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औरंगजेब की मृत्यु कैसे हुई


क्या आप जानते हैं कि…. काशी विश्वनाथ और मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि मदिर के विध्वंसक ….जेहादी आताताई औरंगजेब की मृत्यु कैसे हुई थी….?????

दरअसल… औरंगजेब …और, हिन्दुओं के प्रति उसकी क्रूरता से लगभग हम सभी परिचित हैं…. परन्तु उस आताताई के मृत्यु की कहानी बहुत कम लोगों को ही मालूम होगी…!

उस आततायी के मौत की कहानी और कुछ नहीं …. बल्कि.. हमारे वीर पूर्वजों की वीर गाथा है …….जो कुछ इस प्रकार है कि….

14वीं और 15वीं शताब्दी में…… गद्दारों के मिलीभगत के कारण (जैसे आज के ज़माने में सेक्युलर हैं) …. कई युद्धों में हार के बाद हिन्दू महासभा द्वारा साधू-संतों की अगुवाई में यह निर्णय लिया गया कि …. अब प्रमुख साधू-संतों द्वारा “व्यक्ति निर्माण” का कार्य अपने हाथों में लिए जाए l

और… इस पुनीत कार्य हेतु….. बहुत से संतों ने अपना अपना राष्ट्रीय एवं धार्मिक कर्तव्य निभाते हुए समय-समय पर शूरवीरों का निर्माण किया l

समर्थ गुरु रामदास जी भी इसी श्रेणी में आते हैं…… जिन्होंने “”वीर शिवाजी”” का निर्माण किया l

वहीँ…. प्राण नाथ महाप्रभु जी ने….. बुन्देलखण्ड से “राजा छत्रसाल” का निर्माण किया l
और….. ओहम नरेश को श्री राम महाप्रभु……. द्वारा तैयार किया गया l

उस समय तक…. महान हिन्दु सम्राट शिवाजी…. का स्वर्गवास हो चूका था l

और…. सम्भाजी के अंग-अंग काट कर उनकी नृशंस हत्या …. औरंगजेब के सामने ही कर दी गई थी l

इसके बाद…… हिन्दू महासभा की अगुआई में हम हिन्दुओं के सामूहिक प्रयास द्वारा…… भारत में चारों ओर से…..औरंगजेब के विरुद्ध …छापामार युद्ध आरम्भ किया गया… जिसमे की बहुत से धर्म-गुरुओं और साधू-संतों द्वारा समय-समय पर नीतियाँ और परामर्श भी दिए जाते रहे l

यहाँ… मैं आपको यह दिलाना चाहूँगा कि…. औरंगजेब की सेना …….””धन से और व्यक्तियों से”” इतिहास में सबसे बड़ी सेना मानी जाती है…… l

परन्तु फिर भी हिन्दुओं ने हार नहीं मानी …तथा, ….औरंगजेब को मारने के छोटे-छोटे प्रयास हमेशा ही किये जाते थे ….. लेकिन , वो जेहादी किस्मत का धनी था… और… शायद भारत के गद्दारों के निष्ठा का भी l

यहाँ तक कि……. मराठा नेता संताजी और धनाजी द्वारा …. औरंगजेब के तम्बू की सारी रस्सियाँ ही काट कर तम्बू ही गिरा दिया गया था……परन्तु , औरंगजेब उस रात अपनी बेटी के तम्बू में था…. और, उसी के साथ सो रहा था…… जिस कारण वो तो बच गया …. पर बाकी सारे के सारे लोग… मारे गए l

फिर भी… इस हिन्दुओं के अचानक और जोरदार हमले के बाद….. संता जी और धनाजी की ख्याति भी बहुत बढ़ चुकी थी….. तथा …. मुस्लिमों में उनका इतना आतंक व्याप्त हो चुका था कि…. यदि कोई घोड़ा पानी भी नहीं पीता था… तो, उसे मुसलमान कहते थे कि .. क्या तूने संता जी और धना जी को देख लिया है …. जो डर के मारे पानी नहीं पी रहा है…???

इसी तरह…. दूसरी तरफ , बुन्देलखण्ड के “वीर छत्रसाल” ने सौगंध ली हुई थी कि….. वे औरंगजेब को…. व्यक्तिगत युद्ध में अपनी तलवार से हराएंगे ….. और , छत्रसाल महाराज द्वारा ऐसे कई प्रयास भी किये गए …..परन्तु, अथक प्रयासों के बावजूद वीर छत्रसाल सफल न हो पाए l

अंतत:…… प्राण नाथ महाप्रभु जी ने कहा कि …. औरंगजेब का जिन्दा रहना ….. एक-एक दिन भारी पड़ रहा है हिन्दुओं पर…. क्योंकि, जब तक औरंगजेब रोज ढाई मन जनेऊ न जला लेता था ….. तब तक उसे नींद नहीं आती थी l

अब आप…. इसी बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि …. ढाई मन जनेऊ एक दिन में जलाने के लिए ….. कितने हिन्दुओं को मारा और सताया जाता होगा…. तथा, कितने बड़े स्तर पर धर्म परिवर्तन किया जाता होगा….. साथ ही, कितनी ही औरतों का शारीरिक मान मर्दन किया जाता होगा…. एवं … कितने ही मन्दिरों तथा प्रतिमाओं का विध्वंस किया जाता होगा ..??????

प्राण नाथ महाप्रभु जी की यह बातें सुन कर……. छत्रसाल जी ने अपनी सौगंध वापिस लेकर कहा कि …. आप जो कहेंगे मैं वो करूँगा … इसीलिए आप दुखी न हों…और , मुझे आदेश दें l

जिसके बाद…. प्राणनाथ महाप्रभु जी ने…… एक ख़ास प्रकार के जहर से युक्त एक खंजर दिया बुन्देलखण्ड को और सारी योजना समझाते हुए कहा कि …. यह खंजर उस आतताई औरंगजेब को पूरा नहीं मारना है..अन्यथा … वो तत्काल प्रभाव से मर जायेगा ….. अतः ये खंजर केवल उसको एक इंच से भी कम गहराई का घाव देते हुए….. लम्बा सा एक चीरा ही मारना था ..!

जिससे कि …. धीरे धीरे उस जहर का असर फैलेगा….. और, वो आतताई औरंगजेब तडप-तडप कर मरेगा l

और, ख़ुशी कि बात है कि…. बुन्देला वीर छत्रसाल ने इस कार्य को सफलता पूर्वक अंजाम दिया…. और, जैसा प्राण नाथ महाप्रभु जी ने कहा था… ठीक उसी प्रकार उसके शरीर पर एक चीरा दिया…. जिससे … वो औरंगजेब 3 महीने तक बिस्तर पर रह कर तड़पता रहा… और, इसी तरह वो तडप तडप कर कुत्ते से भी बदतर मौत मरा…… तथा … उसके पापों का का अंत हुआ l

औरंगशाही में औरंगजेब ने स्वयं लिखा है कि… “”मुझे प्राण नाथ महाप्रभु और छत्रसाल ने धोखे और छल से मारा है “”l

अतः…. आप अपने पूर्वजों के इतिहास जो जानें और समझने का प्रयास करें…. तथा… उनके द्वारा स्थापित किये गए सिद्धांतों को जीवित रखें l

जिस सनातन संस्कृति को जीवित रखने के लिए ….. अखंड भारत के सीमाओं की रक्षा हेतु हमारे असंख्य पूर्वजों ने अपने शौर्य और पराक्रम से… अनेकों बार अपने प्राणों तक की आहुति दी गयी हो….उसे हम किस प्रकार आसानी से भुलाते जा रहे हैं…?????

याद रखें….. सीमाएं उसी राष्ट्र की विकसित और सुरक्षित रहेंगी ….. जो सदैव संघर्षरत रहेंगे l

क्योंकि….. जो लड़ना ही भूल जाएँगे….. वो न स्वयं सुरक्षित रहेंगे……. न ही अपने राष्ट्र को सुरक्षित बना पाएंगे l

जय महाकाल…!!!

सौजन्य: हिन्दू महासभा

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Mamta Banerjee Being Radical Muslim is Anti-Hindu and Anti-National


Mamta Banerjee Being Radical Muslim is Anti-Hindu and Anti-National

http://haribhakt.com/mamta-banerjee-being-radical-muslim-is-anti-hindu-and-anti-national/

begum-mamta-banerjee

How West Bengal is Heading to become next Kashmir in India

Just like Sonia Gandhi being italian citizen hide her real name, Antonia Edvige Albina Maino, and christian identity to bluff 80% of Hindus in India. Similarly, some muslim leaders in India are using Hindu names to bluff Indians and establish islamic rule in India.

Mamata Banerjee Original Name: Mamta Banerjee’s real past on religion has discrepancies, is different on different books and references. But since we deal with present facts – We would stick to present truth that Mamta Banerjee is a muslim, prays to allah and is privately known as Maassama Khatoon. No wonder, she speaks Urdu fluently than national language Hindi. True to being a fanatic muslim woman – Mamta Khatun never don nose ring, sometimes use ear-rings, her forehead never has bindiya like a radical muslim women. She has put  her knowledge of islam on appeasing muslims and treating Hindus in West Bengal as third grade citizens.

