Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

महान आक्रान्ता क्यों ? गौरवपुरुष क्यों नहीं ?


महान आक्रान्ता क्यों ? गौरवपुरुष क्यों नहीं ?

भारत के अतीत के गौरवशाली पृष्ठ देश की युवा पीढी के सामने न आयें इसलिए इन पृष्टों पर कालिख पोतने का सुनियोजित षड्यंत्र आजादी के बाद से लगातार कुछ इतिहासकारों द्बारा किया गया । आज तक हमें जो इतिहास पढाया गया है उसके तथ्य सत्य की कसौटी पर खरे नहीं उतरते हैं । गुलामी के दिनों में जो इतिहास विकृत किया गया वह आज भी पढ़ना पड़ता है – इससे बढ़कर बिडम्बना और क्या होगी ? आजादी के बाद इतिहास के तथ्यों को तोड़ मरोड़कर उन्हें घातक तुष्टीकरण की नीति के अनुरूप ढाला गया । राष्ट्र के गौरवशाली महापुरुषों और संस्कृति के पुरोधाओं के प्रति वितृष्णा का जहर घोला गया । भारत की गौरवशाली हिंदू संस्कृति ,सनातन परम्परा व् देश के राष्ट्रपुरुषों जिन्होंने विधर्मी आक्रान्ताओं के साथ संघर्ष किया उनको लांछित करना ,कलंकित करना ,हेय और त्याज्य मानना अक्षम्य भूल है । क्योंकि हिन्दुस्तान के इतिहास में गर्व करने लायक बहुत कुछ है ।इतिहास ही समाज के लिए प्रेरक होता है।इतिहास राष्ट्र का जीवन -चरित्र और संस्कृति-प्राण होता है । इसमे कोई संदेह नहीं कि इतिहास बीती हुई गाथा है ,लेकिन इतिहास अतीत से प्रेरणा ,सबक और शक्ति प्राप्त करने का साधन भी है। हम इतिहास से सीखकर वर्तमान को बदल सकते हैं ,परन्तु वर्तमान की वैयक्तिक स्वार्थी महत्वाकांक्षाओं के कारण इतिहास को नही बदला जा सकता ।अपने देश के तथाकथित सेकुलर नेताओं का चरित्र ऐसा है कि राम ,शिवाजी और महाराणा प्रताप में इन्हें साम्प्रदायिकता की बू आती है ,अकबर और औरंगजेब में सेकुलर छवि नजर आती है। बलिहारी है इन तथाकथित सेकुलरों की वोटपरस्त विकृत मानसिकता को ! विचारणीय प्रश्न यह है कि वर्तमान पीढी की श्रद्धा ,उसका आदरभाव किन लोगों के प्रति होना चाहिए ? क्या वर्तमान पीढी की श्रद्धा के केन्द्र वे मुस्लिम आक्रान्ता उस्मान , उबैदुल्ला , मोहम्मद बिन कासिम , महमूद गजनबी ,मसूद सालार , मोहम्मद गौरी , कुतुबुद्दीन , अल्तमस , बलवन , अलाउद्दीन खिलजी , मोहम्मद तुगलक ,इब्राहिम लोदी , शेरशाह शूरी ,बाबर, अकबर, औरंगजेब होने चाहियें जिन्होंने इस्लामी झंडा फहराने के लिए ,समूल हिंदू-राष्ट्र रूपी वटवृक्ष को उखाड़ फेंकने के लिए हिन्दुस्तान पर आक्रमण किया, हिंदू ग्रामों को जलाया, बहू-बेटियों का बलात्कार किया और अपहरण किया, ज्ञान के भंडार संस्कृत-साहित्य को नष्ट किया, मंदिरों-देवालयों का विध्वंस किया और बलात् धर्मान्तरण कर भारत के सांस्कृतिक-राष्ट्रभाव को तिरोहित करने का प्रयास किया ? नहीं ,कदापि नहीं !देश की वर्तमान पीढी के आदर्श ,उनके प्रेरणा-स्त्रोत वो मर्यादा-पुरुषोत्तम भगवान् श्रीराम होने चाहिए जिन्होंने जात-पात का बंधन तोडा ,केवट को गले लगाया । देश की वर्तमान पीढी का आदरभाव उन महाराणा प्रताप के प्रति होना चाहिए जिनके जीवन में स्वदेश और स्वधर्म के प्रति अविचल अनुराग था , देश-रक्षा के महान वृत से भरा हुआ अदम्य साहस था , मातृभूमि के प्रति अविचल निष्ठा थी ,आत्माहुति थी ,जिन्होंने कष्ट और बलिदान का कंटकाकीर्ण पथ चुनकर मेवाड़ की सत्ता और सम्मान को समाप्त करने के अकबर के सपनों को ही नहीं तोडा बल्कि कई संभावनाओं को उनके जन्म से पहले ही ख़त्म कर दिया । देश की वर्तमान पीढी की श्रृद्धा , उसके प्रेरणा-पुंज वे छत्रपति शिवाजी महाराज होने चाहियें जो राष्ट्रीय-स्वाभिमान और स्वराज के लिए अपने प्राणों पर खेलने से भी नहीं हिचकिचाए। देश की वर्तमान पीढी की श्रद्धा ,उसका आदरभाव उन रानी दुर्गावती के प्रति होना चाहिए जिन्होंने अपने युग की प्रचंड शक्ति अकबर से लोहा लिया .देश की वर्तमान पीढी के नायक, हीरो वे स्वामी विवेकानंद होने चाहियें जिन्होंने अखिल विश्व में भारतीय संस्कृति और अध्यात्म की विजय-पताका फहरायी ।आज की पीढी का रोल मॉडल वह शहीद-ऐ-आजम भगत सिंह होना चाहिए जिसने भारत की आजादी का पहला सूरजदेखने के लिए हँसते-हँसते फांसी का फंदा चूम लिया ।देश और धर्म की रक्षा और विजय के लिए तिल-तिल जीना और फ़िर उसके लिए अपना सर्वस्व लुटा देना एक प्रकार की कठोर कर्म-साधना है। महाराणा-प्रताप,छत्रपति शिवाजी महाराज,रानी दुर्गावती, स्वामी विवेकानंद ,गुरु गोविन्द सिंह, वीर सावरकर, चंद्रशेखर आजाद ,शहीद भगत सिंह, लोकमान्य तिलक, सुभाष चंद्र बोस ,चाफेकर बंधुओं, जैसे देश के कई राष्ट्रपुरुषों का जीवन ऐसी ही कठोर कर्म-साधना में बीता, तो फ़िर ऐसे प्रेरणास्पद जीवन-चरित्रों के बारे में आज हमारे देश की पाठ्यपुस्तकों में क्यों नहीं पढाया जाता ? जिन्होंने राष्ट्रभाव की विरोधी प्रत्येक सत्ता का हमेशा प्रतिकार किया उनका प्रेरक इतिहास क्यों नहीं देश के भावी कर्णधारों को बताया जाना चाहिए?