Posted in हिन्दू पतन

याद रखिये :


याद रखिये :—

अपने “भूतकाल” को भूलने वाले लोगो का “भविष्य” सदा “अंधकारमय”
ही होता है | याद रहे हमारा देश भी सालों से “ईराकी आतंकियों” जैसे लोगो से ही “पीड़ित” रहा है, और आज
भी त्रस्त है …

इराक में आज जो हो रहा है, उससे भी कहीं “बर्बर हमलों” को हमारे देश ने झेला है.

(1) — मीर कासिम ने सिंध में रात को धोखे से घुस कर एक रात में 50000
से ज्यादा हिन्दुओं का कत्ले आम कर सिंध पर कब्ज़ा किया।

(2) — सोमनाथ मंदिर के अन्दर मौजूद 32500 ब्राह्मणों के खून से मुहम्मद
गजनवी ने परिसर को नहला दिया था।

(3) — सोमनाथ में लगी भगवान की मूर्तियों को मुहम्मद गजनवी ने
अपने दरबार और शोचालय के सीढियों में
लगवा दिया था ताकि वो रोज उनके पैर नीचे आती रहे।

(4) — औरंगजेब के इस्लाम कबूल करवाने के खुले आदेश के बाद सबसे
ज्यादा तबाही आई। बहुत से हिन्दुओ को जबरदस्ती से मुस्लिम बनवाया गया।

(5) — औरंगजेब ने ब्राह्मणों द्वारा इस्लाम कबूल ना करने पर उन्हें गर्म पानी में उबाल कर जिन्दा चमड़ी उतरवाने का फरमान
जारी किया। ब्राह्मणों की शिखाएं और जनेउ जलाकर औरंगजेब ने अपने नहाने
का पानी गर्म किया।

(6) — मुहम्मद जलालुदीन ने हर हिन्दू राज्य जीतने पर वहां की लडकियों को उठवा दिया जो मीना बाजार और हरम में पंहुचा दी जाती थीं.

(7) — अजयमेरु का सोमेश्वर नाथ शिव मंदिर तोड़कर अजमेर दरगाह
खड़ी की गयी साथ ही वैष्णव मंदिर तोड़ ढाई दिन का झोपड़ा तयार किया गया। इनका सबूत है वहां लगी कलाकृतियां जिस पर हिन्दू देवी देवता स्वस्तिक आदि बने हुए हैं.

(8) — अलाउदीन खिलजी की सेना से धरम और कुल की रक्षा करने के लिए
चित्तौड़ की रानी पद्मिनी और 26000 राजपूत वीरंगानो ने अग्नि कुंड में कूदकर जोहर प्रथा निभाई।

(9) — बहादुर शाह जफ़र की चित्तौड़ पर आक्रमण के बाद फिर मुगलों से धरम
और स्वाभिमान रक्षा के लिए चितौड़ की रानी कर्णावती ने 18000 राजपूत स्त्रियों के साथ अग्निकुंड में कूद जोहर करना चाहा पर लकड़ी कम
पड़ने के कारन बारूद के ढेर के साथ वीरांगनाओ ने खुद को उड़ा दिया।

(10) — मुहम्मद जलालुदीन के आक्रमण पर चित्तौड़ में फिर महारानी जयमल मेड़तिया ने 12000 राजपूत
स्त्रियों के साथ अग्निकुंड में कूद जोहर किया।

(11) बंटवारे के वक्त हुए “कत्लेआम” के आज भी “सेकड़ो गवाह” जिन्दा मिल
जायेंगे, उस वक्त हमारी माता बहिनों का क्या हाल
हुआ था और हिन्दुओ का कितना लहूँ बहा था, याद कर के ही रूह काँप जाती है | लेकिन भारतीय “हिन्दू
समाज” की “सोच” कैसी हो गई ये मै भी जानता |

(12) सिर्फ कल ही की बात है–
कश्मीर में हिन्दुओ के साथ
क्या क्या जुल्म किये गये और जुल्म सहने और आँखों से देखने वाले लोग अभी तक जिन्दा है सिर्फ हम ही उन्हें नजरंदाज कर रहे है |

एक समय था अरब के “पर्शिया से लेकर इंडोनेशिया” तक हिन्दू धरम अनुयायी थी, कितने करोड़ लाखो की लाशे बिछा दी गयी,
कितनी ही स्त्रियों ने बलिदान दिए,
कितने लाखो मन्दिर टूटे, कितने तरह के जुल्म हए तब भी आज हम कुछ हिन्दू बचे हुए है।
अपने “इतिहास” को “भूलने वाले” एक “सफल भविष्य” नहीं बना सकते।

इसलिये उठो, जागो और दहाड़ो हिँदूओँ..!!

जय महाकाल..!!!

