Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

बीकानेर के राजा रायसिंहजी का भाई अमरसिंह


बीकानेर के राजा रायसिंहजी का भाई अमरसिंह
किसी बात पर अकबर से नाराजहो बागी बन
गया था और इसलिए उन्हे पकड़ने के लिए अकबर ने
आरबखां को सेना के साथ जाने का हुक्म दिया | इस
बात का पता जब अमरसिंह के बड़े भाईपृथ्वीराजसिंह
जी को लगा तो वे अकबर के पास गए बोले- “
मेरा भाई अमर बादशाह से विमुख हुआ है आपके शासित
गांवों में उसने लूटपाट
की हैउसकी तो उसको सजा मिलनी चाहिए पर एक
बात है आपने जिन्हें उसे पकड़ने हेतु भेजा है वह उनसे
कभी पकड़ में नहीं आएगा | ये पकड़ने जाने वाले मारे
जायेंगे | ये पक्की बात है हजरत इसे गाँठ बांधलें |”अकबर
बोला- “पृथ्वीराज ! हम तुम्हारे भाई को जरुर पकड़कर
दिखायेंगे|” पृथ्वीराज ने फिर कहा “जहाँपनाह !
वो मेरा भाई है उसे मैं अच्छीतरह से जानता हूँ
वो हरगिज पकड़ में नहीं आएगा और पकड़ने
वालों को मारेगा भी | पृथ्वीराज के साथ इस तरह
की बातचीत होने के बाद अकबर ने
मीरहम्जा को तीन हजार घुड़सवारों के साथ
आरबखां की मदद के लिए रवाना कर दिया | उधर
पृथ्वीराजजी ने अपने भाई अमरसिंह को पत्र लिख
भेजा कि- ” भाई अमरसिंह ! मेरे और अकबर के बीच
वाद विवाद हो गया है | तेरे ऊपर बादशाह
केसिपहसलार फ़ौज लेकर चढ़ने आ रहे है
तुमइनको पकड़ना मत,इन्हें मार देना | और
तूंतो जिन्दा कभी पकड़ने में आएगा नहीं ये मुझे
भरोसा है | भाई मेरी बातरखना |”ये वही पृथ्वीराज थे
जो अकबर के खास प्रिय थे और जिन्होंने
महाराणा प्रताप को अपने प्रण पर दृढ रहने हेतु दोहे
लिखकर भेजे थे जिन्हें पढने के बाद महाराणा प्रताप ने
अकबर के आगे कभी न झुकने का प्रण कियाथा |
पृथ्वीराज जी का पत्रमिलते ही अमरसिंह ने अपने
साथी २००० घुड़सवार राजपूत योद्धाओं को वह पत्र
पढ़कर सुनाया,पत्र सुनने के बाद सभी ने अपनी मूंछों पर
ताव देतेहुए मरने मारने की कसम खाई कि- ” मरेंगे
या मरेंगे |”अमरसिंह को अम्ल (अफीम) का नशा करने
की आदत थी | नशा कर वे जब सो जाते थे तो उन्हें
जगाने की किसी की हिम्मत नहीं होती थी कारण
नशे में जगाने पर वे बिना देखे,सुने सीधे जगाने वाले के
सिर पर तलवार की ठोक देते थे | उस दिन अमरसिंह
अफीम के नशे में सो रहे थे कि अचानक आरबखां ने
अपनी सेनासहित “हारणी खेड़ा” नामक गांव जिसमे
अमरसिंह रहता था को घेर लिया पर अमरसिंह
तो सो रहे थे उन्हें जगाने की किसी की हिम्मत
नहीं हो रही थी ,कौन अपना सिर गंवाना चाहता |
आखिर वहां रहने वाली एक चारण कन्या “पद्मा”