पाठ्यक्रम का उद्देश्य सकारात्मक शिक्षा होना चाहिए । हमारी पाठ्यपुस्तकों में राष्ट्र के गौरवपुरुषों की चर्चा होनी चाहिए । इतिहास का पाठ्यक्रम ऐसा होना चाहिए जिसमे भारत का अपना प्राचीन गौरवशाली अतीत ,भारत की आत्मा ,भारत का स्व अर्थात अपनापन झलके । स्वधर्म, स्वसंस्कृति, स्वजीवन-मूल्य, स्वश्रद्धा व मानबिंदुओं का जिसमे यथोचित समावेश हो।आज समाज और राष्ट्र की सोयी अस्मिता जगाने के लिए ,उसका मनोबल ऊंचा करने के लिए ताकि वह प्रखर,तेज व कठोर कर्तव्य-बोध से सिद्ध हो सके, उसके लिए भारतीय इतिहास में भरे पड़े बलिदान व पराक्रम के गौरवशाली तेजस्वी प्रसंगों व दृष्टांतों को बड़े गर्वीले अंदाज में युवा-पीढी के समक्ष रखने की नितांत आवश्यकता है।भारत के इतिहास को उसकी गौरवशाली प्राचीन संस्कृति और आध्यात्मिक पहचान के साथ जोड़कर देखना साम्प्रदायिकता नहीं है।परन्तु हिन्दुस्तान का सबसे बड़ा दुर्भाग्य यही है कि राष्ट्र, राष्ट्रीयता ,और संस्कृति के गौरवगान की जब भी बात की जाती है हमारे देश के सेकुलर योद्धाओं के पेट में मरोड़ उठने लगती है ,क्योंकि इन सेकुलर शिखंडियों के लिए तो अकबर महान है, औरंगजेब जिन्दा पीर है ,किंतु महाराणा प्रताप और शिवाजी का नाम लेना फिरकापरस्ती हैsecularism के नाम पर देश के अन्दर यह क्या चल रहा है? ‘ सेकुलर’ शब्द का अर्थ केवल और केवल ‘हिंदू-विरोध’ तक सीमित कर दिया गया है । यदि हिंदू अपनी पूजा-अर्चना करता है,अपने राष्ट्रपुरुषों का पुण्य-स्मरण करता है, तो वह साम्प्रदायिक है ! पर मुसलमान मस्जिदों में ध्वनिवर्धकों द्वारा जहरीली हिंसा की आग भड़काने वाली तकरीरें देता है, जिन मुग़ल आक्रान्ताओं ने हिंदुस्तान के धर्म, संस्कृति और शिक्षा को नष्ट किया -यहाँ के नागरिकों पर नृशंस अत्याचार किए ,उनका गौरवगान -उनकी प्रशंसा करता है तो उसमें इन सेकुलरों को राष्ट्रीयता नजर आती है ? यह हिंदुस्तान की वोटपरस्त राजनीति की बिडम्बना नहीं तो और क्या है?वोट और कुर्सी की खातिर सेकुलर जमात देश के अन्दर कैसा सेकुलर पाठ्यक्रम लागू कराना चाहती है? ऐसा पाठ्यक्रम जिसमे छात्रों को पढाया जाए कि प्रथ्वीराज चौहान कायर और मोहम्मद गौरी वीर योद्धा था ! शिवाजी लुटेरे थे ,औरंगजेब जिन्दा पीर था !महाराणा प्रताप भगोडे थे, अकबर महान था ! रानी लक्ष्मीबाई अपनी झांसी छिन जाने की वजह से अंग्रेजों से लड़ीं ! वीर सावरकर, चंद्रशेखर आजाद, सरदार भगत सिंह, लोकमान्य तिलक, रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ -ये सब आतंकवादी थे !सुभाषचंद्र बोस का तो स्वतंत्रता संग्राम में कोई योगदान ही नहीं था ! देश को आजादी किसने दिलवाई -गांधी नेहरू खानदान ने ! स्वातंत्र्य प्रेम की खातिर जिन असंख्य हुतात्माओं ने अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया ;उनका त्याग कोई त्याग नहीं ! सच तो यह है कि देश की आजादी के इतिहास के नाम पर अब तक कांग्रेस पार्टी का इतिहास ही देश के नौनिहालों को पढाया गया है। इतिहास की ये विकृत धारणाएं देशकाल और देश की भावी पीढीयों के प्रति अन्याय हैं। परिणाम आत्मसम्मान और स्वाभिमान से वंचित वर्तमान पीढी के रूप में हमारे सामने है।हमें सोचना होगा कि क्या हमने आजादी इसलिए हासिल की थी कि गुलामी के दौर का वह स्वभाव, वह मानसिकता बनी रहे?सच पूछिए तो हम मनसा-वाचा-कर्मणा आज भी स्वतंत्र इसलिए नहीं हैं ,क्योंकि जिन महापुरुषों -गौरवपुरुषों के आचरण से,उनके व्यक्तित्व-कृतित्व और जीवन-चरित्र से हमें प्रेरणा मिल सकती थी उनके बारे में देश की वर्तमान पीढी को बताया ही नहीं गया। हमें आजाद हुए ६२ वर्ष बीत गए लेकिन आज भी स्वदेशी ,स्वाभिमान और राष्ट्रभाव तिरोहित है। इतिहास की भूलों से भी हमनें कोई सीख नहीं ली है और गलतियाँ आज पुनः दोहरायीं जा रहीं हैं।देश की चिंताएं और शिक्षा की चिंताएं कभी भी अलग-अलग नहीं हो सकतीं। देश के युवाओं को अब महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज, महाराजा छत्रसाल , रानी दुर्गावती ,पृथ्वीराज चौहान, स्वमीविवेकानंद, रानी लक्ष्मीबाई , तात्या टोपे, वीर सावरकर, लोकमान्य तिलक, गुरु गोविन्द सिंह, चंद्रशेखर आजाद, शहीद भगत सिंह, सुभाषचंद्र बोस आदि के विषय में बताया जाना चाहिए ,जिन्होंने भारतीयता और सांस्कृतिक-मूल्यों की रक्षा के लिए ;राष्ट्र की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया,ताकि उनमें राष्ट्राभिमान व् देशभक्ति की भावना बढे।”हम कौन थे ? क्या हो गए ?और क्या होंगे अभी ?आओ विचारें आज मिलकर ये समस्याएं सभी ॥”:-गुप्त जी की इन पंक्तियों में अन्तर्निहित मूल भावना को इतिहास के परिप्रेक्ष्य में समझने की आज महती आवश्यकता है।