Applauds her love towards islamic culture, as she earned a master’s degree in Islamic History from the University of Calcutta – she always boast on this fact, whenever she meet muslim clerics.

Know How Mumtaz Maassama Khatoon alias Mamata Banerjee is turning West Bengal into Waste Bengal, by infesting the state with islamic fundamentalists.

West Bengal following UP is also on the verge on becoming another islamic state within ‘secular’ India. Some idiot Hindus love that word ‘secular’ more than their own mother and father.

Mamta Benerjee alias Mumtaz Maassama Khatoon is Anti-Hindu, Anti-National Bangladeshi

Mumtaz Maassama Khatoon is more fanatic than common imam of local masjid. Further information would establish these as a true but shameful fact for Hindus who voted her to power.

What Benefits Muslims are Getting and Their Contribution to West Bengal Economy

Hindus are treated very badly and facing torturous apathy in pro-islamic West Bengal Trinamool Congress govt. While more than 75% of the taxes are paid by Hindus, still when it comes to reverting the Hindus with beneficial schemes only 15% Hindus get the benefit of it while 85% of the taxes received are distributed freely among muslims – in the name of minority schemes. While the fact of the matter is, Muslims in West Bengal comprise of 38% to total population…!!

And how muslims are contributing in return to these benefits of the State of West Bengal:

1) Slums in major cities

2) Population (muslims are growing 66% more than average population of other religions)

3) Helping to increase crime rate in WB by 30% – every second criminal in WB is a muslim

4) Building new mosque almost every month

5) Spreading pink revolution by killing more Indian cows

6) Giving shelter to Bangladeshi muslims

7) Providing jobs to Bangladeshi muslims instead of poor Hindus

8) Opposing Hindu festivals – recent clashes in Maa Kali processions and Maa Durga pandals are ample proofs.

9) Avoid dealing with Hindus

10) Lure Hindu girls to marry them and convert to their religion

And How Hindus are helping the Islamization cause

1) Falling prey to false cries of Maassama Mumtaz Banerjee

2) By blindly voting Mamta Banerjee TMC, to make Islamic Trinamool Congress govt in West Bengal

3) By not uniting against Islamization of TMC govt.

4) By not retaliating aggressively towards Bangladeshi muslims and their supporters

What Hindus Should Do To Stop Islamization of West Bengal

1) Organize meetings in various Hindu dominated areas and remove divisions between Biharis, North Indians and Bengalis – a divisive ploy indicted by erstwhile Communist govt.

2) Unite all Hindus, irrespective of their caste, creed or culture

3) Do not provide home/shelter to any muslim tenant

4) Boycott dealings with muslims – do not sell property or involve in business matters with muslims.

5) Do not buy from muslim shops

6) Avoid meeting of Hindu sisters/girls with muslim friends

7) Unitedly vote against TMC, CPI and all such anti-Hindu parties. Prefer party that cares for Hindu ethos and Indian culture

8) Lodge police complaint by mobbing police stations before thrashing muslim criminals or bangladeshis

9) Get united, mobify and Retaliate aggressively whenever a Hindu is mistreated by any muslim

If Hindus do not get aggressive then the main aim of terrorist organisations of Bangladesh and ISI of merging West Bengal with Bangladesh to create ONE BANGLADESH will soon be materialized and how minority Hindus are being treated in Bangladesh presently is not hidden fact. So become owner of your own life or else future slave of islamic state.

The terrorist organisations of Bangladesh which has developed proxy roots in West Bengal TMC govt  are:

  1. Harkat-ul-Jihad-al Islami Bangladesh (HuJI-B)
  2. Jagrata Muslim Janata Bangladesh (JMJB)
  3. Jama’atul Mujahideen Bangladesh (JMB)
  4. Purba Bangla Communist Party (PBCP)
  5. Islami Chhatra Shibir (ICS)

Its high time Hindus take the responsibility in their hands and RETALIATE.

Islamizing Railways Revoking Traditional Hindu values

Few years back Railway Ministry under Khatoon Mamta Banerjee alias Maassama, issued orders to remove all Hindu religious symbols and Images of Hindu gods from Train and also placed a blanket ban on performing traditional pooja’s prior to the take off of a new Train – Reason- Told was – India is a Secular country and we should not offend Minorities by such Public display of our beliefs!

But the very same Ministry issued several advertisements (which continues even to this day on muslim non-Vedic festivals) with a picture of Model cum Minister Mamta Banerji (Begum) offering namaz with Photograph of Mecca Mosques in it – reason again – To upheld Secularism- By this Ad, according to Trinamool spokesman “Mamata is bridging the gap between Muslims and Hindus’!

Why Hindu symbols and festivals cannot be used to bridge gap but instead abolish the existing Hindu values from govt departments and invoke muslim traditions ? – is the question that still remain unanswered by Begum Mamta herself.

mamta benerjee musalman agenda

Railways sources said several photographs were sent for the minister’s approval. “The minister’s cell approved the one in which she is seen offering namaz,” adding that officials were asked to include the motifs and the photograph of Kaaba in the ad by those close to the minister.

BJP leader Tathagata Roy that time said, “The state has no religion. How can religious edifice be part of a government advertisement? This reveals her duplicity… how can she offer namaz? It’s extremely improper.”

As such Minority pampering measures are highly contagious, we can expect Swords of Tippu Sultan and Aurangazeb decorating upcoming Government Ad’s of other Ministries and our Ministers wearing Skull caps and growing beard after shaving off the Moustaches to compete with Mamta Begum’s gimmicks.

mamta-benerjee-muslim-propaganda

If you scan any of the recent newspapers, you will find news Bangladeshis infiltrations through porous border of islamic West Bengal, happening almost daily. Officially Indian govt tabled a report that over 10 million Bangladeshis infiltrated India through West Bengal, while locals suggested this figure to be around 90 million (which are spread across Assam, North Eastern states and of course West Bengal). Local Bengalis call these people “dakha bengalis” or “dhoka bengalis” – meaning Dhaka or Fraud Bengalis. There are numerous illegal hutments and slums that have emerged to house traitors of India, which are digging graves for Indians by robbing off their jobs and resources. These traitors are eyed by Mamta Begum as vote bank lots. And whole heartedly supported by Trinamool Congress, who are devoid of any mool or sanskriti.

Hardly two months back, Hindustan Times reported, huge infiltration of illegal Bangladeshis into India. Infiltration of Rohingya Muslims through Bangladesh is rapidly increasing, BSF officials updated.

While the BSF have arrested 107 Rohingya Muslims from the Bangladesh border in North 24-Parganas, the state police have arrested 20.

“We increased our vigil on immigrants from Myanmar since the end of last year after some Rohingya Muslims were arrested from North 24-Parganas in last November,” Santosh Mehra, IG, BSF, said. Only two nationals from Myanmar were arrested from West Bengal in 2011 and six in 2012, Mehra said.

Sources in the BSF said that the Rohingya Muslims are infiltrating mainly through the Indo-Bangladesh border at Swarupnagar, Basirhat and Gaighata police station areas.

They claim that the state police had recently arrested seven Rohingya Muslims from Balurghat area in North Dinajpur.

These are reported on illegal Bangladeshis who were caught, what about those hundreds who got infested like parasites in India that day alone.

Local news papers including Hindustan Times reported that:

Over the last several months, around 10,000 Rohingya Muslims have infiltrated into India through West Bengal route and are staying in Andhra Pradesh, Bihar, Uttar Pradesh and West Bengal. About 3,000 of them are now in and around New Delhi and are staying at various mosques.

Former vice-chancellor of Jamia Milia Islamia University, Nawab Zafar Jung, has taken up their cause, along with some Leftist student unions based in Jawharlal Nehru University (JNU), who demand the Rohingya Muslims be given the status of refugees.

True to their islamic radicalism, even educated muslims keep religion above country and illegal intruders are expected to be given a refugee status so that later they can be slowly amalgamated with Indians. As it is with the same modus operandi, that we have seen huge surge of Bangladeshi muslims across India.

So Islamic West Bengal is not just curse for their existence but also for India as a whole – which is very danger for sovereignty of India.

Terrorism Breeders Got Salaries from Maassama Khatoon alias Mamta Benerjee

Another anti-Hindu incident was stopped by BJP petitioners, few months back, Calcutta High Court scrapped Mamata Banerjee’s stipend to imams

The Calcutta High Court ordered the West Bengal government to stop payment of a monthly stipend to thousands of imams and muezzins in the state. These were paid after taking money from Hindu tax payers.

Over 70% illegal tradings are done by muslims and illegal Bangladeshis – and they never pay single paisa as a tax.

Imams and muezzins are people who organise prayers in a mosque. For more than a year, Chief Minister Khatoon Mamata Banerjee’s government had been paying more than 30,000 imams in the state Rs. 2500 per month and over 15,000 muezzins Rs. 1500. Burning crores of tax payers money, mostly collected from Hindus.

mamta banerjee islam follower

The state Opposition had slammed the move as a bid by Begum Banerjee to woo the minority community.

The court ordered in response to four public interest litigations (PILs) filed in May last year, including one by the state unit of the BJP.

