Posted in ज्योतिष - Astrology

कुछ आसान से उपाय,जो बेहद फायदेमंद हैं ।


कुछ आसान से उपाय,जो बेहद फायदेमंद हैं । कोई भी,बिना कुंडली दिखाए इन उपायों को कर सकता है ।
1. हर पूर्णिमा को सुबह पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाएं।
2. तुलसी के पौधे पर गुरुवार को पानी में थोड़ा दूध डालकर चढ़ाएं।
3. यदि आपको बरगद के पेड़ के नीचे कोई छोटा पौधा उगा हुआ नजर आ जाए तो उसे उखाड़कर अपने घर में लगा दें।घर से बुरी नज़र दूर रहेगी ।
4. गूलर की जड़ को कपड़े में बांधकर उसे ताबीज में डालकर बाजु पर बांधे।
5. पीपल के वृक्ष की छाया में खड़े होकर लोहे के पात्र में पानी लेकर उसमें दूध मिलाकर उसे पीपल की जड़ में
डालने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और घर में लक्ष्मी का स्थाई निवास होता है।
6. धन समृद्धि की देवी लक्ष्मी को प्रति एकादशी के दिन नौ बत्तियों वाला शुद्ध घी का दीपक लगाएं।

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

आप हाथी नहीं इंसान हैं !


आप हाथी नहीं इंसान हैं !

एक आदमी कहीं से गुजर रहा था, तभी उसने सड़क के किनारे बंधे हाथियों को देखा, और अचानक रुक गया. उसने देखा कि हाथियों के अगले पैर में एक रस्सी बंधी हुई है, उसे इस बात का बड़ा अचरज हुआ की हाथी जैसे विशालकाय जीव लोहे की जंजीरों की जगह बस एक छोटी सी रस्सी से बंधे हुए हैं!!! ये स्पष्ठ था कि हाथी जब चाहते तब अपने बंधन तोड़ कर कहीं भी जा सकते थे, पर किसी वजह से वो ऐसा नहीं कर रहे थे.

उसने पास खड़े महावत से पूछा कि भला ये हाथी किस प्रकार इतनी शांति से खड़े हैं और भागने का प्रयास नही कर रहे हैं ?

तब महावत ने कहा, ” इन हाथियों को छोटे पर से ही इन रस्सियों से बाँधा जाता है, उस समय इनके पास इतनी शक्ति नहीं होती की इस बंधन को तोड़ सकें. बार-बार प्रयास करने पर भी रस्सी ना तोड़ पाने के कारण उन्हें धीरे-धीरे यकीन होता जाता है कि वो इन रस्सियों को नहीं तोड़ सकते,और बड़े होने पर भी उनका ये यकीन बना रहता है, इसलिए वो कभी इसे तोड़ने का प्रयास ही नहीं करते.”

आदमी आश्चर्य में पड़ गया कि ये ताकतवर जानवर सिर्फ इसलिए अपना बंधन नहीं तोड़ सकते क्योंकि वो इस बात में यकीन करते हैं!!

इन हाथियों की तरह ही हममें से कितने लोग सिर्फ पहले मिली असफलता के कारण ये मान बैठते हैं कि अब हमसे ये काम हो ही नहीं सकता और अपनी ही बनायीं हुई मानसिक जंजीरों में जकड़े-जकड़े पूरा जीवन गुजार देते हैं.

याद रखिये असफलता जीवन का एक हिस्सा है ,और निरंतर प्रयास करने से ही सफलता मिलती है. यदि आप भी ऐसे किसी बंधन में बंधें हैं जो आपको अपने सपने सच करने से रोक रहा है तो उसे तोड़ डालिए….. आप हाथी नहीं इंसान हैं.

आप हाथी नहीं इंसान हैं !

एक आदमी कहीं से गुजर रहा था, तभी उसने सड़क के किनारे बंधे हाथियों को देखा, और अचानक रुक गया. उसने देखा कि हाथियों के अगले पैर में एक रस्सी बंधी हुई है, उसे इस बात का बड़ा अचरज हुआ की हाथी जैसे विशालकाय जीव लोहे की जंजीरों की जगह बस एक छोटी सी रस्सी से बंधे हुए हैं!!! ये स्पष्ठ था कि हाथी जब चाहते तब अपने बंधन तोड़ कर कहीं भी जा सकते थे, पर किसी वजह से वो ऐसा नहीं कर रहे थे.

