Posted in गौ माता - Gau maata

पद्म पुराण में कहा गया है –


पद्म पुराण में कहा गया है –

गौ को अपने प्राणों के समान समझे, उसके शरीर को अपने ही शरीर के तुल्य माने, जो गौ के शरीर में सफ़ेद और रंग-बिरंगी रचना करके, काजल, पुष्प, और तेल के द्वारा उनकी पूजा करते है, वह अक्षय स्वर्ग का सुख भोगते है.

जो प्रतिदिन दूसरे की गाय को मुठ्ठी भर घास देता है, उसके समस्त पापों का नाश हो जाता है जैसे ब्राहमण का महत्व है, वैसे ही गौ का महत्व है, दोनों की पूजा का फल एक समान है.

भगवान के मुख से अग्नि, ब्राह्मण, देवता और गौ – ये चारो उत्पन्न हुए इसलिए ये चारो ही इस जगत के जन्मदाता है .

गौ सब कार्यों में उदार तथा समस्त गुणों की खान है .गौ की प्रत्येक वस्तु पावन है, गौ का मूत्र, गोबर, दूध, दही और घी, इन्हे “पंचगव्य” कहते है इनका पान कर लेने से शरीर के भीतर पाप नहीं ठहरता और जिसे गाय का दूध दही खाने नहीं मिलता उसका शरीर मल के समान है.

” घृतक्षीरप्रदा गावो घृतयोन्यो घृतोद्भवा:.
घृतनघो घ्रातावर्त्तास्ता में सन्तु सदा गृह
महावीर पारेख….

पद्म पुराण में कहा गया है –

गौ को अपने प्राणों के समान समझे, उसके शरीर को अपने ही शरीर के तुल्य माने, जो गौ के शरीर में सफ़ेद और रंग-बिरंगी रचना करके, काजल, पुष्प, और तेल के द्वारा उनकी पूजा करते है, वह अक्षय स्वर्ग का सुख भोगते है.

जो प्रतिदिन दूसरे की गाय को मुठ्ठी भर घास देता है, उसके समस्त पापों का नाश हो जाता है जैसे ब्राहमण का महत्व है, वैसे ही गौ का महत्व है, दोनों की पूजा का फल एक समान है. 

भगवान के मुख से अग्नि, ब्राह्मण, देवता और गौ - ये चारो उत्पन्न हुए इसलिए ये चारो ही इस जगत के जन्मदाता है .

गौ सब कार्यों में उदार तथा समस्त गुणों की खान है .गौ की प्रत्येक वस्तु पावन है, गौ का मूत्र, गोबर, दूध, दही और घी, इन्हे "पंचगव्य" कहते है इनका पान कर लेने से शरीर के भीतर पाप नहीं ठहरता और जिसे गाय का दूध दही खाने नहीं मिलता उसका शरीर मल के समान है.

" घृतक्षीरप्रदा गावो घृतयोन्यो घृतोद्भवा:.
घृतनघो घ्रातावर्त्तास्ता में सन्तु सदा गृह
                       महावीर पारेख....
Posted in Sai conspiracy

शेषनाग पर विष्णु जी की जगह साईं बाबा लेटे है


शेषनाग पर विष्णु जी की जगह साईं
बाबा लेटे है
और लक्ष्मी जी उनके पैर दबा रही है
कृष्ण जी की जगह साईं
बाबा बांसुरी बजा रहे है
और राधा जी उनको निहार रही है
हनुमान जी राम को छोड़ साईं
बाबा के चरणों में
बैठे है
इन फोटो से आपकी भावनाए भले
ही आहत न
होती हो लेकिन मेरी होती है।
गलत को गलत और सही को सही कहने
की हिम्मत मै
रखता हूँ।
मै अपने पूज्य भगवान के विरुद्ध कार्य करने
वालो के खिलाफ
लिखता था लिखता हूँ और
लिखता रहूँगा और इसकी हर कीमत मै
चुकाने
को तैयार हूँ।
शेषनाग पर विष्णु जी की जगह साईं
बाबा लेटे है
और लक्ष्मी जी उनके पैर दबा रही है
कृष्ण जी की जगह साईं
बाबा बांसुरी बजा रहे है
और राधा जी उनको निहार रही है
हनुमान जी राम को छोड़ साईं
बाबा के चरणों में
बैठे है
इन फोटो से आपकी भावनाए भले
ही आहत न
होती हो लेकिन मेरी होती है।
गलत को गलत और सही को सही कहने
की हिम्मत मै
रखता हूँ।
मै अपने पूज्य भगवान के विरुद्ध कार्य करने
वालो के खिलाफ
लिखता था लिखता हूँ और
लिखता रहूँगा और इसकी हर कीमत मै
चुकाने
को तैयार हूँ।
Posted in भारत गौरव - Mera Bharat Mahan