Kanchan Chanda, the lawyer representing the state BJP, said the division bench found that the state government did not even pass an order to pay muezzins Rs. 1500 a month but made the payments nevertheless. “So the division bench felt it was nothing but squandering of public money,” he said.

Shahi Imam Barkati, a prominent figure in Kolkata, claims that the Wakf board was paying the stipend — which is legitimate — and not the government. Which later turned out to be blatant lie. Barkati is same fanatic Imam who supported beheading of Taslima Nasreen and patted back of BSP MP, Shafiqur Rahman Barq, for disrespecting jana gana mana, India’s national anthem in Lok Sabha.

Terrorism Breeders with Begum Mumtaz Banerjee

mamtabanerjee antihindu

“I think the High Court could not understand the whole thing. Those who petitioned could not clarify to High Court,” Imam Barkati said.

Others religious leaders of the community are preparing to go to Supreme Court and have contacted a lawyer known to be close to the Trinamool, Idris Ali, to take the matter forward.

Idris Ali said, “What Mamata Banerjee had done for the imams is absolutely correct. This order will be quashed definitely by the Supreme Court.”

So breeders of terrorism who control madarsas to breed terrorists want stipend on hard earned monies of Hindus to kill Hindus and non-muslims. That’s ridiculous, countries like US, France, Australia are curbing madarasas and even banning Hijabs so that no muslim terrorist take advantage of disguising as Islamic women. But here in a bid to islamize West Bengal, Khatoon Banerjee is leaving no stone unturned, to make it a hub of terrorism like Kashmir and UP.

Opposition leaders,especially BJP, did welcomed the court order as “it was a fitting reply to Mamata Begum’s vote bank politics.”

In the Assembly polls of 2011, the swing in the Muslim vote away from the Left and towards the Trinamool Congress is viewed as largely responsible for Ms Banerjee’s stunning victory.

Hindus are regularly killed in muslim dominated areas. No FIR is registered, no investigation is done.

Hindus killed westbengal

What Wikileaks had leaked on Begum Mamta Banerjee?

Mamata Banerjee if elected would help US interests more than Leftists or any other party. Her unclear and hassled approach would be supportive to American agendas. The cable leaked from whistle blowing site wikileaks says it all.

The October, 2009 Kolkata Consulate cable, headlined “Trinamool’s Mamata Banerjee: from oppositional street fighter to West Bengal Chief Minister-in-waiting,” advises United States officials to cultivate Banerjee as the likely next Chief Minister of West Bengal.

US wanted to create conducive atmosphere so that Begum Mamta stick to her confused ideas and help americans impregnate their agendas.

Why Mamta Khatoon a radical muslim wants to eat beef

“Aaj Hamari Gaay Mata Ko Kaata ja raha hai aur Hum chup rahte hai, is sey in darindo ko aur badhawa milega, Kal Hindu Bhaiyo aur Beheno ki baari hogi. Jaisey pakistan mey hua..pehle Gau Mata ko kaata gaya fir hamare Hinduo ko…Jaise hamare Kashmir mey ho raha hai. Agar abhi nahi Jagogey toh marogey kyuki Hinduo ke katne pe koi desh hamara saath nahi dega…musalmano ko saath dene k liye 56 desh hai …Hum Hinduo ka kaun sa desh hai….!!!”

“Isiliye sharam karo ghar mey baitne se kuch nahi hoga….Jago aur Hinduo ki Shaktiyo Ko Badhao. Yeh Bharat (India) hi sirf Hinduo ka desh hai aur koi nahi..sirf hum hi ek dusre ka saath de sakte hai…Jab koi Hindu apna desh chordkar videsh jata hai ….aur fir pakistan mey, australia mey ya fir UK mey pita jata hai toh bhag kar yehi aata Hai Bharat mey kyu…!!..kyuki yehi desh hai jaha Hindu sharan le sakte hai…Yeh desh sirf hamara hai ..Dharam Rakshti, Rakshti Dharam…agar abhi nahi Jagogey toh agli neend jab khulegi toh Islamistan Bharat mey khulegi…kya yehi chahte ho…bolo.”

LalitKumar Haribhakt addressing gathering on “Save Cow Movement” in 2010

Under political pressure from Ruling Party (TMC), the West Bengal Police is plotting to ensure untroubled Cow Slaughter in maximum places very much illegally.

As per HinduExistence.org archives: Through its Valuable Judgements dt 02.11.2011 and 13-10-2011, the Honb’le Calcutta High Court categorically said that “the officials of the State and local bodies have no power to facilitate holding of markets for trading of cattle for sacrifice and also the movement of cattle for the said purpose on the occasion of Id-uz-Zoha”.  Earlier, the Supreme Court of India reiterated that “sacrifice of a cow on Bakr id Day is not an obligatory overt act for a Musalman to exhibit his religious belief and ideas”. In many occasions the appex court directed that “such slaughter cannot be a religious purpose because it is not a part of religious requirement for the Musalmans..”  In fine Cow slaughter in the name of Medicinal, Research or Religious purposes is strictly prohibited as per the directions given by the Honb’le courts time to time. In West Bengal one can procure beef from the authorised slaughter houses and permitted outlets, obviously not violating the West Bengal Animal Slaughter Control Act, 1950 in force.

But, unfortunately the Police in West Bengal allowing Animal Cruelty, Ghastly Slaughtering and Perilous Pollution in these days of ensuing Bakar Idd on 27th Oct, 2012, by violating Preventions of Cruelty to Animals (PCA) Act, 1960; Animal Transportation Act; WB Pollution Control Act; WB Animal Slaughter Control Act, 1950 and the relevant judgements  of different Hon’ble courts. The political and police nexus in different places in West Bengal is promoting local Cow markets (Garu-hat) and the illegal transportation for Cow Slaughter in ensuing Bakar Idd and taking huge amount of speed money-bribe from the unauthorized cow traders and transporters.

This news coming from every corners of West Bengal and the ruling TMC (All India Trinmool Congress) has framed a policy to allow maximum cow markets-cow slaughter for Bakar idd to satisfy its Muslim Vote Bank. For example, the Usthi PS has arranged an illegal Cow trade point just adjacent to Police Station itself (Northern side of PS, in between PS and Usthi Agricultural Nursery).  In Joynagar PS area, big cow markets are presently seen in Mouzpur and Biswanathpur villages. In Sahararhat (Falta PS), the Beef-eaters are canvassing such a illegal Cow market there on mike. Not only that, in some areas Police is trying illegal Cow Slaughter in new places under political pressure.

terrorist muslims

On 12-10-2012, Sri Sudip Singh (M. +919831115206). Officer-in-Charge, Usthi Police Station invited Sri Pintu Mahish of vill-Pianjganj for a discussion over a General Diary made by him (Pintu Mahish) on 4-10-2012 through registered post (book no. 9508, receipt no. 178). In course  of the discussion, Mrs. Papiya Sultana, Deputy Superintendent of Police (Falta Zone, Ph.  2448-0366 , M. +919874690988 , Fax-03174-241100), South 24 Parganas also appeared in that meeting very interestingly. Through out the meeting, the Police authority pressurized Pintu for negotiating a cow slaughter in Pianjganj village. A bold Pintu negated the proposal of Police to allow cow slaughter in that village only to satisfy the Muslim brothers and sisters of the Muslim Police Officer Papiya Sultana. Further he said to the police officials not to favour anybody but to uphold the law of the land and the verdicts of Hon’ble Courts. It is heard that the O/C of Usthi Police Station is hatching a plan to allow the cow slaughter by a crooked means and set a further meeting on 13-10-2012 evening. But, so far it is gathered that the Police has not formally invited the village leaders of Pianjganj in the All Party Meeting on 13-10-2012. But, a resolution may be adopted to permit an OPEN COW SLAUGHTER IN PIANGANJ VILLAGE violating all the rules in broad day light.

It was very much astonishing that an Officer-in-Charge is negotiating for an illegal cow slaughter in a convened meeting and a Deputy Superintendent of Police is trying to convincing their inability to do anything if such a cow slaughter may happen in a cattle house of a personal occupancy. All the proceedings say a police intention to allow an illegal cow slaughter in Pianganj area, where Hindus are united to resist it in both legal and agitational way.

Police and Rapid Action Force (RAF) also entered and enquired into the village of Pianjganj and took some sample of  posters of Bangiya Arya Pratinidhi Sabha Posters from the wall where a SAVE COW – SAVE NATION call was envisaged in connection of a Rashtra Raksha Sammelan (Protect the Nation Meet) on 09-10-2012 at Kolkata. The Kolkata Police did not allow that meeting to make a repression upon the Save Cow Activists and maintained the State Policy of Miss Mamata Banerjee (Chief Minister, West Bengal) to curb out all the Hindu Force from West Bengal step by step.

On the other hand, cross border cow transportation and cow-theft in rural areas in North 24 Pgs, South 24 Pgs, Nadia and Murshidabad are getting optimum rates due the inaction of BSF and State Police in West Bengal.

Mamta Maassama Khatun openly said that killing Indian cow or eating cow meat is her birth right – she made such comments to appease muslims. Infact in parliament she created massive hue and cry when “STOP COW SLAUGHTERING” bill was introduced in the floor. While even staunch muslim leaders were supporting the bill it was only fanatic Mamta Khatoon who opposed the bill and the bill was never materialized.

anti Hindu Mamta Masama Khatoon

How can Hindus in these police and BSF force be so inactive, that they have become pawns and cadres of TMC’s islamic agendas.