जिसे अमरसिंह ने धर्म बहन बना रखा था ने अमरसिंह
को जगाने का निर्णय लिया | पद्मा बहुत
अच्छी कवियत्री थी | उसने अमरसिंह को संबोधित
कर एक ऐसी वीर रस की कविता सुनाई
जो कविता क्या कोई मन्त्र था,प्रेरणा का पुंज
था,युद्ध का न्योता था | उसकी कविता का एक एक
अक्षर एसा कि कायर भी सुन ले तो तलवार उठाकर
युद्ध भूमि में चला जाए | कोई मृत योद्धा सुनले
तो उठकर तलवार बजाने लग जाये |
पद्मा की कविता के बोलों ने अमरसिंह को नशे से
उठा दिया |वे बोले – “बहन पद्मा ! क्या बादशाह
की फ़ौज आ गयी है ?”अमरसिंह तुरंत उठे ,शस्त्र
संभाले,अपनेसभी राजपूतों को अम्ल की मनुहार की |
और घोड़े पर अपने साथियों सहित आरबखां पर टूट पड़े |
उन्होंने देखा आरबखां धनुष लिए हाथी पर बैठा है और
दुसरे ही क्षण उन्होंने अपना घोडा आरबखां के
हाथी पर कूदा दिया , अमरसिंह के घोड़े के अगले
दोनों पैर हाथी के दांतों पर थे अमरसिंह ने एक हाथ से
तुरंत हाथी का होदा पकड़ा और दुसरे हाथ से
आरबखां पर वार करने के उछला ही था कि पीछे से
किसी मुग़ल सैनिक में अमरसिंह की कमर पर तलवार
का एक जोरदार वार किया और उनकी कमर कट
गयी पर धड़ उछल चूका था , अमरसिंह का कमर से निचे
का धड़ उनके घोड़े पर रह गया और ऊपर का धड़ उछलकर
सीधे आरबखां के हाथी के होदे में कूदता हुआ
पहुंचा और एक ही झटके में आरबखां की गर्दन उड़ गयी |
पक्ष विपक्ष के लोगों ने देखा अमरसिंह का आधा धड़
घोड़े पर सवार है औरआधा धड़ हाथी के होदे में पड़ा है
और सबके मुंह से वाह वाह निकल पड़ा|एक सन्देशवाहक
ने जाकर बादशाह अकबर को सन्देश
दिया -“जहाँपनाह ! अमरसिंह मारा गया और
बादशाह सलामत की फ़ौज विजयी हुई |”अकबर ने
पृथ्वीराज की और देखते हुए कहा- ” अमरसिंह
को श्रधांजलि दो|”पृथ्वीराज ने कहा – “
अभी श्रधांजलि नहीं दूंगा, ये खबर पूरी नहीं है झूंठी है
|”तभी के दूसरा संदेशवाहक अकबर के दरबार में
पहुंचा और उसने पूरा घटनाकर्म सुनाते हुए बताया कि-
“कैसे अमरसिंह के शरीर के दो टुकड़े होने के बाद
भी उसकी धड़ ने उछलकर आरबखां का वध कर
दिया |”अकबर चूँकि गुणग्राही था ,अमरसिंह
की वीरता भरी मौत कीई कहानी सुनकर विचलित
हुआ और बोल पड़ा – “अमरसिंह उड़ता शेर
था ,पृथ्वीराज ! भाई पर तुझे जैसा गुमान था वह ठीक
वैसा ही था ,अमरसिंह वाकई सच्चा वीर राजपूत था |
काश वह हमसे रूठता नहीं |”अमरसिंह की मौत पर
पद्मा ने उनकी याद और वीरता पर दोहे बनाये -आरब
मारयो अमरसी,बड़ हत्थे वरियाम,हठ कर खेड़े
हांरणी,कमधज आयो काम |कमर कटे उड़कै कमध, भमर
हूएली भार,आरब हण हौदे अमर, समर बजाई सार ||जय
राजपुताना

