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Hinduism in Burma (Myanmar)


Hinduism in Burma (Myanmar)
Burma was known as Indra-Dvipa. Hindu settlements began to be established in Burma before the first century A.D.

Horace Hayman Wilson who used to be professor of Sanskrit at Oxford University, says:

“The civilizations of the Burmese and the Tibetans is derived from India.”

(source: Hindu Superiority – By Har Bilas Sarda p. 180).

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मर जाएंगे, पर मुसलमान नहीं बनेंगे


‘मर जाएंगे, पर मुसलमान नहीं बनेंगे’

इराक में चरमपंथी संगठन आईएस के कारण अल्पसंख्यक यज़ीदी समुदाय के लोगों में दहशत हैं.

देश के उत्तरी हिस्से में हज़ारों यज़ीदी लोगों ने अपने घरों को छोड़ कर सिंजर की पहाड़ियों में शरण ली. लेकिन वहां भी ज़िंदगी उनके लिए आसान नहीं थी.
सिंजर की पहाड़ियों में बिना पानी और खाने के कई दिनों तक जीवित रहने के बाद इन शरणार्थियों को कुर्द बल देरेक सिटी में बने एक शिविर में ले गए. ये कैंप उत्तरी सीरिया में कुर्दों के नियंत्रण वाले इलाक़े में है.
65 वर्षीय शरणार्थी खिदीर शामो कहते हैं, “आईएस के लड़ाकों ने सैकड़ों लोगों की हत्या की और उनके सिर कलम कर दिए. सैकड़ों महिलाओं को वो अपने साथ ले गए. हम मर रहे हैं- यज़ीदी समुदाय ने जनसंहार देखा है.”
कुर्द बलों को पहाड़ियों में दो बहनें और उनका परिवार भी मिला. इनमें एक बहन ट्रक से कूद गई क्योंकि वो बहुत प्यासी थीं और पानी के लिए तड़प रही थीं. इससे उनके टखने में मोच भी आ गई.

एक बहन ने कहा, “मेरा सारा परिवार पहाड़ियों में 12 किलोमीटर तक पैदल चला. मेरे बच्चों को पानी नहीं मिला पाया और उन्हें डायरिया हो गया. हमने अपने बहुत सारे संबंधी खो दिए हैं.” दूसरी तरफ 65 साल के फरमान जेंदी कहते हैं, “ये एक धर्मयुद्ध है. ये कोई राजनीतिक या आर्थिक युद्ध नहीं है.”

सिंजर की 18 वर्षीय अमीना कालो कहती हैं, “हम कभी इस्लाम को नहीं अपनाएंगे जैसा कि आईएस चाहता है. इसकी बजाय हम मरना पसंद करेंगे.”

कई शरणार्थियों को सिंजर की पहाड़ियों से एक सुरक्षित रास्ते से शिविर में पहुंचाया गया. सिर्फ़ बड़े ट्रक ही पहाड़ी इलाक़ों से उबड़ खाबड़ रास्तों से गुज़र सकते हैं.