While West Bengal is urging Muslims to Slaughter Cows…what other states are doing

Like MP, other BJP-ruled states such as Gujarat have banned cow slaughter and the sale, purchase and transportation of beef.

The Karnataka under BJP govt had banned Cow Slaughter but when Congress regained power, they re-initiated the evil act from the swearing ceremony itself.

Tamil Nadu bans cow slaughter but not the consumption of beef.

In Punjab and Haryana, cow slaughter is a criminal offence. The sale of beef is banned but consumption is not penalised.

Maharashtra bans the killing of cows but bullocks, female buffaloes and calves can be killed on getting a fit-for-slaughter certificate. So Cows are still killed in muslim dominated areas due to loose laws and its implementation.

West Bengal’s Animal Slaughter Control Act bans the slaughter of healthy cows with offences carrying jail terms of up to six months. There is no ban on the consumption of beef or slaughter if carried out in government or municipal slaughterhouses after a certificate from a veterinarian. The act exempts slaughter for religious purposes. The Supreme Court has said however that such exclusions are illegal. (telegraph, kolkatta).

How Begum Mamta’s Islamic govt later Let off these 13 trucks – carrying over 500 Indian cows to be slaughtered by Butchers

Its a raw video filmed by a Cow Protector

Hindus were beaten and dragged to police stations by the local cops. While five Hindus have been arrested for fight against illegal cow slaughter and trying restoration of the provision of laws and Hon’ble orders of apex and Calcutta High Court, the illegal cow traders and the Muslim offenders were set scot free. To continue killing cows and sell beef illegally. No Muslims were arrested so far for illegal cow trading, carrying near Khunsuni Kalitala, Paniara, Panchpara or Dhulagari. Several such videos were placed as a proof in the court of law but TMC govt pressed heavy charges against Hindus to assure that they remain jailed and muslims can carry inhuman and evil act of killing cows.

How a local Hindu Samiti was Harassed under Islamic Mamta Benerjee’s Rule

Begum Mamta Banerjee takes monthly review strictly and sees to it that all funds allocated to muslim appeasement and welfare schemes are consumed at each level properly. If with such responsibility, she had taken cognizance of Hindus as well then infiltration and terrorism breeding would not have happened under her islamic regime.

You breed like insects, Trinamool Congress govt is there to support your islamic motives of making Hindus minority in their own homeland.

How Breeding of Muslims Supported with Reservation, Rejecting Same Facilities to other minorities.

Discrimination is an instrument to appease one minority than others. And TMC govt is communal. Jain minority deprived off loans in West Bengal for not being a Muslim!

HinduExistence.org Archives: Hon’ble Calcutta High Court ordered West Bengal Government in West Bengal Minorities Development and Finance Corporation (WBMFC) to be restrained from conferring any benefit on any person under the relevant scheme of ‘Term Loan Scheme for  the minorities of West Bengal’ as notified  July 16, 2010 pending disposal of the case of one Sanjib Kumar Jain vs WBMFC vide WP No. 10399(W) of 2012 .

In his landmark order on 3rd July 2013, Justice Sanjib Banerjee asked the State respondents to file affidavit to clear their stand to exclude Jain communities from the state notification upon which the advertisement was published to give term loans to all six minority communities of West Bengal as Muslim, Christian, Buddhist, Sikh, Parsee and Jain.

It is allegedin the writ petition filed in Calcutta High Court that the petitioner, Sanjib Kumar Jain’s  prayer for sanction of term loan has been refused on the ground that he does not belong to Muslim community.

Sanjib, an unemployed youth from Lalgola, Murshidabad applied for a term loan of Rs 1 lac from West Bengal Minorities Development and Finance Corporation. On the merit of his application he was interviewed on 2nd February 2011 and instructed to arrange one person for loan security and the matching amount for drawing the loan.

Sanjib completed all the formalities but was being refused time and again by the authorities of  WBMFC and finally he was got a clue that one Muslim citizen of Murshidabad got the loan of Rs.66,500/- depriving his claim in the same period.

westbengal muslim agenda

Being aggrieved Sanjib filed a writ petition bearing WP No. 10399 (W) of 2012 highlighting his case of deprivation as he is a Jain but not a Muslim.

The allegation is rather serious in as much as none can be discriminated on the ground of religion ordinarily.

Actually, Muslims, Sikhs, Christians, Buddhists and Zoroastrians (Parsees) have been notified as minority communities under Section 2 (c) of the National Commission for Minorities Act, 1992. As per Census 2001, the percentage of minorities in the country is about 18.4% of the total population of the country, of which Muslims are 13.4%; Christians 2.3%; Sikhs 1.9%, Buddhists 0.8% and Parsees 0.007%. But, the 0.4% Jains were not included in the Section 2 (c) of the NCMA, 1992 under a certain conspiracy. When all the census from 1951 (post independence) were conducted under a segregation of  Sikhs, Buddhists, Jains from Hindus, then why the minority status of the Jains are not conferred to them?

In 2007, Jains were included in the minority list of West Bengal through an important legislation. On 27th Sept, West Bengal government  accorded minority status to the Jain community in response to their long-pending demand.

“So far Muslim, Buddhist, Parsee, Christian and Sikh communities were included among minorities, now the Jains have been included,” the then Minority Affairs minister Abdus Sattar said in the floor of WB Assembly. But poor Jains are deprived off with such benefits. The status of other minorities is still unclear since very few of them are unaware of it.

All welfare schemes are promoted in the name of muslim benefits and their upliftments so other religion people are always in the dark. And muslims are up for grabs, as beggars, in taking benefits.

In the website of West Bengal Minorities Development and Finance Corporation, it is clearly stated that, “The Govt. of West Bengal has also notified Jain Community as a Minority Community but as this community is not on the Central government List, it can avail benefits of only those schemes which are undertaken out of the fund granted by the State Government.”

In the present case of sanction a loan upto Rs 1 lac comes under state purview and the loan upto Rs. 5.00 lacs needs approval of NMDFC of Central Govt. As such, the West Bengal State authority can arrange such funds for term loans etc (upto one lac) for Jains, when WB Govt are allocating huge funds for Imam/Muazzin honorarium etc from state revenue, even in an impugned manner.  So, the case of deprivation made upon Sanjib Kumar Jain is bad in law and a blatant violation of Rights to Equality. Moreover, Sanjib has been  discriminated for being a Jain and  not being a Muslim. This is very much dangerous to the entity of the secular texture of Indian Constitution.

As per source, the West Bengal are now trying to suppress various documents and orders for discarding the claim of the present petitioner and disown the status of Jains as minorities in West Bengal. This is alarming enough as none can be discriminated on the ground of religion ordinarily by appeasing others. The Muslim appeasement in West Bengal has no bound here and word ‘Minority’ has been equated with the word ‘Muslim’. Sanjib and other non-Muslim minorities are the victims of this serious situation pampered by one and only Mamata Banerjee (read Mamatz Banu Arjee), the CM, West Bengal.

Click on the image for enlarged view

muslim islamizing west bengal

Three pertinent questions come here for decision that 1. What is the criteria in India for being minority? When 13.4% Muslims (now touching 20%) in the country is considered as minority, why 0.7% Jains are not given minority Status? 2. While a Hon’ble Court in U.P.  questioned the minority status of 17% Muslims in Uttar Pradesh, then why a huge number of Muslim like 35% Muslims in West Bengal are given Minority status? and 3. In India, under the “Multi Sectoral Development Programme” 99 MCD, 338 Towns and 1228 CD Blocks have been declared as “Minority Concentration districts” ranging the status of lowest 17.63%  Muslims (Gulbarga, Aandhra Pradesh) to the highest 63.67% Muslims (Murshidabad, West Bengal).  There are over 1200 Blocks/Towns/MCD where Hindus are synchronized as minority maintaining the above parameter. Then why minority Hindus are not given facilities under MsDP there?

Such a thinking of appeasement by politics is a curse to Indian unity in diversity. Politics in India is empowering such a group of fanatics who does believe more in Sharia than Indian Constitution. It may pave another partition of India.

A patriot Indian, Sanjib Kumar had to fight in court to get minority loan while a common muslim even with criminal background could easily avail loan under Mumtaz Mamata Banerjee Begum regime.  If this is not appeasement of criminals and criminalization of West Bengal then what is this ?

 

Opening Railway Route to Muslim Bangladeshis to increase their infiltration

Begum Mumtaz Banerjee strongly advocated that India should play a pivotal role in the Trans-Asian Railway and that rail links between Bangladesh and Nepal should be reintroduced. In all, she had introduced 19 new trains for the 2000–2001 fiscal year. And true to her agenda hiked Bangladeshis infiltration to manifolds.

terrorist-mamta

US being developed state has simple two point program to detain temporarily in their international airports:

1) A Muslim surname or

2) Past interviews or speech advocating terrorism or muslim appeasement or

3) Past suspicious activity against Nation

Just based on these three parameters, US deem such people as suspect or terrorist. Mamta Banerjee fulfills all these above qualities so by US logic, Khatoon Mamta Banerjee is a terrorist and suspect. Indian govt talks about open thinking and security on par with US facilities. Would Indian govt keep close watch on her with detectors to trace her movements like US does with suspects. SPREAD the TRUTH and Save West Bengal…Save India. Or else with adjacent border to islamist bangladesh it could easily merge and become part of ONE BANGLADESH – the eventual aim of fanatic bangladeshis.

