Posted in P N Oak

Secular Hindu


पोस्ट पढ़ें

विजय कृष्ण पांडेय's photo.
विजय कृष्ण पांडेय's photo.

स्नेही स्वजनों,स्वागत एवं सुमंग; संध्या~~~~~~~~~~~^~~~~~~~~~~~~~

ईसाई धर्मावलम्बी, हिन्दू देवी-देवताओं को, किन गंदी नज़रों से देखते हैं ?

किसी ने आपको सिखा दिया है कि ‘बुरा मत सुनो, बुरा मत देखो, बुरा मत कहो’
और आपने उसे अपना ‘कवच’ जैसा बना लिया है
आप न बुरा देखते हैं, न बुरा सुनते हैं,न बुरा मानते हैं।

क्या कभी आपने सोचा है कि स्वाभिमान जैसी भी कोई चीज होती है ?

सिआटल (Seattle अमरीका) की एक कंपनी सिटिन प्रेटी (Sittin Pretty) कोमोड
(toilet seat) बेचनी शुरू की श्री गणेश एवं माँ काली की तस्वीरों के साथ।

अपने चहेते ईसा मसीह की तस्वीर उन्होंने वहाँ न दी।
पैगम्बर मुहम्मद की तस्वीर देने की बात सोच कर वे अपने ही पैंट में टट्टी कर देते,
हलाल कर दिये जाने के डर से।
यदि साधारण ईसाई दूध के धुले भलेमानुस थे,तो उन्हें इन टट्टी करने के स्थानों का
बहिष्कार करना चाहिये था,जो उन्होंने नहीं किया,बल्कि उन्हे बड़े चाव के साथ खरीदा
और उनको अपने घरों में लगाया,ताकि वे श्री गणेश व माँ काली के साथ हग सकें।

कई हिंदू संस्थाओं ने इस पर आपत्ति उठाई।
हजारों की संख्या मे ईमेल गए, फैक्स एवं टेलीफोन किए गए। कोशिशें ज़ारी रहीं।
काफी लम्बा चला यह आन्दोलन।
अंत में कंपनी ने इन डिज़ाइनों को बजार से वापस लेना स्वीकार किया।

उनकी नजर में हिन्दू धर्म एक नारकीय/राक्षसी धर्म है, असभ्य लोगों का धर्म है,
केवल ईसाई बनाकर हिंदुओं को सुसभ्य बनाया जा सकता है।

अमरीका के ईसाई धर्माध्यक्षों के परिवार में जन्मे डॉ डेविड फ़्रावले (वामदेव शास्त्री)
अपनी आत्मकथा स्वरूप पुस्तक में लिखते हैं –
“वे हमेशा धन माँगते हैं अमरीकी जनसमुदाय से कि हम भारतवर्ष में जाकर हिंदुओं
का धर्म परिवर्तन करना चाहते हैं।

हम यह देखते हैं नित्य विभिन्न टेलिविज़न चैनेलों पर।
पैट रॉबर्टसन जो उनके मुख्य धार्मिक नेताओं में से एक हैं उन्होंने कहा है कि हिंदू धर्म
एक नारकीय/राक्षसी धर्म है ।
वे हिंदू देवताओं को जानवरों के सिरों के साथ दिखाते हैं और कहते हैं जरा देखो इन्हें
कितने असभ्य हैं ये लोग।
वे भारतवर्ष के राज नैतिक एवं सामाजिक समस्याओं को अमरीकी जन समुदाय के
समक्ष रख कर कहते हैं यह सब हिंदू धर्म के कारण हैं।
वे अमरीकी जन समुदाय से कहते हैं कि हमें धन दीजिए ताकि हम भारतवर्ष जाकर
उन्हें इस भयावह हिंदू धर्म के चंगुल से छुड़ाएँ और उन्हें ईसाई बना सकें।”

पश्चिमी देशों में लाखों-करोड़ों व्यक्ति, हिंदूधर्म के बारे में, इन धारणाओं के साथ
जीते हैं

आप अमरीका में रहते होंगे,पर सैकड़ों में से उन्हीं पाँच-सात चैनलों को देखते होंगे
जिनमें आपकी रुचि है।

अतः आप न तो बुरा देखते हैं,न बुरा सुनते हैं,न आपको बुरा लगता है।

पर अमरीका और कैनेडा में ऐसे लाखों गोरी चमड़ी वाले होंगे जो उन चैनलों को देखते
हैं और हिंदुओं के बारे में ऐसी-ही धारणाओं के साथ जीते हैं।
आप भारतवर्ष में रहते हैं,आपको वे अमरीकी चैनल देखने को मिलते नहीं।

आप न बुरा देखते हैं, न बुरा सुनते हैं, न बुरा मानते हैं।

अधिकांशतः हिंदू धर्मगुरू इन समस्यायों के प्रति जागरूक नहीं हैं और इसकी ‘तोड़’
के बारे में प्रयत्नशील नहीं दिखायी देते हैं

अमरीका में आप अपने गुरु के पास जाते हैं,उनका अपना एक सम्प्रदाय जैसा होता है।
वहाँ पाँच-सौ हिंदुओं में दो-तीन गोरी चमड़ी वाले भी होते हैं।
अनुयायी उनके पाँव छूते हैं,उनका पंथ अपने पर फैला रहा होता है।
आप भी खुश,आप के गुरू भी खुश।

किसी को क्या पड़ी है कि सार्वजनिक रूप से विरोध करें कि हिन्दू धर्म का अपमान
हम नहीं सह सकते।

किसी ने आपको सिखा दिया है कि ‘बुरा मत सुनो, बुरा मत देखो, बुरा मत कहो’ और
आपने उसे अपना ‘कवच’ जैसा बना लिया है