विश्व का प्रथम विश्वविद्यालय: तक्षशिला


Ojasvi Hindustan

^ विश्व का प्रथम विश्वविद्यालय: तक्षशिला

तक्षशिला प्राचीन भारत में गांधार देश की राजधानी और शिक्षा का प्रमुख केन्द्र था | यह विश्व का प्रथम विश्वविद्यालय था जिसकी स्थापना 700 वर्ष ईसा पूर्व में की गई थी।
तक्षशिला वर्तमान समय में पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त के रावलपिण्डी जिले की एक तहसील है।
तक्षशिला की जानकारी सर्वप्रथम वाल्मीकि रामायण से होती है। अयोध्या के राजा श्रीरामचंद्र की विजय के उल्लेख के पश्चात श्री वाल्मीकि लिखते है कि उनके छोटे भाई भरत ने अपने नाना केकयराज अश्वपति के आमंत्रण और उनकी सहायता से गंधर्वो के देश (गांधार) को जीता और अपने दो पुत्रों को वहाँ का शासक नियुक्त किया। गंधर्व देश सिंधु नदी के दोनों किनारे, स्थित था |
सिंधोरुभयत: पार्श्वे देश: परमशोभन:, वाल्मिकि रामायण, सप्तम, 100-11
और उसके दोनों ओर भरत के तक्ष और पुष्कल नामक दोनों पुत्रों ने तक्षशिला और पुष्करावती नामक अपनी-अपनी राजधानियाँ बसाई। तक्षशिला सिंधु के पूर्वी तट पर थी।
रघुवंश पंद्रहवाँ, 88-9; वाल्मीकि रामायण, सप्तम, 101.10-11;
वायुपुराण, 88.190, महा0, प्रथम 3.22।

तक्षशिला विश्वविद्यालय में पूरे विश्व के 10,500 से अधिक छात्र अध्ययन करते थे।
यहां 60 से भी अधिक विषयों को पढ़ाया जाता था। विश्वविद्यालय में आवास कक्ष, पढ़ाई के लिए कक्ष, सभागृह और पुस्तकालय थे। विभिन्न विषयों पर शोध का भी प्रावधान था।
इसका कोई एक केन्द्रीय स्थान नहीं था, अपितु यह विस्तृत भू भाग में फैला हुआ था।
महत्वपूर्ण पाठयक्रमों में यहां वेद-वेदान्त, अष्टादश विद्याएं, दर्शन, व्याकरण, अर्थशास्त्र, राजनीति, युद्धविद्या, शस्त्र-संचालन, ज्योतिष, खगोल, गणित, चिकित्सा, आयुर्वेद, ललित कला, हस्त विद्या, अश्व-विद्या, मन्त्र-विद्या, विविद्य भाषाएं, शिल्प, गणना, संख्यानक, वाणिज्य, सर्पविद्या, तंत्रशास्त्र, संगीत, नृत्य , चित्रकला, मनोविज्ञान, योगविद्या, कृषि, भूविज्ञान आदि की शिक्षाएं दी जाती थी |
प्राचीन भारतीय साहित्य के अनुसार पाणिनी, कौटिल्य, चन्द्रगुप्त, जीवक, कौशलराज, प्रसेनजित आदि महापुरुषों ने इसी विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की।
सुप्रसिद्ध विद्वान, चिंतक, कूटनीतिज्ञ, अर्थशास्त्रीचाणक्य ने भी अपनी शिक्षा यहीं पूर्ण की थी
तथा यही पर अर्थशास्त्र व राजनीति के अध्यापक बने |
चोथी शताब्दी ई. पू. से ही इस मार्ग से भारत वर्ष पर विदेशी आक्रमण होने लगे। विदेशी आक्रांताओं ने इस विश्वविद्यालय को काफी क्षति पहुंचाई। अंततः छठी शताब्दी में यह आक्रमणकारियों द्वारा पूरी तरह नष्ट कर दिया।

अधिक जानकारी के लिए देखें :
http://hi.wikipedia.org/wiki/तक्षशिला_विश्वविद्यालय
http://hi.wikipedia.org/wiki/तक्षशिला

Posted in P N Oak

तात्या टोपे पर ‘अनोखा’ इतिहास पढ़ा रही है सरकार


^ तात्या टोपे पर ‘अनोखा’ इतिहास पढ़ा रही है सरकार

सन 1857 की क्रांति के नायक रहे तात्या टोपे को शिवपुरी की 12वीं की सामाजिक विज्ञान की किताब में शहीद के बजाय संन्यासी बताया गया है।
इस मामले में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रेमनारायण नागर ने कहा कि गलती नहीं सुधरने से कक्षा 12वीं के छात्र गलत इतिहास पढ़ रहे हैं।
प्रदेश सरकार का राज्य शिक्षा केंद्र तात्या टोपे को संन्यासी बता रहा है, जबकि स्वराज संचालनालय व संस्कृति विभाग उन्हें शहीद बताते हुए उनकी याद में शिवपुरी में हर साल मेला लगवाता है।

दसवीं की किताब में शहीद

कक्षा 10वीं की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक के अध्याय सात में पृष्ठ क्रमांक 110 पर लिखा है कि शिवपुरी में 18 अप्रैल 1859 को तात्या टोपे को फांसी दी गई।