Posted in गौ माता - Gau maata

ब्राज़ील, ईजराइल, के बाद न्यूझीलेंड ने भी भारतीय देशी गाय का दूध अपनाया


ब्राज़ील, ईजराइल, के बाद न्यूझीलेंड ने भी भारतीय देशी गाय का दूध अपनाया……

आपकी जानकारी के मुताबिक बता दे की ब्राज़ील व ईजराइल में गौ हत्या करने वाले को अगले सात दिन में ही बीच रास्ते में देश की तमाम जनता के सामने सजा ए मौत (फांसी) का प्रावधान हैं जो विश्व में गौ रक्षा के मामले में सबसे कड़ा कानून वाला पहला देश हैं !

विश्व में भारत ही एक ऐसा राष्ट्र हैं जो गाय को माँ भी बोलता हैं और हत्या भी करवाता हैं…. भारत में गौ हत्या करने वाले पर कोई कानूनी दंड नहीं होता जबकि गौ रक्षा दल बनाने पर या किसी कसाई को बाधित करने पर आप को सजा जरूर हो सकती हैं…..

ब्राज़ील, ईजराइल, के बाद न्यूझीलेंड ने भी भारतीय देशी गाय का दूध अपनाया...... 

आपकी जानकारी के मुताबिक बता दे की ब्राज़ील व ईजराइल में गौ हत्या करने वाले को अगले सात दिन में ही बीच रास्ते में देश की तमाम जनता के सामने सजा ए मौत (फांसी) का प्रावधान हैं जो विश्व में गौ रक्षा के मामले में सबसे कड़ा कानून वाला पहला देश हैं !

विश्व में भारत ही एक ऐसा राष्ट्र हैं जो गाय को माँ भी बोलता हैं और हत्या भी करवाता हैं.... भारत में गौ हत्या करने वाले पर कोई कानूनी दंड नहीं होता जबकि गौ रक्षा दल बनाने पर या किसी कसाई को बाधित करने पर आप को सजा जरूर हो सकती हैं.....
Posted in भारतीय मंदिर - Bharatiya Mandir, P N Oak

काशी विश्वनाथ


हमारे वामपंथी इतिहासकारों द्वारा बहुत जोर-शोर से यह भ्रम फैलाया जाता है कि.... हमारे हिंदुस्तान में मुस्लिमों से बहुत सहृदयता से शासन की.... और, समाज के उत्थान के लिए ढेरों काम किये....!

लेकिन, उन मुस्लिम शासकों ने .... समाज का क्या और कैसा उत्थान किया .... यह जानकर आपका मुंह खुला का खुला रह जायेगा....

क्योंकि.... यह जानना किसी भी हिन्दू के लिए बेहद दुखद होगा  कि..... आज जिसे हम ""काशी विश्वनाथ मंदिर"" के नाम से जानते हैं ... वो रानी ""अहिल्या देवी होल्कर"" द्वारा 1777 ईस्वी में बनवाया गया ""नया मंदिर"" है....  !

क्योंकि.... अपने जिहादी भावना से वशीभूत होकर अकबर के परपोते औरंगजेब ने अगस्त  1669 में  .... 490 ईस्वी में स्थापित ""असली काशी विश्वनाथ मंदिर"" को ध्वस्त कर .... उस स्थान पर ""ज्ञानवापी मस्जिद"" का निर्माण करवा दिया गया था .... जिसे आज भी ""विश्वनाथ मंदिर"" के बगल में आसानी ने देखा जा सकता है....!

और तो और....

औरंगजेब द्वारा ... काशी विश्वनाथ मंदिर को ध्वस्त करने के पीछे ...... हमारे वामपंथी सेक्युलर विचारधारा के इतिहासकार .... क्या कहानी बताते हैं .... वो जानने योग्य है...

औरंगजेब द्वारा  विश्वनाथ मंदिर को ध्वस्त करने के उचित कारण बताते एवं औरंगजेब को सही ठहराते हुए ...... सेक्युलर विचारधारा के इतिहासकारों का कहना है कि.....

सन 1669  ईस्वी में .... औरंगजेब अपनी सेना एवं हिन्दू राजा  मित्रों के साथ वाराणसी के रास्ते बंगाल जा रहा था...... और, रास्ते में बनारस आने पर .... हिन्दू राजाओं की पत्नियों ने .... गंगा में डुबकी लगा कर काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा करने की इच्छा व्यक्त की ..... जिसे औरंगजेब सहर्ष मान गया और.... और, उसने अपनी सेना का पड़ाव बनारस से पांच किलोमीटर दूर ही रोक दिया ...!

फिर उस स्थान से .... हिन्दू राजाओं की रानियां पालकी एवं अपने अंगरक्षकों के साथ गंगाघाट पहुंची ... और, गंगा में स्नान कर ..... विश्वनाथ मंदिर में पूजा करने चली गई....!

लेकिन, पूजा के उपरांत सभी रानियां तो लौटी लेकिन ... कच्छ की रानी नहीं लौटी , जिससे औरंगजेब के सेना में खलबली गयी और, उसने अपने सेनानायक को रानी को खोज कर लाने का हुक्म दिया ...!

उसके बाद.... औरंगजेब का सेनानायक अपने सैनिकों के साथ रानी को खोजने मंदिर पहुंचा ... जहाँ, काफी खोजबीन के उपरांत ""भगवान गणेश की प्रतिमा के पीछे"" से नीचे की ओर जाती सीढ़ी से मंदिर के तहखाने में उन्हें रानी रोती हुई मिली.... जिसकी अस्मिता और गहने ......... मंदिर के पुजारी द्वारा लुट चुके थे ...!

इसके बाद .... औरंगजेब के लश्कर के साथ मौजूद हिन्दू राज्यों ने .... मंदिर के पुजारी एवं प्रबंधन के खिलाफ कठोरतम करवाई की मांग की .....

जिससे विवश होकर .... औरंगजेब ने सभी पुजारियों को दण्डित करने एवं उस ""विश्वनाथ मंदिर"" को ध्वस्त करने के आदेश दे दिए....और, मंदिर को तोड़ डाला गया ...!

============

लेकिन,  मनहूस  सेक्युलर इतिहासकारों के इस मनगढंत कहानी में बहुत झोल है .... और, इस कहानी से सम्बंधित कुछ ज्वलंत सवालों के  जबाब वे कभी देना नहीं चाहते हैं...................

१.  औरंगजेब की जीवनी में इस बात कहीं कोई जिक्र ही नहीं है कि.... औरंगजेब कभी बंगाल गया था......
और, बंगाल तो क्या वो कभी.... वाराणसी भी नहीं गया था...!

२. अगर एक बार इतिहासकारों की बात मान भी ली जाए तो...... मंदिर तोड़ने के बाद ... औरंगजेब बंगाल में कहाँ गया और वहां वो क्या किया.... ??????

३. क्या इतिहासकारों का ये कहना है कि..... औरंगजेब जब कहीं युद्ध के लिए जाता था तो... अपने साथ हिन्दू राजा मित्रों को रखता था.... क्योंकि, औरंगजेब की जीवनी में ऐसा कहीं कुछ नहीं लिखा है ...????

४. अगर एक बार फिर ... इन वामपंथी इतिहासकारों की बात मान भी ली जाए तो.... क्या, वे ये कहना चाहते हैं कि...... औरंगजेब और उसके तथाकथित हिन्दू मित्र ... जब भी कहीं युद्ध के लिए जाते थे तो क्या वे..... किसी  पिकनिक की तरह......  अपनी पत्नियों को भी ले कर जाते थे...????????

५. जब कच्छ की रानी .... ""अन्य रानियों एवं अपने अंगरक्षकों के साथ""........ मंदिर गयी थी..... तो , किसी पुजारी या महंत द्वारा उसका अपहरण कैसे संभव हुआ .... और, पुजारी द्वारा ऐसा करते हुए किसी ने देखा कैसे नहीं ....?????

६. अगर,  किसी तरह ये न हो सकने वाला जादू...... हो भी गया था तो..... साथ के हिन्दू राजाओं ने .... पुजारी को दंड देने एवं मंदिर को तोड़ने का आदेश देने के लिए औरंगजेब को क्यों कहा ... उन हिन्दू राजाओं ने खुद ही उन पुजारियों और मंदिर प्रबंधन को दंड क्यों नहीं दिया....?????

७. अगर किसी तरह ""ये  चमत्कार भी"" हो गया था तो.... क्या मंदिर तोड़ने से पहले वहां के ""ज्योतिर्लिंग और अन्य पवित्र मूर्तियों"" को..... शास्त्र सम्मत तरीके से हटाया गया था ...????

८. क्या मंदिरों को तोड़कर वहां पर .... मस्जिद बनाने की प्रार्थना भी ... साथ गए हिन्दू राजाओं ने ही की थी....????

