Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

क्यों हुआ भारत देश गुलाम !


क्यों हुआ भारत देश गुलाम !
मुगल बादशाह जब भारत आया था तो उसने भारत की सीमा में घुसकर अपना घोडा खेत में चरने को छोड दिया तो दूसरे खेत के किसानों ने देखा पर उस घोडे को भगाया नहीं । मुगल छुपकर देख रहा था । उसने जाकर दूसरे खेत वाले से पूछा भाई उस खेत में घोडा चर रहा है उसे भगाते क्यों नहीं । किसान ने कहा वो मेरा खेत नहींं है । मुगल बादशाह ने समझ लिया । जब ईर्षया के कारण किसान दूसरे के खेत में चर रहे घोडे से खेत को नहीं बचा सकता उस देश के राजा एक दूसरे को क्या बचायेंगे । वास्तव में आपस में ईर्ष्या, एक दूसरे को नीचा दिखाना, आपसी फूट, और अपने ही हितेशी लोगों को दुशमन समझना, सच्चे संतों का अपमान यही कारण है विदेशियों की गुलामी को झेलना पडा ।

सावधान कहीं आज भी वो ही फूट डालो शासन करो की निती तो नहीं चल रही है । हिन्दू हिन्दू को जात पात, धर्म भेद के नाम पर , ऊँच नीच के नाम पर बाँट दिया है । आज हम भी कहीं ये तो नहीें कर रहे शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती, स्वामी केशवा नंद जी महाराज, साध्वी प्रज्ञा, स्वामी नित्या नंद जी महाराज, संत आशारामजी बापू आज इनको देखकर हम चुप हैं । क्योंकि अपने पर आयेगी तब देख लेंगे पर बचना उस दिन से भाईयों क्योंकी ये चक्र घुमकर कल आपका और हमारे साथ भी घटित हो सकता है । फिर क्या करोगे । इसलिए मिलकर इन झूठे षडयंत्रों का सामना करो ।

संत बचाओ ! गौ माता बचाओ ! संस्कृति बचाओ ! देश बचाओ !!
सावधान भाईयों जागो नहीं तो देर ना हो जाये…..

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किसी गाँव की पहाड़ी पर एक विशाल तथा भव्य मंदिर था।


विजय मधोक भारतीय

 

किसी गाँव की पहाड़ी पर एक विशाल तथा भव्य मंदिर था।
उसके प्रधान पुजारी की मृत्यु के पश्चात मंदिर के प्रबंधक ने नए पुजारी की नियुक्ति के लिए घोषणा कराई और शर्त रखी कि जो कल सुबह मंदिर में आकर पूजा विषयक ज्ञान में अपने को श्रेष्ठ सिद्ध करेगा, उसे पुजारी रखा जाएगा।

चूंकि मंदिर मे बहुत श्रद्धालु आते थे और चड़ावा भी बहुत आता था सो यह घोषणा सुनकर अनेक पुजारी सुबह मंदिर के लिए चल पड़े।

मंदिर पहाड़ी पर था और पहुंचने का रास्ता कांटों व पत्थरों से भरा हुआ अत्यंत ही दुर्गम था। मार्ग की इन जटिलताओं से किसी प्रकार बचकर ये सभी मंदिर पहुंच गए।

प्रबंधक ने सभी से कुछ प्रश्न और मंत्र पूछे।
जब परीक्षा समाप्त होने को थी, तभी एक युवा पुजारी वहां आया।
वह पसीने से लथपथ था और उसके कपड़े भी फट गए थे।

प्रबंधक ने देरी का कारण पूछा तो वह बोला –
घर से तो बहुत जल्दी चला था, किंतु मंदिर के रास्ते में बहुत कांटे व पत्थर देख उन्हें हटाने लगा, जिससे कि श्रद्धालुओं और यत्रियों को कष्ट न हो …
बस इसी में देर हो गई।

प्रबंधक ने उससे पूजा विधि और कुछ मंत्र पूछे तो उसने बता दिए।
प्रबंधक ने निर्णायक स्वर मे कहा –
” तुम ही आज से इस मंदिर के पुजारी हो ”

यह सुनकर अन्य पुजारी बोले – पूजा विधि और मंत्रों का हमें भी ज्ञान हैं … फिर इसे ही क्यों पुजारी बनाया जा रहा है ?
इस में ऐसा कौन सा विशेष गुण है जो हम सब में नहीं है ?