‘मर जाएंगे, पर मुसलमान नहीं बनेंगे’ इराक में चरमपंथी संगठन आईएस के कारण अल्पसंख्यक यज़ीदी समुदाय के लोगों में दहशत हैं. देश के उत्तरी हिस्से में हज़ारों यज़ीदी लोगों ने अपने घरों को छोड़ कर सिंजर की पहाड़ियों में शरण ली. लेकिन वहां भी ज़िंदगी उनके लिए आसान नहीं थी. सिंजर की पहाड़ियों में बिना पानी और खाने के कई दिनों तक जीवित रहने के बाद इन शरणार्थियों को कुर्द बल देरेक सिटी में बने एक शिविर में ले गए. ये कैंप उत्तरी सीरिया में कुर्दों के नियंत्रण वाले इलाक़े में है. 65 वर्षीय शरणार्थी खिदीर शामो कहते हैं, “आईएस के लड़ाकों ने सैकड़ों लोगों की हत्या की और उनके सिर कलम कर दिए. सैकड़ों महिलाओं को वो अपने साथ ले गए. हम मर रहे हैं- यज़ीदी समुदाय ने जनसंहार देखा है.” कुर्द बलों को पहाड़ियों में दो बहनें और उनका परिवार भी मिला. इनमें एक बहन ट्रक से कूद गई क्योंकि वो बहुत प्यासी थीं और पानी के लिए तड़प रही थीं. इससे उनके टखने में मोच भी आ गई. एक बहन ने कहा, “मेरा सारा परिवार पहाड़ियों में 12 किलोमीटर तक पैदल चला. मेरे बच्चों को पानी नहीं मिला पाया और उन्हें डायरिया हो गया. हमने अपने बहुत सारे संबंधी खो दिए हैं.” दूसरी तरफ 65 साल के फरमान जेंदी कहते हैं, “ये एक धर्मयुद्ध है. ये कोई राजनीतिक या आर्थिक युद्ध नहीं है.” सिंजर की 18 वर्षीय अमीना कालो कहती हैं, “हम कभी इस्लाम को नहीं अपनाएंगे जैसा कि आईएस चाहता है. इसकी बजाय हम मरना पसंद करेंगे.” कई शरणार्थियों को सिंजर की पहाड़ियों से एक सुरक्षित रास्ते से शिविर में पहुंचाया गया. सिर्फ़ बड़े ट्रक ही पहाड़ी इलाक़ों से उबड़ खाबड़ रास्तों से गुज़र सकते हैं.

Posted in हिन्दू पतन

सिर्फ ग्यारह सौ साल पहले यजीदी ध


— ये पूरी पोस्ट ध्यान से पढियेगा —
सिर्फ ग्यारह सौ साल पहले यजीदी धर्म के लोग ईराक जिसे पहले मेसोपोटामिया कहा जाता था, तुर्की, लेबनान में बहुसंख्यक थे .. बहुसंख्यक भी नही कह सकते बल्कि सिर्फ यजीदी ही यहाँ रहते थे … इनका ही यहाँ राज था
फिर धीरे धीरे इस्लाम ने अपनी दस्तक देनी शुरू की … पहले एक मुस्लिम ने इबादत करने के लिए एक मस्जिद बनाने के लिए जगह देने की गुजारिश की .. यजीदी राजा ने बसरा शहर के बाहर उन्हें एक जगह दे दी … फिर वो राजा और पुरे यजीदी लोग निश्चिन्त हो गये की ये लोग तो शांतिप्रिय लोग हैं .. नेक बंदे हैं … धरती पर शांतिदूत बनकर आये हैं
और आज ?????
वही यजीदी सिकुड़ते सिकुड़ते मात्र एक शहर में कुछ हजार बचे … आज उन्ही मुस्लिमों के अत्याचारों से त्रस्त होकर एक पहाड़ी पर शरण लिए हैं … भूखे प्यासे .. कोई पूछने वाला नही है … न भारत … न अमेरिका न ही संयुक्तराष्ट्र .. न ही सेकुलर सूअर जमात
करीब दो हजार यजीदी पुरुषो का कत्लेआम कर दिया गया .. एक हजार से ज्यादा बच्चों को मार डाला गया .. उनकी लडकियों को मुस्लिम लोग सेक्स गुलाम बनाने के लिए अपने साथ लेकर चले गये … बचे तो कुछ बुजुर्ग महिलायें और बुजुर्ग पुरुष जिनकी बेचारी देखिये वो आत्महत्या तक नही कर सकते … क्योकि न जहर है .. न झूलने के लिए पेड़ .. न कूदने के लिए नदी …रात में सपने में वही मंजर सामने आ रहा है … भारत में आज के दो हजार साल के बाद कुछ हजार हिन्दू मुसलमानों के अत्याचारो से त्रस्त होकर हिमालय पर शरण लिए हुए हैं … हिन्दू युवाओ का कत्लेआम मचा हुआ है … हिन्दू लडकियों को सेक्स गुलाम बनाया जा रहा है …
मित्रो, ये कोई कोरी परिकल्पना नही है बल्कि हर उस देश की कहानी है जहाँ जहाँ इस्लाम के हर अत्याचारों को सरकारों ने वोट बैंक के लिए बर्दाश्त किया है .