९. मंदिर तोड़ने के बाद और पहले .... इतिहास में उस तथाकथित कच्छ की रानी का जिक्र क्यों नहीं है....?????
==========

इन सब सवालों के जबाब किसी भी इतिहासकारों के पास नहीं है क्योंकि ... यह एक पूरी तरह से मनगढंत कहानी है....!

हकीकत बात ये है कि.... औरंगजेब मदरसे में पढ़ा हुआ एक कट्टर मुसलमान और जेहादी था .... जिसने हिन्दुओं को अपमानित करने के लिए ना सिर्फ काशी विश्वनाथ बल्कि, कृष्णजन्म भूमि मथुरा के मंदिर अन्य सभी प्रसिद्द मंदिरों को ध्वस्त कर वहां मस्जिदों का निर्माण करवा दिया था.....

जिसे.... ये मनहूस वामपंथी सेक्युलर इतिहासकार किसी भी तरह से न्यायोचित ठहराने में लगे हुए हैं....

और .. अपने पुराने विश्वनाथ मंदिर की स्थिति ये है कि.....

 वहां औरंगजेब द्वारा  बनवाया गया ... ज्ञानवापी मस्जिद आज भी हम हिन्दुओं का मुंह चिढ़ा रहा है ... और, मुल्ले उसमे नियमित नमाज अदा करते हैं..... !

जबकि.... आज भी ज्ञानवापी मस्जिद के दीवारों पर हिन्दू देवी -देवताओं के मूर्ति अंकित हैं.... और, मस्जिद के ठीक सामने .... भगवान विश्वनाथ की नंदी विराजमान है....!

इसीलिए.....

हे हिन्दुओं जागो....

और... जानो अपने सही इतिहास को .....

क्योंकि.... इतिहास की सही जानकारी ही..... इतिहास की पुनरावृति को रोक सकती है...!

जय महाकाल....!!!

हमारे वामपंथी इतिहासकारों द्वारा बहुत जोर-शोर से यह भ्रम फैलाया जाता है कि…. हमारे हिंदुस्तान में मुस्लिमों से बहुत सहृदयता से शासन की…. और, समाज के उत्थान के लिए ढेरों काम किये….!

लेकिन, उन मुस्लिम शासकों ने …. समाज का क्या और कैसा उत्थान किया …. यह जानकर आपका मुंह खुला का खुला रह जायेगा….

क्योंकि…. यह जानना किसी भी हिन्दू के लिए बेहद दुखद होगा कि….. आज जिसे हम “”काशी विश्वनाथ मंदिर”” के नाम से जानते हैं … वो रानी “”अहिल्या देवी होल्कर”” द्वारा 1777 ईस्वी में बनवाया गया “”नया मंदिर”” है…. !

क्योंकि…. अपने जिहादी भावना से वशीभूत होकर अकबर के परपोते औरंगजेब ने अगस्त 1669 में …. 490 ईस्वी में स्थापित “”असली काशी विश्वनाथ मंदिर”” को ध्वस्त कर …. उस स्थान पर “”ज्ञानवापी मस्जिद”” का निर्माण करवा दिया गया था …. जिसे आज भी “”विश्वनाथ मंदिर”” के बगल में आसानी ने देखा जा सकता है….!

और तो और….

औरंगजेब द्वारा … काशी विश्वनाथ मंदिर को ध्वस्त करने के पीछे …… हमारे वामपंथी सेक्युलर विचारधारा के इतिहासकार …. क्या कहानी बताते हैं …. वो जानने योग्य है…

औरंगजेब द्वारा विश्वनाथ मंदिर को ध्वस्त करने के उचित कारण बताते एवं औरंगजेब को सही ठहराते हुए …… सेक्युलर विचारधारा के इतिहासकारों का कहना है कि…..

सन 1669 ईस्वी में …. औरंगजेब अपनी सेना एवं हिन्दू राजा मित्रों के साथ वाराणसी के रास्ते बंगाल जा रहा था…… और, रास्ते में बनारस आने पर …. हिन्दू राजाओं की पत्नियों ने …. गंगा में डुबकी लगा कर काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा करने की इच्छा व्यक्त की ….. जिसे औरंगजेब सहर्ष मान गया और…. और, उसने अपनी सेना का पड़ाव बनारस से पांच किलोमीटर दूर ही रोक दिया …!

फिर उस स्थान से …. हिन्दू राजाओं की रानियां पालकी एवं अपने अंगरक्षकों के साथ गंगाघाट पहुंची … और, गंगा में स्नान कर ….. विश्वनाथ मंदिर में पूजा करने चली गई….!

लेकिन, पूजा के उपरांत सभी रानियां तो लौटी लेकिन … कच्छ की रानी नहीं लौटी , जिससे औरंगजेब के सेना में खलबली गयी और, उसने अपने सेनानायक को रानी को खोज कर लाने का हुक्म दिया …!

उसके बाद…. औरंगजेब का सेनानायक अपने सैनिकों के साथ रानी को खोजने मंदिर पहुंचा … जहाँ, काफी खोजबीन के उपरांत “”भगवान गणेश की प्रतिमा के पीछे”” से नीचे की ओर जाती सीढ़ी से मंदिर के तहखाने में उन्हें रानी रोती हुई मिली…. जिसकी अस्मिता और गहने ……… मंदिर के पुजारी द्वारा लुट चुके थे …!

इसके बाद …. औरंगजेब के लश्कर के साथ मौजूद हिन्दू राज्यों ने …. मंदिर के पुजारी एवं प्रबंधन के खिलाफ कठोरतम करवाई की मांग की …..

जिससे विवश होकर …. औरंगजेब ने सभी पुजारियों को दण्डित करने एवं उस “”विश्वनाथ मंदिर”” को ध्वस्त करने के आदेश दे दिए….और, मंदिर को तोड़ डाला गया …!

============

लेकिन, मनहूस सेक्युलर इतिहासकारों के इस मनगढंत कहानी में बहुत झोल है …. और, इस कहानी से सम्बंधित कुछ ज्वलंत सवालों के जबाब वे कभी देना नहीं चाहते हैं……………….

१. औरंगजेब की जीवनी में इस बात कहीं कोई जिक्र ही नहीं है कि…. औरंगजेब कभी बंगाल गया था……
और, बंगाल तो क्या वो कभी…. वाराणसी भी नहीं गया था…!

२. अगर एक बार इतिहासकारों की बात मान भी ली जाए तो…… मंदिर तोड़ने के बाद … औरंगजेब बंगाल में कहाँ गया और वहां वो क्या किया…. ??????

३. क्या इतिहासकारों का ये कहना है कि….. औरंगजेब जब कहीं युद्ध के लिए जाता था तो… अपने साथ हिन्दू राजा मित्रों को रखता था…. क्योंकि, औरंगजेब की जीवनी में ऐसा कहीं कुछ नहीं लिखा है …????

४. अगर एक बार फिर … इन वामपंथी इतिहासकारों की बात मान भी ली जाए तो…. क्या, वे ये कहना चाहते हैं कि…… औरंगजेब और उसके तथाकथित हिन्दू मित्र … जब भी कहीं युद्ध के लिए जाते थे तो क्या वे….. किसी पिकनिक की तरह…… अपनी पत्नियों को भी ले कर जाते थे…????????

५. जब कच्छ की रानी …. “”अन्य रानियों एवं अपने अंगरक्षकों के साथ””…….. मंदिर गयी थी….. तो , किसी पुजारी या महंत द्वारा उसका अपहरण कैसे संभव हुआ …. और, पुजारी द्वारा ऐसा करते हुए किसी ने देखा कैसे नहीं ….?????

६. अगर, किसी तरह ये न हो सकने वाला जादू…… हो भी गया था तो….. साथ के हिन्दू राजाओं ने …. पुजारी को दंड देने एवं मंदिर को तोड़ने का आदेश देने के लिए औरंगजेब को क्यों कहा … उन हिन्दू राजाओं ने खुद ही उन पुजारियों और मंदिर प्रबंधन को दंड क्यों नहीं दिया….?????

७. अगर किसी तरह “”ये चमत्कार भी”” हो गया था तो…. क्या मंदिर तोड़ने से पहले वहां के “”ज्योतिर्लिंग और अन्य पवित्र मूर्तियों”” को….. शास्त्र सम्मत तरीके से हटाया गया था …????

८. क्या मंदिरों को तोड़कर वहां पर …. मस्जिद बनाने की प्रार्थना भी … साथ गए हिन्दू राजाओं ने ही की थी….????

९. मंदिर तोड़ने के बाद और पहले …. इतिहास में उस तथाकथित कच्छ की रानी का जिक्र क्यों नहीं है….?????
==========

इन सब सवालों के जबाब किसी भी इतिहासकारों के पास नहीं है क्योंकि … यह एक पूरी तरह से मनगढंत कहानी है….!

हकीकत बात ये है कि…. औरंगजेब मदरसे में पढ़ा हुआ एक कट्टर मुसलमान और जेहादी था …. जिसने हिन्दुओं को अपमानित करने के लिए ना सिर्फ काशी विश्वनाथ बल्कि, कृष्णजन्म भूमि मथुरा के मंदिर अन्य सभी प्रसिद्द मंदिरों को ध्वस्त कर वहां मस्जिदों का निर्माण करवा दिया था…..