बारहवीं की किताब में संन्यासी

कक्षा 12 वीं की हिन्दी विशिष्ट के गद्य खंड के पाठ 6 में पृष्ठ क्रमांक 64 में लिखा है कि अग्रेजों ने तात्याटोपे की जगह किसी अन्य को फांसी दी थी। इसके बाद तात्या संन्यासी हो गए थे। पुस्तक के लेखक डॉ. सुरेश चंद्र शुक्ल हैं।
सुधार के लिए दिया था ज्ञापन

12वीं की किताब में गलत जानकारी प्रकाशित होने के बाद 29 मई 2013 को शहर के बुद्धिजीवियों ने राज्य सरकार के नाम एक ज्ञापन एडीएम को सौंपा था। ज्ञापन में गलतियों को सुधारने की मांग की गई थी। मगर तथ्यों में सुधार नहीं हुआ।
शिवपुरी में तात्या टोपे को फांसी देते वक्त कई लोगों ने देखा था। कुछ लेखक ऐसे भी हैं, जो घर बैठकर किताबें लिख रहे हैं। इन लेखकों को इतिहास की कोई जानकारी नहीं रहती।

– प्रेमनारायण नागर, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, शिवपुरी
तात्या टोपे के संबंध में 10वीं और 12वीं की किताबों में छपी जानकारी को लेखन समिति के सदस्यों के सामने रखा जाएगा। तथ्यों का क्रॉस चेक कराया जाएगा। तथ्य गलत होंगे तो सुधारेंगे।
– गोविंद प्रसाद शर्मा, अध्यक्ष, पाठ्य पुस्तक लेखन समिति, मप्र

स्त्रोत : अमर उजाला
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Photo: ^ तात्या टोपे पर 'अनोखा' इतिहास पढ़ा रही है सरकार

सन 1857 की क्रांति के नायक रहे तात्या टोपे को शिवपुरी की 12वीं की सामाजिक विज्ञान की किताब में शहीद के बजाय संन्यासी बताया गया है।
इस मामले में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रेमनारायण नागर ने कहा कि गलती नहीं सुधरने से कक्षा 12वीं के छात्र गलत इतिहास पढ़ रहे हैं।
प्रदेश सरकार का राज्य शिक्षा केंद्र तात्या टोपे को संन्यासी बता रहा है, जबकि स्वराज संचालनालय व संस्कृति विभाग उन्हें शहीद बताते हुए उनकी याद में शिवपुरी में हर साल मेला लगवाता है।

दसवीं की किताब में शहीद

कक्षा 10वीं की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक के अध्याय सात में पृष्ठ क्रमांक 110 पर लिखा है कि शिवपुरी में 18 अप्रैल 1859 को तात्या टोपे को फांसी दी गई।

बारहवीं की किताब में संन्यासी

कक्षा 12 वीं की हिन्दी विशिष्ट के गद्य खंड के पाठ 6 में पृष्ठ क्रमांक 64 में लिखा है कि अग्रेजों ने तात्याटोपे की जगह किसी अन्य को फांसी दी थी। इसके बाद तात्या संन्यासी हो गए थे। पुस्तक के लेखक डॉ. सुरेश चंद्र शुक्ल हैं।
सुधार के लिए दिया था ज्ञापन

12वीं की किताब में गलत जानकारी प्रकाशित होने के बाद 29 मई 2013 को शहर के बुद्धिजीवियों ने राज्य सरकार के नाम एक ज्ञापन एडीएम को सौंपा था। ज्ञापन में गलतियों को सुधारने की मांग की गई थी। मगर तथ्यों में सुधार नहीं हुआ।
शिवपुरी में तात्या टोपे को फांसी देते वक्त कई लोगों ने देखा था। कुछ लेखक ऐसे भी हैं, जो घर बैठकर किताबें लिख रहे हैं। इन लेखकों को इतिहास की कोई जानकारी नहीं रहती।

- प्रेमनारायण नागर, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, शिवपुरी
तात्या टोपे के संबंध में 10वीं और 12वीं की किताबों में छपी जानकारी को लेखन समिति के सदस्यों के सामने रखा जाएगा। तथ्यों का क्रॉस चेक कराया जाएगा। तथ्य गलत होंगे तो सुधारेंगे।
- गोविंद प्रसाद शर्मा, अध्यक्ष, पाठ्य पुस्तक लेखन समिति, मप्र

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Posted in आयुर्वेद - Ayurveda

