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साई बाबा के जन्म कि कहानी


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साई बाबा के जन्म कि कहानी

माधवराव देशपांडे उर्फ़ शमा ने शुरुवात में साईं बाबा का प्रचार महात्मा कबीर के अवतार के रूप में किया और कबीर की जीवनी जैसी ही साईं बाबा जीवनी बनायीं गयी लेकिन बाबा के जीवनकाल में इसे लिखित रूप किसी ने नहीं दिया पर उनके मरने(१९१८) के बाद दस गनु ने १९२५ में उनके द्वारा रचित पुस्तक भक्त सारम्रित में इसे प्रकाशित किया बाबा के जन्म की कहानी बिलकुल कबीरदास जैसी ही थी उसमे addition यह था की साईं के तथाकथित गुरु वेंकोषा को अहमदाबाद की मस्जिद से बाहर निकलते समय एक कब्र से आवाज आई की कबीर जन्म लेकर उनके पास शिष्य बनकर आने वाला है अब इस कहानी पर कोई अनपढ़ या मुर्ख ही विश्वास कर सकता है.महत्मा कबीर का यह अवतार १९२९ में प्रकाशित श्री दाभोलकर द्वारा रचित श्री साईं सत्चरित में भगवन दत्तात्रेय का अवतार हो गया,उसके बाद तो साईं बाबा लगभग सभी हिन्दू देवी देवताओं के अवतार होने लगे.१९५४ में बाबा की कब्र के रखवाले अब्दुल बाबा के मरते ही उनकी मूर्ति स्थापित की गयी वहां उन्हें शिव का अवतार के रूप में प्रदर्शित किया गया जैसा की शिव मंदिर के बाहर नंदी की मूर्ति रहती है वैसे ही यहाँ नंदी की मूर्ति स्थापित की गयी क्यूंकि शिवजी ही एकमात्र ऐसे भगवान हैं जिनकी वेशभूषा भी साधारण है.यहाँ पर साथ ही साथ जय साईं राम भी लिखकर राम से भी जोड़ दिया गया.

इतने सब के साथ बाबा को ब्राह्मण प्रमाणित करने का प्रयास भी चल रहा था वहां दस गनु जिसने यह रोचक कहानी बनायीं थी वह मुकर गया की उनको बाबा के जन्म या शुरू के उनके जीवन काल की कोई जानकारी है,यह बात उन्होंने १९३६ में बी व् नरसिम्हन को दिए एक इंटरव्यू में बोला.दस गनु स्वयं पुलिस में थे और बाबा के बारे में जानकारी इकठा करने उनके तथाकथित जन्म स्थल सेलु भी गए वहां पर एक लडके की कहानी उन्हें बताई गयी लेकिन यह भी बोला गया की यह बात १०० साल पहले की है अर्थात बाबा के जन्म के ३० साल पहले की.दस गानु वेंकुषा की समाधी पर भी गए जहाँ उनकी मृत्यु की तिथि १८०८ लिखी थी,बाबा का जन्म १८३८ के लगभग हुआ था.नरसिम्हन और साईं बाबा संसथान ने इस बात को दबाये रखा और १९५५ में प्रकाशित अपनी पुस्तक में दस गानु की झूठी कहानी दोहरा दी,शायद बुढ़ापे में पछतावा होने पर उन्होंने इस बात का खुलासा किया की साईं के पहले के जीवन की जानकारी किसी को नहीं है उनका यह बयां १९७६ में साईं लीला में प्रकाशित हुआ.

दस गानु की झूठी कहानी को इतना प्रचारित किया गया की उसके बाद के सभी लेखकों ने साईं बाबा की वही जीवनी लिखी,शिर्डी साईं संसथान के सभी प्रमुख पदाधिकारियों को यह मालूम है लेकिन साईं के व्यवसाय को बढाने के लिए वे इसी कहानी को प्रचारित करते हैं और झूठी कहानी को हवा दे रहे हैं.

साईं भक्तों बाबा ने अपने मुह से कभी अपने जन्म,माँ,बाप और अपने गुरु के बारे में नहीं कहा,तो यह झूठी कहानियां किसलिए.