जिसे…. ये मनहूस वामपंथी सेक्युलर इतिहासकार किसी भी तरह से न्यायोचित ठहराने में लगे हुए हैं….

और .. अपने पुराने विश्वनाथ मंदिर की स्थिति ये है कि…..

वहां औरंगजेब द्वारा बनवाया गया … ज्ञानवापी मस्जिद आज भी हम हिन्दुओं का मुंह चिढ़ा रहा है … और, मुल्ले उसमे नियमित नमाज अदा करते हैं….. !

जबकि…. आज भी ज्ञानवापी मस्जिद के दीवारों पर हिन्दू देवी -देवताओं के मूर्ति अंकित हैं…. और, मस्जिद के ठीक सामने …. भगवान विश्वनाथ की नंदी विराजमान है….!

इसीलिए…..

हे हिन्दुओं जागो….

और… जानो अपने सही इतिहास को …..

क्योंकि…. इतिहास की सही जानकारी ही….. इतिहास की पुनरावृति को रोक सकती है…!

जय महाकाल….!!!

Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas, P N Oak

लार्ड मैकाले


*** "हर भारतीय के लिए चुनौती " ***

सन् 1836 में लार्ड मैकाले अपने पिता को लिखे एक पत्र में कहता है:
"अगर हम इसी प्रकार अंग्रेजी नीतिया चलाते रहे और भारत इसे अपनाता रहा तो आने वाले कुछ सालों में 1 दिन ऐसा आएगा की यहाँ कोई सच्चा भारतीय नहीं बचेगा.....!!"
(सच्चे भारतीय से मतलब......चरित्र में ऊँचा, नैतिकता में ऊँचा, धार्मिक विचारों वाला, धर्मं के रस्ते पर चलने वाला)

भारत को जय करने के लिए, चरित्र गिराने के लिए, अंग्रेजो ने 1758 में कलकत्ता में पहला शराबखाना खोला, जहाँ पहले साल वहाँ सिर्फ अंग्रेज जाते थे। आज पूरा भारत जाता है।
सन् 1947 में 3.5 हजार शराबखानो को सरकार का लाइसेंस.....!!

सन् 2009-10 में लगभग 25,400 दुकानों को मौत का व्यापार करने की इजाजत।

चरित्र से निर्बल बनाने के लिए सन् 1760 में भारत में पहला वेश्याघर कलकत्ता में सोनागाछी में अंग्रेजों ने खोला और लगभग 200 स्त्रियों को जबरदस्ती इस काम में लगाया गया।

अंग्रेजों के जाने के बाद जहाँ इनकी संख्या में कमी होनी चाहिए थी वहीं इनकी संख्या में दिन दुनी रात चौगुनी वृद्धि हो रही है !!

आज हमारे सामने पैसा चुनौती नहीं बल्कि भारत का चारित्रिक पतन चुनौती है।
इसकी रक्षा और इसको वापस लाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए !!!

*** “हर भारतीय के लिए चुनौती ” ***

सन् 1836 में लार्ड मैकाले अपने पिता को लिखे एक पत्र में कहता है:
“अगर हम इसी प्रकार अंग्रेजी नीतिया चलाते रहे और भारत इसे अपनाता रहा तो आने वाले कुछ सालों में 1 दिन ऐसा आएगा की यहाँ कोई सच्चा भारतीय नहीं बचेगा…..!!”
(सच्चे भारतीय से मतलब……चरित्र में ऊँचा, नैतिकता में ऊँचा, धार्मिक विचारों वाला, धर्मं के रस्ते पर चलने वाला)

भारत को जय करने के लिए, चरित्र गिराने के लिए, अंग्रेजो ने 1758 में कलकत्ता में पहला शराबखाना खोला, जहाँ पहले साल वहाँ सिर्फ अंग्रेज जाते थे। आज पूरा भारत जाता है।
सन् 1947 में 3.5 हजार शराबखानो को सरकार का लाइसेंस…..!!

सन् 2009-10 में लगभग 25,400 दुकानों को मौत का व्यापार करने की इजाजत।

चरित्र से निर्बल बनाने के लिए सन् 1760 में भारत में पहला वेश्याघर कलकत्ता में सोनागाछी में अंग्रेजों ने खोला और लगभग 200 स्त्रियों को जबरदस्ती इस काम में लगाया गया।
अंग्रेजों के जाने के बाद जहाँ इनकी संख्या में कमी होनी चाहिए थी वहीं इनकी संख्या में दिन दुनी रात चौगुनी वृद्धि हो रही है !!

आज हमारे सामने पैसा चुनौती नहीं बल्कि भारत का चारित्रिक पतन चुनौती है।
इसकी रक्षा और इसको वापस लाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए !!!

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Hindu Scriptures (Part 6d) Bhagavad Gita : Some Interesting Questions about Hinduism…


Whatever It is Worth...

Some Interesting Questions about  Hinduism…

Hindu Scriptures (Part 6d) Bhagavad Gita

Bhagavad Gita

The Gita begins before the start of the climactic Mahabharata war, where the Pandava prince Arjuna is filled with doubt on the battlefield. Realizing that his enemies are his own relatives, beloved friends, and revered teachers, he turns to his charioteer and guide, Krishna, for advice. Responding to Arjuna’s confusion and moral dilemma, Krishna explains to Arjuna his duties as a warrior and prince, elaborating on a variety of philosophical concepts. The Song of the Bhagavan, often referred to as simply the Gita, is a 700-verse scripture that is part of the Hindu epic Mahabharata. This scripture contains a conversation between Pandava prince Arjuna and his guide Lord Krishna on a variety of theological and philosophical issues.  The Bhagavad Gita’s call for selfless action inspired many leaders of the Indian…

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Bhagavad Gita: Chapter 13: Khshetra Khshetragya Vibhaag Yoga – The Individual and Ultimate Consciousness


Whatever It is Worth...

#Bhagavad #Gita 

BG_C13_08

Chapter 13: Khshetra Khshetragya Vibhaag Yoga – The Individual and Ultimate Consciousness

In chapter 13 Lord Krishna reveals the distinct difference between the physical body and the immortal soul. He explains that the physical is transitory and perishable whereas the soul is immutable and eternal. The Lord also gives precise knowledge about the individual soul and the ultimate soul. Thus this chapter is entitled: The Individual and Ultimate Consciousness.

  • Section-1 (Shloka 1-18)
    • ‘Field’ and the ‘knower of Field’ together with Knowledge
  • Section-2 (Shloka 19-34)

13.1 Shree Bhagwan said “This body, Arjuna, is termed as the Field ( Khshetra ); and him who knows it, the sages discerning the truth about both refer to as the knower of Field (khshetragya).”
13.1 ShreeBhagwanovach
idam shreeram kaunteya khshetram-itiyabhidhiyate
aitatadyo veti tam prahuh khshetragya iti tadvidah

13.2 Know Myself…

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Harappa Civilsation


Harappa Civilsation was one of three early civilizations of the Old World, and  the most widespread. Even though Max Muller an early Indologist invented an Aryan Invasion theory to sow doubts in the mind of Indians which were supported by Congress government , this theory is now refuted and debunked. Shivling , Swastika symbols , Peepal tree and may other symbols found in excavation indicate that this was an indigenous civilization and there was no invasion.
Shivling found in excavation clearly indicates that Aryans did not bring in any culture into our country , never imposed their religion on indigenous people.
Harappa Civilsation was one of three early civilizations of the Old World, and the most widespread. Even though Max Muller an early Indologist invented an Aryan Invasion theory to sow doubts in the mind of Indians which were supported by Congress government , this theory is now refuted and debunked. Shivling , Swastika symbols , Peepal tree and may other symbols found in excavation indicate that this was an indigenous civilization and there was no invasion.
Shivling found in excavation clearly indicates that Aryans did not bring in any culture into our country , never imposed their religion on indigenous people.
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चंडी मंदिर


चंडी मंदिर जहाँ भालुओं का झुंड करता है मंदिर की परिक्रमा!

महासमुंद जिले के बागबाहरा शहर से करीब चार किलोमीटर दूर घुंचापाली में है चंडी मंदिर। शाम साढ़े छह से सात बजे आरती होती है, ठीक इसी वक्त करीब आधा दर्जन से ज्यादा भालू पहुंच जाते हैं। इनमें दो बड़े और चार बच्चे हैं। आरती के वक्त सारे भालू एक जगह इकट्ठा हो जाते हैं। जब भक्त मंदिर की परिक्रमा करते हैं, भालू भी उनके पीछे होते हैं। उसके बाद वे यहां प्रसाद लेते हैं। बच्चे, बड़े-बुजुर्ग सारे लोग अपने हाथों से इन भालुओं को प्रसाद खिलाते हैं।

महासमुंद के डीएफओ आशुतोष ने बताया कि भालुओं को यहां खाने-पीने का सामान मिलता है, इसलिए आते हैं। लेकिन आम लोगों को नहीं भूलना चाहिए कि वे जंगली जानवर हैं। मंदिर में चेतावनी का बोर्ड भी लगा है, ताकि लोग भालुओं से सावधान रहें। विशेषज्ञ बताते हैं कि भालू पिछले कई महीनों से यहां मनुष्यों के संपर्क में हैं। इसलिए उनकी झिझक खत्म हो चुकी है। लेकिन किसी बात पर अगर वे गुस्सा हो गए, तो हमला भी कर सकते हैं। हालांकि आज तक ऐसा हुआ नहीं है।

चंडी मंदिर जहाँ भालुओं का झुंड करता है मंदिर की परिक्रमा!