याद रखिये :---

अपने "भूतकाल" को भूलने वाले लोगो का "भविष्य" सदा "अंधकारमय"
ही होता है | याद रहे हमारा देश भी सालों से "ईराकी आतंकियों" जैसे लोगो से ही "पीड़ित" रहा है, और आज
भी त्रस्त है …

इराक में आज जो हो रहा है, उससे भी कहीं "बर्बर हमलों" को हमारे देश ने झेला है.

(1) -- मीर कासिम ने सिंध में रात को धोखे से घुस कर एक रात में 50000
से ज्यादा हिन्दुओं का कत्ले आम कर सिंध पर कब्ज़ा किया।

(2) -- सोमनाथ मंदिर के अन्दर मौजूद 32500 ब्राह्मणों के खून से मुहम्मद
गजनवी ने परिसर को नहला दिया था।

(3) -- सोमनाथ में लगी भगवान की मूर्तियों को मुहम्मद गजनवी ने
अपने दरबार और शोचालय के सीढियों में
लगवा दिया था ताकि वो रोज उनके पैर नीचे आती रहे।

(4) -- औरंगजेब के इस्लाम कबूल करवाने के खुले आदेश के बाद सबसे
ज्यादा तबाही आई। बहुत से हिन्दुओ को जबरदस्ती से मुस्लिम बनवाया गया।

(5) -- औरंगजेब ने ब्राह्मणों द्वारा इस्लाम कबूल ना करने पर उन्हें गर्म पानी में उबाल कर जिन्दा चमड़ी उतरवाने का फरमान
जारी किया। ब्राह्मणों की शिखाएं और जनेउ जलाकर औरंगजेब ने अपने नहाने
का पानी गर्म किया।

(6) -- मुहम्मद जलालुदीन ने हर हिन्दू राज्य जीतने पर वहां की लडकियों को उठवा दिया जो मीना बाजार और हरम में पंहुचा दी जाती थीं.

(7) -- अजयमेरु का सोमेश्वर नाथ शिव मंदिर तोड़कर अजमेर दरगाह
खड़ी की गयी साथ ही वैष्णव मंदिर तोड़ ढाई दिन का झोपड़ा तयार किया गया। इनका सबूत है वहां लगी कलाकृतियां जिस पर हिन्दू देवी देवता स्वस्तिक आदि बने हुए हैं.

(8) -- अलाउदीन खिलजी की सेना से धरम और कुल की रक्षा करने के लिए
चित्तौड़ की रानी पद्मिनी और 26000 राजपूत वीरंगानो ने अग्नि कुंड में कूदकर जोहर प्रथा निभाई।

(9) -- बहादुर शाह जफ़र की चित्तौड़ पर आक्रमण के बाद फिर मुगलों से धरम
और स्वाभिमान रक्षा के लिए चितौड़ की रानी कर्णावती ने 18000 राजपूत स्त्रियों के साथ अग्निकुंड में कूद जोहर करना चाहा पर लकड़ी कम
पड़ने के कारन बारूद के ढेर के साथ वीरांगनाओ ने खुद को उड़ा दिया।

(10) -- मुहम्मद जलालुदीन के आक्रमण पर चित्तौड़ में फिर महारानी जयमल मेड़तिया ने 12000 राजपूत
स्त्रियों के साथ अग्निकुंड में कूद जोहर किया।

(11) बंटवारे के वक्त हुए "कत्लेआम" के आज भी "सेकड़ो गवाह" जिन्दा मिल
जायेंगे, उस वक्त हमारी माता बहिनों का क्या हाल
हुआ था और हिन्दुओ का कितना लहूँ बहा था, याद कर के ही रूह काँप जाती है | लेकिन भारतीय "हिन्दू
समाज" की "सोच" कैसी हो गई ये मै भी जानता |

(12) सिर्फ कल ही की बात है--
कश्मीर में हिन्दुओ के साथ
क्या क्या जुल्म किये गये और जुल्म सहने और आँखों से देखने वाले लोग अभी तक जिन्दा है सिर्फ हम ही उन्हें नजरंदाज कर रहे है |

एक समय था अरब के "पर्शिया से लेकर इंडोनेशिया" तक हिन्दू धरम अनुयायी थी, कितने करोड़ लाखो की लाशे बिछा दी गयी,
कितनी ही स्त्रियों ने बलिदान दिए,
कितने लाखो मन्दिर टूटे, कितने तरह के जुल्म हए तब भी आज हम कुछ हिन्दू बचे हुए है। 
अपने "इतिहास" को "भूलने वाले" एक "सफल भविष्य" नहीं बना सकते। 

इसलिये उठो, जागो और दहाड़ो हिँदूओँ..!!

जय महाकाल..!!!

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