Posted in भारत गौरव - Mera Bharat Mahan

लहरों से बिजली बनाने वाली मशीन तैयार की है।


दसवीं कक्षा के एक चौदह वर्षीय छात्र सुधांशु तिवारी ने लहरों से बिजली बनाने वाली मशीन तैयार की है। कबाड़ के सामानों से बनाई गई इस मशीन की लागत केवल चार हजार रुपए है। सी-शोर इलेक्‍ट्रो जेनरेटर नाम की इस मशीन से बिजली उत्पादन का परीक्षण सफलतापूर्वक किया गया है। मशीन पानी की लहरों से बिजली बनाने के साथ ही अपने अंदर एक तय क्षमता तक बिजली स्टोर भी कर सकती है।

छात्र सुधांशु तिवारी इलाहाबाद के आलोपीबाग इलाके में अपने नाना वीके दुबे के साथ रहते हैं। उनकी यह मशीन समुद्र की लहरों से बिजली बनाने में सफल होगी। मशीन को समुद्र के किनारे एक तैरते हुए प्लेटफार्म पर रखा जाएगा। समुद्र से आने वाली हर लहर से इस मशीन में एक वोल्ट बिजली तैयार होकर डायनेमो के जरिए बैटरी में स्टोर हो जाएगी। मशीन को नदियों और झीलों में भी लगाया जा सकता है।
यह मशीन देखने में काफी सरल है। मशीन में लगा लकड़ी का एक प्लैंक (तख्‍ता) लहरों के झटके के साथ ही मशीन को सक्रिय करता है। इसके बाद मशीन में लगे गि‍यर और रॉड कैपेसिटर (कंडेंसर) में बिजली उत्पादित कर भेजने लगते हैं। कैपेसिटर से बिजली बैटरी में जाकर स्टोर हो जाती है। इस प्रकार मशीन पानी की हर लहर से एक वोल्ट बिजली पैदा करने में सक्षम होती है।

सुधांशु के पिता सतीश कुमार तिवारी अम्बिकापुर की एक कोयला खान में काम करते हैं। नए आविष्कार के लिए हजारों रुपए खर्च करना उनके लिए संभव नहीं था। इसलि‍ए सुधांशु ने घर के कबाड़ से ही कुछ करने का निर्णय लिया। इस दौरान उसने घर में रखे साइकिल के गियर, चेन, लकड़ी के टुकड़ों और रॉड का इस मशीन को बनाने के लिए इस्‍तेमाल कि‍या। सुधांशु को सिर्फ बैटरी और कैपेसिटर (कंडेंसर) के लिए रुपए खर्च करने पड़े।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में विज्ञान के प्रोफेसर अनुपम दीक्षित के मुताबिक, पानी की लहरों से बिजली बनाने का यह तरीका काफी सरल है। यदि इसे बड़े पैमाने पर प्रयोग में लाया जाए, तो देश का बिजली संकट काफी हद तक हल हो सकता है। इसके लि‍ए भारत के पास एक लंबा समुद्री कि‍नारा है, जहां स्वाभाविक रूप से लहरें उठती हैं।

बीएचयू ने कि‍या सम्‍मानि‍त

सुधांशु को उनके प्रयोग के लिए बीएचयू ने भी सम्मानित किया है। उन्हें चाइल्ड साइंटिस्ट का प्रमाण पत्र दिया गया है। वे कुछ और मशीनों पर भी काम कर रहे हैं।

औद्योगिक संभावनाएं भी हैं

सुधांशु की सी-शोर इलेक्‍ट्रो जेनरेटर मशीन को वर्तमान क्षमता से 12 गुना अधिक बिजली पैदा करने के लायक बनाया जा सकता है। इसके लिए इसके मॉडल में कोई परिवर्तन नहीं करना होगा। सुधांशु के मुताबिक, क्षमता बढ़ने पर हर मशीन एक बार में 12 वोल्ट बिजली पैदा करने में सक्षम हो जाएगी।

औद्योगिक स्तर पर उत्पादन के लिए इसमें कुछ फेरबदल करने होंगे। उद्योगपति राजीव नैय्यर भी मानते हैं कि इस मशीन में कुछ फेरबदल कर इसका बड़ा मॉडल बनाया जा सकता है। इससे बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन संभव हो सकेगा।