^ कद बढ़ाने का तरीका:लम्बाई बढाएं


^ कद बढ़ाने का तरीका:लम्बाई बढाएं

क्या आप अपनी लम्बाई बडाना चाहते हैं अगर हाँ तो इस लेख को पड़कर आप अपनी लम्बाई बड़ा सकते हैं|योग में ताड़ आसन होता है जिसको करकर आप अपने शरीर की लम्बाई अच्छी खासी बड़ा सकते हैं| छोटे बच्चे और टीनेजर इस ताड़ आसन को रोज़ करे तो उनकी लम्बाई 6 फुट तक आसानी से हो सकती है| ताड़ आसन को करने के लिए आपको सबसे पहले अपने दोनों हाथ ऊपर की और उठाने हैं और हाथ उठाते समय आपको सांस अन्दर लेनी हैं ऐसा करने के साथ साथ आपको अपने पैर के पंजो में भी कुछ सेकंड के लिए खड़ा होना है और इसके बाद आपको सांस बाहर छोड़ते छोड़ते हाथ नीचे करने है और दोनों पैर के पंजो को वापस सामान्य अवस्था में लाना है! इस प्रक्रिया को आप 10 -15 बार करे और इसे बढ़ातें चले जाएँ| इस आसन को करने के साथ साथ आपको अपने आहार का भी ध्यान रखना है आपको अपने आहार में ज्यादा से ज्यादा फल और मेवे खाने है|अगर रोजाना ताड़ आसन करेंगे और आहार में फल और मेवे खायेंगे तो आप अपने कद को काफी अच्छा कर सकते हैं|

* कद बढ़ाने के लिये सूखी नागौरी, अश्वगंधा की जड़ को कूटकर बारीक कर चूर्ण बना लें। बराबर मात्रा में खांड मिलाकर किसी टाईट ढक्कन वाली कांच की शीशी में रखें। इसे रात सोते समय रोज दो चम्मच गाय के दूध के साथ लें। इससे दुबले व्यक्ति भी मोटे हो जायेंगे। कम कद वाले लोग लंम्बे हो सकते हैं। इससे नया नाखून भी बनना शुरू होता है। इस चूर्ण का सेवन करने से कमजोर व्यक्ति अपने अंदर स्फूर्ति महसूस करने लगता है। इस चूर्ण को लगातार 40 दिन तक लेते रहें। इस चूर्ण को शीतकाल में लेने से अधिक लाभ मिलता है।

सावधानी—

इस चूर्ण का सेवन करते समय खटाई, तली चीजें न खायें और जिन्हें आंव की शिकायत हो, तो अश्वगंधा न लें।

किसी कारणवश आप ये चूर्ण नहीं ले पा रहे हैं, तो सुबह व्यायाम करें। व्यायाम में ताड़ासन करना सर्वोत्तम है।
ताड़ासन– दोनों हाथ उपर करके सीधे खड़े हो जायें, दीर्घ श्वास लें, हाथ ऊपर धीरे-धीरे उठाते जायें और साथ-साथ पैर की एडियां भी उठती रहे। पूरी एड़ी उठाने के बाद शरीर को पूरी तरह से तान दें और दीर्घ श्वास लें। इससे फेफडे़ फैलते हैं और स्वच्छ वायु मिलती भी है। ताड़ासन करने से स्नायु सक्रिय होकर विस्तृत होते हैं। इसी कारण यह कद बढ़ाने में सहायक साबित होता है।

* 1 से 2 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण, 1 से 2 ग्राम काले तिल, 3 से 5 खजूर को 5 से 20 ग्राम गाय के घी में एक महीने तक खाने से लाभ होता है। साथ में पादपश्चिमोत्तानासन, ‘पुल्ल-अप्स’ करने से एवं हाथ से शरीर झुलाने से ऊँचाई बढ़ती है।
मनुष्य को अपने हाथ तथा पैरों के बल झूलने तथा दौड़ने जैसी कसरतों के अलावा भोजन में प्रोटीन, कैल्शियम तथा विटामिनों की जरूरत बहुत आवश्यक है तथा पौष्टिक भोजन करने से लम्बाई बढ़ने में फायदा मिलता है।

शरीर की लम्बाई बढ़ाने के लिये चुम्बकों का प्रयोग-

शरीर की लम्बाई बढ़ाने के लिये सेरामिक चुम्बकों का प्रयोग कनपटियों पर करना चाहिए। इस प्रयोग में उत्तरी ध्रुव वाले चुम्बकों का उपयोग एक दिन में सिर के दायीं ओर तथा दक्षिणी ध्रुव वाले चुम्बक का उपयोग सिर के बाईं ओर करना चाहिए। दूसरे दिन सिर के आगे और पीछे की ओर तथा सिर के अगले भाग पर उत्तरी ध्रुव वाला चुम्बक तथा इसके पिछले भाग पर दक्षिणी ध्रुव वाले चुम्बक का उपयोग करना चाहिए। चुम्बक का ऐसा प्रयोग लगातार तीन महीने तक करना चाहिए तथा इस प्रयोग के एक सप्ताह तक छोड़कर फिर दुबारा यह प्रयोग 3 महीने तक करना चाहिए और नियमित रूप से चुम्बकित जल को दवाई की मात्रा के बराबर पीना चाहिए।