आप भारतवर्ष में रहते हैं, अपनी पसन्द की दो-चार चैनलों को देखते हैं।
उन चैनलों को आप देखते नहीं जिनमें हिन्दूओं के विरुद्ध उट-पटांग बातें दिखायी जाती हैं।
इस प्रकार आप न बुरा देखते हैं,न बुरा सुनते हैं,न बुरा मानते हैं।

वे मुट्ठीभर जो आपको लगातार सचेत किये रखना चाहते हैं,उनसे आपको ‘परहेज’ है।

ऐसी पत्र-पत्रिकायें जो आपको हिन्दू धर्म के विरुद्ध हो रहे अभियानों के बारे में सचेत
करते रहते हैं उन्हें आप पढ़ना नहीं चाहते क्योंकि आपकी दृष्टि में वे सब उग्रवादी हैं, साम्प्रदायिक हैं,धर्मनिरपेक्ष नहीं हैं।
(उदाहरण के लिए ‘हिन्दू वॉइस’ एवं ‘सनातन प्रभात’)।

स्वाभिमान को तजकर आप उदार बनने की चेष्टा में लगे हैं

आपकी सोच कुछ ऐसी बन चुकी है कि यदि कोई आपको कहता है कि ‘मेरे भाई,तुमने
तो मुझे केवल एक थप्पड़ मारा है,एक और मार दो’ तो आप उसे महान आत्मा घोषित
कर देंगे।
मानसिक नपुंसकता की महिमा आपके दिलो-दिमाग पर इस तरह छा चुकी है कि
स्वाभिमान जैसा शब्द आपके शब्दकोश से कोसों दूर जा चुका है।

क्षात्रधर्म तो आप भुला बैठे और गीता को जाने क्या समझ लिया है

क्षात्रधर्म तो आपने भुला दिया है क्योंकि आपके दिग्दर्शकों ने आपको समझाया कि
भगवद्गीता आपको त्याग का सन्देश देती है,आपको अन्तर्मुखी बन कर ईश्वर की
साधना में लीन होने को कहती है।

महाभारत तो एक पारिवारिक कलह एवं अनावश्यक रक्तपात की कहानी है,
अतः उसमें सीख लेने जैसी कोई बात नहीं है।

कोई आपसे यह नहीं कहता कि भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश कुरुक्षेत्र
की रणभूमि में ही क्यों दिया,त्याग और ईश्वर प्राप्ति की बातें करनी थीं तो अर्जुन को
लेकर किसी वन में क्यों न चले गए?

भगवान श्री कृष्ण जानते थे कि एक समय आयेगा जब मानव-जीवन अपने आप में एक
रणक्षेत्र बन जायेगा और आज हम उसी स्थिति में पहुँच गए हैं।
आज गीता के संदेश को एक बार फिर से समझने की आवश्यकता है,और वह भी एक नई
दृष्टि से।

उन विधर्मियों के शब्दों में अमरनाथ की यात्रा का उद्देश्य है विनाश के देवता शिव के
कामवासना के अंगों की पूजा !!

डॉ डेविड फ़्रावले (वामदेव शास्त्री) लिखते हैं –

“न्यूयॉर्क टाइम्स अमरनाथ की तीर्थयात्रा के बारे में लिखता है कि हिंदू जा रहे हैं विनाश
के देवता शिव के कामवासना के अंगों की पूजा के लिए।”

न्यूयॉर्क टाइम्स जैसे ख्याति प्राप्त समचार पत्र,जो अमरीकी जनमत तैयार करते हैं

न्यूयॉर्क टाइम्स जैसे ख्याति प्राप्त समचार पत्र, जो अमरीकी जनमत तैयार करते हैं,
वे अपने पाठकों को बताते हैं शिव हैं विनाश के देवता और उनके कामवासना के अंगों
की पूजा है अमरनाथ तीर्थ यात्रा का मुख्य उद्देश्य।

जरा सोच कर देखिए क्या प्रभाव पड़ता होगा विश्व जनमत पर हिंदू धर्म के बारे में।

कब तक इस भ्रम में जीयेंगे कि हिंदू धर्म की क्या साख है सारे विश्व में

आप में से अनेक हैं जो फूले नहीं समाते जब देखते हैं मुट्ठी भर गोरी चमड़ी वालों को हिंदू
धर्म अपनाते।

आप इसी खुशफ़हमी में जीते हैं कि देखो हिंदू धर्म की क्या साख है सारे विश्व में,
जो इन गोरी चमड़ी वालों को भी प्रेरित करती है हिंदू धर्म को अपनाने।

कुछ तो यहाँ तक छाप देते हैं कि आज सारा विश्व हिंदू धर्म की महत्ता को मानता है
पर हमारे अपने हिंदू उस महत्ता को नहीं समझते।

ये अति ज्ञानी लोग उन मुट्ठी भर गोरी चमड़ी वालों को सारे विश्व का प्रतिनिधि मान
बैठते हैं।

क्या ऐसा नहीं लगता कि आप अपनी ही नज़रों में इतना गिर चुके हैं कि कोई जरा सा
आपकी पीठ थपथपाता और आप फूल कर कुप्पा बन जाते हैं।

आपने खो दी अपनी शिक्षा, अपनी संस्कृति, अपनी पहचान !!

यही तो चाहा था उस टीबी मॅकॉले ने जो ‘टी-बी’ की तरह घुन लगा गया हमारे स्वाभिमान
को,जब वह लेकर आया ईसाई मिशनरियों की बटालियन सन 1835 में, हमें ईसाई-अँग्रेज़ी
शिक्षा पद्धति के साँचे में ढालने के उद्देश्य से।

वह तो सफल हो गया अपने उद्देश्य में और उसका मूल्य चुकाया आपने।
आपने खो दी अपनी शिक्षा, अपनी संस्कृति, अपनी पहचान।

उन विधर्मियों के शब्दों में शिव नशे में धुत्त गाँव-गाँव में नंगा घूमता है,शिव मंदिरों में
पाओगे एक खड़ा जननांग जो है शिव की निरंकुश कामुकता का प्रतीक,
शिव की पत्नि ‘शक्ति’ मद्यपान,व्यभिचार,लाम्पट्य,मंदिरों में वेश्यावृत्ति को प्रोत्साहित
करती है,
‘काली’ दुष्ट, डरावनी, ख़ून की प्यासी है।

क्या ये रक्तबीज जैसे किसी असुर की ही संतानें हैं?