महासमुंद जिले के बागबाहरा शहर से करीब चार किलोमीटर दूर घुंचापाली में है चंडी मंदिर। शाम साढ़े छह से सात बजे आरती होती है, ठीक इसी वक्त करीब आधा दर्जन से ज्यादा भालू पहुंच जाते हैं। इनमें दो बड़े और चार बच्चे हैं। आरती के वक्त सारे भालू एक जगह इकट्ठा हो जाते हैं। जब भक्त मंदिर की परिक्रमा करते हैं, भालू भी उनके पीछे होते हैं। उसके बाद वे यहां प्रसाद लेते हैं। बच्चे, बड़े-बुजुर्ग सारे लोग अपने हाथों से इन भालुओं को प्रसाद खिलाते हैं।

महासमुंद के डीएफओ आशुतोष ने बताया कि भालुओं को यहां खाने-पीने का सामान मिलता है, इसलिए आते हैं। लेकिन आम लोगों को नहीं भूलना चाहिए कि वे जंगली जानवर हैं। मंदिर में चेतावनी का बोर्ड भी लगा है, ताकि लोग भालुओं से सावधान रहें। विशेषज्ञ बताते हैं कि भालू पिछले कई महीनों से यहां मनुष्यों के संपर्क में हैं। इसलिए उनकी झिझक खत्म हो चुकी है। लेकिन किसी बात पर अगर वे गुस्सा हो गए, तो हमला भी कर सकते हैं। हालांकि आज तक ऐसा हुआ नहीं है।
Posted in भारत गौरव - Mera Bharat Mahan

विकसित था भारत मे 2000 से ज्यादा वनस्पतियों से भोजन को रखने के लिए दोने पत्तल बनाई जाती है


भारत को मूर्खो का देश समझने वाले आज के काले अंग्रेज़ अपने दादा दादी नाना नानी को गंवार कहने वाले लोग आज अपने इस प्राचीन भारतीय विज्ञान को जानकार आश्चर्य चकित रह जाएगे भारत मे विज्ञान कितना अनुपम था विकसित था भारत मे 2000 से ज्यादा वनस्पतियों से भोजन को रखने के लिए दोने पत्तल बनाई जाती है और इन दोने पत्तल मे हर एक दोने पत्तल कई कई बीमारियो का इलाज है और औषधीय गुण रखता है आइये हम कुछ जानकारी ले
आम तौर पर केले की पत्तियो मे खाना परोसा जाता है। प्राचीन ग्रंथों मे केले की पत्तियो पर परोसे गये भोजन को स्वास्थ्य के लिये लाभदायक बताया गया है। आजकल महंगे होटलों और रिसोर्ट मे भी केले की पत्तियो का यह प्रयोग होने लगा है।
* पलाश के पत्तल में भोजन करने से स्वर्ण के बर्तन में भोजन करने का पुण्य व आरोग्य मिलता है ।
* केले के पत्तल में भोजन करने से चांदी के बर्तन में भोजन करने का पुण्य व आरोग्य मिलता है ।
* रक्त की अशुद्धता के कारण होने वाली बीमारियों के लिये पलाश से तैयार पत्तल को उपयोगी माना जाता है। पाचन तंत्र सम्बन्धी रोगों के लिये भी इसका उपयोग होता है। आम तौर पर लाल फूलो वाले पलाश को हम जानते हैं पर सफेद फूलों वाला पलाश भी उपलब्ध है। इस दुर्लभ पलाश से तैयार पत्तल को बवासिर (पाइल्स) के रोगियों के लिये उपयोगी माना जाता है।
* जोडो के दर्द के लिये करंज की पत्तियों से तैयार पत्तल उपयोगी माना जाता है। पुरानी पत्तियों को नयी पत्तियों की तुलना मे अधिक उपयोगी माना जाता है।
* लकवा (पैरालिसिस) होने पर अमलतास की पत्तियों से तैयार पत्तलो को उपयोगी माना जाता है।
इसके अन्य लाभ :
1. सबसे पहले तो उसे धोना नहीं पड़ेगा, इसको हम सीधा मिटटी में दबा सकते है l
2. न पानी नष्ट होगा l
3. न ही कामवाली रखनी पड़ेगी, मासिक खर्च भी बचेगा l
4. न केमिकल उपयोग करने पड़ेंगे l
5. न केमिकल द्वारा शरीर को आंतरिक हानि पहुंचेगी l 
6. अधिक से अधिक वृक्ष उगाये जायेंगे, जिससे कि अधिक आक्सीजन भी मिलेगी l
7. प्रदूषण भी घटेगा ।
8. सबसे महत्वपूर्ण झूठे पत्तलों को एक जगह गाड़ने पर, खाद का निर्माण किया जा सकता है, एवं मिटटी की उपजाऊ क्षमता को भी बढ़ाया जा सकता है l
9. पत्तल बनाए वालों को भी रोजगार प्राप्त होगा l
10. सबसे मुख्य लाभ, आप नदियों को दूषित होने से बहुत बड़े स्तर पर बचा सकते हैं, जैसे कि आप जानते ही हैं कि जो पानी आप बर्तन धोने में उपयोग कर रहे हो, वो केमिकल वाला पानी, पहले नाले में जायेगा, फिर आगे जाकर नदियों में ही छोड़ दिया जायेगा l जो जल प्रदूषण में आपको सहयोगी बनाता है..
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जाएगे भारत मे विज्ञान कितना अनुपम था विकसित था भारत मे 2000 से ज्यादा वनस्पतियों से भोजन को रखने के लिए दोने पत्तल बनाई जाती है और इन दोने पत्तल मे हर एक दोने पत्तल कई कई बीमारियो का इलाज है और औषधीय गुण रखता है आइये हम कुछ जानकारी ले
आम तौर पर केले की पत्तियो मे खाना परोसा जाता है। प्राचीन ग्रंथों मे केले की पत्तियो पर परोसे गये भोजन को स्वास्थ्य के लिये लाभदायक बताया गया है। आजकल महंगे होटलों और रिसोर्ट मे भी केले की पत्तियो का यह प्रयोग होने लगा है।
* पलाश के पत्तल में भोजन करने से स्वर्ण के बर्तन में भोजन करने का पुण्य व आरोग्य मिलता है ।
* केले के पत्तल में भोजन करने से चांदी के बर्तन में भोजन करने का पुण्य व आरोग्य मिलता है ।
* रक्त की अशुद्धता के कारण होने वाली बीमारियों के लिये पलाश से तैयार पत्तल को उपयोगी माना जाता है। पाचन तंत्र सम्बन्धी रोगों के लिये भी इसका उपयोग होता है। आम तौर पर लाल फूलो वाले पलाश को हम जानते हैं पर सफेद फूलों वाला पलाश भी उपलब्ध है। इस दुर्लभ पलाश से तैयार पत्तल को बवासिर (पाइल्स) के रोगियों के लिये उपयोगी माना जाता है।
* जोडो के दर्द के लिये करंज की पत्तियों से तैयार पत्तल उपयोगी माना जाता है। पुरानी पत्तियों को नयी पत्तियों की तुलना मे अधिक उपयोगी माना जाता है।
* लकवा (पैरालिसिस) होने पर अमलतास की पत्तियों से तैयार पत्तलो को उपयोगी माना जाता है।
इसके अन्य लाभ :
1. सबसे पहले तो उसे धोना नहीं पड़ेगा, इसको हम सीधा मिटटी में दबा सकते है l
2. न पानी नष्ट होगा l
3. न ही कामवाली रखनी पड़ेगी, मासिक खर्च भी बचेगा l
4. न केमिकल उपयोग करने पड़ेंगे l
5. न केमिकल द्वारा शरीर को आंतरिक हानि पहुंचेगी l
6. अधिक से अधिक वृक्ष उगाये जायेंगे, जिससे कि अधिक आक्सीजन भी मिलेगी l
7. प्रदूषण भी घटेगा ।
8. सबसे महत्वपूर्ण झूठे पत्तलों को एक जगह गाड़ने पर, खाद का निर्माण किया जा सकता है, एवं मिटटी की उपजाऊ क्षमता को भी बढ़ाया जा सकता है l
9. पत्तल बनाए वालों को भी रोजगार प्राप्त होगा l
10. सबसे मुख्य लाभ, आप नदियों को दूषित होने से बहुत बड़े स्तर पर बचा सकते हैं, जैसे कि आप जानते ही हैं कि जो पानी आप बर्तन धोने में उपयोग कर रहे हो, वो केमिकल वाला पानी, पहले नाले में जायेगा, फिर आगे जाकर नदियों में ही छोड़ दिया जायेगा l जो जल प्रदूषण में आपको सहयोगी बनाता है..