उसने पास खड़े महावत से पूछा कि भला ये हाथी किस प्रकार इतनी शांति से खड़े हैं और भागने का प्रयास नही कर रहे हैं ?

तब महावत ने कहा, ” इन हाथियों को छोटे पर से ही इन रस्सियों से बाँधा जाता है, उस समय इनके पास इतनी शक्ति नहीं होती की इस बंधन को तोड़ सकें. बार-बार प्रयास करने पर भी रस्सी ना तोड़ पाने के कारण उन्हें धीरे-धीरे यकीन होता जाता है कि वो इन रस्सियों को नहीं तोड़ सकते,और बड़े होने पर भी उनका ये यकीन बना रहता है, इसलिए वो कभी इसे तोड़ने का प्रयास ही नहीं करते.”

आदमी आश्चर्य में पड़ गया कि ये ताकतवर जानवर सिर्फ इसलिए अपना बंधन नहीं तोड़ सकते क्योंकि वो इस बात में यकीन करते हैं!!

इन हाथियों की तरह ही हममें से कितने लोग सिर्फ पहले मिली असफलता के कारण ये मान बैठते हैं कि अब हमसे ये काम हो ही नहीं सकता और अपनी ही बनायीं हुई मानसिक जंजीरों में जकड़े-जकड़े पूरा जीवन गुजार देते हैं.

याद रखिये असफलता जीवन का एक हिस्सा है ,और निरंतर प्रयास करने से ही सफलता मिलती है. यदि आप भी ऐसे किसी बंधन में बंधें हैं जो आपको अपने सपने सच करने से रोक रहा है तो उसे तोड़ डालिए….. आप हाथी नहीं इंसान हैं.
Posted in Sai conspiracy

Sai


मैं साई भक्तो का विरोध नहीं करता , आखिर साई उनकी आस्था है , और किसी की भी आस्था का विरोध या मज़ाक नहीं करना चाहिए
परंतु
साई को हमारे आराध्य प्रभु के नाम के साथ जोड़कर या हमारे देवी देवताओ के चित्र के साथ जोड़कर हमारी धार्मिक भावनाओ को ठेस क्यों पहुंचाई जाती है ।
हमारे धर्म मे साधू संतो को इज्जत और सम्मान देने की परंपरा है लेकिन हम उन्हे भगवान नहीं बना लेते
वैसे ही साई भक्त अपने साई को कुछ भी माने परंतु भगवान का दर्जा ना दे

अगर सच मे साई एक अलौकिक शक्ति हैं तो उनके भक्त सिर्फ साई के नाम का उपयोग करे और उस शक्ति का लाभ उठाए परंतु हमारे धर्म मे साई या किसी अन्य को भगवान जैसा दर्जा दिलाने की कोशिश ना करें ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥

Posted in Sai conspiracy

Sai


साईं के विषय में कुतर्क करने वाले हिंदुओं से कुछ प्रश्न:

क्या किसी मस्जिद में साईं की मूर्ती पाई जाती है ?
अवश्य ही नही… परन्तु क्यों ?
शिया सुन्नी समेत 72 फिरकों में से किसी की भी मस्जिद या मदरसे में नही ।

अल्लाह मालिक कहने वालों का मालिक एक नही है क्या ?

क्या किसी चर्च में साईं की मूर्ती पाई जाती है ?
अवश्य ही नही… परन्तु क्यों ?
73 फिरकों में से किसी के भी चर्च में नही ।
इनका मालिक एक नही है क्या ? क्यों ?

क्या किसी बोद्ध मठ में साईं की मूर्ती पाई जाती है ?
अवश्य ही नही… परन्तु क्यों ?
हीनयान, वज्रयान और महायान किसी में भी नही ।
इनका मालिक एक नही है क्या ? क्यों ?

क्या किसी गुरूद्वारे में साईं की मूर्ती पाई जाती है ?
अवश्य ही नही… परन्तु क्यों ?
गुरुमत खालिस्तानी, मनमुख सिख, धीरमल्ली सिख, मिन्ने सिख, राधा स्वामी सिख, निरंकारी सिख, नामधारी सिख, निर्मल सिख, कूके सिख… रविदासी सिख, चमार सिख, रामगढ़िया सिख, क्रिस्टन सिख ।

इनका मालिक एक नही है क्या ? क्यों ?