Pran Dey
जय सियाराम
धर्म की जय हो अधर्म का नाश हो |
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मित्रो , कृपया अधिक से अधिक Tag और Share अवश्य करे (y) (y) Shirdi Sai Exposed (y) (y) साई बाबा के जन्म कि कहानी माधवराव देशपांडे उर्फ़ शमा ने शुरुवात में साईं बाबा का प्रचार महात्मा कबीर के अवतार के रूप में किया और कबीर की जीवनी जैसी ही साईं बाबा जीवनी बनायीं गयी लेकिन बाबा के जीवनकाल में इसे लिखित रूप किसी ने नहीं दिया पर उनके मरने(१९१८) के बाद दस गनु ने १९२५ में उनके द्वारा रचित पुस्तक भक्त सारम्रित में इसे प्रकाशित किया बाबा के जन्म की कहानी बिलकुल कबीरदास जैसी ही थी उसमे addition यह था की साईं के तथाकथित गुरु वेंकोषा को अहमदाबाद की मस्जिद से बाहर निकलते समय एक कब्र से आवाज आई की कबीर जन्म लेकर उनके पास शिष्य बनकर आने वाला है अब इस कहानी पर कोई अनपढ़ या मुर्ख ही विश्वास कर सकता है.महत्मा कबीर का यह अवतार १९२९ में प्रकाशित श्री दाभोलकर द्वारा रचित श्री साईं सत्चरित में भगवन दत्तात्रेय का अवतार हो गया,उसके बाद तो साईं बाबा लगभग सभी हिन्दू देवी देवताओं के अवतार होने लगे.१९५४ में बाबा की कब्र के रखवाले अब्दुल बाबा के मरते ही उनकी मूर्ति स्थापित की गयी वहां उन्हें शिव का अवतार के रूप में प्रदर्शित किया गया जैसा की शिव मंदिर के बाहर नंदी की मूर्ति रहती है वैसे ही यहाँ नंदी की मूर्ति स्थापित की गयी क्यूंकि शिवजी ही एकमात्र ऐसे भगवान हैं जिनकी वेशभूषा भी साधारण है.यहाँ पर साथ ही साथ जय साईं राम भी लिखकर राम से भी जोड़ दिया गया. इतने सब के साथ बाबा को ब्राह्मण प्रमाणित करने का प्रयास भी चल रहा था वहां दस गनु जिसने यह रोचक कहानी बनायीं थी वह मुकर गया की उनको बाबा के जन्म या शुरू के उनके जीवन काल की कोई जानकारी है,यह बात उन्होंने १९३६ में बी व् नरसिम्हन को दिए एक इंटरव्यू में बोला.दस गनु स्वयं पुलिस में थे और बाबा के बारे में जानकारी इकठा करने उनके तथाकथित जन्म स्थल सेलु भी गए वहां पर एक लडके की कहानी उन्हें बताई गयी लेकिन यह भी बोला गया की यह बात १०० साल पहले की है अर्थात बाबा के जन्म के ३० साल पहले की.दस गानु वेंकुषा की समाधी पर भी गए जहाँ उनकी मृत्यु की तिथि १८०८ लिखी थी,बाबा का जन्म १८३८ के लगभग हुआ था.नरसिम्हन और साईं बाबा संसथान ने इस बात को दबाये रखा और १९५५ में प्रकाशित अपनी पुस्तक में दस गानु की झूठी कहानी दोहरा दी,शायद बुढ़ापे में पछतावा होने पर उन्होंने इस बात का खुलासा किया की साईं के पहले के जीवन की जानकारी किसी को नहीं है उनका यह बयां १९७६ में साईं लीला में प्रकाशित हुआ. दस गानु की झूठी कहानी को इतना प्रचारित किया गया की उसके बाद के सभी लेखकों ने साईं बाबा की वही जीवनी लिखी,शिर्डी साईं संसथान के सभी प्रमुख पदाधिकारियों को यह मालूम है लेकिन साईं के व्यवसाय को बढाने के लिए वे इसी कहानी को प्रचारित करते हैं और झूठी कहानी को हवा दे रहे हैं. साईं भक्तों बाबा ने अपने मुह से कभी अपने जन्म,माँ,बाप और अपने गुरु के बारे में नहीं कहा,तो यह झूठी कहानियां किसलिए. Pran Dey जय सियाराम धर्म की जय हो अधर्म का नाश हो | #FraudSai #ExposeShirdisai #Bhaktijihad #बहरूपिया_साई #शिर्डी_साई_बेनकाब #भक्ति_जिहाद
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Hello, Harshad Ashodiya I have 12,000 Hindi, Gujarati ebooks

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