माँ काली ने रक्तबीज नामक असुर का संहार किया था,जिसके खून का एक कतरा धरती
पर गिरने से एक और वैसा ही असुर पैदा हो जाता था।

अतः स्वाभविक है कि कोई भी ऐसा असुर माँ काली को श्रद्धा की दृष्टि से नहीं देखेगा।

ईसाई भी माँ काली को श्रद्धा की दृष्टि से नहीं देखते।

क्या इसका मतलब यह हुआ कि ये ईसाई भी उसी रक्तबीज जैसे किसी असुर की ही
संतानें हैं?

प्रतिदिन पैंतीस हज़ार लोगों के मन में हिंदू धर्म के प्रति कैसा विष बोया जाता है

आज इंटरनेट का बोलबाला है।
विश्व के कोने कोने तक अपनी बात पहुँचाने का यह सबसे सस्ता एवं द्रुतगामी माध्यम है।
वेब साइट पर एक काउंटर होता है।
यह काउंटर गिनता रहता है कितने लोग अब तक इस साइट पर आए हैं।
जब भी कोई व्यक्ति विश्व के किसी भी कोने से कंप्यूटर के द्वारा उस साइट पर जाता है
तो तत्काल काउंटर उसे रेकॉर्ड कर लेता है।
डॉ जेरोमे का दावा है कि इस साइट को विश्व भर से पैंतीस हज़ार लोग प्रतिदिन देखते हैं।
अब सुनिए उनकी जबानी हिंदू धर्म की कहानी।
http://religion-cults.com/Eastern/Hinduism/hindu11.htm

भगवान शिव एवं माँ शक्ति की आज यह छवि प्रस्तुत की जाती है !!

“हिन्दू धर्म है जमघट विभिन्न पंथों का जिसे कहा जा सकता है धार्मिक अराजकता का
ज्वलंत उदाहरण।
शिव उनमें से सबसे अधिक लोकप्रिय है।
उसके सबसे अधिक भक्त मिलेंगे आपको।
नटराज के रूप में वह चार हाथों के साथ नाचता है।
चारों ओर नंगा घूमता है गाँव गाँव में,नंदी नामक एक सफ़ेद साँड़ के पीठ पर चढ़ कर।
नशे में धुत्त, भूखे रहने और अपने शरीर को विकृत करने की शिक्षा देता वह।
भैरव के रूप में अपने पिता की हत्या करने वाला,अपने बाप की खोपड़ी को एक कटोरे के
रूप में प्रयोग करने वाला है वह।
अर्धनारीश्वर के रूप में स्त्री व पुरुष के काम वासना की छवि है वह।
उसके मंदिरों में सदा पाओगे एक बड़ा लिंगपुरुष,रूढ़ शैली का एक खड़ा जननांग जो है
शिव की निरंकुश कामुकता का प्रतीक है।
(Erect Penis symbolizing his rampant Sexuality)

शिव की पत्नियाँ बड़ी लोकप्रिय हैं।
शक्ति रहस्यानुष्ठान,मद्यपान-उत्सव,व्यभिचार,लाम्पट्य,मंदिरों में वेश्यावृत्ति एवं
बलि देने की प्रथा को प्रोत्साहित करती है।
शक्ति ने आरम्भ किया सती प्रथा का जिसमें विधवा आग में कूद जाती है अपने पति
की चिता में।

शक्ति काली के रूप में दुष्ट, डरावनी और ख़ून की प्यासी और सबसे अधिक लोकप्रिय है।
वह खड़ी होती है एक छिन्न-मस्तक शरीर के ऊपर,गले में मनुष्यों के कटे सरों की माला
डाले।
ख़बरों के अनुसार प्रति वर्ष सौ व्यक्तियों का ख़ून किया जाता है,बलि के लिए,भारतवर्ष
में काली के सम्मान में।

हिंदू धर्म के जंगल में न घुसो, निकल भागो इस जंगल से जब यह तुम्हारे बस में हो।” http://religion-cults.com/Eastern/Hinduism/hindu11.htm

उस ईसाई धर्माध्यक्ष ने क्या सोच कर अपने अंग्रेजी मूल में erect penis शब्द का
‘चयन’ किया, genital का क्यों नहीं ?

आप स्वयं सोच कर देखें कि इस ईसाई धर्माध्यक्ष ने genital (जननेन्द्रिय) शब्द का
प्रयोग नहीं किया।
उसने erect (खड़ा, तना हुआ) विशेषण का प्रयोग किया है genital के साथ नहीं बल्कि
penis के साथ।
जब penis erect होता है तब पुरुष के मन में कामुकता की भावना प्रबल होती है।
इसी बात पर जोर देते हुए ईसाई धर्माध्यक्ष हमारे भगवान शिव की rampant (निरंकुश) sexuality (कामुकता) का वर्णन करते हुए उन्हें काम वासना की छवि बताया।
अतः erect penis की बात करते हुए उनकी भावना स्पष्टतः कामुकता से उद्वेलित खड़े
जननांग की ओर संकेत करती है,किसी जननेन्द्रिय (सृजन प्रक्रिया का एक अंग) अथवा
किसी लिंग (gender जैसे स्त्रीलिंग या पुलिंग) की नहीं।