क्या किसी जैन मन्दिर में साईं की मूर्ती पाई जाती है ?
अवश्य ही नही… परन्तु क्यों ?
श्वेताम्बर या दिगम्बर किसी में भी नही ।

इनका मालिक एक नही है क्या ? क्यों ?

क्या किसी छ्बाड़ हाउस (यहूदी) में साईं की मूर्ती पाई जाती है ?
अवश्य ही नही… परन्तु क्यों ?

इनका मालिक एक नही है क्या ? क्यों ?

कृपया उचित उत्तर सुझाएँ…?

Posted in Sai conspiracy

sai


कृपया ध्यान दे ,ये बाते खुद साईं सत्चरित्र में लिखा हुआ है जो सिरडी संस्थान द्वारा जारी की गयी है | कटु सत्य—क्या आप जानते है??
1-साईं का असली नाम चाँद मियाँ था।
2-साईं ने कभी अपने जीवन में 2 गाव से बाहर
कदम नहीं रखा।
3-साईं सत्चारित में 10 बार से अधिक”अल्लाह
मालिक”आया है। परन्तु एक बार भी ॐ
नहीं आया।

4-साईं के समय में उसके आस पास के राज्यों में
भयंकर अकाल पड़ा। परन्तु साईं भगवान् (भक्तो के अनुसार) ने गरीबो की मदद
करना जरूरी नहीं समझा।
5-साईं का जन्म 1834 में हुआ। पर इन्होने
धर्म युद्ध (आजादी की लड़ाई) में भारतीयों की मदद
करना जरूरी नहीं समझा ।(पता नहीं क्यों अगर ये
राम कृष्ण के अवतार थे। तो इन्हें मदद
करनी चाहिए थी। क्युकी श्रीकृषण का ही कहना है
की धर्म युद्ध में सभी को भाग लेना पड़ता है।
स्वयं श्रीकृषण ने महाभारत में पांडवो का मार्ग
दर्शन किया।और वक़्त आने पर शस्त्र
भी उठाया। राम जी ने भी यही किया।पर
पता नहीं साईं कहा थे)
6-साईं भोजन से पहले फातिमा,कुरान पढ़ते थे।
परन्तु कभी गीता और रामायण नहीं पढ़ी न
ही कोई वेद। वाह कमाल के भगवान थे।
7-साईं अपने भक्तो को प्रशाद के रूप में मॉस
चावल (नमकीन चावल) देते थे। खास कर
ब्राह्मण
भक्तो को।ये तो संभव ही नहीं की कोई भगवान्
का रूप ऐसा करे ।)
8-साईं जात के यवनी(मुसलमान) थे। और
मस्जिद में रहते थे। लेकिन आज कल उसे
ब्राह्मण
दिखने का प्रयास चल रहा है (प्रश्न-
क्या ब्राह्मण मस्जिदों मे रहते है)
9-साईं को 1990 से पहले कोई जानता तक नहीं था सिरडी के बाहर
लेकिन पर्चे बाटने की मार्केटिंग और फिर सीरियल के षडयंत्र ने
कुछ लोगो को साईं को भगवन के रूप में पेश करके
पैसे कमाने का मौका दे दिया |
नोट-ये सारी बाते स्वयं”साईं सत्चारित”में
देखे।
यहाँ पर एक भी बात मनगढ़ंत नहीं है।
ये हमारी एक कोशिश है अन्धे हिन्दुओ को जगाने
की ।
कृपया ध्यान दे ,ये बाते खुद साईं सत्चरित्र में लिखा हुआ है जो सिरडी संस्थान द्वारा जारी की गयी है | कटु सत्य---क्या आप जानते है??
1-साईं का असली नाम चाँद मियाँ था।
2-साईं ने कभी अपने जीवन में 2 गाव से बाहर 
कदम नहीं रखा।
3-साईं सत्चारित में 10 बार से अधिक"अल्लाह
मालिक"आया है। परन्तु एक बार भी ॐ
नहीं आया।
4-साईं के समय में उसके आस पास के राज्यों में
भयंकर अकाल पड़ा। परन्तु साईं भगवान् (भक्तो के अनुसार) ने गरीबो की मदद
करना जरूरी नहीं समझा।
5-साईं का जन्म 1834 में हुआ। पर इन्होने
धर्म युद्ध (आजादी की लड़ाई) में भारतीयों की मदद
करना जरूरी नहीं समझा ।(पता नहीं क्यों अगर ये
राम कृष्ण के अवतार थे। तो इन्हें मदद
करनी चाहिए थी। क्युकी श्रीकृषण का ही कहना है
की धर्म युद्ध में सभी को भाग लेना पड़ता है।
स्वयं श्रीकृषण ने महाभारत में पांडवो का मार्ग
दर्शन किया।और वक़्त आने पर शस्त्र
भी उठाया। राम जी ने भी यही किया।पर
पता नहीं साईं कहा थे)
6-साईं भोजन से पहले फातिमा,कुरान पढ़ते थे।
परन्तु कभी गीता और रामायण नहीं पढ़ी न
ही कोई वेद। वाह कमाल के भगवान थे।
7-साईं अपने भक्तो को प्रशाद के रूप में मॉस
चावल (नमकीन चावल) देते थे। खास कर
ब्राह्मण
भक्तो को।ये तो संभव ही नहीं की कोई भगवान्
का रूप ऐसा करे ।)
8-साईं जात के यवनी(मुसलमान) थे। और
मस्जिद में रहते थे। लेकिन आज कल उसे
ब्राह्मण
दिखने का प्रयास चल रहा है (प्रश्न-
क्या ब्राह्मण मस्जिदों मे रहते है)
9-साईं को 1990 से पहले कोई जानता तक नहीं था सिरडी के बाहर 
लेकिन पर्चे बाटने की मार्केटिंग और फिर सीरियल के षडयंत्र ने
कुछ लोगो को साईं को भगवन के रूप में पेश करके 
पैसे कमाने का मौका दे दिया | 
नोट-ये सारी बाते स्वयं"साईं सत्चारित"में
देखे।
यहाँ पर एक भी बात मनगढ़ंत नहीं है।
ये हमारी एक कोशिश है अन्धे हिन्दुओ को जगाने
की ।
Posted in Sai conspiracy