प्रबंधक ने कहा –
ज्ञान और अनुभव व्यक्तिगत होते हैं, जबकि मनुष्यता सदैव परोन्मुखी होती है।

अपने स्वार्थ की बात तो पशु भी जानते हैं, किंतु सच्चा मनुष्य वह है, जो दूसरों के लिए अपना सुख छोड़ दे।
युवा पुजारी प्रतियोगिता मे भाग लेने अवश्य आया था किन्तु उसका उदेश्य परमार्थी था।

मेरा अपना अनुभव है कि जीवन मे किया कोई भी परमार्थ व्यर्थ नहीं जाता , देर सवेर उसका प्रतिफल अवश्य ही मिलता है।

!! ॐ नमः शिवाय !!

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हिंदू परंपरा में मृतक का दाह संस्का


हिंदू परंपरा में मृतक का दाह संस्कार करते समय उसके मुख पर चंदन रख कर जलाने की परंपरा है। यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। इस परंपरा के पीछे सिर्फ धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक कारण भी निहित है।

चंदन की लकड़ी अत्यंत शीतल मानी जाती है। उसकी ठंडक के कारण लोग चंदन को घिसकर मस्तक पर तिलक लगाते हैं, जिससे मस्तिष्क को ठंडक मिलती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मृतक के मुख पर चंदन की लकड़ी रख कर दाह संस्कार करने से उसकी आत्मा को शांति मिलती है तथा मृतक को स्वर्ग में भी चंदन की शीतलता प्राप्त होती है।

इसका वैज्ञानिक कारण अगर देखा जाए तो मृतक का दाह संस्कार करते समय मांस और हड्डियों के जलने से अत्यंत तीव्र दुर्गंध फैलती है। उसके साथ चंदन की लकड़ी के जलने से दुर्गंध पूरी तरह समाप्त तो नहीं होती लेकिन कुछ कम जरुर हो जाती है।

(2) अस्थि संचय क्यों किया जाता है?
हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में से एक अंतिम संस्कार के समय मृत व्यक्ति की अस्थियों का संचय किया जाता है। इन अस्थियों को पूरे दस दिन सुरक्षित रख ग्यारहवें दिन से इनका श्राद्ध व तर्पण किया जाता है। आखिर किसी की अस्थियों का संचय क्यों किया जाता है? हड्डियों में ऐसी कौन सी विशेष बात होती है जो शरीर के सारे अंग और हिस्से छोड़कर उनका ही संचय किया जाता है?

वास्तव में अस्थि संचय का जितना धार्मिक महत्व है उतना ही वैज्ञानिक भी। हिंदू धर्म में मान्यता है कि मृत्यु के बाद भी व्यक्ति की सूक्ष्म आत्मा उसी स्थान पर रहती है जहां उस व्यक्ति की मृत्यु हुई। आत्मा पूरे तेरह दिन अपने घर में ही रहती है। उसी की तृप्ति और मुक्ति के लिए तेरह दिन तक श्राद्ध औ भोज आदि कार्यक्रम किए जाते हैं। अस्थियों का संख्य प्रतीकात्मक रूप माना गया है। जो व्यक्ति मरा है उसके दैहिक प्रमाण के तौर पर अस्थियों संचय किया जाता है।

