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स्वर्ण मंदिर प्रबंधन द्वारा बाढ़ प्रभावित कश्मीर के लिए विशेष सहायता।


स्वर्ण मंदिर प्रबंधन द्वारा बाढ़ प्रभावित कश्मीर के लिए विशेष सहायता।

हर पैकेट में देसी घी के चार बड़े परांठे, आलू की सब्जी और अचार, पहले दिन 25 हज़ार और उसके बाद 50 हज़ार पैकेट रोज।।

भेजने का भाड़ा 27 रु. प्रतिकिलो भी अपनी जेब से।

यदि इसका एक प्रतिशत काम भी किसी शाहरुख़, सलमान या किसी मुस्लिम संस्था ने किया होता तो पूरी मीडिया व पूरा शांतिदूत समुदाय रात- दिन उनका गुणगान करते न थकता।

इतना सब कुछ तब- जब कि इसी कश्मीर में से 1990 में हिन्दू पंडितों के साथ- साथ सिखों को भी जबरन मार- काट कर भगा दिया गया था व उनका धर्म परिवर्तन करवाया गया था इतना पीछे न जाएँ तो हाल ही के महीने में सहारनपुर में सिखों और गुरूद्वारे पर
हमला किया था इसी जेहादी कौम ने।

शायद किसी को गर्व हो या न हो पर मुझे बेहद गर्व होता है अपने सिख समुदाय पर दुनिया में जब भी कहीं विपदा आती है तो सबसे पहले सिख ही अपने दल- बल के साथ पहुँच जाते हैं और अपने पुरे तन- मन- धन से लग जाते हैं वहाँ के लोगों की सेवा करने में बिना उनसे उनका ‘धर्म’ पूछे, अभी कुछ दिन पहले और आज भी जब ईराक में यजीदी समुदाय के लोगों को मारा जा रहा है व उनकी औरतों को अपने मजहब का हवाला देकर उनकी इज्जत लूटकर उनको बाजार में ‪#‎शांतिदूतों‬ द्वारा बेचा जा रहा है ऐसे में भी सबसे पहले सिख ही अपने दल- बल व साजों- सामान के साथ ईराक पहुंचे थे और आज भी यजीदी समुदाय लोगों की सेवा जी- जान से कर रहे हैं।

मगर इतना कुछ करने के बाद भी सिखों की मानवता को कोई मीडिया कवर नहीं करता ख़ैर नहीं करता तो न करे हमारे सिख किसी ‘नेम- फेम’ के मोहताज नहीं है वे बस अपना काम कर रहे हैं और शायद इसी वजह से आज सिखों का नाम दुनिया भर में बेहद ही सम्मान के साथ लिया जाता है और दुनिया उनको स्नेह देती है।

शांतिदूतों को समझना चाहिए कि हमेशा ही मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है।

वाहे गुरु जी दा खालसा वाहे गुरु जी दी फ़तेह। ‪#‎sikhi‬ ‪#‎proud‬

आप मित्रों का क्या कहना है??

स्वर्ण मंदिर प्रबंधन द्वारा बाढ़ प्रभावित कश्मीर के लिए विशेष सहायता। हर पैकेट में देसी घी के चार बड़े परांठे, आलू की सब्जी और अचार, पहले दिन 25 हज़ार और उसके बाद 50 हज़ार पैकेट रोज।। भेजने का भाड़ा 27 रु. प्रतिकिलो भी अपनी जेब से। यदि इसका एक प्रतिशत काम भी किसी शाहरुख़, सलमान या किसी मुस्लिम संस्था ने किया होता तो पूरी मीडिया व पूरा शांतिदूत समुदाय रात- दिन उनका गुणगान करते न थकता। इतना सब कुछ तब- जब कि इसी कश्मीर में से 1990 में हिन्दू पंडितों के साथ- साथ सिखों को भी जबरन मार- काट कर भगा दिया गया था व उनका धर्म परिवर्तन करवाया गया था इतना पीछे न जाएँ तो हाल ही के महीने में सहारनपुर में सिखों और गुरूद्वारे पर हमला किया था इसी जेहादी कौम ने। शायद किसी को गर्व हो या न हो पर मुझे बेहद गर्व होता है अपने सिख समुदाय पर दुनिया में जब भी कहीं विपदा आती है तो सबसे पहले सिख ही अपने दल- बल के साथ पहुँच जाते हैं और अपने पुरे तन- मन- धन से लग जाते हैं वहाँ के लोगों की सेवा करने में बिना उनसे उनका 'धर्म' पूछे, अभी कुछ दिन पहले और आज भी जब ईराक में यजीदी समुदाय के लोगों को मारा जा रहा है व उनकी औरतों को अपने मजहब का हवाला देकर उनकी इज्जत लूटकर उनको बाजार में #शांतिदूतों द्वारा बेचा जा रहा है ऐसे में भी सबसे पहले सिख ही अपने दल- बल व साजों- सामान के साथ ईराक पहुंचे थे और आज भी यजीदी समुदाय लोगों की सेवा जी- जान से कर रहे हैं। मगर इतना कुछ करने के बाद भी सिखों की मानवता को कोई मीडिया कवर नहीं करता ख़ैर नहीं करता तो न करे हमारे सिख किसी 'नेम- फेम' के मोहताज नहीं है वे बस अपना काम कर रहे हैं और शायद इसी वजह से आज सिखों का नाम दुनिया भर में बेहद ही सम्मान के साथ लिया जाता है और दुनिया उनको स्नेह देती है। शांतिदूतों को समझना चाहिए कि हमेशा ही मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है। वाहे गुरु जी दा खालसा वाहे गुरु जी दी फ़तेह। #sikhi #proud आप मित्रों का क्या कहना है??
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Hello, Harshad Ashodiya I have 12,000 Hindi, Gujarati ebooks

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