sai


Ravi Prasad क्या शंकराचार्य हिन्दुओ को आपस में बाट कोंग्रेश की वोट बैंक बढ़ा रहे हे,

६० साल कोंग्रेश ने राज किया, तब ये साईं बाबा का मुद्दा क्यों नहीं उठाया,
महाराष्ट्र में ५ साल से कोंग्रेश का राज हे, फिर ये मुद्दा अभी इलेकसन से २ महीने पहले क्यों,
क्यों सोनिया ग़ांधी जी सिर्फ सवरूपानंदजी का ही आर्शीवाद लेने गई, क्या कोई और संत नहीं हे,
आखिर सवरूपानंदजी ने नरेंद्र मोदी का का क्यों विरोध किया, क्या मोदीजी हिन्दू विरोधी हे,
अपनी अकल लगाओ हिन्दुओ दुसरो के बहकावे में मत आओ, मुद्दा साईं बाबा का नहीं,
हिन्दुओ को तोड़ने का हे, क्युकी महाराष्ट्र में साईं भगत ज्यादा हे, और अभी इलेकसन भी हे,
हिन्दूओं साई पर प्रतिक्रिया बंद कर दे
कांग्रेस अचछी तरह जानती हैं
भाजपा हिन्दू एकता के कारण जीती है<
इसलिए वे हमारे बीच रिफ्ट पैदा कर रहे हैं 
साई बाबा को गालियाँ देकर आप सिर्फ उन गद्दारों की मदद कर रहे हो,
जो कि हिंदुओं के बीच लडाई कराना चाहते हैं गुस्से की जगह बुद्धिमता से काम लें. 

में साईं भगत नहीं हु, मगर हिन्दुओ को आपस में ऐसा लड़ते देख मुझसे रहा नहीं गया,
इसलिए मेरे दिल की बात कह दी, अगर आप सहमत हे तो जरूर शेयर करे,

https://www.facebook.com/567225360008100/photos/a.567265183337451.1073741828.567225360008100/745740508823250/?type=1&fref=nf

Photo

क्या शंकराचार्य हिन्दुओ को आपस में बाट कोंग्रेश की वोट बैंक बढ़ा रहे हे,

६० सालSee More

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Disappearing Temple Of Shiva By Muruga Sthambeshwar


Ramani's blog

True,

There is a Temple of Lord Shiva which disappears only to reappear.