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क्या आप अपनी लम्बाई बडाना चाहते हैं अगर हाँ तो इस लेख को पड़कर आप अपनी लम्बाई बड़ा सकते हैं|योग में ताड़ आसन होता है जिसको करकर आप अपने शरीर की लम्बाई अच्छी खासी बड़ा सकते हैं| छोटे बच्चे और टीनेजर इस ताड़ आसन को रोज़ करे तो उनकी लम्बाई 6 फुट तक आसानी से हो सकती है| ताड़ आसन को करने के लिए आपको सबसे पहले अपने दोनों हाथ ऊपर की और उठाने हैं और हाथ उठाते समय आपको सांस अन्दर लेनी हैं ऐसा करने के साथ साथ आपको अपने पैर के पंजो में भी कुछ सेकंड के लिए खड़ा होना है और इसके बाद आपको सांस बाहर छोड़ते छोड़ते हाथ नीचे करने है और दोनों पैर के पंजो को वापस सामान्य अवस्था में लाना है! इस प्रक्रिया को आप 10 -15 बार करे और इसे बढ़ातें चले जाएँ| इस आसन को करने के साथ साथ आपको अपने आहार का भी ध्यान रखना है आपको अपने आहार में ज्यादा से ज्यादा फल और मेवे खाने है|अगर रोजाना ताड़ आसन करेंगे और आहार में फल और मेवे खायेंगे तो आप अपने कद को काफी अच्छा कर सकते हैं|

* कद बढ़ाने के लिये सूखी नागौरी, अश्वगंधा की जड़ को कूटकर बारीक कर चूर्ण बना लें। बराबर मात्रा में खांड मिलाकर किसी टाईट ढक्कन वाली कांच की शीशी में रखें। इसे रात सोते समय रोज दो चम्मच गाय के दूध के साथ लें। इससे दुबले व्यक्ति भी मोटे हो जायेंगे। कम कद वाले लोग लंम्बे हो सकते हैं। इससे नया नाखून भी बनना शुरू होता है। इस चूर्ण का सेवन करने से कमजोर व्यक्ति अपने अंदर स्फूर्ति महसूस करने लगता है। इस चूर्ण को लगातार 40 दिन तक लेते रहें। इस चूर्ण को शीतकाल में लेने से अधिक लाभ मिलता है।

सावधानी—

इस चूर्ण का सेवन करते समय खटाई, तली चीजें न खायें और जिन्हें आंव की शिकायत हो, तो अश्वगंधा न लें।

किसी कारणवश आप ये चूर्ण नहीं ले पा रहे हैं, तो सुबह व्यायाम करें। व्यायाम में ताड़ासन करना सर्वोत्तम है।
ताड़ासन– दोनों हाथ उपर करके सीधे खड़े हो जायें, दीर्घ श्वास लें, हाथ ऊपर धीरे-धीरे उठाते जायें और साथ-साथ पैर की एडियां भी उठती रहे। पूरी एड़ी उठाने के बाद शरीर को पूरी तरह से तान दें और दीर्घ श्वास लें। इससे फेफडे़ फैलते हैं और स्वच्छ वायु मिलती भी है। ताड़ासन करने से स्नायु सक्रिय होकर विस्तृत होते हैं। इसी कारण यह कद बढ़ाने में सहायक साबित होता है।

* 1 से 2 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण, 1 से 2 ग्राम काले तिल, 3 से 5 खजूर को 5 से 20 ग्राम गाय के घी में एक महीने तक खाने से लाभ होता है। साथ में पादपश्चिमोत्तानासन, 'पुल्ल-अप्स' करने से एवं हाथ से शरीर झुलाने से ऊँचाई बढ़ती है।
            मनुष्य को अपने हाथ तथा पैरों के बल झूलने तथा दौड़ने जैसी कसरतों के अलावा भोजन में प्रोटीन, कैल्शियम तथा विटामिनों की जरूरत बहुत आवश्यक है तथा पौष्टिक भोजन करने से लम्बाई बढ़ने में फायदा मिलता है।

शरीर की लम्बाई बढ़ाने के लिये चुम्बकों का प्रयोग-

            शरीर की लम्बाई बढ़ाने के लिये सेरामिक चुम्बकों का प्रयोग कनपटियों पर करना चाहिए। इस प्रयोग में उत्तरी ध्रुव वाले चुम्बकों का उपयोग एक दिन में सिर के दायीं ओर तथा दक्षिणी ध्रुव वाले चुम्बक का उपयोग सिर के बाईं ओर करना चाहिए। दूसरे दिन सिर के आगे और पीछे की ओर तथा सिर के अगले भाग पर उत्तरी ध्रुव वाला चुम्बक तथा इसके पिछले भाग पर दक्षिणी ध्रुव वाले चुम्बक का उपयोग करना चाहिए। चुम्बक का ऐसा प्रयोग लगातार तीन महीने तक करना चाहिए तथा इस प्रयोग के एक सप्ताह तक छोड़कर फिर दुबारा यह प्रयोग 3 महीने तक करना चाहिए और नियमित रूप से चुम्बकित जल को दवाई की मात्रा के बराबर पीना चाहिए।

