Posted in छोटी कहानिया - १००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक सन्त बहुत बूढ़े हो गए।


Saraswati Vidya Mandir Haflong

एक सन्त बहुत बूढ़े हो गए। मरने का समय निकट
आया तो उनके सभी शिष्य उपदेश सुनने और
अन्तिम
प्रणाम करने एकत्रित हुए। उपदेश न देकर उनने
अपना मुँह
खोला और शिष्यों से पूछ- देखो इसमें दाँत है क्या? शिष्यों ने
उत्तर दिया- एक भी नहीं।
दूसरी बार उनने फिर मुँह खोला और पूछा –
देखो इसमें
जीभ है क्या? सभी शिष्यों ने एक
स्वर
में उत्तर दिया हाँ- है – है। सन्त ने फिर पूछा –
अच्छा एक
बात बताओ। जीभ जन्म से थी और
मृत्यु
तक रहेगी और दाँत पीछे उपजे
और
पहले चले गए। इसका क्या कारण है?
इस प्रश्न का उत्तर किसी से भी न
बन
पड़ा।
सन्त ने कहा जीभ कोमल होती है
इसलिए टिकी रही। दाँत कठोर थे
इसलिए
उखड़ गए।
मेरा एक ही उपदेश है-
दांतों की तरह
कठोर मत होना – जीभ की तरह
मुलायम
रहना।
यह कह कर उनने अपनी आंखें मूँद(बंद)
ली।

Advertisements

Author:

Hello, Harshad Ashodiya I have 12,000 Hindi, Gujarati ebooks

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s