दो हिंदू संस्थाओं के द्वारा किये गए घोर आपत्ति के बावज़ूद उस ईसाई धर्म गुरु ने अपने वेबसाइट पर कोई भी परिवर्तन करना स्वीकार नहीं किया

भगवान शिव ने कामुकता पर पूर्ण विजय प्राप्त कर ली थी।
उसी भगवान शिव के बारे में,अश्लील भावना का प्रदर्शन करते हुए,उस प्रख्यात ईसाई
धर्माध्यक्ष ने अपने शब्दों का चयन किया था बहुत ही सोच-समझ कर।
अमरीका में दो हिंदू संस्थाओं ने घोर आपत्ति की,भगवान शिव के लिए erect penis एवं rampant sexuality जैसे शब्दों के प्रयोग पर।
पर उस ईसाई धर्म गुरु ने अपने वेबसाइट पर कोई भी परिवर्तन करना स्वीकार नहीं किया।
ऐसा क्यों?
विवरण – http://www.IndiaCause.com

अब तक एक करोड़ लोग देख चुके होंगे उस वेबसाइट को – क्या प्रभाव पड़ता होगा सारे
विश्व पर हिंदू धर्म के प्रति?

हिंदू धर्म के प्रति अपनी वह कुत्सित भावना,उस ईसाई धर्माध्यक्ष ने,विश्व भर के लाखों
लोगों के मन में भरी।

क्या प्रभाव पड़ता होगा सारे विश्व पर जब पैंतीस हज़ार लोग प्रतिदिन पढ़ते होंगे इसको?
आपके सामने आपके धर्म का बलात्कार हो रहा है और आपकी आत्मा को यह स्वीकार भी है

यह सब जानकर भी यदि आपका खून नहीं खौलता तो जान लीजिए कि आप का खून
ठंडा पड़ चुका है और आप स्वाभिमान के साथ जीने के हकदार नहीं हैं।

जरा सोचकर देखिए जैसे आपकी माँ अपने दूध से आपके शरीर को सींचती है ठीक
उसी प्रकार आपका धर्म आपकी आत्मा को सींचता है।
कल्पना कीजिए, आपके सामने आपकी माँ का बलात्कार हो रहा है।
उसी प्रकार आज आपके धर्म का बलात्कार हो रहा है।
आपकी आत्मा को यह स्वीकार भी है।

आपकी सोच – हमारा हिंदू धर्म विश्व भर में कितने आदर के साथ देखा जाता है

और आप हैं कि मुट्ठी भर सफेद चमड़ी वालों को हिंदू धर्म अपनाते देख,फूले नहीं समाते।
यह सोच कर खुश हो लेते हैं कि हमारा हिंदू धर्म विश्व भर में कितने आदर के साथ देखा
जाता है।

अब तो कम से कम अपने मन को बहलाना बंद कीजिए।

ईसाई ऐसा क्यों करते है ? क्या छुपा है उनकी शिक्षा एवं उनके चरित्र में ?

मैं स्वयं अनगिनत बार भगवान शिव शंकर के द्वार पर गया पर मुझे तो वहाँ कभी वह न
दिखा जो ईसाइयोंको दिखा।
मेरे मन में वैसी भावना कभी जगी तक नहीं।
उस भावना के अस्तित्व को मैंने तभी जाना जब उसके बारे में पुस्तकों में पढ़ा या दूसरों
से सुना और फिर भी मेरे मन में वह भावना कभी घर न कर पायी।
ऐसा क्या है उन ईसाइयों की सोच में जो उन्हें सदा खड़ा लंड ही दिखाई देता है ?
आगे चलकर इसी रहस्य को समझने की चेष्टा करेंगे।

यह समझने की भूल न करें कि ये सारे हथकण्डे केवल ईसाई धर्मगुरुओं और चंद कलाकारों
के ही हैं – बाकी साधारण ईसाई दूध के धुले हुए हैं.

अमेरीकन ईगल आउटफिटर्स (American Eagle Outfitters) नामक कम्पनी ने देवी
देवताओं के चित्र वाले चप्पलों को 12.50 डॉलर (500 रुपये उन दिनों) में बेचना शुरू किया
जिन पर हमारे पूजनीय श्री गणेश की मूर्ति अंकित थी।
इस कंपनी के लगभग 750 स्टोर्स मिलेंगे आपको, अमरीका एवं कैनेडा में।

यदि साधारण ईसाई दूध के धुले भलेमानुस थे,तो उन्हें इन चप्पलों का बहिष्कार करना
चाहिये था,जो उन्होंने नहीं किया, बल्कि उन्हे बड़े चाव के साथ खरीदा और पहना,
ताकि वे हमारे परम पूज्य श्री गणेश को अपने पैरों तले प्रतिदिन रौंद सकें।

अमरीका की IndiaCause नामक हिंदू संस्था ने इस पर आपत्ति करते हुए कम्पनी
को लिखा।
कम्पनी के वाइस-प्रेसिडेन्ट नील बुलमैन जूनियर ने क्षमायाचना करते हुए IndiaCause
को फैक्स भेजा इस आश्वासन के साथ कि वे उन सारी चप्पलों को अपनी दुकानों से
वापस मंगा लेंगे।
विवरण – www.indiacause.com
इस संस्था ने चेष्टा की। इस चेष्टा का फल भी मिला।

हमारे देश के धर्मान्तरित ईसाई तो विदेशियों से भी एक कदम आगे गाँव में जिस शिवलिंग
की नियमित पूजा होती थी उसी पर ये ईसाई टट्टी कर जाते हैं –
उस ईसाई धर्मगुरु की शह पर जिसने उनका धर्मान्तरण किया

ग्राम कोविलनचेरी जिला कांची प्रदेश तमिलनाडु – यह केवल अमरीका की बात ही नहीं,
हमारे अपने भारतवर्ष में भी ऐसा होता है पर आपकी समाचार एजेंसियाँ इन्हें आपसे
छुपा जाती हैं।
अंतर केवल इतना है कि यहाँ आज माँ काली की फ़ोटो के साथ नहीं,बल्कि उससे एक
कदम बढ़ कर,साक्षात शिवलिंग के ऊपर टट्टी करते हैं,उसे कोमोड मान कर।

वह शिवलिंग जिसकी,तब भी गाँव में, नियमित पूजा होती थी।
सम्पूर्ण विवरण – हिंदू वॉइस (अँग्रेजी संस्करण),
रिपोर्ट एस वी बादरी, सितम्बर 2003, पृ 40-41

कब तक आप सत्य से भागते फिरेंगे?