अंतिम संस्कार के बाद देह के अंगों में केवल हड्डियों के अवशेष ही बचते हैं। जो लगभग जल चुके होते हैं। इन्हीं को अस्थियां कहते हैं। इन अस्थियों में ही व्यक्ति की आत्मा का वास भी माना जाता है। जलाने के बाद ही चिता से अस्थियां इसलिए ली जाती हैं क्योंकि मृत शरीर में कई तरह के रोगाणु पैदा हो जाते हैं। जिनसे बीमारियों की आशंका होती है। जलने के बाद शरीर के ये सारे जीवाणु और रोगाणु खत्म हो जाते हैं और बची हुई हड्डियां भी जीवाणु मुक्त होती हैं। इनको छूने या इन्हें घर लाने से किसी प्रकार की हानि का डर नहीं होता है। इन अस्थियों को श्राद्ध कर्म आदि क्रियाओं बाद किसी नदी में विसर्जित कर दिया जाता है।

नम्र निवेदन है की “हिंदुत्व- विज्ञान” के अखंड और अनंत समुद्र की इन कुछ बूंदों को शेयर द्वारा अपने अन्य मित्रों तक भी गर्व से पहुचायें … _/|\_

जय हिंदुत्व …

Posted in काश्मीर - Kashmir

स्वर्ण मंदिर प्रबंधन द्वारा बाढ़ प्रभावित कश्मीर के लिए विशेष सहायता।


स्वर्ण मंदिर प्रबंधन द्वारा बाढ़ प्रभावित कश्मीर के लिए विशेष सहायता।

हर पैकेट में देसी घी के चार बड़े परांठे, आलू की सब्जी और अचार, पहले दिन 25 हज़ार और उसके बाद 50 हज़ार पैकेट रोज।।

भेजने का भाड़ा 27 रु. प्रतिकिलो भी अपनी जेब से।

यदि इसका एक प्रतिशत काम भी किसी शाहरुख़, सलमान या किसी मुस्लिम संस्था ने किया होता तो पूरी मीडिया व पूरा शांतिदूत समुदाय रात- दिन उनका गुणगान करते न थकता।

इतना सब कुछ तब- जब कि इसी कश्मीर में से 1990 में हिन्दू पंडितों के साथ- साथ सिखों को भी जबरन मार- काट कर भगा दिया गया था व उनका धर्म परिवर्तन करवाया गया था इतना पीछे न जाएँ तो हाल ही के महीने में सहारनपुर में सिखों और गुरूद्वारे पर
हमला किया था इसी जेहादी कौम ने।

शायद किसी को गर्व हो या न हो पर मुझे बेहद गर्व होता है अपने सिख समुदाय पर दुनिया में जब भी कहीं विपदा आती है तो सबसे पहले सिख ही अपने दल- बल के साथ पहुँच जाते हैं और अपने पुरे तन- मन- धन से लग जाते हैं वहाँ के लोगों की सेवा करने में बिना उनसे उनका ‘धर्म’ पूछे, अभी कुछ दिन पहले और आज भी जब ईराक में यजीदी समुदाय के लोगों को मारा जा रहा है व उनकी औरतों को अपने मजहब का हवाला देकर उनकी इज्जत लूटकर उनको बाजार में ‪#‎शांतिदूतों‬ द्वारा बेचा जा रहा है ऐसे में भी सबसे पहले सिख ही अपने दल- बल व साजों- सामान के साथ ईराक पहुंचे थे और आज भी यजीदी समुदाय लोगों की सेवा जी- जान से कर रहे हैं।

मगर इतना कुछ करने के बाद भी सिखों की मानवता को कोई मीडिया कवर नहीं करता ख़ैर नहीं करता तो न करे हमारे सिख किसी ‘नेम- फेम’ के मोहताज नहीं है वे बस अपना काम कर रहे हैं और शायद इसी वजह से आज सिखों का नाम दुनिया भर में बेहद ही सम्मान के साथ लिया जाता है और दुनिया उनको स्नेह देती है।

शांतिदूतों को समझना चाहिए कि हमेशा ही मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है।

वाहे गुरु जी दा खालसा वाहे गुरु जी दी फ़तेह। ‪#‎sikhi‬ ‪#‎proud‬

आप मित्रों का क्या कहना है??