Legends say that this Temple was built by Kartikeya, called Murugan in Tamil, after he killed Tarakasura.(Kumararika kanda, Skanda Puarna)

The Temple is in the Gulf of Cambay in Gujarat.

 This Lingam of Lord Shiva can only be viewed during the low tide hours and gets disappeared inside the sea during high tide hours. Stambheswar.imagejpg.. This Lingam of Lord Shiva can only be viewed during the low tide hours and gets disappeared inside the sea during high tide hours. Stambheswar.

Sthambeswar,Gujarat.Image.jpg. Sthambeswar,Gujarat.

Sthambeswar.Image.jpg Sthambeswar

The Temple is gets totally submerged into the Sea during the high tide hours and as the tide starts to get low it again starts emerging out of the sea inch by inch, unveiling the 4 feet high Shiva lingam.

It is ideal to plan a trip for at least whole day and night, so that you can see and enter the temple in the early morning low tide hours and can also meditate in the quite, peaceful…

View original post 228 more words

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Sai


Hindus Open Your Eyes, Sai Baba is Fake God EXPOSED!

Why Hindus should Follow Lord Krishna

And not Shirdi Ke Saibaba, A Fake God, Why are you praying a dead body “mazar” a muslim practice of paying obeisance

Shirdi Sai Baba False Prophet, An Islamic and British Fraud

Hindus must remember one simple thing that Vedas and Puranas clearly mention that at the end of Kaliyuga, Lord Vishnu will take Kalki Avatar to annihilate the adharmis  and make way for Satyuga. There is never any mention of any other Avatars apart from Kalki Avatar that too at the end of Kaliyuga. So called god Shirdi Sai Baba, a meat eater was neither an avatar nor a god, has no mention in any Vedic texts.

fake god saibaba shirdi

Lord Krishna’s temple was used to build monument of fake god Sai Baba in Shirdi. Sai Baba’s dead body was sepulchered in a small monument, removing Lord Krishna’s idol. Throughout his life Sai Baba never came out of Shirdi, neither entered any Hindu temple, nor recited chants of Hindu gods. This Chand Mia (Sai Baba) always remained a devout muslim and followed islamic rituals of killing animals and eating flesh. But when this marijuana (ganja) addict Chand Miya was nearing his death, he strongly insisted that his filthy body be sepulchered in Hindu temple of Lord Krishna which was located nearby – whose priests were always against Sai Baba’s policy of bluffing innocent local Hindus. HOW CAN HINDUS of that time tolerate this, that they replaced Supreme Godhead Lord Krishna’s idol with filthy dead body of biggest thug in the world’s history on religion, after Muhammed, Sai Baba – a staunch musalman. Some pro sai baba disciples started doing puja and reciting aartis (these aartis were initially made replacing Hindu god names with filthy sai baba’s) on the dead body of drug addict baba. What an irony !!!..A person who was practicing muslim through out his life was being prayed by Hindus !!!…that too with rituals that he hated the most.

Though sai baba’s body was not buried in the mother earth (a practice of muslims) but instead it was kept at an elevated platform. So according to koran, is sai baba still rotting in hell by not being buried as per islamic practice. That’s the reason why muslims NEVER thought of him as great saint, let alone call him god.

Samadhi is common practice among Hindu saints and sages. Disciples of sai baba wrongly pose sai baba’s mazar as samadhi structure. They don’t know the major difference between Samadhi and dying out of illness. Samadhi is death at will while sai baba died due to long term illness (nephritis and hepatic due to excessive meat eating) and not at his will. So sai baba cannot be even compared to ordinary pious Sadhus or Sages who took Samadhis but never boasted or called themselves as gods. Then how can sai baba be called anant koti brahmand nayak (king of millions of universes) when he cannot even treat his own illness, which occurred due to eating of stale meats. How can this thug be called King of Universes ????….All the references used for Hindus gods are being inferred while praising FAKE god sai baba..Why ???..Just to drag Hindus and make them believe this filthy human being.