आपको सदा से सिखाया जाता रहा है कि अपने गरेबान में झाँक कर देखो
(अपने अंदर झाँक कर देखो)। और आपने भी सदा अपने ही गरेबान में झाँकना सीखा है।

इस प्रक्रिया में आपने इतनी महारथ हासिल कर ली है कि आप अपनी ही नज़रों में बहुत
छोटे बन गए हैं।
अपने हिंदुओं में ही सर्वदा दोष खोजने के आदी बन चुके हैं।

यह उन भगोड़ों की विशेषता है जो समस्या के समाधान हेतु ‘समस्या को पैदा’ करने वालों
के विरुद्ध खड़े होने का सत्साहस नहीं रखते।

क्या आपने कभी दूसरों के गरेबान में भी झाँक कर देखने की चेष्टा की है? इसलिए नहीं
कि आप उनकी गलतियाँ निकालें।

बल्कि इसलिए कि वे सदा से आपको छोटा दिखाते आये हैं। एक बार उनकी खामियों की
ओर भी नजर डाल कर देखें, केवल अपनों को हीन मानने के बजाय !

क्या कभी आपने सोचा है कि स्वाभिमान जैसी भी कोई चीज होती है ?

क्या आपने जाना है कि आत्मरक्षा का हमारी जीवन प्रक्रिया में कोई महत्व होता है ?
आत्मरक्षा की बात करें तो केवल यह न सोचिए–आपके शरीर पर हमला हो रहा है।

हमला आपकी आत्मा पर भी हो सकता है।
हमला आपकी आस्थाओं पर भी हो सकता है।
हमले का उद्देश्य आपकी सोच को एक नया जामा पहनाने का भी हो सकता है।
हमला एक षड़यंत्र के रूप में भी हो सकता है जिसके पीछे एक निहित स्वार्थ हो।

और वह यह कि आपको अपनी जड़ों से उखाड़ कर अलग करना। जब आप अपनी जड़ों
से ही कट जायेंगे तो आप अपनी पहचान को भी भूल जायेंगे।

क्या यही नहीं हो रहा है आज के युवा वर्ग के साथ ?

ऐसा क्या है ईसाइयों की सोच में,उनकी शिक्षा में, उनके संस्कारों में और उनके छुपे हुए
अतीत में,जो उन्हें इस रूप में ढालता है ?

क्या वे ऐसा केवल आज ही कर रहे हैं? नहीं, केवल आज ही नहीं,वे सदा से ही ऐसा करते
आए हैं।
वे सदा से ऐसा क्यों करते आए हैं ?
ऐसा क्या छुपा है उनके अतीत में ?
क्या हिंदू धर्म भी उनके साथ ऐसा ही व्यवहार करता है? कभी नहीं।
वे किस मिट्टी के बनें हैं जो उनमें इतनी घृणा है हमारे प्रति ?
–कट्टर हिंदू
========

जागो हिंदू जागो !!

जयति हिंदू सनातन संस्कृति,,,जयति पुण्य भूमि भारत,,
सदा सुमंगल,,वंदेमातरम,,,
जय श्री राम

Posted in AAP

AAP


नवाज शरीफ द्वारा मोदी जी की मां को मिले तोहफे पर किन्नर कवि कुमार विश्वास के बोल –
‘शॉल और साड़ियों के सरहद पार आने-जाने की खबरों के बीच शहीद हेमराज की पत्नी अपने पति के सरहद पार रह गए सिर की प्रतीक्षा कर रही है।’
कमाल है.. ‘कश्मीर’ पाकिस्तान को देने की बात करने वाले गद्दार को सीमा पे शहीद हुए हेमराज के सिर की चिंता सता रही है, जिसने अफजल गुरु जैसे आतंकवादी को शहीद बता कर उसकी वकालत की वो आज शहीद हेमराज की बात कर रहा है.
कुमार बकवास, मोदी जी दूसरे सिद्धांतो वाले है जो पहले मुलाकात, फिर बात और जरुरत पड़ी तो लात का इस्तेमाल करते है .
Posted in Secular