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मुंबई शहर मे 20 साल की एक लडकी , रात 10 बजे सड़क पर अकेली खड़ी ,,


मुंबई शहर मे 20 साल की एक लडकी , रात 10 बजे सड़क पर अकेली खड़ी ,,
आने जाने वाली तमाम कार और मोटरसाइकिल सवारों ने खुद ही उसे
लिफ़्ट देनी चाही ,,
पर वो डरी सहमी सब को मना करती गयी ,,
उसके रूट की अंतिम बस छूट चुकी थी ..
अचानक एक बाइक सवार अजनबी नवयुवक गुजरा उधर से ,
वो लड़की को नही देख पाया और आगे बढ गया ,
पर लड़की ने जोर जोर से चिल्ला कर उसे रोका ,
रुकने के बाद लड़की ने उस लड़के से वहा काफ़ी दूर और सूनसान रास्ते से
हो कर जाने वाले अपने घर तक छोड़ने का निवेदन किया,
नौ जवान तैयार हो गया ,
30 मिनट मे वो नौ जवान उस लड़की को उसके घर के दरवाजे तक छोड़
चुका था ,
लड़की जब अंदर जाने लगी तो लड़के ने उसे रोक कर पहला और
आखिरी सवाल किया ..
उसने पूछा कि इतनी रात मे अकेली होने के बाद इतने कार और बाइक
वालों के खुद आग्रह के बाद भी उसने सिर्फ उसी को क्यों चुना अपने घर
तक पाहुचाने के लिये वो भी इतनी दूर से चिल्ला कर बुला कर के ???
लड़की अंदर जाने के पहले रुकी , मुस्कुराई और बोली– मैने आप
की बाइक के आगे लिखी प्लेट काफ़ी दूर से ही पढ ली थी, जिस पर
लिखा था
***जय श्री राम *******,,

अब आप भी कहदो

*****जय श्रीराम *****

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एक गुप्त समझौता ” Liaquat-Nehru Pact “


एक गुप्त समझौता ” Liaquat-Nehru Pact ”

इस बात में कोई शंका नहीं की भारत का बटवारा धर्म के आधार पर हुआ था , क्योंकि मुसलमान हिन्दुओं से नफ़रत करते थे और उनकेसाथ नहीं रहना चाहते थे . बटवारे के अनुसार सभी मुसलमानों को पाकिस्तान और हिन्दुओं को भारत चले जाना चाहिए था . लेकिन जब ऐसा हो रहा था तभी पाकिस्तानी मुसलमानों ने हिन्दुओं और सिखों पर हमले शुरू कर दिए , यही नहीं उनकी औरतों पर बलात्कार भी करने लगे . जब ऐसी ख़बरें नेहरू को मिलीं तो उसे अपनी कुर्सी खतरे में दिखाई देने लगी , क्योंकि लोग नेहरू को इसका जिम्मेदार मानं रहे थे . तब नेहरू ने लोगों का ध्यान हटाने के लिए एक चाल चली , और 2 अप्रेल 1950 को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत खान को दिल्ली बुलाकर उपाय पूछा यह बातचीत 8 अप्रेल 1950 तक यानि 6 दिनों तक चली .
लियाकत खान ने नेहरू को समझाया कि भविष्य में जब भी भारत में दंगे हो , भारत पाकिस्तान को जिम्मेदार बताएगा . और यदि पाकिस्तान में दंगे हों तो वह उसमे भारत का हाथ बताएगा . इस तरह से मामला ठंडा पड़ जायेगा . और लोग भूल जायेंगे .

इतिहास में इस गुप्त समझौते को ” Liaquat-Nehru Pact. ” कहा जाता है . और आज भी कांग्रेस इसी नीति का पालन कर रही . और इसी समझौते के कारण हमेशा मुस्लिम आतंक वादियों पर नरमी का व्यवहार करती है .

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Cubical weights


 
 
Cubical weights in graduated sizes from Allahdino (top right) and Harappa (bottom right) and a recreation of an ancient Indus trader using them to weigh goods (left). These weights conform to the standard Harappan binary weight system that was used in all of the settlements. The smallest weight in this series is 0.856 grams and the most common weight is approximately 13.7 grams, which is in the 16th ratio (e.g. they increased in ration 1:2:4:8:16:32). In the large weights the system become a decimal increase where the largest weight is 100 times the weight of the 16th ratio in the binary system. These weights were found in recent excavations at Harappa and may have been used for controlling trade and possibly for collecting taxes.

Cubical weights in graduated sizes from Allahdino (top right) and Harappa (bottom right) and a recreation of an ancient Indus trader using them to weigh goods (left). These weights conform to the standard Harappan binary weight system that was used in all of the settlements. The smallest weight in this series is 0.856 grams and the most common weight is approximately 13.7 grams, which is in the 16th ratio (e.g. they increased in ration 1:2:4:8:16:32). In the large weights the system become a decimal increase where the largest weight is 100 times the weight of the 16th ratio in the binary system. These weights were found in recent excavations at Harappa and may have been used for controlling trade and possibly for collecting taxes.

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अजा एकादशी


 

२१. अजा एकादशी

युधिष्ठिर ने पूछा : जनार्दन ! अब मैं यह सुनना चाहता हूँ कि भाद्रपद (गुजरात महाराष्ट्र के अनुसार श्रावण) मास के कृष्णपक्ष में कौन सी एकादशी होती है ? कृपया बताइये ।

भगवान श्रीकृष्ण बोले : राजन् ! एकचित्त होकर सुनो । भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की एकादशी का नाम ‘अजा’ है । वह सब पापों का नाश करनेवाली बतायी गयी है । भगवान ह्रषीकेश का पूजन करके जो इसका व्रत करता है उसके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं ।

पूर्वकाल में हरिश्चन्द्र नामक एक विख्यात चक्रवर्ती राजा हो गये हैं, जो समस्त भूमण्डल के स्वामी और सत्यप्रतिज्ञ थे । एक समय किसी कर्म का फलभोग प्राप्त होने पर उन्हें राज्य से भ्रष्ट होना पड़ा । राजा ने अपनी पत्नी और पुत्र को बेच दिया । फिर अपने को भी बेच दिया । पुण्यात्मा होते हुए भी उन्हें चाण्डाल की दासता करनी पड़ी । वे मुर्दों का कफन लिया करते थे । इतने पर भी नृपश्रेष्ठ हरिश्चन्द्र सत्य से विचलित नहीं हुए ।

इस प्रकार चाण्डाल की दासता करते हुए उनके अनेक वर्ष व्यतीत हो गये । इससे राजा को बड़ी चिन्ता हुई । वे अत्यन्त दु:खी होकर सोचने लगे: ‘क्या करुँ ? कहाँ जाऊँ? कैसे मेरा उद्धार होगा?’ इस प्रकार चिन्ता करते-करते वे शोक के समुद्र में डूब गये ।

