Posted in छोटी कहानिया - ९०० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

किसी गाँव की पहाड़ी पर एक विशाल तथा भव्य मंदिर था।

विजय मधोक भारतीय

 

किसी गाँव की पहाड़ी पर एक विशाल तथा भव्य मंदिर था।
उसके प्रधान पुजारी की मृत्यु के पश्चात मंदिर के प्रबंधक ने नए पुजारी की नियुक्ति के लिए घोषणा कराई और शर्त रखी कि जो कल सुबह मंदिर में आकर पूजा विषयक ज्ञान में अपने को श्रेष्ठ सिद्ध करेगा, उसे पुजारी रखा जाएगा।

चूंकि मंदिर मे बहुत श्रद्धालु आते थे और चड़ावा भी बहुत आता था सो यह घोषणा सुनकर अनेक पुजारी सुबह मंदिर के लिए चल पड़े।

मंदिर पहाड़ी पर था और पहुंचने का रास्ता कांटों व पत्थरों से भरा हुआ अत्यंत ही दुर्गम था। मार्ग की इन जटिलताओं से किसी प्रकार बचकर ये सभी मंदिर पहुंच गए।

प्रबंधक ने सभी से कुछ प्रश्न और मंत्र पूछे।
जब परीक्षा समाप्त होने को थी, तभी एक युवा पुजारी वहां आया।
वह पसीने से लथपथ था और उसके कपड़े भी फट गए थे।

प्रबंधक ने देरी का कारण पूछा तो वह बोला –
घर से तो बहुत जल्दी चला था, किंतु मंदिर के रास्ते में बहुत कांटे व पत्थर देख उन्हें हटाने लगा, जिससे कि श्रद्धालुओं और यत्रियों को कष्ट न हो …
बस इसी में देर हो गई।

प्रबंधक ने उससे पूजा विधि और कुछ मंत्र पूछे तो उसने बता दिए।
प्रबंधक ने निर्णायक स्वर मे कहा –
” तुम ही आज से इस मंदिर के पुजारी हो ”

यह सुनकर अन्य पुजारी बोले – पूजा विधि और मंत्रों का हमें भी ज्ञान हैं … फिर इसे ही क्यों पुजारी बनाया जा रहा है ?
इस में ऐसा कौन सा विशेष गुण है जो हम सब में नहीं है ?

प्रबंधक ने कहा –
ज्ञान और अनुभव व्यक्तिगत होते हैं, जबकि मनुष्यता सदैव परोन्मुखी होती है।

अपने स्वार्थ की बात तो पशु भी जानते हैं, किंतु सच्चा मनुष्य वह है, जो दूसरों के लिए अपना सुख छोड़ दे।
युवा पुजारी प्रतियोगिता मे भाग लेने अवश्य आया था किन्तु उसका उदेश्य परमार्थी था।

मेरा अपना अनुभव है कि जीवन मे किया कोई भी परमार्थ व्यर्थ नहीं जाता , देर सवेर उसका प्रतिफल अवश्य ही मिलता है।

!! ॐ नमः शिवाय !!

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Hello, Harshad Ashodiya I have 12,000 Hindi, Gujarati ebooks

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