Secular


मुस्लिम लडकिया कृपा करके ध्यान दीजिए…
फायदा ही फायदा
अगर कोई मुस्लीम कन्या हिंदू से शादी करेगी तो….
उसे निम्न लीखीत फायदे बिना मांगे ही मिल जायेंगे….
1. तलाक का डर नहीं…………….
(क्योंकी हमहिन्दूओ में शादी 7 जन्मों का पवीत्र बंधन
माना जाता है)
2. सूअरों की तरह 20 -25 बच्चे पैदा करने से आजादी …
3. बुरके से आजादी …
4. घर में पूर्ण सुरक्षा ( अपने भाई, चाचाओं और मौसाओं से )
5. उनके बच्चे पंचर नहीं बनायेंगे….. बल्की 5 रुपया दे कर
बनवायेंगे….
6. बच्चे भी हमेशा प्राकृतीक रहेंगे …… कहीं से कोई काट छाँट
नहीं होगी….
7. बच्चीयों की भी घर में पूर्ण सुरक्षा ( मुहम्मद साहब और
फातीमा का प्रकरण तो आप लोगों को याद ही होगा,
जबकी दोनों सगे बाप-बेटी थे)
8. बच्चे आतंकवादी नहीं बनेंगे..
9. और सबसे बड़ी बात की….. आप बैठे बिठाये दुनीया के सबसे
पवीत्र और गौरवशाली हिन्दू सनातन धर्म का हिस्सा बन
जाओगे…!
तो, देखा मुल्लीयो..शादी एक……….फायदे अनेक …..!
जल्दी करें….. ये सुनहरा मौका हाथ से जाने ना पाए……!!!
ऑफर सीमीत समय के लिए ही है…!
अंत में बस इतना ही कहू की….. अपने भाई,
चाचाओं और मौसाओं को देखा बार-बार …….. हमें भी देखो एक
बार…..! अब फैसला आप सब मुसलीम लेडकियों के हाथ मे है l
इस पोस्ट को शेयर करे ,घर घर तक पहुचाये , हर
मुल्ली तक पहुचाये.
हर हर महादेव”
Posted in Secular

Minority


.
अगर जनसंख्या नियंत्रण की बात हो तो…
‘अल्पसंख्यकों की भावनाएं आहत’
‘समान नागरिक संहिता’ लागु करने की बात
हो तो… ‘अल्पसंख्यकों की भावनाएं आहत’
आतंकवाद के खिलाफ कठोर कानून बनाने की बात
हो तो… ‘अल्पसंख्यकों की भावनाएं आहत’
गौहत्या पे पाबन्दी की बात हो तो…
‘अल्पसंख्यकों की भावनाएं आहत’
कश्मीर से धारा 370 हटाने की बात हो तो …
‘अल्पसंख्यकों की भावनाएं आहत’
दूसरे धर्म को मानने वाले अगर अपने-अपने धर्म
को नियमपूर्वक पालन करे तो इनकी भावनाएं आहत
हो जाती है, अगर कोई इनकी टोपी न पहने
तो भी इनकी भावनाएं आहत..
हद है यार…. अगर देश इनकी भावनाओं की फिक्र
करता रहा तो ‘विश्वगुरु’ बनने की बात तो दूर हम
विकसित देशों की सूचि में भी शामिल
नहीं हो पाएंगे,,,,
Posted in रामायण - Ramayan

Murti pooja


मूर्तिपूजा क्योँ ??

क्या आप जानते हैं
कि…..
हमारे हिन्दू धर्म
के हर एक मंदिर में
भगवान की मूर्तियाँ
क्यों स्थापित
की जाती हैँ…. और
मूर्ति पूजा का इतना
महत्व क्यों हैं…??

अक्सर कुछ लोग
कहते हैँ कि,
मूर्तियाँ तो पत्थर की
होती हैँ और पत्थर
को पूजने से
भला क्या लाभ है…??

दरअसल….
हिन्दू धर्म में मूर्तियों
को पूजे जाने का
एक मनोवैज्ञानिक
कारण है…!!
हकीकत में…..
मंदिर अथवा घर में
रखी मूर्तियाँ..
भगवान नहीं होती हैं,
बल्कि वे भगवान का
प्रतीक होती हैँ…
जिससे साधक
को साधना करने और
एकाग्रचित्त होने में
मदद मिल सके….
ताकि, मंत्रोच्चार का
समुचित
प्रभाव हो सके….!!

इसे और भी अच्छी
तरह समझने के
लिए… हम ऐसे समझ
सकते हैं कि…….
जब हम कोई सिनेमा
देखते हैं तो, वो
हकीकत में हमारे
सामने घटित नहीं हो
रहा होता है….
बल्कि सिर्फ सामने
परदे पर दृश्य
आते-जाते रहते हैं….
फिर भी हम
फिल्म देखते हुए
कभी ख़ुशी, कभी दुःख
और कभी आवेशित
महसूस करते हैं…!!
दरअसल वो….
हमारे एकाग्रचित्त
होकर उस फिल्म के
चरित्र में डूब जाने
का नतीजा है…!!

इसे इस प्रकार भी
समझा जा सकता है…..
प्रेमी और प्रेमिका
जब एक दूजे से दूर
होते हैं….
उस समय, प्रेमी
अपनी प्रेमिका के
फोटो को ही
अपनी प्रेमिका समझ
कर, उसे निहारते
रहते हैं….. और
उसी से उन्हें ऐसा
लगता है कि….
उनकी प्रेमिका उनके
समीप ही बैठी है…!!
उस फोटो में
मानसिक रूप से डूब
जाने के बाद तो,
वो अपनी प्रेमिका को
महसूस तक करने
लगता है…!!

असल में….
ये शुद्ध रूप से विज्ञान
है, एक मनोविज्ञान…!!
जिसका प्रयोग,
लोगों को कृत्रिम रूप
से सम्मोहित
करने के लिए किया
जाता है…!!
आप सभी जानते
हैँ कि सम्मोहन विद्या
मेँ सम्मोहनकर्ता
किसी एक वस्तु को
ध्यान लगा कर
देखने को बोलता है….
ताकि, उस वयक्ति
का मन
एकाग्रचित्त हो सके…!!
मंदिर में भगवान की
मूर्तियों की पूजा
के पीछे यही एकमात्र
रहस्य है…..
जो पूर्णतया विज्ञान पर आधारित है…!!

हालाँकि…..
भगवान कण-कण में
विराजमान हैं….
परन्तु , किसी
प्रतीक चिन्ह के अभाव
में, इस अनंत ब्रह्माण्ड
में लोगों का
एकाग्रचित्त होना और
भगवान का ध्यान
करना, काफी मुश्किल
हो जाएगा….
क्योंकि, उस हालत में
लोगों के मन में
भगवान की कोई छवि
बन ही नहीं पाएगी…!!