स्वर्ण मंदिर प्रबंधन द्वारा बाढ़ प्रभावित कश्मीर के लिए विशेष सहायता। हर पैकेट में देसी घी के चार बड़े परांठे, आलू की सब्जी और अचार, पहले दिन 25 हज़ार और उसके बाद 50 हज़ार पैकेट रोज।। भेजने का भाड़ा 27 रु. प्रतिकिलो भी अपनी जेब से। यदि इसका एक प्रतिशत काम भी किसी शाहरुख़, सलमान या किसी मुस्लिम संस्था ने किया होता तो पूरी मीडिया व पूरा शांतिदूत समुदाय रात- दिन उनका गुणगान करते न थकता। इतना सब कुछ तब- जब कि इसी कश्मीर में से 1990 में हिन्दू पंडितों के साथ- साथ सिखों को भी जबरन मार- काट कर भगा दिया गया था व उनका धर्म परिवर्तन करवाया गया था इतना पीछे न जाएँ तो हाल ही के महीने में सहारनपुर में सिखों और गुरूद्वारे पर हमला किया था इसी जेहादी कौम ने। शायद किसी को गर्व हो या न हो पर मुझे बेहद गर्व होता है अपने सिख समुदाय पर दुनिया में जब भी कहीं विपदा आती है तो सबसे पहले सिख ही अपने दल- बल के साथ पहुँच जाते हैं और अपने पुरे तन- मन- धन से लग जाते हैं वहाँ के लोगों की सेवा करने में बिना उनसे उनका 'धर्म' पूछे, अभी कुछ दिन पहले और आज भी जब ईराक में यजीदी समुदाय के लोगों को मारा जा रहा है व उनकी औरतों को अपने मजहब का हवाला देकर उनकी इज्जत लूटकर उनको बाजार में #शांतिदूतों द्वारा बेचा जा रहा है ऐसे में भी सबसे पहले सिख ही अपने दल- बल व साजों- सामान के साथ ईराक पहुंचे थे और आज भी यजीदी समुदाय लोगों की सेवा जी- जान से कर रहे हैं। मगर इतना कुछ करने के बाद भी सिखों की मानवता को कोई मीडिया कवर नहीं करता ख़ैर नहीं करता तो न करे हमारे सिख किसी 'नेम- फेम' के मोहताज नहीं है वे बस अपना काम कर रहे हैं और शायद इसी वजह से आज सिखों का नाम दुनिया भर में बेहद ही सम्मान के साथ लिया जाता है और दुनिया उनको स्नेह देती है। शांतिदूतों को समझना चाहिए कि हमेशा ही मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है। वाहे गुरु जी दा खालसा वाहे गुरु जी दी फ़तेह। #sikhi #proud आप मित्रों का क्या कहना है??
Posted in Harshad Ashodiya