बीकानेर के राजा रायसिंहजी का भाई अमरसिंह
किसी बात पर अकबर से नाराजहो बागी बन
गया था और इसलिए उन्हे पकड़ने के लिए अकबर ने
आरबखां को सेना के साथ जाने का हुक्म दिया | इस
बात का पता जब अमरसिंह के बड़े भाईपृथ्वीराजसिंह
जी को लगा तो वे अकबर के पास गए बोले- "
मेरा भाई अमर बादशाह से विमुख हुआ है आपके शासित
गांवों में उसने लूटपाट
की हैउसकी तो उसको सजा मिलनी चाहिए पर एक
बात है आपने जिन्हें उसे पकड़ने हेतु भेजा है वह उनसे
कभी पकड़ में नहीं आएगा | ये पकड़ने जाने वाले मारे
जायेंगे | ये पक्की बात है हजरत इसे गाँठ बांधलें |"अकबर
बोला- "पृथ्वीराज ! हम तुम्हारे भाई को जरुर पकड़कर
दिखायेंगे|" पृथ्वीराज ने फिर कहा "जहाँपनाह !
वो मेरा भाई है उसे मैं अच्छीतरह से जानता हूँ
वो हरगिज पकड़ में नहीं आएगा और पकड़ने
वालों को मारेगा भी | पृथ्वीराज के साथ इस तरह
की बातचीत होने के बाद अकबर ने
मीरहम्जा को तीन हजार घुड़सवारों के साथ
आरबखां की मदद के लिए रवाना कर दिया | उधर
पृथ्वीराजजी ने अपने भाई अमरसिंह को पत्र लिख
भेजा कि- " भाई अमरसिंह ! मेरे और अकबर के बीच
वाद विवाद हो गया है | तेरे ऊपर बादशाह
केसिपहसलार फ़ौज लेकर चढ़ने आ रहे है
तुमइनको पकड़ना मत,इन्हें मार देना | और
तूंतो जिन्दा कभी पकड़ने में आएगा नहीं ये मुझे
भरोसा है | भाई मेरी बातरखना |"ये वही पृथ्वीराज थे
जो अकबर के खास प्रिय थे और जिन्होंने
महाराणा प्रताप को अपने प्रण पर दृढ रहने हेतु दोहे
लिखकर भेजे थे जिन्हें पढने के बाद महाराणा प्रताप ने
अकबर के आगे कभी न झुकने का प्रण कियाथा |
पृथ्वीराज जी का पत्रमिलते ही अमरसिंह ने अपने
साथी २००० घुड़सवार राजपूत योद्धाओं को वह पत्र
पढ़कर सुनाया,पत्र सुनने के बाद सभी ने अपनी मूंछों पर
ताव देतेहुए मरने मारने की कसम खाई कि- " मरेंगे
या मरेंगे |"अमरसिंह को अम्ल (अफीम) का नशा करने
की आदत थी | नशा कर वे जब सो जाते थे तो उन्हें
जगाने की किसी की हिम्मत नहीं होती थी कारण
नशे में जगाने पर वे बिना देखे,सुने सीधे जगाने वाले के
सिर पर तलवार की ठोक देते थे | उस दिन अमरसिंह
अफीम के नशे में सो रहे थे कि अचानक आरबखां ने
अपनी सेनासहित "हारणी खेड़ा" नामक गांव जिसमे
अमरसिंह रहता था को घेर लिया पर अमरसिंह
तो सो रहे थे उन्हें जगाने की किसी की हिम्मत
नहीं हो रही थी ,कौन अपना सिर गंवाना चाहता |
आखिर वहां रहने वाली एक चारण कन्या "पद्मा"
जिसे अमरसिंह ने धर्म बहन बना रखा था ने अमरसिंह
को जगाने का निर्णय लिया | पद्मा बहुत
अच्छी कवियत्री थी | उसने अमरसिंह को संबोधित
कर एक ऐसी वीर रस की कविता सुनाई
जो कविता क्या कोई मन्त्र था,प्रेरणा का पुंज
था,युद्ध का न्योता था | उसकी कविता का एक एक
अक्षर एसा कि कायर भी सुन ले तो तलवार उठाकर
युद्ध भूमि में चला जाए | कोई मृत योद्धा सुनले
तो उठकर तलवार बजाने लग जाये |
पद्मा की कविता के बोलों ने अमरसिंह को नशे से
उठा दिया |वे बोले - "बहन पद्मा ! क्या बादशाह
की फ़ौज आ गयी है ?"अमरसिंह तुरंत उठे ,शस्त्र
संभाले,अपनेसभी राजपूतों को अम्ल की मनुहार की |
और घोड़े पर अपने साथियों सहित आरबखां पर टूट पड़े |
उन्होंने देखा आरबखां धनुष लिए हाथी पर बैठा है और
दुसरे ही क्षण उन्होंने अपना घोडा आरबखां के
हाथी पर कूदा दिया , अमरसिंह के घोड़े के अगले
दोनों पैर हाथी के दांतों पर थे अमरसिंह ने एक हाथ से
तुरंत हाथी का होदा पकड़ा और दुसरे हाथ से
आरबखां पर वार करने के उछला ही था कि पीछे से
किसी मुग़ल सैनिक में अमरसिंह की कमर पर तलवार
का एक जोरदार वार किया और उनकी कमर कट
गयी पर धड़ उछल चूका था , अमरसिंह का कमर से निचे
का धड़ उनके घोड़े पर रह गया और ऊपर का धड़ उछलकर
सीधे आरबखां के हाथी के होदे में कूदता हुआ
पहुंचा और एक ही झटके में आरबखां की गर्दन उड़ गयी |
पक्ष विपक्ष के लोगों ने देखा अमरसिंह का आधा धड़
घोड़े पर सवार है औरआधा धड़ हाथी के होदे में पड़ा है
और सबके मुंह से वाह वाह निकल पड़ा|एक सन्देशवाहक
ने जाकर बादशाह अकबर को सन्देश
दिया -"जहाँपनाह ! अमरसिंह मारा गया और
बादशाह सलामत की फ़ौज विजयी हुई |"अकबर ने
पृथ्वीराज की और देखते हुए कहा- " अमरसिंह
को श्रधांजलि दो|"पृथ्वीराज ने कहा - "
अभी श्रधांजलि नहीं दूंगा, ये खबर पूरी नहीं है झूंठी है
|"तभी के दूसरा संदेशवाहक अकबर के दरबार में
पहुंचा और उसने पूरा घटनाकर्म सुनाते हुए बताया कि-
"कैसे अमरसिंह के शरीर के दो टुकड़े होने के बाद
भी उसकी धड़ ने उछलकर आरबखां का वध कर
दिया |"अकबर चूँकि गुणग्राही था ,अमरसिंह
की वीरता भरी मौत कीई कहानी सुनकर विचलित
हुआ और बोल पड़ा - "अमरसिंह उड़ता शेर
था ,पृथ्वीराज ! भाई पर तुझे जैसा गुमान था वह ठीक
वैसा ही था ,अमरसिंह वाकई सच्चा वीर राजपूत था |
काश वह हमसे रूठता नहीं |"अमरसिंह की मौत पर
पद्मा ने उनकी याद और वीरता पर दोहे बनाये -आरब
मारयो अमरसी,बड़ हत्थे वरियाम,हठ कर खेड़े
हांरणी,कमधज आयो काम |कमर कटे उड़कै कमध, भमर
हूएली भार,आरब हण हौदे अमर, समर बजाई सार ||जय
राजपुताना
 