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भगतसिंह


Ojasvi Hindustan

^ शहीदे आजम भगतसिंह को फांसी दिए जाने
पर अहिंसा के महान पुजारी गांधी ने
कहा था, ‘‘हमें ब्रिटेन के विनाश के बदले
अपनी आजादी नहीं चाहिए ।’’ और आगे
कहा, ‘‘भगतसिंह की पूजा से देश को बहुत
हानि हुई और हो रही है ।
वहीं इसका परिणाम गुंडागर्दी का पतन
है । फांसी शीघ्र दे दी जाए ताकि 30
मार्च से करांची में होने वाले कांग्रेस
अधिवेशन में कोई बाधा न आवे ।”
अर्थात् गांधी की परिभाषा में
किसी को फांसी देना हिंसा नहीं थी ।
इसी प्रकार एक ओर महान्
क्रान्तिकारी जतिनदास
को जो आगरा में अंग्रेजों ने शहीद
किया तो गांधी आगरा में ही थे और जब
गांधी को उनके पार्थिक शरीर पर
माला चढ़ाने को कहा गया तो उन्होंने
साफ इनकार कर दिया अर्थात् उस
नौजवान द्वारा खुद को देश के लिए
कुर्बान करने पर भी गांधी के दिल में
किसी प्रकार की दया और
सहानुभूति नहीं उपजी, ऐसे थे हमारे
अहिंसावादी गांधी । जब सन् 1937 में
कांग्रेस अध्यक्ष के लिए नेताजी सुभाष और
गांधी द्वारा मनोनीत
सीताभिरमैया के मध्य मुकाबला हुआ
तो गांधी ने कहा यदि रमैया चुनाव
हार गया तो वे राजनीति छोड़ देंगे
लेकिन उन्होंने अपने मरने तक
राजनीति नहीं छोड़ी जबकि रमैया चुनाव
हार गए थे।
इसी प्रकार गांधी ने कहा था,
“पाकिस्तान उनकी लाश पर बनेगा”
लेकिन पाकिस्तान उनके समर्थन से
ही बना । ऐसे थे हमारे
सत्यवादी गांधी । इससे भी बढ़कर
गांधी और कांग्रेस ने दूसरे विश्वयुद्ध में
अंग्रेजों का समर्थन किया तो फिर
क्या लड़ाई में हिंसा थी या लड्डू बंट रहे
थे ? पाठक स्वयं बतलाएं ? गांधी ने अपने
जीवन में तीन आन्दोलन (सत्याग्रहद्) चलाए
और तीनों को ही बीच में वापिस ले
लिया गया फिर भी लोग कहते हैं
कि आजादी गांधी ने दिलवाई ।इससे
भी बढ़कर जब देश के महान सपूत उधमसिंह ने
इंग्लैण्ड में माईकल डायर
को मारा तो गांधी ने उन्हें पागल
कहा इसलिए नीरद चौ० ने
गांधी को दुनियां का सबसे बड़ा सफल
पाखण्डी लिखा है । इस आजादी के बारे
में इतिहासकार सी. आर. मजूमदार लिखते
हैं – “भारत
की आजादी का सेहरा गांधी के सिर
बांधना सच्चाई से मजाक होगा । यह
कहना उसने सत्याग्रह व चरखे से
आजादी दिलाई बहुत
बड़ी मूर्खता होगी । इसलिए
गांधी को आजादी का ‘हीरो’
कहना उन सभी क्रान्तिकारियों
का अपमान है जिन्होंने देश की आजादी के
लिए अपना खून बहाया ।”
यदि चरखों की आजादी की रक्षा सम्भव
होती है तो बार्डर पर टैंकों की जगह चरखे
क्यों नहीं रखवा दिए जाते ………..??

++++++

Posted in जीवन चरित्र

Maharana pratap


Maharana pratap singh ji (Bachpan or rajayabhishek):-
Pratap singh ji ka janam 9 may, 1540 mai, khumbhal garh kile mai hua. Ye Rana udai singh II ke 33 putra or putrio mai sabse bade the. In ki mata ji ka nam Maharani jaiwanta kanwar tha. khuddari or bahaduri to pratap singh ji mai koot koot k bhari hui thi. bachpan se hi atyant bahadur os sahshi hone ke karn sabhi ko vishvas tha k ye bhot hi mahan raja banenge.
Bachpan mai Pratap singh ji ko khel kud or yudh siksha mai waki vishayo se jayda ruchi thi.
Rana udai singh ji apni mratyu se purv apni chhoti rani k putra Jagammal ko raja bnana chahte the, Pratap singh ji ne bhi Prabhu shree Ram ji k hi bhanti rajay path tyagne ka nischay kr lia tha. prantu Jagammal ka raja banna kisi ko bhi shveekar nhi tha, kyuki un mai raja banne wali wah pratibha or hunar nhi tha jo Maharana mai tha.
Akhir kar Maharana pratap singh ji ka 1 march, 1572 mai rajaytilak kia gya.

jai maharana pratap.