आज मुर्ख बुद्धिजीवी जूठे तर्कवादी पैदा हो गए


आज मुर्ख बुद्धिजीवी जूठे तर्कवादी पैदा हो गए है. उदहारण इन लिगो को शोले फ़िल्म के गब्बर पे वक्तव्य बोलने कहा जाए तो कहेंगे. गब्बर बड़ा दयालु ठ उसने गब्बर को नहीं मारा सिर्फ दो हाथ काट दिए , उनको जिन्दा छोड़ दिया. वो संगीत प्रेमी था इत्यादि .
कुछ लोग भी ऐसे ही तर्क करके जूठ को सत्य के कपडे पहनाकर राजू करते है. चार्वाक का मतलब चारु वक अर्थात जिसकी वाणी मीठी हो ऐसा . वो भी यही कहता था आप श्राद्ध में ब्राम्हिन को खिलाओगे तो क्या आप के पितृओ को मिलेगा ?
कर्ण को बहुत अन्याय हुआ है वो कहने वाले भी है. कर्ण महान था कोई सक नहीं लेकिन उसने अपनी सामर्थ्यता हरामी लोगो के कदमो में राखी इसलिए उनके बड़े २ गुण भी माटी मोल हो गए.
सीतामाता ने जीवन में एक बार भी नहीं कहा राम ने मेरे लिए अन्याय किया है वनवास जाने का निर्णय सीतामाता का था सुख और दुःख में मई पति के साथ रहूंगी. लेकिन आज के जूठे तर्कवादी कहते है सीता माता को बहुत दुःख पंहुचा !!
बाबरी टूटी तो उस पैर रोने वाले हिन्दू कुतर्क वाड़ी भी बहुत है उन्होंने कभी नहीं रोया की मंदिर बनाकर मस्जिद बनाई . उल्टा कुतर्क करते है बाबरी टूटने पैर दंगे हुए और देस को करोडोका नुकसान हुआ. मई पूछता हु अयोद्या में ४० % मुल्लो की आबादी वाले सहर में क्यों कोई दंगा नहीं हुआ ? कारन ये सब दंगे करवाये गए थे..
कभी कोई मुल्लो की मजाक करते है तो कुतर्क वादी दौड़े चले आकर उनको बचते है !!!
मुल्लो की मजाक करना मतलब उनका गर्वे खंडन करना . गर्व खंडन के बाद उनकी सक्ति खलास हो जाती है. जैसे सैल्य ने करना की कीथी . कर्ण जब तक लड़ता था तब तक कर्ण को वेधक वचन कहकर उनकी मानसिक सक्ति खंडित करता था.
६० साल कॉंग्रेस्स को कोई नहीं पूछा ३७० कश्मीर के बारे में ! कोई जनता था १५ साल पहले ३७० के बारेमे ? और आज पूछने चले मोदी ने आपने वादा पूरा नहीं किया .
मै इतनाही कहूँगा कुतर्क छोड़ कर प्रभु प्रिया बुद्धि चाहिए.

आज मुर्ख बुद्धिजीवी जूठे तर्कवादी पैदा हो गए है. उदहारण इन लिगो को शोले फ़िल्म के गब्बर पे वक्तव्य बोलने कहा जाए तो कहेंगे. गब्बर बड़ा दयालु ठ उसने गब्बर को नहीं मारा सिर्फ दो हाथ काट दिए , उनको जिन्दा छोड़ दिया. वो संगीत प्रेमी था इत्यादि . 
कुछ लोग भी ऐसे ही तर्क करके जूठ को सत्य के कपडे पहनाकर राजू करते है. चार्वाक का मतलब चारु वक अर्थात जिसकी वाणी मीठी हो ऐसा . वो भी यही कहता था आप श्राद्ध में ब्राम्हिन को खिलाओगे तो क्या आप के पितृओ को मिलेगा ?
कर्ण को बहुत अन्याय हुआ है वो कहने वाले भी है. कर्ण महान था कोई सक नहीं लेकिन उसने अपनी सामर्थ्यता हरामी लोगो के कदमो में राखी इसलिए उनके बड़े २ गुण भी माटी मोल हो गए.
सीतामाता ने जीवन में एक बार भी नहीं कहा राम ने मेरे लिए अन्याय किया है वनवास जाने का निर्णय सीतामाता का था सुख और दुःख में मई पति के साथ रहूंगी. लेकिन आज के जूठे तर्कवादी कहते है सीता माता को बहुत दुःख पंहुचा !!
बाबरी टूटी तो उस पैर रोने वाले हिन्दू कुतर्क वाड़ी भी बहुत है उन्होंने कभी नहीं रोया की मंदिर बनाकर मस्जिद बनाई . उल्टा कुतर्क करते है बाबरी टूटने पैर दंगे हुए और देस को करोडोका नुकसान हुआ. मई पूछता हु अयोद्या में ४० % मुल्लो की आबादी वाले सहर में क्यों कोई दंगा नहीं हुआ ? कारन ये सब दंगे करवाये गए थे..
कभी कोई मुल्लो की मजाक करते है तो कुतर्क वादी दौड़े चले आकर उनको बचते है !!!
मुल्लो की मजाक करना मतलब उनका गर्वे खंडन करना . गर्व खंडन के बाद उनकी सक्ति खलास हो जाती है. जैसे सैल्य ने करना की कीथी . कर्ण जब तक लड़ता था तब तक कर्ण को वेधक वचन कहकर उनकी मानसिक सक्ति खंडित करता था.
६० साल कॉंग्रेस्स को कोई नहीं पूछा ३७० कश्मीर के बारे में ! कोई जनता था १५ साल पहले ३७० के बारेमे ? और आज पूछने चले मोदी ने आपने वादा पूरा नहीं किया .
मै इतनाही कहूँगा कुतर्क छोड़ कर प्रभु प्रिया बुद्धि चाहिए.
Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