इसका सबसे बड़ा
प्रमाण यह है कि…..
कोई भी व्यक्ति
यह नहीं कहता कि,
फलाने मंदिर में
भगवान की स्थापना
हुई है…. या फलाने
मंदिर के भगवान
बहुत ही सुंदर हैं…!!
हमेशा यही कहा
जाता है कि,
फलाने मंदिर में
भगवान की प्रतिमा
स्थापित हुई है….
या फलाने मंदिर की
मूर्ति बहुत सुंदर है…!!
इस तरह….
एक सामान्य बोल-
चाल में भी हम
यही कहते हैं कि,
मूर्तियाँ भगवान नहीं
हैँ…. बल्कि,
भगवान का प्रतीक हैँ…!!

अब तो आप समझ
ही गये होँगे कि
मूर्ति पूजा ही साधना
करने का सर्वोत्तम
और एक पूर्णतया
वैज्ञानिक तरीका है…!!
अतः आप सबसे
विनम्र अनुरोध है कि
पूजा करने में
शर्म नहीं बल्कि…. गर्व
का अनुभव करें…!!
हम हिन्दुओं की
पूजा पद्धति सर्वश्रेष्ठ
पूजा पद्धति है…!!
हम गौरवशाली हिन्दू हैं…!!
हम पहले भी विश्वगुरु
थे…. और आज भी
हम में विश्वगुरु बनने
की क्षमता है…!!

-*-जय श्री कृष्णा-*-

Posted in PM Narendra Modi

Modi


अभी-२ एक मुल्लायम सिंह यादव जी के भक्त का कमेंट देखा की काले धन पर टीम बनाने का निर्णय तो सुप्रीम कोर्ट का था मोदी का नहीं और वाराणसी में लगने वाला अमूल प्रोजेक्ट मुल्ला+यम की सरकार की देन है मोदी की नहीं ,तो ऐसे मूर्खों को हमारा दिया गया जवाब –

Mr Harikesh ……अपनी जानकारी पूरी रखा कीजिये ,केवल बिकाऊ मोदी-विरोधी मीडिया की झूठी बातों पर यकीन करने की जगह थोड़ी रिर्सच खुद भी कर लिया कीजिये ,काले धन पर SIT बनाने का निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में दिया था जिसे की खान्ग्रेस सरकार 3 साल तक लटकाती रही और SIT नहीं बनाई ,ऐसा ही मोदी जी भी कर सकते थे,अगर नियत में खोट होता तो वे भी अगले कई साल तक उसे लटकाते रहते लेकिन पीएम बनते ही सबसे पहला फैसला उन्होनें SIT बनाने का किया, ये दिखाता है की उनकी नियत साफ़ और सही है ,अब आपके मुल्ला+यम और मायावती जैसे नेताओं के काले धन की खैर नहीं

aur ye kahla bhi galat hoga ki varanasi mein hone wala amul project up sarkar ki den hai, up sarkaar ke paas apne pariwar ke gaanvon ki jagah baaki areas ko dene ke liye bijli to hai nahin , amul jaise 24 ghnte bijli requirement ke project ko kya ghanta bijli denge, isi liye amul ne ab tak final decision nahin liya tha lekin modi ji ke varanasi se jeetne ke baad unhonein isey finalise kiya hai kyonki ab wey aashvst hain ki ab varanasi ko 24 ghnte bijli mila karegi jiske kaaran wey apne plant ka kaam bhi bina ruke kar sakengein

Posted in Secular

Real secular


भारत के सबसे बड़े सेकुलर (सिनेमा वालो) का कमीनापन देखिये जो किसी हिन्दू को 
नज़र नहीं आता….
१. फिल्म में पंडित (ब्रह्मण ) हमेशा जोकर ही होता है ,जिसकी वेशभूषा भी हस्यास्पथ 
सी होती है जो कुछ पैसे ले कर शादी की तारीख मन मुताबिक निकल देता है..
२. छत्रिय (ठाकुर) गाँव का सबसे बड़ा बलात्कारी होता है जिसने गाँव की कोई मासूम
लड़की छोड़ी नहीं होती…..
३. वैश्य (बनिया) सबसे बड़ा खून चूसने वाला जीव होता है , जो हीरो की माँ या बहन पर
हमेशा कुछ पैसो के लिए बुरी नज़र डालता है, और जिसकी तोंद दुनिया के सभी आदमियों
से बड़ी होती है,और सबसे ख़ास बात….
१. अल्लाह का बन्दा चाहे डाकू हो या कोई और , कभी पीछे से वार नहीं करेगा, हर लड़की
की इज्जत बचने में सबसे आगे और मरेगा भी तो नमाज़ की आवाज़ सुन कर..
२. जीसस का पुत्र हमेशा हीरो को चर्च की सीढियों से उठा कर पाल पोस कर बड़ा करेगा,और
कितनी भी यातनाये सहने के बाद भी हीरो का पता नहीं बताएगा और दुनिया के हर आदमी
को क्षमा कर देगा…
मतलब की फिल्म जैसे मनोरंजन के साधन में भी अपनी बकवास (धर्मनिरपेक्ष गुंडागर्दी)
घुसेड कर ,सभी भारत वासियों के मन में जहर घोल रहे है अपने ही धर्मं के प्रति…..