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सेकुलर हिंदू इसे एक बार पूरा अवश्य पढ़ें –


सेकुलर हिंदू इसे एक बार पूरा अवश्य पढ़ें –

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इस देश के अंदर राम-रावण का युद्ध हुआ तो केवल मातृ शक्ति के सम्मान के लिए हुआ था , पूरा महाभारत ही इस देश के अंदर मातृ शक्ति के सम्मान के लिए हुआ था , और आज कुछ लोग भारत माता को गाली दें और हम स्वीकार कर लें ,गाय माता कि हत्या करें और हम स्वीकार कर लें

वन्दे-मातरम के बारे में कहते हैं कि हम नहीं गायेंगें, अरे !! आप भारत के अंदर रहेंगें ,भारत का अन्न खायेंगें ,भारत कि भूमि पर पैदा होने वाले मीठे फल खायेंगें, इस पवित्र धरती पर हर प्रकार के कार्य करेंगें लेकिन जब भारत के कानून कि बात आएगी ,वन्दे-मातरम गाने कि बात आएगी ,भारत कि किसी व्यवस्था को मानने कि बात आएगी तो कहेंगें कि नहीं साहब इसमें हमारी शरीयत आड़े आ जाती है ,इसमें हमारी कुरआन आड़े आ जाती है

