाम की राष्टभक्ति पर किसी को सन्देह है???…..
मुख्तार अब्बास नकवी और शाहनवाज हुसैन जैसे मुस्लमान भी हैं, जो गंगा आरती और आचमन करते हैं, कांवड़ लेने जाते हैं और माथे पर तिलक भी लगाते हैं……
और सलमान खान भी है. जिनके घर गणपति विराजे जाते हैं, जिनकी पूजा सलमान खुद सभी विधि विधान से करते हैं. खुद अपने हाथों से सलमान परिवार के साथ बप्पा की आरती करते हैं……
यहाँ मोदीजी ने स्पष्ट हिन्दुस्तान के मुस्लिमों की ही बात की है. हिन्दुस्तान में रहकर पोर्कीस्तान अपना मानने वाले मुस्लिमों की नहीं……
मुसलमान को भी अब फैसला करना पडेगा की वह किसके साथ है???…..
और जबसे मोदीजी का बयान आया है. तब से लांडे लांडो की बजा रहे है. आज तक आपने कभी मुसलमानों को आजम खान, औवेसी के खिलाफ बोलते सूना था??…
नहीं ना? आज मोदीजी के बयान के बाद मुसलमान उन लांडो (आजम खान, औवेसी) के खिलाफ खुलेआम बोल रहें है.. यह आपको नजर नहीं आता??…..
अगर अब भी आप मोदीजी को गलत कहते हो तो आप निकालो तलवार और अपने आस पास रहने वाले लांडो को सजा देना शुरू कर दो. है दम?? या खाली पिली कमी निकालने ही आता है……
और अंत में मोदीजी पर विश्वाश करो. उन्होंने जो जो कहा था. वो सब कुछ पूरा करेंगे…..
श्री राम मन्दिर भी बनेगा….
गौ हत्या भी बंद होगी….
Uniform Civil Code भी लागु होगा…..
ये इंडिया पहले भारत और फिर महाशक्ति भारत भी बनेगा…
ये मैं पुरे विश्वाश के साथ कहता हूँ. अभी गौ हत्या पर कानून बनाना संभव नहीं है. क्योकिं लोकसभा में तो बहुमत है. पर राज्य सभा में नहीं है और ये सभी सेक्युलर दल राज्यसभा में ऐसे किसी भी बिल को पास नहीं होने देगें…..
मोदी जी को काम अधूरा छोड़ने की आदत नहीं है. इसलिए अच्छे दिन के लिए हिन्दुओं थोड़ा इन्तजार करो……
हमारे इस राष्ट्रवादी पेज से भी जुड़े…..
https://www.facebook.com/WeWantToBeNarendraModi

दिखावे पे ना जाओ......
अपनी अकल लगाओ..........
जब से मोदीजी का मुसलमानों पर बयान आया है. मेरे कुछ कट्टर हिन्दू भाई और हिंदुस्तान के सभी नासमझ कट्टर हिन्दू नाराज है. मोदीजी के खिलाफ बकबक कर रहे है.उनके लिए ये करारा जवाब. पूरा पढ़े और ज्यादा से ज्यादा शेयर कर के सभी हिन्दुओ तक पहुचाये. खुद समझे, सभी हिन्दुओ को भी समझाए......
मोदीजी के मुस्लिमों पर दिए बयान पर रंडी रोना मचाने वाले अधिकतर वही हिन्दु है. जो पिछले 67 साल से चिरनिद्रा में लीन थे और आज ही इनका सारा राष्ट्रवाद, हिंदुत्ववाद और देशप्रेम एक दम फट के बाहर निकल पड़ा है.........
सभी भुल चुके हैं कि वाराणसी के इस शेर और माँ भारती के इस सपुत्र ने सबसे पहले महादेव की पुजा कर दुनिया को संकेत दे दिये कि अब किसका सिक्का चलने वाला है??.....
गीता भेंट कर विश्व को यह भी संदेश पहुचा दिया कि हिंदुस्तान के पास देने के लिए गीता से बडा कुछ भी नही और सांकेतिक भाषा मे यह भी समझा दिया कि आक्रमण की भाषा हमे भी आती है.......
पर कुछ लोगों को मुसलमानों का देशभक्त कहलाना हजम नही हुआ. मित्रों, उनमें से मैं भी हूँ. लेकिन क्या हमारे देश में कोई एपीजे अब्दुल कलाम की राष्टभक्ति पर किसी को सन्देह है???.....
मुख्तार अब्बास नकवी और शाहनवाज हुसैन जैसे मुस्लमान भी हैं, जो गंगा आरती और आचमन करते हैं, कांवड़ लेने जाते हैं और माथे पर तिलक भी लगाते हैं......