To promote sai baba prominently among innocent Hindus, who strongly believe in Vedic Gods; some of his followers insert farce baba’s images in-between Hindu gods Lord Krishna, Shiv Parvati or Lord Ganesha. This is just a wicked ploy to connect an ordinary drug addict with Hindu gods – as if this islamic thug was reincarnation of Hindu gods – what a dubious and filthy bluff when he himself hated Hinduism his entire life.

Do not fall into trap of fake promises made by false god sai baba in Sai Sat charita. Sai Baba is a false god who fronts for Satan,  There are many fallacious prophets and misleading godmen who make all kinds of promises, but you must keep in mind that this Satan(sai baba) was the father of all liars.

This Satan of Shirdi Need Assistance of Hindu God’s images. Its better to pray REAL GODS than fall into trap of false Saibaba who uses Vedic God names to gain popularity and Islamize Hindus with cultural jihad.

sai baba chand miya musalman thug

 

To substantiate further proof that Shirdi is definitely not PIOUS city, neither actual God’s pilgrimage; the criminal records of all pilgrimages show that Shirdi rates highest among crimes happening in any pilgrimages followed by Ajmer. It also clarifies that there is no change of heart or divine miracle as such, which is expected in pilgrimages to avoid criminal activities or untoward incidents. While Vrindavan rated as the most safest pilgrimages on earth – where Lord Krishna still performs Raas Lila.

Sai Baba’s followers are using Sai Baba as a brand name in Shirdi and other cities to collect millions of funds from Hindu devotees and then siphon off the money, it is also controlled by regional ministers so everything is managed, loot is still ongoing. The most painful factor is that these so called Sai Baba Sansthans or Trust never utilize money in development of poor Hindus or on free hospitals or free schooling. All funds received from Hindu devotees are fraudulently distributed among trustees.

Use simple logic while Tirupati Balaji receives thousands of crores of funds from devotees. Shirdi’s fake sai baba being second richest temple receives only 280 odd crores as claimed by the trust. Then how come it’s ranked second richest temple in India ? So either less funds are shown to public or Shirdi being second most famous temple is a complete LIE.

Some fake black and white photos depicting as sai baba are sold in auctions to bluff such ignorant devotees. There are many other channels using which this sai baba scam is conducted. Though even his real pic would not be worth, a toilet paper.

Keeping Hindu devotees ignorant about truth of fraudulent sai baba and using media and news papers for propaganda, they are looting innocent public.

Taking cue from historical Ramayan and Mahabharat, Sai Baba disciples thought of creating their own version of it, around conman sai to bluff Hindus. Laying those trappings was done with composition of Sai Satcharitra.

All those fools out there, who talk about baba miracles fail to understand basics of Hinduism which revolves around Karma and its fruits – which affects life and after lives. Karma helps explain the disparities that occur in the human population such as: prosperity or poverty, happiness or misery, good health, illness, or disability. Behind every individual’s existence there partly lies his own past deeds, which are directly responsible for many of the events during his lifespan, be it painful or pleasant. We are what we are because of our deeds and actions.You can not escape from the Karma, right or wrong committed by you. We all are ordinary human beings, think about great super natural beings of Mahabharat and Ramayan, principles of Karma is such that even God has to perform Karmic duties to teach us that without Karma there is no life. So always practice good karma – without attaching to the fruits of it – if you want to lead peaceful and worry free healthy life.

Lord Krishna in Bhagwad Gita clearly stated:

Chapter 3, Verse 18: A self-realized man has no purpose to fulfill in the discharge of his prescribed duties, nor has he any reason not to perform such work. Nor has he any need to depend on any other living being.

Chapter 3, Verse 19: Therefore, without being attached to the fruits of activities, one should act as a matter of duty; for by working without attachment, one attains the Supreme.

Chapter 3, Verse 24: If I should cease to work, then all these worlds would be put to ruination. I would also be the cause of creating unwanted population, and I would thereby destroy the peace of all sentient beings.

Chapter 3, Verse 25: As the ignorant perform their duties with attachment to results, similarly the learned may also act, but without attachment, for the sake of leading people on the right path.