हज करने के लिए सब्सिडी मिलती हो तो ले लेंगें , ब्याज में किसी प्रकार कि छूट मिलती हो तो ले लेंगें ,देश से किसी भी प्रकार कि सुविधाएं मिलती हों तो ले लेंगें लेकिन जब इस मातृ-भूमि को,इस भारत माता को वन्दे-मातरम गाकर नमन करने कि बात आएगी तो कहेंगें कि हमारा धर्म इसकी इजाजत नहीं देता , जब इस भारत माता से सुविधाएं लेनी हों तब इनका धर्म इजाजत देता है लेकिन जब इसे नमन करना हो तो इनका धर्म उसकी इजाजत नहीं देता

हम देश में समान नागरिक संहिता बनाने कि बात करें तो फिर धर्म को बीच में ले आयेंगें कि नहीं हमारा धर्म इसे स्वीकार नहीं करता, बढती जनसंख्या को रोकने के लिए परिवार नियोजन लागू करने कि बात करें तो फिर कहेंगें कि हमारा धर्म इसे स्वीकार नहीं करता, अरे !! खुद कई मुस्लिम देशों में सउदी अरब तक में एक मुसलमान को दो से ज्यादा बच्चे पैदा करने कि इजाजत नहीं है ,पाकिस्तान तक में लागू हो गया ,सूडान में लागू हो गया ,इरान और ईराक में लागू हो चुका है ,तुर्की में भी लागू है लेकिन भारत में अगर लागू करने कि बात हम करेंगें तो कहेंगें कि नहीं साहब आप साम्प्रदायिक बात कर रहे हो ,हम ये लागू नहीं होने देंगें ,क्या आपने कभी इस बात को सोचा कि जब भारत कि न्याय-व्यवस्था एक विधान से चल सकती है , एक प्रधान से चल सकती है ,एक निशान से चल सकती है तो ये हर बार खुद के लिए अलग-२ मांगें क्यों करते हैं

धर्म के आधार पर इस देश का विभाजन एक बार हो चुका है ( पाकिस्तान ),अब अगर इस देश का दूसरा विभाजन हमें होने से रोकना है तो इस देश में दो विधान चलाने वालों को हमें बेनकाब करना ही होगा और इसके लिए जय श्री राम का नारा लगाना ही होगा

जातिवाद के नाम पर ,भाषावाद के नाम पर ,क्षेत्रवाद के नाम पर हम हिंदू ना जानें अपना कितना नुक्सान कर चुके हैं और इसी कारण आज हमारे राष्ट्र कि अस्मिता भी खतरे में है ,राष्ट्र एक और गृह-युद्ध के मुहाने पर खड़ा है , पूरा उत्तर-प्रदेश जेहादी आतंकवाद के मुहाने पर खड़ा हो चुका है , सिमी ,हूजी ,लश्कर-ऐ-तोय्ब्बा ,जैश-ऐ-मोहम्मद ,अल-कायदा और ना जाने किस-२ नाम से सैकड़ों आतंकवादी संगठन इस्लाम के नाम पर उत्तर-प्रदेश के अंदर जेहाद करने के लिए खड़े हैं

इसलिए अब इस राष्ट्र को बचाने के लिए केवल शास्त्र नहीं शस्त्र भी उठाने पड़ेंगें , खाली माला जपने से कुछ नहीं होने वाला माला के साथ-२ भाला भी तैयार रखना पड़ेगा ,जब कमल के साथ कृपाण सजेगी तो किसी देशद्रोही कि भारत माता को डायन कहने कि हिम्मत नहीं होगी

– योगी आदित्यनाथ

सेकुलर हिंदू इसे एक बार पूरा अवश्य पढ़ें -

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इस देश के अंदर राम-रावण का युद्ध हुआ तो केवल मातृ शक्ति के सम्मान के लिए हुआ था , पूरा महाभारत ही इस देश के अंदर मातृ शक्ति के सम्मान के लिए हुआ था , और आज कुछ लोग भारत माता को गाली दें और हम स्वीकार कर लें ,गाय माता कि हत्या करें और हम स्वीकार कर लें