राजा को शोकातुर जानकर महर्षि गौतम उनके पास आये । श्रेष्ठ ब्राह्मण को अपने पास आया हुआ देखकर नृपश्रेष्ठ ने उनके चरणों में प्रणाम किया और दोनों हाथ जोड़ गौतम के सामने खड़े होकर अपना सारा दु:खमय समाचार कह सुनाया ।

राजा की बात सुनकर महर्षि गौतम ने कहा :‘राजन् ! भादों के कृष्णपक्ष में अत्यन्त कल्याणमयी ‘अजा’ नाम की एकादशी आ रही है, जो पुण्य प्रदान करनेवाली है । इसका व्रत करो । इससे पाप का अन्त होगा । तुम्हारे भाग्य से आज के सातवें दिन एकादशी है । उस दिन उपवास करके रात में जागरण करना ।’ ऐसा कहकर महर्षि गौतम अन्तर्धान हो गये ।

मुनि की बात सुनकर राजा हरिश्चन्द्र ने उस उत्तम व्रत का अनुष्ठान किया । उस व्रत के प्रभाव से राजा सारे दु:खों से पार हो गये । उन्हें पत्नी पुन: प्राप्त हुई और पुत्र का जीवन मिल गया । आकाश में दुन्दुभियाँ बज उठीं । देवलोक से फूलों की वर्षा होने लगी ।

एकादशी के प्रभाव से राजा ने निष्कण्टक राज्य प्राप्त किया और अन्त में वे पुरजन तथा परिजनों के साथ स्वर्गलोक को प्राप्त हो गये ।

राजा युधिष्ठिर ! जो मनुष्य ऐसा व्रत करते हैं, वे सब पापों से मुक्त हो स्वर्गलोक में जाते हैं । इसके पढ़ने और सुनने से अश्वमेघ यज्ञ का फल मिलता है ।

 

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Bat girk


राहुल गांधी के मंदिर और हिंदुओं के प्रति शर्मनाक बयान से उनकी कुंठा और सच्चाई दोनो का पता चलता है…….
क्योंकि इसके पिता, दादा-दादी और पुर्वज उस कौम से है, जिसमें महिलाओं को इस कदर भोग की वस्तु समझा जाता है कि ये अपनी बहनों के साथ भी सेक्स संबंध बनाने से नही हिचकते…….
इसलिए मेरे सनातनी भाइयों से मेरा निवेदन है कि गियासुद्दीन गाजी के इन वंशजों की सच्चाई भारतीय जनता के सामने लाऐं……

जब बात टिपण्णी की ही चल रही है तो हम क्यों न बोलें कि…..
1) सोनिया गांधी शादी से पहले “बार” में शराब परोसा करती थी और भारत के ख़ुफ़िया दस्तावेज प्राप्त करने के लिए रूस की जासूसी कंपनी KGB ने सोनिया को एजेंट बनाकर राजीव गांधी पर डोरे डालने के निर्देश दिए थे…..
2) जब इंदिरा गांधी को गोली मारी गयी तब उनकी मौत अधिक खून बहने से हुई थी और ऐसा सोनिया के इशारों पर हुआ था जिसने इंदिरा को पास के हॉस्पिटल में एडमिट नहीं करने दिया, जानबूझकर इंदिरा को घर से काफी दूर वाले हॉस्पिटल में ले जाने का निर्देश क्यों दिया????
3) शादी के बाद माधवराव सिंधिया के साथ आधी रात में शारब पीकर सोनिया गांधी के घूमने का कारण क्या था और अगर ये ऑफिसियल था तो सोनिया गांधी गाड़ी का एक्सीडेंट होते ही चुपचाप गाड़ी से निकल कर तेजी से क्यों भागी थी???
4) अपने आप को पंडित बताने वाले नेहरु के दादा गयासुद्दीन गाजी “सुन्नी” मुसलमान थे तो ये पंडित कैसे हो गए??? रॉबर्ट हार्डी एन्ड्रूज की किताब ए लैम्प फॉर इंडिया – द स्टोरी ऑफ मदाम पण्डित में उस तथाकथित गंगाधर का चित्र छपा है, जिसके अनुसार गंगाधर असल में एक सुन्नी मुसलमान था, जिसका असली नाम गयासुद्दीन गाजी था। दरअसल नेहरू ने खुद की आत्मकथा में एक जगह लिखा है कि उनके दादा अर्थात् मोतीलाल के पिता गंगा धर थे।
5) सोनिया ने अपनी इतालियन नागरिकता का बहिष्कार नहीं किया है इंदिरा गाँधी ने अपनी राजनितिक पकड़ के चलते उसे भारतीय नागरिकता दिलवा दी, उसे भारतीय राजनीती में सहयोग के लये वह भारत में एक अवैध नागरिकता के साथ रह रही है, गृह मंत्री द्वारा भी इसपर आजतक कोई कार्यवाही क्यों नहीं की गई???
6) राहुल गांधी पर आज तक सुकन्या देवी बलात्कार पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं की गयी?? और राहुल गाँधी पर मुकदमा करने वाला सुकन्या देवी का परिवार मुकदमा करने के बाद अचानक कहाँ गया?
बातें बहुत सारी हैं जो गांधी परिवार पर प्रश्न चिन्ह लगाती हैं, ध्यान आया तो अन्य सभी बातों को आप मित्रों तक पहुंचाऊंगा…..

राहुल गांधी के मंदिर और हिंदुओं के प्रति शर्मनाक बयान से उनकी कुंठा और सच्चाई दोनो का पता चलता है.......
क्योंकि इसके पिता, दादा-दादी और पुर्वज उस कौम से है, जिसमें महिलाओं को इस कदर भोग की वस्तु समझा जाता है कि ये अपनी बहनों के साथ भी सेक्स संबंध बनाने से नही हिचकते.......
इसलिए मेरे सनातनी भाइयों से मेरा निवेदन है कि गियासुद्दीन गाजी के इन वंशजों की सच्चाई भारतीय जनता के सामने लाऐं......