Do not depend on any human being or false god-man. Praying fake anti-gods like sai baba or pir fakirs will never help in renouncing fruits of past Karmas. Even recently, one Hindi movie was started to show real face of Thief Sai baba but due to behind the scene games the movie was turned into anti-Hindu movie. And this movie was hit – this shows that Hindus are ignorant about their own beliefs, such movies should have been banned.

Also you should remember that to enjoy luxury you need to experience poverty own-self or seeing others. To know what is healthy life, you need to know about pains. There is always two side to every thing in this universe. You cannot expect everything good happening to you while blindly visiting stupid sai baba temple.

BELIEVE IN GOD NOT IN FAKE GOD-MAN or PIR FAKIRS

(Sai Satcharita is a fiction book which keeps evolving with latest versions to bluff more Hindus and include some FAKE miracles to generate funds and also has stories of Con Sai Baba. Ironically, the birth and other details keep changing on major revisions of this fiction)

Few excerpts from the research done on Sai Satcharitra

साँई माँसाहार का प्रयोग करता था व स्वयं जीवहत्या करता था!

Sai Baba was meat eater and involved in killing innocent animals

१ मैं मस्जिद में एक बकरा हलाल करने वाला हूँ, बाबा ने शामा से कहा हाजी से पुछो उसे क्या रुचिकर होगा – “बकरे का मांस, नाध या अंडकोष ?”
-अध्याय ११

Baba said: I am going to kill goat in mosque, He told Shama to ask Haji what he likes to eat “meat of goat or it’s testicles”.

(1)मस्जिद मेँ एक बकरा बलि देने के लिए लाया गया। वह अत्यन्त दुर्बल और मरने वाला था। बाबा ने उनसे चाकू लाकर बकरा काटने को कहा।
-:अध्याय 23. पृष्ठ 161.

A feeble, weak goat was brought in the mosque for sacrificial killing. Baba asked for knife to kill the goat.

(2)तब बाबा ने काकासाहेब से कहा कि मैँ स्वयं ही बलि चढ़ाने का कार्य करूँगा।
-:अध्याय 23. पृष्ठ 162.

Then Baba told Kakasaheb that he will himself carry out this sacrificial killing of goat.

(3)फकीरोँ के साथ वो आमिष(मांस) और मछली का सेवन करते थे।
-:अध्याय 5. व 7.

Baba used to feast on meat, fish with fakirs.

(4)कभी वे मीठे चावल बनाते और कभी मांसमिश्रित चावल अर्थात् नमकीन पुलाव।
-:अध्याय 38. पृष्ठ 269.

Sometimes Baba used to make sweet rice other times meat biryani.

(5)एक एकादशी के दिन उन्होँने दादा कलेकर को कुछ रूपये माँस खरीद लाने को दिये। दादा पूरे कर्मकाण्डी थे और प्रायः सभी नियमोँ का जीवन मेँ पालन किया करते थे।
-:अध्याय 32. पृष्ठः 270.

That Ekadashi Baba gave Dada Kelkar some money to bring meat. Dada Kelkar was devout Brahmin and always followed Vedic rituals, but still Baba made him bring this meat.

Would any sane Hindu follow Sai Baba, who was always practicing islam and staunch muslim, and who insisted on removal of Lord Krishna pious murti from Bihari ji’s temple to replace with his illness ridden dead body.

Hindus must remember these great verses from Sreemad Bhagwad Gita

यातयामं गतरसं पूति पर्युषितं च यत् ।
उच्छिष्टमपि चामेध्यं भोजनं तामसप्रियम् ….गीता १७/१

अर्थात

जो भोजन अधपका, रसरहित, दुर्गन्धयुक्त, बासी और उच्छिष्ट है तथा जो अपवित्र(मांस आदि) भी है, वह भोजन तामस(अधम) पुरुषों को प्रिय होते हैं ।

The food which is stale, tasteless, putrid and rotten, refuse and impure (meat etc), is dear to the Tamasic

यान्ति देवव्रता देवान् पितृन्यान्ति पितृव्रताः
भूतानि यान्ति भूतेज्या यान्ति मद्याजिनोऽपिमाम् …. गीता ९/२५

अर्थात

देवताओं को पूजने वाले देवताओं को प्राप्त होते है, पितरों को पूजने वाले पितरों को प्राप्त होते है। 
भूतों को पूजने वाले भूतों को प्राप्त होते है, और मेरा पूजन करने वाले भक्त मुझे ही प्राप्त होते है ॥ 
…………….इसलिए मेरे भक्तों का पुनर्जन्म नही होता !!