दसवीं कक्षा के एक चौदह वर्षीय छात्र सुधांशु तिवारी ने लहरों से बिजली बनाने वाली मशीन तैयार की है। कबाड़ के सामानों से बनाई गई इस मशीन की लागत केवल  चार हजार रुपए है। सी-शोर इलेक्‍ट्रो जेनरेटर नाम की इस मशीन से बिजली उत्पादन का परीक्षण सफलतापूर्वक किया गया है। मशीन पानी की लहरों से बिजली बनाने के साथ ही अपने अंदर एक तय क्षमता तक बिजली स्टोर भी कर सकती है।

 छात्र सुधांशु तिवारी इलाहाबाद के आलोपीबाग इलाके में अपने नाना वीके दुबे के साथ रहते हैं। उनकी यह मशीन समुद्र की लहरों से बिजली बनाने में सफल होगी। मशीन को समुद्र के किनारे एक तैरते हुए प्लेटफार्म पर रखा जाएगा। समुद्र से आने वाली हर लहर से इस मशीन में एक वोल्ट बिजली तैयार होकर डायनेमो के जरिए बैटरी में स्टोर हो जाएगी। मशीन को नदियों और झीलों में भी लगाया जा सकता है।
 यह मशीन देखने में काफी सरल है। मशीन में लगा लकड़ी का एक प्लैंक (तख्‍ता) लहरों के झटके के साथ ही मशीन को सक्रिय करता है। इसके बाद मशीन में लगे गि‍यर और रॉड कैपेसिटर (कंडेंसर) में बिजली उत्पादित कर भेजने लगते हैं। कैपेसिटर से बिजली बैटरी में जाकर स्टोर हो जाती है। इस प्रकार मशीन पानी की हर लहर से एक वोल्ट बिजली पैदा करने में सक्षम होती है।

सुधांशु के पिता सतीश कुमार तिवारी अम्बिकापुर की एक कोयला खान में काम करते हैं। नए आविष्कार के लिए हजारों रुपए खर्च करना उनके लिए संभव नहीं था। इसलि‍ए सुधांशु ने घर के कबाड़ से ही कुछ करने का निर्णय लिया। इस दौरान उसने घर में रखे साइकिल के गियर, चेन, लकड़ी के टुकड़ों और रॉड का इस मशीन को बनाने के लिए इस्‍तेमाल कि‍या। सुधांशु को सिर्फ बैटरी और कैपेसिटर (कंडेंसर) के लिए रुपए खर्च करने पड़े।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में विज्ञान के प्रोफेसर अनुपम दीक्षित के मुताबिक, पानी की लहरों से बिजली बनाने का यह तरीका काफी सरल है। यदि इसे बड़े पैमाने पर प्रयोग में लाया जाए, तो देश का बिजली संकट काफी हद तक हल हो सकता है। इसके लि‍ए भारत के पास एक लंबा समुद्री कि‍नारा है, जहां स्वाभाविक रूप से लहरें उठती हैं।

बीएचयू ने कि‍या सम्‍मानि‍त

सुधांशु को उनके प्रयोग के लिए बीएचयू ने भी सम्मानित किया है। उन्हें चाइल्ड साइंटिस्ट का प्रमाण पत्र दिया गया है। वे कुछ और मशीनों पर भी काम कर रहे हैं। 

औद्योगिक संभावनाएं भी हैं

सुधांशु की सी-शोर इलेक्‍ट्रो जेनरेटर मशीन को वर्तमान क्षमता से 12 गुना अधिक बिजली पैदा करने के लायक बनाया जा सकता है। इसके लिए इसके मॉडल में कोई परिवर्तन नहीं करना होगा। सुधांशु के मुताबिक, क्षमता बढ़ने पर हर मशीन एक बार में 12 वोल्ट बिजली पैदा करने में सक्षम हो जाएगी।

औद्योगिक स्तर पर उत्पादन के लिए इसमें कुछ फेरबदल करने होंगे। उद्योगपति राजीव नैय्यर भी मानते हैं कि इस मशीन में कुछ फेरबदल कर इसका बड़ा मॉडल बनाया जा सकता है। इससे बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन संभव हो सकेगा।

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