जब बात टिपण्णी की ही चल रही है तो हम क्यों न बोलें कि.....
1) सोनिया गांधी शादी से पहले "बार" में शराब परोसा करती थी और भारत के ख़ुफ़िया दस्तावेज प्राप्त करने के लिए रूस की जासूसी कंपनी KGB ने सोनिया को एजेंट बनाकर राजीव गांधी पर डोरे डालने के निर्देश दिए थे.....
2) जब इंदिरा गांधी को गोली मारी गयी तब उनकी मौत अधिक खून बहने से हुई थी और ऐसा सोनिया के इशारों पर हुआ था जिसने इंदिरा को पास के हॉस्पिटल में एडमिट नहीं करने दिया, जानबूझकर इंदिरा को घर से काफी दूर वाले हॉस्पिटल में ले जाने का निर्देश क्यों दिया????
3) शादी के बाद माधवराव सिंधिया के साथ आधी रात में शारब पीकर सोनिया गांधी के घूमने का कारण क्या था और अगर ये ऑफिसियल था तो सोनिया गांधी गाड़ी का एक्सीडेंट होते ही चुपचाप गाड़ी से निकल कर तेजी से क्यों भागी थी???
4) अपने आप को पंडित बताने वाले नेहरु के दादा गयासुद्दीन गाजी "सुन्नी" मुसलमान थे तो ये पंडित कैसे हो गए??? रॉबर्ट हार्डी एन्ड्रूज की किताब ए लैम्प फॉर इंडिया - द स्टोरी ऑफ मदाम पण्डित में उस तथाकथित गंगाधर का चित्र छपा है, जिसके अनुसार गंगाधर असल में एक सुन्नी मुसलमान था, जिसका असली नाम गयासुद्दीन गाजी था। दरअसल नेहरू ने खुद की आत्मकथा में एक जगह लिखा है कि उनके दादा अर्थात् मोतीलाल के पिता गंगा धर थे।
5) सोनिया ने अपनी इतालियन नागरिकता का बहिष्कार नहीं किया है इंदिरा गाँधी ने अपनी राजनितिक पकड़ के चलते उसे भारतीय नागरिकता दिलवा दी, उसे भारतीय राजनीती में सहयोग के लये वह भारत में एक अवैध नागरिकता के साथ रह रही है, गृह मंत्री द्वारा भी इसपर आजतक कोई कार्यवाही क्यों नहीं की गई???
6) राहुल गांधी पर आज तक सुकन्या देवी बलात्कार पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं की गयी??  और राहुल गाँधी पर मुकदमा करने वाला सुकन्या देवी का परिवार मुकदमा करने के बाद अचानक कहाँ गया?
बातें बहुत सारी हैं जो गांधी परिवार पर प्रश्न चिन्ह लगाती हैं, ध्यान आया तो अन्य सभी बातों को आप मित्रों तक पहुंचाऊंगा.....
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Six Vishnu Avatars In South Confirm South Sanatana Dharma


Ramani's blog

An examination of Lord Vishnu’s Avatars reveal a curious fact.

Dasavatars of Vishnu.jpg. Dasavatars of Vishnu. Image credit. http://www.exoticindiaart.com/product/paintings/dasavatara-ten-incarnations-of-lord-vishnu-PF79/

  1. Matsya, the fish-avatar who saved Manu – the progenitor of mankind from the great deluge and rescued the Vedic scriptures by killing a demon. Story can be found in the Matsya Purana.
  2. Kurma, the tortoise-avatar, who helped in the Samudra manthan – the churning of the ocean. Story can be found in the Kurma Purana.
  3. Varaha, the boar-avatar, who rescued the earth from the ocean, by killing her kidnapper-demon Hiranyaksha. Story can be found in the Varaha Purana.
  4. Narasimha, the half man-half lion avatar, who killed the tyrant demon-king Hiranyakashipu, to rescue the demon’s son Prahlada, who was a Vishnu-devotee
  5. Vamana, the dwarf-avatar, who subdued the king Maha Bali. Story can be found in the Vamana Purana.
  6. Parashurama

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बहुत समय पहले की बात है एक विख्यात


 
 
बहुत  समय  पहले  की  बात  है  एक  विख्यात  ऋषि  गुरुकुल  में  बालकों  को  शिक्षा  प्रदान  किया  करते  थे . उनके गुरुकुल में बड़े-बड़े राजा महाराजाओं  के पुत्रों से  लेकर साधारण परिवार के लड़के भी पढ़ा करते थे।
वर्षों से शिक्षा प्राप्त कर रहे शिष्यों की शिक्षा आज पूर्ण हो रही थी और सभी बड़े उत्साह के साथ अपने अपने घरों को लौटने की तैयारी कर रहे थे कि तभी ऋषिवर की तेज आवाज सभी के कानो में पड़ी ,
” आप सभी मैदान में एकत्रित हो जाएं। “
आदेश सुनते ही शिष्यों ने ऐसा ही किया।
ऋषिवर बोले , “ प्रिय  शिष्यों  , आज  इस  गुरुकुल  में  आपका  अंतिम  दिन  है . मैं  चाहता  हूँ  कि  यहाँ  से  प्रस्थान  करने  से  पहले  आप  सभी  एक  दौड़  में  हिस्सा  लें .
यह  एक  बाधा  दौड़  होगी  और  इसमें  आपको  कहीं  कूदना  तो  कहीं  पानी  में दौड़ना  होगा  और  इसके  आखिरी  हिस्से  में  आपको  एक  अँधेरी  सुरंग  से  भी  गुजरना  पड़ेगा .”
तो  क्या  आप  सब  तैयार  हैं ?”
” हाँ , हम  तैयार  हैं ”, शिष्य  एक  स्वर  में  बोले .
दौड़ शुरू  हुई .
सभी  तेजी  से  भागने  लगे . वे  तमाम  बाधाओं  को  पार  करते  हुए  अंत  में  सुरंग  के  पास  पहुंचे  . वहाँ  बहुत  अँधेरा  था  और  उसमे  जगह – जगह  नुकीले  पत्थर  भी  पड़े  थे  जिनके  चुभने  पर  असहनीय  पीड़ा  का  अनुभव  होता  था .
सभी  असमंजस  में  पड़  गए , जहाँ  अभी  तक  दौड़  में  सभी  एक  सामान  बर्ताव  कर  रहे थे  वहीँ  अब  सभी  अलग -अलग  व्यवहार  करने  लगे ; खैर , सभी ने ऐसे-तैसे   दौड़  ख़त्म  की और ऋषिवर के समक्ष एकत्रित हुए।
 “पुत्रों ! मैं  देख  रहा  हूँ  कि  कुछ  लोगों  ने  दौड़  बहुत  जल्दी  पूरी  कर  ली  और  कुछ  ने  बहुत अधिक  समय  लिया  , भला   ऐसा  क्यों  ?”, ऋषिवर ने प्रश्न किया।
यह सुनकर एक  शिष्य  बोला , “ गुरु  जी  , हम  सभी  लगभग  साथ –साथ  ही  दौड़  रहे  थे  पर  सुरंग  में  पहुचते  ही  स्थिति  बदल  गयी …कोई  दुसरे  को  धक्का  देकर  आगे  निकलने  में   लगा  हुआ  था  तो  कोई  संभल -संभल  कर  आगे  बढ़  रहा  था …और  कुछ तो ऐसे  भी  थे  जो  पैरों  में  चुभ  रहे  पत्थरों  को  उठा -उठा  कर  अपनी  जेब  में  रख  ले  रहे  थे  ताकि  बाद  में  आने  वाले  लोगों  को  पीड़ा  ना  सहनी  पड़े…. इसलिए सब ने अलग-अलग समय में दौड़ पूरी की .”
“ठीक है ! जिन  लोगों  ने  पत्थर  उठाये  हैं  वे  आगे  आएं  और  मुझे  वो  पत्थर  दिखाएँ  “, ऋषिवर  ने  आदेश  दिया .
आदेश  सुनते  ही  कुछ  शिष्य  सामने  आये  और  पत्थर  निकालने  लगे . पर  ये  क्या  जिन्हे  वे  पत्थर  समझ  रहे  थे  दरअसल  वे  बहुमूल्य  हीरे  थे .  सभी आश्चर्य  में  पड़  गए  और  ऋषिवर  की   तरफ  देखने  लगे .
“ मैं  जानता  हूँ  आप  लोग  इन  हीरों  के  देखकर  आश्चर्य  में  पड़  गए  हैं .” ऋषिवर  बोले।
“ दरअसल इन्हे मैंने ही उस सुरंग में डाला था , और यह दूसरों के विषय में सोचने वालों शिष्यों को मेरा इनाम है।
पुत्रों यह दौड़ जीवन की भागम -भाग को दर्शाती है, जहाँ हर कोई कुछ न कुछ पाने के लिए भाग रहा है . पर  अंत में वही सबसे समृद्ध होता है जो इस भागम -भाग में भी दूसरों के बारे में सोचने और उनका भला करने से नहीं चूकता है .
अतः  यहाँ  से  जाते -जाते  इस बात को गाँठ बाँध लीजिये कि आप अपने जीवन  में  सफलता  की  जो  इमारत  खड़ी  करें  उसमे  परोपकार  की  ईंटे  लगाना  कभी  ना भूलें , अंततः  वही आपकी सबसे अनमोल जमा-पूँजी होगी । “