भारत के सबसे बड़े सेकुलर (सिनेमा वालो) का कमीनापन देखिये जो किसी हिन्दू को 
नज़र नहीं आता....
१. फिल्म में पंडित (ब्रह्मण ) हमेशा जोकर ही होता है ,जिसकी वेशभूषा भी हस्यास्पथ 
सी होती है जो कुछ पैसे ले कर शादी की तारीख मन मुताबिक निकल देता है..
२. छत्रिय (ठाकुर) गाँव का सबसे बड़ा बलात्कारी होता है जिसने गाँव की कोई मासूम
लड़की छोड़ी नहीं होती.....
३. वैश्य (बनिया) सबसे बड़ा खून चूसने वाला जीव होता है , जो हीरो की माँ या बहन पर
हमेशा कुछ पैसो के लिए बुरी नज़र डालता है, और जिसकी तोंद दुनिया के सभी आदमियों
से बड़ी होती है,और सबसे ख़ास बात....
१. अल्लाह का बन्दा चाहे डाकू हो या कोई और , कभी पीछे से वार नहीं करेगा, हर लड़की 
की इज्जत बचने में सबसे आगे और मरेगा भी तो नमाज़ की आवाज़ सुन कर..
२. जीसस का पुत्र हमेशा हीरो को चर्च की सीढियों से उठा कर पाल पोस कर बड़ा करेगा,और
कितनी भी यातनाये सहने के बाद भी हीरो का पता नहीं बताएगा और दुनिया के हर आदमी
को क्षमा कर देगा...
मतलब की फिल्म जैसे मनोरंजन के साधन में भी अपनी बकवास (धर्मनिरपेक्ष गुंडागर्दी) 
घुसेड कर ,सभी भारत वासियों के मन में जहर घोल रहे है अपने ही धर्मं के प्रति.......
Posted in भारत गौरव - Mera Bharat Mahan

Mera Bharat


जब बात विज्ञानं की आती है,,,
एक ब्राह्मण आर्यभट्ट बन जाता हे।
जब बात चिकित्सा की आती हे
एक ब्राह्मण शुश्रुत चरक बन जाता हे।
जब बात रक्षण की आती हे
एक ब्राह्मण परशुराम बन जाता हे।
जब बात धर्म की आती हे
एक ब्राह्मण आदि शंकराचार्य बन जाते हे।
जब बात युद्ध की आती हे
एक ब्राह्मण दाहिर और पुष्यमित्र शुंग बन जाता है।
जब बात क्रांति की आती हे
एक ब्राह्मण मंगल पाण्डेय हो जाता हे।
जब बात आजादी की आती हे
ब्राह्मण कन्या लक्ष्मीबाई बन जाती हे।
जब बात समाज सुधार की आती हे
एक ब्राह्मण महर्षि दयानंद बन जाते हे।
जब बात शाहदत की आती हे
एक ब्राह्मण संदीप उन्नीकृष्णन बन जाता हे।
जब बात अखंड हिंदुत्व की आती
तब ब्राह्मण हेडगेवार RSS बना जाते हे।
जब बात हिन्दुराष्ट्र की आती हे
एक ब्राह्मण सावरकर बन जाता हे।
जब बात स्वाभिमान की आती हे
एक ब्राह्मण राजीव दीक्षित बन जाता है।
इतिहास गवाह हे ब्राह्मण ने जब अपना ब्राह्मणत्व पहचाना है उसने खुद
के लिए कुछ नहीं किया सर्वजन हिताय के उद्देश्य से
सभी को रोशन किया।
Posted in भारतीय मंदिर - Bharatiya Mandir

Kaliyoug


Ancient Indian UFO

According to the Surya Siddhanta, Kali yuga is of total 4,32,00 years & Kali Yuga began at midnight (00:00) on 18 February 3102 BCE in the proleptic Julian calendar.

Just after the Mahabaharta Yudh and Yadu vansi decline the dwapar yuga shifted to Kaliyuga. This date is also considered by many Hindus to be the day that Krishna left Earth to return to his abode.

till now 5115 years has been passed of kalyuga. Before Shri Krishna left earth bhagwan pointed out that the 10,000 year golden years should begin after 5,000 years are completed in Kaliyuga which means that the Golden period started approximately 115 years back since 5115 years have elapsed, which makes the date of the Golden period as 1898 AD. iN THESE 10,000 years people will worshipe God, veda, purans and others spirituality.

The moral va;ues will be alive but after the golden years the moral values will be totally lost, no one will believe in god, technology will be on high level and people will fall deeply into the habit of drugs and sexual pleasures…

Kali is the reigning lord of Kali Yuga and his nemesis is Sri Kalki, the tenth and final Avatar of Lord Vishnu. According to the Vishnu Purana, Kali is a negative manifestation working towards the cause of ‘the end’ or rather towards eventual rejuvenation of the universe.

Kali also serves as an antagonistic force in the Kalki Purana. It is said that towards the end of this yuga, Kalki will return riding on a white horse to do battle with Kali and his dark forces. The world will suffer a fiery end that will destroy all evil, and a new age, Satya Yuga, will begin.

via – Arun Joshi

Posted in Uncategorized

Jati vyavastha


हमारे भारत में जाती प्रथा थी ही नहीं. जाती व्यवस्था थी. ७०० साल मोगलो के गुलाम रहे और ३०० साल ब्रिटिश के गुलाम रहे. उसमे जाती भेद आ गया. भागवान राम ने खुद सबरी के जूठे बेर खाये थे. भगवन कृष्ण और सुदामा एक ही गुरुकुल में पढाई की थी. १००० साल पहेले का इतिहास कभी हमने पढ़ना चाहिए. हर ऑफिस में एक व्यवस्था होती है एक सफाई करता है दूसरा मेनेजर बिज़नस करता है. तीसरा चोकीदार है और चौथा ट्रेनर है. यह एक व्यवस्था है. चार वर्ण कर्म से बनाये गए है जन्म से नहीं. मनु स्मुर्ती में कहा है जो ब्रामिन अपना ब्रामिन धर्मं न निभाता हो वो क्षुद्र है. आदमी जाती से क्षुद्र नहीं होता लेकिन विचारो से होता है आरक्षण मांग के.