एक रानी रासमणि थी।


एक रानी रासमणि थी।
बहुत से लोगों ने नाम पहली बार भी सुना हो सकता है।
परन्तु यह वह रानी थी जिसने दक्षिणेश्वर काली मंदिर की स्थापना करी थी।
जिसके पुजारी ठाकुर राम कृष्ण परमहंस बने जिनका पुरवर्ती नाम गदाधर था।
यह बात जो मैं लिख रहा हू वह 1830 ईस्वी के आस पास की है।
रानी रासमणि जॉन बाजार के राजा राजचंद्र की दूसरी पत्नी थी
राजा का महल 300 कमरो की सात मंजिला इमारत थी।
उस समय इस महल की निर्माण लागत 25 लाख थी।
रानी रासमणि एक स्वदेशी पसंद महिला थी और बहुत बुद्धिमान भी थी।
उस समय कलकत्ता में अंग्रेजी शासन स्थापित था।
जॉन बाजार के महल में एक दिन गोरे असुरों ने घुसकर हंगामा किया तो रानी ने उस समय उनका मुकाबला करके उनको भगा दिया।
जबकि रानी शुद्ध ग्रामीण पृष्ठ भूमि से आई गरीब परिवार की कन्या थी परन्तु असुर दल हेतु साक्षात महाकाली साबित हुयी।

उस समय बंगाल में गंगा में मछली पकड़ने वाले मछुआरों पर अंग्रेज ने कर लगा दिया।
उनकी साहयता को रानी आगे आई और बहुत बुद्धिमानी से मछली पकड़ने की पूरी जगह को दस हजार में अंग्रेज बहादुर से खरीद लिया।
उसके बाद मछुआरों को बिना कर मछली पकड़ने की छूट मिल गयी।
कुछ समय बाद उसने मछली पकड़ने की पूरी जगह की घेरा बंदी करवादी।
अंग्रेज बहादुर की बोट स्टीमर रुक गए।
इस पर अंग्रेज बहादुर ने रानी के साथ समझोता किया दस हजार वापस दिए और मछुआरों को बिना कर मछली पकड़ने की छूट मिली।
उस समय बंगाल में स्नान यात्रा का महत्व था उसमे देवता के लिए चांदी का रथ बनाने का काम रानी के दामाद और मेनेजर मथुरा बाबू ने उस समय के कलकत्ता के प्रसिद्ध जोहरी हेमिल्टन को सवा लाख में दिया तो रानी का सवाल था की क्या हमारे सारे भारतीय जोहरी मर गए ?
यह सौदा निरस्त हुआ और वह रथ भारतीय कारीगरों ने बनाया।
आज जहा ईडन गार्डन है उस के पास स्थित बाबू घाट में नवरात्र की नवपत्रिका को स्नान करवाया जाता था।
उसमे ढोल नगाड़े खूब बजते थे वैसे बाबू घाट भी रानी रासमणि ने ही बनाया था।
इन ढोल नगाड़े की शिकायत अंग्रेज बहादुर को होने पर उन्होंने ने रानी की स्नान यात्रा पर 50 रूपये जुर्माना किया।
रानी ने जुर्माना जमा करवाया और रातो रात बाबू घाट से जॉन बाजार तक का पूरा इलाका बाड़ से घेर लिया यह इलाका पूरा वैसे रानी की मालकियत का था सो सरकारी विरोध कोई काम नहीं आया
आखिर सरकार झुकी और समझोता हुया लिखित माफीनामा लिखा गया जुर्माना की रकम वापस मिली।
इसी रानी ने काली मंदिर बनवाया।