वन्दे-मातरम के बारे में कहते हैं कि हम नहीं गायेंगें, अरे !! आप भारत के अंदर रहेंगें ,भारत का अन्न खायेंगें ,भारत कि भूमि पर पैदा होने वाले मीठे फल खायेंगें, इस पवित्र धरती पर हर प्रकार के कार्य करेंगें लेकिन जब भारत के कानून कि बात आएगी ,वन्दे-मातरम गाने कि बात आएगी ,भारत कि किसी व्यवस्था को मानने कि बात आएगी तो कहेंगें कि नहीं साहब इसमें हमारी शरीयत आड़े आ जाती है ,इसमें हमारी कुरआन आड़े आ जाती है

हज करने के लिए सब्सिडी मिलती हो तो ले लेंगें , ब्याज में किसी प्रकार कि छूट मिलती हो तो ले लेंगें ,देश से किसी भी प्रकार कि सुविधाएं मिलती हों तो ले लेंगें लेकिन जब इस मातृ-भूमि को,इस भारत माता को वन्दे-मातरम गाकर नमन करने कि बात आएगी तो कहेंगें कि हमारा धर्म इसकी इजाजत नहीं देता , जब इस भारत माता से सुविधाएं लेनी हों तब इनका धर्म इजाजत देता है लेकिन जब इसे नमन करना हो तो इनका धर्म उसकी इजाजत नहीं देता

हम देश में समान नागरिक संहिता बनाने कि बात करें तो फिर धर्म को बीच में ले आयेंगें कि नहीं हमारा धर्म इसे स्वीकार नहीं करता, बढती जनसंख्या को रोकने के लिए परिवार नियोजन लागू करने कि बात करें तो फिर कहेंगें कि हमारा धर्म इसे स्वीकार नहीं करता, अरे !! खुद कई मुस्लिम देशों में सउदी अरब तक में एक मुसलमान को दो से ज्यादा बच्चे पैदा करने कि इजाजत नहीं है ,पाकिस्तान तक में लागू हो गया ,सूडान में लागू हो गया ,इरान और ईराक में लागू हो चुका है ,तुर्की में भी लागू है लेकिन भारत में अगर लागू करने कि बात हम करेंगें तो कहेंगें कि नहीं साहब आप साम्प्रदायिक बात कर रहे हो ,हम ये लागू नहीं होने देंगें ,क्या आपने कभी इस बात को सोचा कि जब भारत कि न्याय-व्यवस्था एक विधान से चल सकती है , एक प्रधान से चल सकती है ,एक निशान से चल सकती है तो ये हर बार खुद के लिए अलग-२ मांगें क्यों करते हैं

धर्म के आधार पर इस देश का विभाजन एक बार हो चुका है ( पाकिस्तान ),अब अगर इस देश का दूसरा विभाजन हमें होने से रोकना है तो इस देश में दो विधान चलाने वालों को हमें बेनकाब करना ही होगा और इसके लिए जय श्री राम का नारा लगाना ही होगा

जातिवाद के नाम पर ,भाषावाद के नाम पर ,क्षेत्रवाद के नाम पर हम हिंदू ना जानें अपना कितना नुक्सान कर चुके हैं और इसी कारण आज हमारे राष्ट्र कि अस्मिता भी खतरे में है ,राष्ट्र एक और गृह-युद्ध के मुहाने पर खड़ा है , पूरा उत्तर-प्रदेश जेहादी आतंकवाद के मुहाने पर खड़ा हो चुका है , सिमी ,हूजी ,लश्कर-ऐ-तोय्ब्बा ,जैश-ऐ-मोहम्मद ,अल-कायदा और ना जाने किस-२ नाम से सैकड़ों आतंकवादी संगठन इस्लाम के नाम पर उत्तर-प्रदेश के अंदर जेहाद करने के लिए खड़े हैं

इसलिए अब इस राष्ट्र को बचाने के लिए केवल शास्त्र नहीं शस्त्र भी उठाने पड़ेंगें , खाली माला जपने से कुछ नहीं होने वाला माला के साथ-२ भाला भी तैयार रखना पड़ेगा ,जब कमल के साथ कृपाण सजेगी तो किसी देशद्रोही कि भारत माता को डायन कहने कि हिम्मत नहीं होगी

- योगी आदित्यनाथ