बहुत समय पहले की बात है एक विख्यात ऋषि गुरुकुल में बालकों को शिक्षा प्रदान किया करते थे . उनके गुरुकुल में बड़े-बड़े राजा महाराजाओं के पुत्रों से लेकर साधारण परिवार के लड़के भी पढ़ा करते थे।
वर्षों से शिक्षा प्राप्त कर रहे शिष्यों की शिक्षा आज पूर्ण हो रही थी और सभी बड़े उत्साह के साथ अपने अपने घरों को लौटने की तैयारी कर रहे थे कि तभी ऋषिवर की तेज आवाज सभी के कानो में पड़ी ,
” आप सभी मैदान में एकत्रित हो जाएं। “
आदेश सुनते ही शिष्यों ने ऐसा ही किया।
ऋषिवर बोले , “ प्रिय शिष्यों , आज इस गुरुकुल में आपका अंतिम दिन है . मैं चाहता हूँ कि यहाँ से प्रस्थान करने से पहले आप सभी एक दौड़ में हिस्सा लें .
यह एक बाधा दौड़ होगी और इसमें आपको कहीं कूदना तो कहीं पानी में दौड़ना होगा और इसके आखिरी हिस्से में आपको एक अँधेरी सुरंग से भी गुजरना पड़ेगा .”
तो क्या आप सब तैयार हैं ?”
” हाँ , हम तैयार हैं ”, शिष्य एक स्वर में बोले .
दौड़ शुरू हुई .
सभी तेजी से भागने लगे . वे तमाम बाधाओं को पार करते हुए अंत में सुरंग के पास पहुंचे . वहाँ बहुत अँधेरा था और उसमे जगह – जगह नुकीले पत्थर भी पड़े थे जिनके चुभने पर असहनीय पीड़ा का अनुभव होता था .
सभी असमंजस में पड़ गए , जहाँ अभी तक दौड़ में सभी एक सामान बर्ताव कर रहे थे वहीँ अब सभी अलग -अलग व्यवहार करने लगे ; खैर , सभी ने ऐसे-तैसे दौड़ ख़त्म की और ऋषिवर के समक्ष एकत्रित हुए।
“पुत्रों ! मैं देख रहा हूँ कि कुछ लोगों ने दौड़ बहुत जल्दी पूरी कर ली और कुछ ने बहुत अधिक समय लिया , भला ऐसा क्यों ?”, ऋषिवर ने प्रश्न किया।
यह सुनकर एक शिष्य बोला , “ गुरु जी , हम सभी लगभग साथ –साथ ही दौड़ रहे थे पर सुरंग में पहुचते ही स्थिति बदल गयी …कोई दुसरे को धक्का देकर आगे निकलने में लगा हुआ था तो कोई संभल -संभल कर आगे बढ़ रहा था …और कुछ तो ऐसे भी थे जो पैरों में चुभ रहे पत्थरों को उठा -उठा कर अपनी जेब में रख ले रहे थे ताकि बाद में आने वाले लोगों को पीड़ा ना सहनी पड़े…. इसलिए सब ने अलग-अलग समय में दौड़ पूरी की .”
“ठीक है ! जिन लोगों ने पत्थर उठाये हैं वे आगे आएं और मुझे वो पत्थर दिखाएँ “, ऋषिवर ने आदेश दिया .
आदेश सुनते ही कुछ शिष्य सामने आये और पत्थर निकालने लगे . पर ये क्या जिन्हे वे पत्थर समझ रहे थे दरअसल वे बहुमूल्य हीरे थे . सभी आश्चर्य में पड़ गए और ऋषिवर की तरफ देखने लगे .
“ मैं जानता हूँ आप लोग इन हीरों के देखकर आश्चर्य में पड़ गए हैं .” ऋषिवर बोले।
“ दरअसल इन्हे मैंने ही उस सुरंग में डाला था , और यह दूसरों के विषय में सोचने वालों शिष्यों को मेरा इनाम है।
पुत्रों यह दौड़ जीवन की भागम -भाग को दर्शाती है, जहाँ हर कोई कुछ न कुछ पाने के लिए भाग रहा है . पर अंत में वही सबसे समृद्ध होता है जो इस भागम -भाग में भी दूसरों के बारे में सोचने और उनका भला करने से नहीं चूकता है .
अतः यहाँ से जाते -जाते इस बात को गाँठ बाँध लीजिये कि आप अपने जीवन में सफलता की जो इमारत खड़ी करें उसमे परोपकार की ईंटे लगाना कभी ना भूलें , अंततः वही आपकी सबसे अनमोल जमा-पूँजी होगी । “

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देशद्रोही Shah Rukh Khan की सच्चाई का पर्दाफाश !!