Posted in Harshad Ashodiya

मै इतनाही कहूँगा कुतर्क छोड़ कर प्रभु प्रिया बुद्धि चाहिए.


आज मुर्ख बुद्धिजीवी जूठे तर्कवादी पैदा हो गए है. उदहारण इन लिगो को शोले फ़िल्म के गब्बर पे वक्तव्य बोलने कहा जाए तो कहेंगे. गब्बर बड़ा दयालु ठ उसने गब्बर को नहीं मारा सिर्फ दो हाथ काट दिए , उनको जिन्दा छोड़ दिया. वो संगीत प्रेमी था इत्यादि .
कुछ लोग भी ऐसे ही तर्क करके जूठ को सत्य के कपडे पहनाकर राजू करते है. चार्वाक का मतलब चारु वक अर्थात जिसकी वाणी मीठी हो ऐसा . वो भी यही कहता था आप श्राद्ध में ब्राम्हिन को खिलाओगे तो क्या आप के पितृओ को मिलेगा ?
कर्ण को बहुत अन्याय हुआ है वो कहने वाले भी है. कर्ण महान था कोई सक नहीं लेकिन उसने अपनी सामर्थ्यता हरामी लोगो के कदमो में राखी इसलिए उनके बड़े २ गुण भी माटी मोल हो गए.
सीतामाता ने जीवन में एक बार भी नहीं कहा राम ने मेरे लिए अन्याय किया है वनवास जाने का निर्णय सीतामाता का था सुख और दुःख में मई पति के साथ रहूंगी. लेकिन आज के जूठे तर्कवादी कहते है सीता माता को बहुत दुःख पंहुचा !!
बाबरी टूटी तो उस पैर रोने वाले हिन्दू कुतर्क वाड़ी भी बहुत है उन्होंने कभी नहीं रोया की मंदिर बनाकर मस्जिद बनाई . उल्टा कुतर्क करते है बाबरी टूटने पैर दंगे हुए और देस को करोडोका नुकसान हुआ. मई पूछता हु अयोद्या में ४० % मुल्लो की आबादी वाले सहर में क्यों कोई दंगा नहीं हुआ ? कारन ये सब दंगे करवाये गए थे..
कभी कोई मुल्लो की मजाक करते है तो कुतर्क वादी दौड़े चले आकर उनको बचते है !!!
मुल्लो की मजाक करना मतलब उनका गर्वे खंडन करना . गर्व खंडन के बाद उनकी सक्ति खलास हो जाती है. जैसे सैल्य ने करना की कीथी . कर्ण जब तक लड़ता था तब तक कर्ण को वेधक वचन कहकर उनकी मानसिक सक्ति खंडित करता था.
६० साल कॉंग्रेस्स को कोई नहीं पूछा ३७० कश्मीर के बारे में ! कोई जनता था १५ साल पहले ३७० के बारेमे ? और आज पूछने चले मोदी ने आपने वादा पूरा नहीं किया .
मै इतनाही कहूँगा कुतर्क छोड़ कर प्रभु प्रिया बुद्धि चाहिए.