Maharana pratap singh ji (Bachpan or rajayabhishek):-
Pratap singh ji ka janam 9 may, 1540 mai, khumbhal garh kile mai hua. Ye Rana udai singh II ke 33 putra or putrio mai sabse bade the. In ki mata ji ka nam Maharani jaiwanta kanwar tha. khuddari or bahaduri to pratap singh ji mai koot koot k bhari hui thi. bachpan se hi atyant bahadur os sahshi hone ke karn sabhi ko vishvas tha k ye bhot hi mahan raja banenge.
Bachpan mai Pratap singh ji ko khel kud or yudh siksha mai waki vishayo se jayda ruchi thi.
Rana udai singh ji apni mratyu se purv apni chhoti rani k putra Jagammal ko raja bnana chahte the, Pratap singh ji ne bhi Prabhu shree Ram ji k hi bhanti rajay path tyagne ka nischay kr lia tha. prantu Jagammal ka raja banna kisi ko bhi shveekar nhi tha, kyuki un mai raja banne wali wah pratibha or hunar nhi tha jo Maharana mai tha.
Akhir kar Maharana pratap singh ji ka 1 march, 1572 mai rajaytilak kia gya.

jai maharana pratap.
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ऐक कडवा सच


ऐक कडवा सच
आप कभी वृद्धा आश्रम मे जाए तो वाहाँ मोजुद वृद्ध से पुछना की आपके बेटे क्या करते है ? तो आपको जवाब मिलेगा कि मेरा बेटा बडा ओफिसर है डोकटर है वकील है ईन्स्पेकर है , इन्जीनियर है . टीचर है व्यापारी है .पर ऐक भी वृद्ध दम्पति ऐसा नही मिलेगा जो आपको कहे की मेरा बेटा किसान है अनपढ या गरिब है क्यु की अनपढ किसान और गरिब के माँ बाप कभी वृद्धा आश्रम तक पहोचते ही नही । ये आधुनिक युग का सच है ।

Posted in हिन्दू पतन

मुरादाबाद


Jyoti Datwani's photo.
Jyoti Datwani's photo.
Jyoti Datwani's photo.
Jyoti Datwani's photo.
Jyoti Datwani added 4 new photos.

!! शेयर !! शेयर !! शेयर !! शेयर !! शेयर !! शेयर !! शेयर !!

आदरणीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी,
भारत सरकार नई दिल्ली !
महोदय जी,

बात हिन्दू राज की हुई थी न की मुल्ला राज की

मुरादाबाद में मुस्लिमो के विरोध के कारण पुलिश ने जबरन मंदिर से लाउड स्पीकर उतार दिया !

कांठ के नया गांव अकबरपुर चैदरी में मंदिर पर लगे लाउडस्पीकर को पुलिश वालो ने जबरन लाठी चार्ज करके उतार दिया और हिन्दुओ के विरोध करने पर उन पर जबरन बल प्रयोग कर उन्हें जेल में डाल दिया जा रहा है और पुलिश हिन्दुओ के घर में घुस कर पुरुष महिलाओ को जबरन लाठियो दण्डो से पीट-पीट कर जेल में डाल दे रहे है ! क्या हम हिन्दू आरती पूजा पाठ भी नहीं कर सकते ! हमने आपको पी एम बनाया बहुत आशा एवं विश्वास लेकर कृपया आज हम लोग कष्ट एवं मुसीबत में है कृपया हम सबकी मदद करने कि कृपा करें !

मेरा मुस्लिमो और पुलिश वालो से कुछ सवाल है :-
* मंदिर के लाउड स्पीकर से आपको ध्वनि प्रदूसन नजर आती है वही दूसरी तरफ मस्जिदो के लाउड स्पीकर पर ध्वनि प्रदूसन क्यों नजर नहीं आती ?
* मंदिर में केवल 2 बार लाउड स्पीकर को ऑन करके भक्ति सांग चलाया जाता है जबकि मस्जिदो में 5 बार नमाज फूल स्पीड में और तक़रीर और जिहाद अलग से फैलाया जाता है !
* ये हिंदुस्तान है न की पाकिस्तान आपकी हिम्मत कैसे हुई लाउड स्पीकर उतरवाने की ! हम पूजा आरती करें तो लाठीचार्ज और वो बीच सड़क पर नमाज करें तो सुरक्षा, ये कैसा द्वेष पूर्ण व्यहार हो रहा है हिन्दुओ के साथ !
* हिन्दुओ को उकसाना बहुत भरी पड़ सकता है —याद कर लो गोधरा, मुजफ्फर नगर, लखनऊ, मेरठ आदि सुरुवात मुस्लिमो ने किया अंत हिंदुओं ने किया !

सभी हिन्दू भाइयो से अनुरोध है कि आप सब एक और संगठित हो जाइये और अब हिंदुत्वा के लिए खड़े हो जाइये नहीं तो एक दिन ऐसा आएगा कि हिन्दू सिर्फ इतिहास में रहेगा और हाँ इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ! जिससे पूरा हिंदुस्तान देख सकें हिन्दुओ कि स्थति !