Votaries of the Devas go to the Devas (gods); to the Pitrs (ancestors), go their votaries; to the Bhutas (demons), go the Bhuta worshippers; My votaries too come unto Me……That’s why they attain Moskha; renouncement from birth-death cycles.

भूत प्रेत, मूर्दा (खुला या दफ़नाया हुआ अर्थात् कब्र) को सकामभाव से पूजने वाले स्वयं मरने के बाद भूत-प्रेत ही बनते हैं.!

So worshiping dead body or mazar is like worshiping Bhuta or Pisach and then attaining them itself. So If Hindus who pray sai baba want to become bhut or pisach (filthy beings who roam endlessly to attain freedom from pret or bhut yoni but never are able to do so due to their past deeds) after death can continue to do so.

“Hindu Brothers and Sisters…DO NOT BECOME Victim of Cultural Terrorism.”

Sai Baba was Created to Invoke Cultural Terrorism Among Indians. And these anti-Hindu brigade are almost successful as our own Hindus are becoming Bhakts of this Thug “Shirdi Ka Sai Baba”. It is our responsibility to pass on factual legacy to our children so that they do not become Victim of this cultural terrorism. Lets comprehend Vedic knowledge and STOP cultural destruction of our Hindu values.
Hindu brothers and sisters – Spread the Knowledge of of this Truth and consider only Lord Krishn as omnipresent Supreme Godhead.

The Video below the post is expose’ of a devout Hindu who had debate with a priest of Sai Baba temple (remember this temple was build removing Hanuman Ji’s murti and replacing it with fake god Sai Baba to fool Hindus). It’s happening across India where Rambhakt Hanuman’s or Lord Ram’s temples are demolished or revamped to accommodate fake god Sai Baba. Also to make Hindus believe fake god sai baba, who are originally Bhakts of Tridev (Sagun and nirgun roop; Lord Shiva, Lord Vishnu, Lord Brahma), the followers of false god sai baba started inserting this mleccha’s photos in between revered Hindu gods.

A devout Hindu has made good research on false prophet Sai Baba, you can visit this site to know more about Sai Baba facts

Interrogation of the priest of sai baba temple where Lord Hanuman idol was replaced with filthy pir sai baba.

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Sai


ो नहीं पता साई कौन था इसने कौन सी किताब लिखी क्या उपदेश दिये पर फिर भी भगवान बनाकर बैठे है। साई के माँ बाप का सही सही पता नहीं पर मूर्खो को ये पता है कि ये किस किस के अवतार है। अंग्रेज़ो के जमाने मे मूर्खो के साई भगवान पैदा होकर मर गए पर किसी भी एक महामारी भुखमरी मे मदद नहीं की। इनके रहते भारत गुलाम बना रहा पर इन महाशय को कोई खबर नहीं रही। शिर्डी से कभी बाहर नहीं निकले पर पूरे देश मे अचानक इनकी मौत के 90-100 साल बाद इनके मंदिर कुकरमूतते की तरह बनने लगे। चालीसा हनुमान जी की हुआ करती थी आज साई की हो गयी। राम सीता के हुआ करते थे। आज साई ही राम हो गए। श्याम राधा के थे आज वोभी साई बना दिये गए। ब्रहस्पति दिन विष्णु भगवान का होता था आज साई का मनायाजाने लगा। भगवान की मूर्ति मंदिरो में छोटी हो गयी और साई विशाल मूर्ति मे हो गए। प्राचीन हनुमान मंदिर दान को तरस गए और साई मंदिरो के तहखाने तक भर गए। मूर्खहिन्दुओ अगर दुनिया मे सच मे कलयुग के बाद भगवान ने इंसाफ किया तो याद रखना मुहछुपाने के लिए और अपनी मूर्ख बुद्धि पर तरस खाने के लिए कही शरण भी न मिलेगी। इसलिए भागवानो की तुलना मुल्ले साई से करके पाप मत करो। और इस लेख को पढ़ने के बाद भी न समझ मे आए तो अपना खतना करवाके मुसलमान बन जाओ।