आज मुर्ख बुद्धिजीवी जूठे तर्कवादी पैदा हो गए है. उदहारण इन लिगो को शोले फ़िल्म के गब्बर पे वक्तव्य बोलने कहा जाए तो कहेंगे. गब्बर बड़ा दयालु ठ उसने गब्बर को नहीं मारा सिर्फ दो हाथ काट दिए , उनको जिन्दा छोड़ दिया. वो संगीत प्रेमी था इत्यादि . 
कुछ लोग भी ऐसे ही तर्क करके जूठ को सत्य के कपडे पहनाकर राजू करते है. चार्वाक का मतलब चारु वक अर्थात जिसकी वाणी मीठी हो ऐसा . वो भी यही कहता था आप श्राद्ध में ब्राम्हिन को खिलाओगे तो क्या आप के पितृओ को मिलेगा ?
कर्ण को बहुत अन्याय हुआ है वो कहने वाले भी है. कर्ण महान था कोई सक नहीं लेकिन उसने अपनी सामर्थ्यता हरामी लोगो के कदमो में राखी इसलिए उनके बड़े २ गुण भी माटी मोल हो गए.
सीतामाता ने जीवन में एक बार भी नहीं कहा राम ने मेरे लिए अन्याय किया है वनवास जाने का निर्णय सीतामाता का था सुख और दुःख में मई पति के साथ रहूंगी. लेकिन आज के जूठे तर्कवादी कहते है सीता माता को बहुत दुःख पंहुचा !!
बाबरी टूटी तो उस पैर रोने वाले हिन्दू कुतर्क वाड़ी भी बहुत है उन्होंने कभी नहीं रोया की मंदिर बनाकर मस्जिद बनाई . उल्टा कुतर्क करते है बाबरी टूटने पैर दंगे हुए और देस को करोडोका नुकसान हुआ. मई पूछता हु अयोद्या में ४० % मुल्लो की आबादी वाले सहर में क्यों कोई दंगा नहीं हुआ ? कारन ये सब दंगे करवाये गए थे..
कभी कोई मुल्लो की मजाक करते है तो कुतर्क वादी दौड़े चले आकर उनको बचते है !!!
मुल्लो की मजाक करना मतलब उनका गर्वे खंडन करना . गर्व खंडन के बाद उनकी सक्ति खलास हो जाती है. जैसे सैल्य ने करना की कीथी . कर्ण जब तक लड़ता था तब तक कर्ण को वेधक वचन कहकर उनकी मानसिक सक्ति खंडित करता था.
६० साल कॉंग्रेस्स को कोई नहीं पूछा ३७० कश्मीर के बारे में ! कोई जनता था १५ साल पहले ३७० के बारेमे ? और आज पूछने चले मोदी ने आपने वादा पूरा नहीं किया .
मै इतनाही कहूँगा कुतर्क छोड़ कर प्रभु प्रिया बुद्धि चाहिए.
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हिन्दुत्व को कमज़ोर करने के लिये पिछले 100 सालों मे ये बातें कही गयी


हिन्दुत्व को कमज़ोर करने के लिये पिछले 100 सालों मे ये बातें कही गयी
१। सबका मालिक एक
२। सब धर्मों का मूल एक ही है
३। सिक्ख हिन्दुओं के दुश्मन हैहिन्दुत्व को कमज़ोर करने के लिये पिछले 100 सालों मे ये बातें कही गयी
४। हम दो हमारे दो
५। एक या दो ही बच्चे होते है घर मे अच्छे
६। सेक्युलर (धर्म निरपेक्ष ) बनो
७। अनुसूचित जाती , अनुसूचित जनजाति ,पिछड़ा वर्ग आदि बोलके हिन्दुओं को बांटा गया
८। मूर्तिपूजा व्यर्थ है
९। रामायण महाभारत वेद पुराण आदि सब काल्पनिक है