——————अनूप कुमार गुप्ता ॐ कमेटी

ॐ कमेटी

http://www.amarujala.com/feature/states/uttar-pradesh/disturbance-in-muradabad/

Posted in आयुर्वेद - Ayurveda

हार्ट अटैक: ना घबराये


हार्ट अटैक: ना घबराये ......!!!

सहज सुलभ उपाय ....
99 प्रतिशत ब्लॉकेज को भी रिमूव कर देता है पीपल का पत्ता....

पीपल के 15 पत्ते लें जो कोमल गुलाबी कोंपलें न हों, बल्कि पत्ते हरे, कोमल व भली प्रकार विकसित हों। प्रत्येक का ऊपर व नीचे का कुछ भाग कैंची से काटकर अलग कर दें।

पत्ते का बीच का भाग पानी से साफ कर लें। इन्हें एक गिलास पानी में धीमी आँच पर पकने दें। जब पानी उबलकर एक तिहाई रह जाए तब ठंडा होने पर साफ कपड़े से छान लें और उसे ठंडे स्थान पर रख दें, दवा तैयार।

इस काढ़े की तीन खुराकें बनाकर प्रत्येक तीन घंटे बाद प्रातः लें। हार्ट अटैक के बाद कुछ समय हो जाने के पश्चात लगातार पंद्रह दिन तक इसे लेने से हृदय पुनः स्वस्थ हो जाता है और फिर दिल का दौरा पड़ने की संभावना नहीं रहती। दिल के रोगी इस नुस्खे का एक बार प्रयोग अवश्य करें।

* पीपल के पत्ते में दिल को बल और शांति देने की अद्भुत क्षमता है।
* इस पीपल के काढ़े की तीन खुराकें सवेरे 8 बजे, 11 बजे व 2 बजे ली जा सकती हैं।
* खुराक लेने से पहले पेट एक दम खाली नहीं होना चाहिए, बल्कि सुपाच्य व हल्का नाश्ता करने के बाद ही लें।
* प्रयोगकाल में तली चीजें, चावल आदि न लें। मांस, मछली, अंडे, शराब, धूम्रपान का प्रयोग बंद कर दें। नमक, चिकनाई का प्रयोग बंद कर दें।
* अनार, पपीता, आंवला, बथुआ, लहसुन, मैथी दाना, सेब का मुरब्बा, मौसंबी, रात में भिगोए काले चने, किशमिश, गुग्गुल, दही, छाछ आदि लें । ......

तो अब समझ आया, भगवान ने पीपल के पत्तों को हार्टशेप क्यों बनाया..

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हार्ट अटैक: ना घबराये ……!!!

सहज सुलभ उपाय ….
99 प्रतिशत ब्लॉकेज को भी रिमूव कर देता है पीपल का पत्ता….

पीपल के 15 पत्ते लें जो कोमल गुलाबी कोंपलें न हों, बल्कि पत्ते हरे, कोमल व भली प्रकार विकसित हों। प्रत्येक का ऊपर व नीचे का कुछ भाग कैंची से काटकर अलग कर दें।

पत्ते का बीच का भाग पानी से साफ कर लें। इन्हें एक गिलास पानी में धीमी आँच पर पकने दें। जब पानी उबलकर एक तिहाई रह जाए तब ठंडा होने पर साफ कपड़े से छान लें और उसे ठंडे स्थान पर रख दें, दवा तैयार।

इस काढ़े की तीन खुराकें बनाकर प्रत्येक तीन घंटे बाद प्रातः लें। हार्ट अटैक के बाद कुछ समय हो जाने के पश्चात लगातार पंद्रह दिन तक इसे लेने से हृदय पुनः स्वस्थ हो जाता है और फिर दिल का दौरा पड़ने की संभावना नहीं रहती। दिल के रोगी इस नुस्खे का एक बार प्रयोग अवश्य करें।

* पीपल के पत्ते में दिल को बल और शांति देने की अद्भुत क्षमता है।
* इस पीपल के काढ़े की तीन खुराकें सवेरे 8 बजे, 11 बजे व 2 बजे ली जा सकती हैं।
* खुराक लेने से पहले पेट एक दम खाली नहीं होना चाहिए, बल्कि सुपाच्य व हल्का नाश्ता करने के बाद ही लें।
* प्रयोगकाल में तली चीजें, चावल आदि न लें। मांस, मछली, अंडे, शराब, धूम्रपान का प्रयोग बंद कर दें। नमक, चिकनाई का प्रयोग बंद कर दें।
* अनार, पपीता, आंवला, बथुआ, लहसुन, मैथी दाना, सेब का मुरब्बा, मौसंबी, रात में भिगोए काले चने, किशमिश, गुग्गुल, दही, छाछ आदि लें । ……

तो अब समझ आया, भगवान ने पीपल के पत्तों को हार्टशेप क्यों बनाया..

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