और सलमान खान भी है. जिनके घर गणपति विराजे जाते हैं, जिनकी पूजा सलमान खुद सभी विधि विधान से करते हैं. खुद अपने हाथों से सलमान परिवार के साथ बप्पा की आरती करते हैं......
यहाँ मोदीजी ने स्पष्ट हिन्दुस्तान के मुस्लिमों की ही बात की है. हिन्दुस्तान में रहकर पोर्कीस्तान अपना मानने वाले मुस्लिमों की नहीं......
मुसलमान को भी अब फैसला करना पडेगा की वह किसके साथ है???.....
और जबसे मोदीजी का बयान आया है. तब से लांडे लांडो की बजा रहे है. आज तक आपने कभी मुसलमानों को आजम खान, औवेसी के खिलाफ बोलते सूना था??...
नहीं ना? आज मोदीजी के बयान के बाद मुसलमान उन लांडो (आजम खान, औवेसी) के खिलाफ खुलेआम बोल रहें है.. यह आपको नजर नहीं आता??.....
अगर अब भी आप मोदीजी को गलत कहते हो तो आप निकालो तलवार और अपने आस पास रहने वाले लांडो को सजा देना शुरू कर दो. है दम?? या खाली पिली कमी निकालने ही आता है......
और अंत में मोदीजी पर विश्वाश करो. उन्होंने जो जो कहा था. वो सब कुछ पूरा करेंगे.....
श्री राम मन्दिर भी बनेगा....
गौ हत्या भी बंद होगी....
Uniform Civil Code भी लागु होगा.....
ये इंडिया पहले भारत और फिर महाशक्ति भारत भी बनेगा...
ये मैं पुरे विश्वाश के साथ कहता हूँ. अभी गौ हत्या पर कानून बनाना संभव नहीं है. क्योकिं लोकसभा में तो बहुमत है. पर राज्य सभा में नहीं है और ये सभी सेक्युलर दल राज्यसभा में ऐसे किसी भी बिल को पास नहीं होने देगें.....
मोदी जी को काम अधूरा छोड़ने की आदत नहीं है. इसलिए अच्छे दिन के लिए हिन्दुओं थोड़ा इन्तजार करो......
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हिंदू धर्म के पवित्र ग्रन्थों को दो भागों में बाँटा गया है


हिंदू धर्म के पवित्र ग्रन्थों को दो भागों में बाँटा गया है- श्रुति और स्मृति। श्रुति हिन्दू धर्म के सर्वोच्च ग्रन्थ हैं, जो पूर्णत: अपरिवर्तनीय हैं, अर्थात् किसी भी युग में इनमे कोई बदलाव नही किया जा सकता। स्मृति ग्रन्थों मे देश-कालानुसार बदलाव हो सकता है। श्रुति के अन्तर्गत वेद : ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद ब्रह्म सूत्र व उपनिषद् आते हैं। वेद श्रुति इसलिये कहे जाते हैं क्योंकि हिन्दुओं का मानना है कि इन वेदों को परमात्मा ने ऋषियों को सुनाया था, जब वे गहरे ध्यान में थे। वेदों को श्रवण परम्परा के अनुसार गुरू द्वारा शिष्यों को दिया जाता था। हर वेद में चार भाग हैं- संहिता — मन्त्र भाग, ब्राह्मण-ग्रन्थ — गद्य भाग, जिसमें कर्मकाण्ड समझाये गये हैं, आरण्यक — इनमें अन्य गूढ बातें समझायी गयी हैं, उपनिषद् — इनमें ब्रह्म, आत्मा और इनके सम्बन्ध के बारे में विवेचना की गयी है। अगर श्रुति और स्मृति में कोई विवाद होता है तो श्रुति ही मान्य होगी। श्रुति को छोड़कर अन्य सभी हिन्दू धर्मग्रन्थ स्मृति कहे जाते हैं, क्योंकि इनमें वो कहानियाँ हैं जिनको लोगों ने पीढ़ी दर पीढ़ी याद किया और बाद में लिखा। सभी स्मृति ग्रन्थ वेदों की प्रशंसा करते हैं। इनको वेदों से निचला स्तर प्राप्त है, पर ये ज़्यादा आसान हैं और अधिकांश हिन्दुओं द्वारा पढ़े जाते हैं (बहुत ही कम हिन्दू वेद पढ़े होते हैं)। प्रमुख स्मृतिग्रन्थ हैं:- इतिहास–रामायण और महाभारत, भगवद गीता,पुराण–(18), मनुस्मृति, धर्मशास्त्र और धर्मसूत्र, आगम शास्त्र। भारतीय दर्शन के ६ प्रमुख अंग हैं- साँख्य, योग, न्याय, वैशेषिक, मीमांसा और वेदान्त।