--- ये पूरी पोस्ट ध्यान से पढियेगा ---
सिर्फ ग्यारह सौ साल पहले यजीदी धर्म के लोग ईराक जिसे पहले मेसोपोटामिया कहा जाता था, तुर्की, लेबनान में बहुसंख्यक थे .. बहुसंख्यक भी नही कह सकते बल्कि सिर्फ यजीदी ही यहाँ रहते थे ... इनका ही यहाँ राज था
फिर धीरे धीरे इस्लाम ने अपनी दस्तक देनी शुरू की ... पहले एक मुस्लिम ने इबादत करने के लिए एक मस्जिद बनाने के लिए जगह देने की गुजारिश की .. यजीदी राजा ने बसरा शहर के बाहर उन्हें एक जगह दे दी ... फिर वो राजा और पुरे यजीदी लोग निश्चिन्त हो गये की ये लोग तो शांतिप्रिय लोग हैं .. नेक बंदे हैं ... धरती पर शांतिदूत बनकर आये हैं
और आज ?????
वही यजीदी सिकुड़ते सिकुड़ते मात्र एक शहर में कुछ हजार बचे ... आज उन्ही मुस्लिमों के अत्याचारों से त्रस्त होकर एक पहाड़ी पर शरण लिए हैं ... भूखे प्यासे .. कोई पूछने वाला नही है ... न भारत ... न अमेरिका न ही संयुक्तराष्ट्र .. न ही सेकुलर सूअर जमात
करीब दो हजार यजीदी पुरुषो का कत्लेआम कर दिया गया .. एक हजार से ज्यादा बच्चों को मार डाला गया .. उनकी लडकियों को मुस्लिम लोग सेक्स गुलाम बनाने के लिए अपने साथ लेकर चले गये ... बचे तो कुछ बुजुर्ग महिलायें और बुजुर्ग पुरुष जिनकी बेचारी देखिये वो आत्महत्या तक नही कर सकते ... क्योकि न जहर है .. न झूलने के लिए पेड़ .. न कूदने के लिए नदी ...रात में सपने में वही मंजर सामने आ रहा है ... भारत में आज के दो हजार साल के बाद कुछ हजार हिन्दू मुसलमानों के अत्याचारो से त्रस्त होकर हिमालय पर शरण लिए हुए हैं ... हिन्दू युवाओ का कत्लेआम मचा हुआ है ... हिन्दू लडकियों को सेक्स गुलाम बनाया जा रहा है ...
मित्रो, ये कोई कोरी परिकल्पना नही है बल्कि हर उस देश की कहानी है जहाँ जहाँ इस्लाम के हर अत्याचारों को सरकारों ने वोट बैंक के लिए बर्दाश्त किया है .
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विकीलीक्स के खुलासे में राजीव