 
 
देशद्रोही Shah Rukh Khan की सच्चाई का पर्दाफाश !!

1= Pakistani खिलाड़ियों को IPL में जगह नहीं मिलने पर शाहरुख खान को निराशा हुई. बाद में शाहरुख ने कहा कि वह IPL में Pakistani खिलाड़ियों को शामिल करना पसंद करते है. Pakistan के प्रति इतनी हमदर्दी का क्या कारण हो सकता है??
2= पाकिस्तान में जब बाढ़ आई थी तो इसने दुबई, लंदन तक में जाकर स्टेज शो किये और बाढ़ पीड़ितों के लिए चंदा इकठ्ठा किया पर जब देव भूमि Uttarakhand में भीषण आपदा आई तो इसने 1 रुपये की भी मदद नही की..
3= Pakistani आतंकवादी हाफ़िज़ सईद ने जब ये बोला की अगर Shahrukh को India में रहने में कोई दिक्कत है, तो शाहरुख खान चाहे तो Pakistan में आकर रह सकते हैं तो इस Shahrukh Khan ने ये तक नही बोला की मुंबई हमले का मास्टरमाइंड हाफ़िज़ सईद कौन होता है मुझे पकिस्तान में आकर रहने के लिए कहने वाला??
4= शाहरुख खान ने कहा था में Pakistan जाना चाहता हूँ । मुझे पाकिस्तान बहुत पसंद है और मेरा जन्म भी पाकिस्तान में हुआ था इसीलिए भी मुझे पाकिस्तान बहुत पसंद है। ये सारे बाते शाहरुख खान ने एजेंडा Aaj Tak कार्यक्रम में कहीं है।
5= शाहरुख खान ने Baba Ramdev द्वारा काले धन और भ्रष्टाचार पर किये गए आन्दोलन पर कहा था की Ram dev का अभियान राजनीति से प्रेरित है. “कोई Support नहीं करूँगा, यह उनका एजेंडा है..
6= शाहरुख खान, अमेरिकी खुफिया एजेंसी FBI की संदिग्ध लिस्ट मे है, अलकायदा के आतंकवादियों को Fund देने के लिए शाहरुख खान FBI की संदिग्ध लिस्ट मे है. भारत से सेकड़ो लोग हर रोज America जाते है लेकिन किसी को इस तरह क्यों नही पूछ-ताछ और जाँच पड़ताल की जाती? सिर्फ शाहरुख खान को ही FBI क्यों रोकती है? शाहरुख खान को पहले भी 3-4 बार Airport पर रोका जा चुका है..
7= शाहरुख खान पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल जहीरुल इस्लाम का रिश्तेदार है..
8= जब Mumbai के बाज़ारों में बम धमाके हुए थे उस रात ये Mumbai में अपनी फिल्म की सफलता की पार्टी मना रहा था जबकि एश्वर्या राय ने उस दिन बम धमाको की वजह से Delhi में आयोजित अपने सम्मान समारोह में भाग लेने से मना कर दिया था..
9= IPL में नशे में धुत्त होकर इसने एक Security Guard की पिटाई की थी जिसके लिए इसके ऊपर 2 साल तक वानखेड़े स्टेडियम में घुसने पर बैन लगा दिया गया था..
10= कुछ ही दिन पहले जब पूरा देश BJP के नेता गोपी नाथ मुण्डे के निधन पर शोक मना रहा था तो Shah Rukh Khan कोलकाता मे अपनी टीम KKR की जीत का जश्न मना रहा था..
दोस्तों इस पाकिस्तान परस्त गद्दार की फिल्म देखने वाले लोग मेरी नज़र में देशद्रोही हैं. क्या आप अब भी सोचते है की शाहरुख की निष्ठां भारत के साथ है, और वो एक सच्चा देशप्रेमी और देशभक्त है?? आखिर कब तक छुटेगा शाहरुख के प्रति मोह ?? धोखे में ना रहे, फिल्मो में देशभक्ति गीत गा लेने से, तिरंगे का अभिवादन और तिरंगे को फहरा लेने से कोई देश भक्त नहीं हो जाता..आज से ही इस पाकिस्तानी शाहरुख खान की फिल्मे देखना बंद करे. ..
जय हिन्द , वन्दे मातरम"

देशद्रोही Shah Rukh Khan की सच्चाई का पर्दाफाश !!

1= Pakistani खिलाड़ियों को IPL में जगह नहीं मिलने पर शाहरुख खान को निराशा हुई. बाद में शाहरुख ने कहा कि वह IPL में Pakistani खिलाड़ियों को शामिल करना पसंद करते है. Pakistan के प्रति इतनी हमदर्दी का क्या कारण हो सकता है??
2= पाकिस्तान में जब बाढ़ आई थी तो इसने दुबई, लंदन तक में जाकर स्टेज शो किये और बाढ़ पीड़ितों के लिए चंदा इकठ्ठा किया पर जब देव भूमि Uttarakhand में भीषण आपदा आई तो इसने 1 रुपये की भी मदद नही की..
3= Pakistani आतंकवादी हाफ़िज़ सईद ने जब ये बोला की अगर Shahrukh को India में रहने में कोई दिक्कत है, तो शाहरुख खान चाहे तो Pakistan में आकर रह सकते हैं तो इस Shahrukh Khan ने ये तक नही बोला की मुंबई हमले का मास्टरमाइंड हाफ़िज़ सईद कौन होता है मुझे पकिस्तान में आकर रहने के लिए कहने वाला??
4= शाहरुख खान ने कहा था में Pakistan जाना चाहता हूँ । मुझे पाकिस्तान बहुत पसंद है और मेरा जन्म भी पाकिस्तान में हुआ था इसीलिए भी मुझे पाकिस्तान बहुत पसंद है। ये सारे बाते शाहरुख खान ने एजेंडा Aaj Tak कार्यक्रम में कहीं है।
5= शाहरुख खान ने Baba Ramdev द्वारा काले धन और भ्रष्टाचार पर किये गए आन्दोलन पर कहा था की Ram dev का अभियान राजनीति से प्रेरित है. “कोई Support नहीं करूँगा, यह उनका एजेंडा है..
6= शाहरुख खान, अमेरिकी खुफिया एजेंसी FBI की संदिग्ध लिस्ट मे है, अलकायदा के आतंकवादियों को Fund देने के लिए शाहरुख खान FBI की संदिग्ध लिस्ट मे है. भारत से सेकड़ो लोग हर रोज America जाते है लेकिन किसी को इस तरह क्यों नही पूछ-ताछ और जाँच पड़ताल की जाती? सिर्फ शाहरुख खान को ही FBI क्यों रोकती है? शाहरुख खान को पहले भी 3-4 बार Airport पर रोका जा चुका है..
7= शाहरुख खान पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल जहीरुल इस्लाम का रिश्तेदार है..
8= जब Mumbai के बाज़ारों में बम धमाके हुए थे उस रात ये Mumbai में अपनी फिल्म की सफलता की पार्टी मना रहा था जबकि एश्वर्या राय ने उस दिन बम धमाको की वजह से Delhi में आयोजित अपने सम्मान समारोह में भाग लेने से मना कर दिया था..
9= IPL में नशे में धुत्त होकर इसने एक Security Guard की पिटाई की थी जिसके लिए इसके ऊपर 2 साल तक वानखेड़े स्टेडियम में घुसने पर बैन लगा दिया गया था..
10= कुछ ही दिन पहले जब पूरा देश BJP के नेता गोपी नाथ मुण्डे के निधन पर शोक मना रहा था तो Shah Rukh Khan कोलकाता मे अपनी टीम KKR की जीत का जश्न मना रहा था..
दोस्तों इस पाकिस्तान परस्त गद्दार की फिल्म देखने वाले लोग मेरी नज़र में देशद्रोही हैं. क्या आप अब भी सोचते है की शाहरुख की निष्ठां भारत के साथ है, और वो एक सच्चा देशप्रेमी और देशभक्त है?? आखिर कब तक छुटेगा शाहरुख के प्रति मोह ?? धोखे में ना रहे, फिल्मो में देशभक्ति गीत गा लेने से, तिरंगे का अभिवादन और तिरंगे को फहरा लेने से कोई देश भक्त नहीं हो जाता..आज से ही इस पाकिस्तानी शाहरुख खान की फिल्मे देखना बंद करे. ..
जय हिन्द , वन्दे मातरम”

