Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

आशीर्वादीलाल श्रीवास्तव की पुस्तक मुगल इतिहास


Arun Upadhyay आशीर्वादीलाल श्रीवास्तव की पुस्तक मुगल इतिहास में अबुल फजल को उद्धृत कर लिखा है कि कुछ कश्मीरी ब्राह्मण खुशामद के लिये अकबर का दर्शन कर ही व्रत का पारण करते थे। अकबर को इतनी खुशामद पर आश्चर्य हुआ और बुलाकर पूछा। उन्होंने कहा कि राजा भगवान् का रूप होता है-दिल्लीश्वरो वा जगदीश्वरो वा मनोरथान् पूरयितुं समर्थः। (पण्डितराज जगन्नाथ)। अतः वे राजा का दर्शन कर ही भोजन लेते हैं। उनके दर्शन के लिये अकबर झरोखे पर बैठता था। यह परम्परा राम के समय भी थी, जैसा कबीर ने कहा है-रामझरोखे बैठ कर सबका मुजरा लेय।कबर ने उनका नाम दर्शनीय ब्राह्मण रखा क्यों कि वे दर्शन (अकबर का) कर ही भोजन लेते थे। किन्तु खुशामदी ब्राह्मणों को संस्कृत नाम पसन्द नहीं आया और उन्होंने फारसी नाम देने की प्रार्थना की। तब उनका नाम नीहारू रखा, यह संस्कृत में भी है जैसे नीहारिका (तारा की तरह हलका-सा दीखना)। इसी नीहारु से नेहरू हुआ। मुगलों ने दिल्ली में कभी कोई नहर नहीं बनवायी थी। इनके पूर्वज राज कौल ने गुरु तेग बहादुर को औरंगजेब दरबार में पहुंचा कर क्रूरतापूर्वक हत्या करवाई थी। उनके पुत्र ने मुखबिरी कर गुरु गोविन्द सिंह जी के २ छोटे बच्चों को पकड़वाया था जिनको जीवित ही सरहिन्द के किले की दीवार में दफना दिया गया। गयासुद्दीन या गंगाधर ने ५ लाख रुपये घूस लेकर बिहार, बंगाल ओड़िशा का दीवानी अधिकार (लगान वसूलने का काम) ईस्ट इण्डिया कम्पनी को दिया था। अतः मेरठ छावनी के सिपाहियों ने अंग्रेजों के पूर्व इसी परिवार पर हमला किया था क्योंकि ये दोनों तरफ से पैसे लेकर गद्दारी कर रहे थे।

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