नया खुलासा….
WIKILEAKS ON RAJIV GANDHI…
विकीलीक्स के खुलासे में राजीव
www.mns-news.in
विकीलीक्स ने कुछ पुराने कूटनीतिक दस्तावेज जारी किए हैं और इनसे 1970 के दशक में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हथियारों के एक सौदे में बिचौलिए की भूमिका निभाने की बात सामने आई है.विकीलीक्स से मिली जानकारियों के आधार पर भारत के प्रमुख अखबार द हिंदू ने खबर छापी है कि स्वीडेन के कारोबारी समूह साब स्कैन्डिया ने राजीव गांधी को विगेन लड़ाकू विमान बिकवाने में मदद करने के लिए नौकरी पर रखा था. इस जानकारी के पीछे अमेरिकी दूतावास के राजनयिक दस्तावेजों को आधार बनाया गया है.
उस वक्त राजीव गांधी राजनीति में नहीं आए थे और कमर्शियल पायलट के रूप में काम कर रहे थे. तब उनकी मां इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री थीं. इन दस्तावेजों में कहा गया है कि राजीव गांधी साब स्कैंडिया के लिए प्रमुख बिचौलिए के रूप में काम कर रहे थे. प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तक उनकी पहुंच की वजह से उन्हें पैसा दिया गया. यह जानकारी स्वीडिश दूतावास के अधिकारियों ने अमेरिकी अधिकारियों को दी, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने न तो इसकी पुष्टि की और न ही इसे खारिज किया. इन दस्तावेजों में एक अमेरिकी राजनयिक ने कहा है, “हम यह सोच सकते हैं कि एक ट्रांसपोर्ट पायलट पर किसी लड़ाकू जहाज के जानकार के रूप में भरोसा नहीं किया जा सकता लेकिन अगर हम किसी ट्रांसपोर्ट पायलट के बारे में बात कर रहे हैं तो शायद उसके पास कोई और ज्यादा उपयोगी योग्यता हो सकती है.इंदिरा गांधी की मौत के बाद राजीव गांधी राजनीति में उतरे और भारत के प्रधानमंत्री बने. इसी दौरान उन पर स्वीडेन की तोप बनाने वाली कंपनी बोफोर्स के साथ घोटाले का आरोप लगा. इस मामले में गांधी परिवार के नजदीकी को कथित रूप से बिचौलिए के रूप में एक बड़ी रकम सौदा कराने के लिए दी गई. साब स्कैंडिया आखिरकार अपने जहाज भारत को बेचने में नाकाम रहा. ब्रिटेन में बनी जगुआर को भारतीय वायु सेना के लिए खरीदने का फैसला हुआ.
विकीलीक्स ने सोमवार को 1970 के दशक के करीब 17 लाख अमेरिकी राजनयिक और खुफिया दस्तावेज जारी किए हैं. इन्हें इस तरह से जारी किया गया है कि कोई भी जानकारी कीवर्ड डाल कर ढूंढी जा सकती है. विकीलीक्स को शुरू करने वाले जूलियन असांज ने फिलहाल लंदन में इक्वाडोर के दूतावास में शरण ले रखी है और वहां रहकर भी उन्होंने इन दस्तावेजों को रिलीज करने में बड़ी भूमिका निभाई है. उनके साथ स्थानीय प्रेस एसोसिएशन ने भी काम किया है. इन दस्तावेजों के जरिए यह बताने की कोशिश की गई है कि दुनिया भर के मामलों में अमेरिका का दखल कितना ज्यादा है.

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आखिर नीच दोगले कांग्रेसी अपना पाप क्यों भूल जाते है ??


आखिर नीच दोगले कांग्रेसी अपना पाप क्यों भूल जाते है ??
जब नरेंद्र मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब अहमदाबाद में सरदार पटेल म्यूजियम का उद्घाटन समारोह था … उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह करने वाले थे … मंच पर पूर्व मनमोहन सरकार के आठ केन्द्रीय मंत्री मौजूद थे … चूँकि सरदार पटेल ट्रस्ट में मुख्य ट्रस्टी दिनशा पटेल थे इसलिए इस कार्यक्रम को कांग्रेस ने पूरी तरह से हाईजैक कर लिया था … दुर्योधन भाई झूठवाडिया भी मंच पर थे ….
जैसे ही नरेद्र मोदी बोलने लगे वहाँ मौजूद कांग्रेसी फेकू फेकू बोलकर हुटिंग करने लगे ..मोदी जी ने दो मिनट में अपना भाषण पूरा किया और मंच से चले गये …
जैसी करनी वैसी भरनी … फिर आज जब कांग्रेसियो के साथ जनता हुटिंग कर रही है तो इन्हें मिर्ची क्यों लग रही है

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Kashmir: With State govt complicity, Muslims usurp ancient Hindu site at Kounsar Nag – Vivek Sharma


BHARATA BHARATI

Kounsar Nag

Vivek Sharma “Pakistan’s prestigious media house Dawn has come up with a pictorial feature … showing seven odd young Kashmiri boys offering Namaz in a make-shift prayer place on its magnificent banks. … Behind those offering prayers lays hanging a huge banner, seeking donations for ‘reconstruction’ of Masjid Sharief, Syed Akbar, Ahrabal. On a corner of the slightly raised stone fencing, stands a tall post fluttering a green flag. This is exactly the location, which some Kashmiri Pandits claim to have been worshipping from times immemorial as ‘Vishnu Paad’, foot print of Bhagwan Vishnu.” – Vivek Sharma

Kashmir PanditsNow that the controversy over holy Kounsar Nag in Kashmir was gradually dying down, Pakistan’s prestigious media house Dawn has come up with a pictorial feature in its multimedia segment on 11th August, showing seven odd young Kashmiri boys offering Namaz in a make-shift prayer place on its magnificent banks in the scenic backdrop of Pir…

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