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किसी के पास इसका उत्तर हैं क्या ……… मित्रो


किसी के पास इसका उत्तर हैं क्या ……… मित्रो

 
भारत रत्न उन लोगों को दिया जाता हैं जिन्होंने अपना तन मन और जीवन सब कुछ देश के लिए न्योछावर कर दिया , 
अरे कान्ग्रेसियो जरा बताओ कि राजीव गांधी किस एन्गल से भारत रत्न के हकदार थे... 

- रक्षा सौदों में दलाली की परंपरा राजीव गांधी के समय में शुरू हुई,जब बोफोर्स तोपो की दलाली में राजीव गांधी की भूमिका पाई गई... 

- इटालियन दलाल क्वात्रोच्चि को बचाने वाले राजीव गांधी ही थे...

- देश की सबसे भयंकर भोपाल गैस त्रासदी के गुनहगार हेन्डरसन को देश से बाहर भगाने में राजीव गांधी सरकार ने पूरा सहयोग किया ...

- लाखो तमिल हिन्दूओ की जान जोखिम में डालकर श्रीलंका में सेना भेजने की ऐतिहासिक भूल करने वाले राजीव गांधी ही थे ...

- भारत के सबसे अच्छे पडोसी मित्र नेपाल से खराब सम्बन्धों की शुरुआत राजीव गांधी ने ही की थी, जब सोनिया के दबाव में उन्होंने नेपाल पर प्रतिबंध लगा दिए थे..

- नेताओं द्वारा खुलेआम भडकाउ और नफरत भरे बयान देकर दन्गा भडकाने की परंपरा राजीव गांधी ने शुरू की थी, जब उन्होंने खुलेआम "बड़ा पेड़ गिरने" जैसे जहरीले व नफरत भरे बयान देकर हजारों सिखों के नरसंहार को जायज ठहराया था... 

- शाहबानो मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ जाकर मुस्लिम तुष्टीकरण की सबसे बड़ी मिसाल राजीव गांधी ने ही कायम की थी .. 

- विकिलिक्स ने खुलासा किया था कि राजीव गांधी स्वीडिश कम्पनी के लिए दलाली करते थे... 

इसके अलावा जिस नेहरू ने प्रधानमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा में देश का विभाजन करवा दिया.... जिस नेहरू की अय्याशी के किस्से जगजाहिर थे... जिस नेहरू की वजह से कश्मीर भारत के हाथ से निकल कर एक नासूर बन गया,,... जिस नेहरू की वजह से चीन के हाथों शर्मनाक हार मिली व अरुणाचल की हजारों किमी जमीन भारत ने गवा दी... उस नेहरू को भारत रत्न क्यों दिया गया?

भारत रत्न उन लोगों को दिया जाता हैं जिन्होंने अपना तन मन और जीवन सब कुछ देश के लिए न्योछावर कर दिया ,
अरे कान्ग्रेसियो जरा बताओ कि राजीव गांधी किस एन्गल से भारत रत्न के हकदार थे…

– रक्षा सौदों में दलाली की परंपरा राजीव गांधी के समय में शुरू हुई,जब बोफोर्स तोपो की दलाली में राजीव गांधी की भूमिका पाई गई…

– इटालियन दलाल क्वात्रोच्चि को बचाने वाले राजीव गांधी ही थे…

– देश की सबसे भयंकर भोपाल गैस त्रासदी के गुनहगार हेन्डरसन को देश से बाहर भगाने में राजीव गांधी सरकार ने पूरा सहयोग किया …

– लाखो तमिल हिन्दूओ की जान जोखिम में डालकर श्रीलंका में सेना भेजने की ऐतिहासिक भूल करने वाले राजीव गांधी ही थे …

– भारत के सबसे अच्छे पडोसी मित्र नेपाल से खराब सम्बन्धों की शुरुआत राजीव गांधी ने ही की थी, जब सोनिया के दबाव में उन्होंने नेपाल पर प्रतिबंध लगा दिए थे..

– नेताओं द्वारा खुलेआम भडकाउ और नफरत भरे बयान देकर दन्गा भडकाने की परंपरा राजीव गांधी ने शुरू की थी, जब उन्होंने खुलेआम “बड़ा पेड़ गिरने” जैसे जहरीले व नफरत भरे बयान देकर हजारों सिखों के नरसंहार को जायज ठहराया था…

– शाहबानो मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ जाकर मुस्लिम तुष्टीकरण की सबसे बड़ी मिसाल राजीव गांधी ने ही कायम की थी ..

– विकिलिक्स ने खुलासा किया था कि राजीव गांधी स्वीडिश कम्पनी के लिए दलाली करते थे…

इसके अलावा जिस नेहरू ने प्रधानमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा में देश का विभाजन करवा दिया…. जिस नेहरू की अय्याशी के किस्से जगजाहिर थे… जिस नेहरू की वजह से कश्मीर भारत के हाथ से निकल कर एक नासूर बन गया,,… जिस नेहरू की वजह से चीन के हाथों शर्मनाक हार मिली व अरुणाचल की हजारों किमी जमीन भारत ने गवा दी… उस नेहरू को भारत रत्न क्यों दिया गया?