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मोदी का संकल्प, गंगा व काशी को गंदा नहीं होने देंगे


 

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मोदी का संकल्प, गंगा व काशी को गंदा नहीं होने देंगे
वाराणसी, हिन्दुस्तान टीम

भावी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने काशी में मिली भारी सफलता पर आभार जताते हुए लोगों को संकल्प दिलाया कि अब न गंगा को गंदा होने देंगे न काशी को। शनिवार को गंगा आरती में भाग लेने के बाद राजेन्द्र प्रसाद घाट पर मोदी ने लोगों को संबोधित किया। सबसे पहले मोदी ने पार्टी अध्यक्ष का नाम लेते हुए कहा कि चुनावी नतीजों के आधार पर अगर सफलता आंकी जाएगी तो राजनाथ सिंह सबसे सफल माने जाएंगे। मैं राजनाथ जी का आभारी हूं कि उन्होंने मुझे बनारस आने का अवसर दिया।

बनारस के लोगों ने मेरे मौन पर मुहर लगा दी। आपने मुझे इतना जनसमर्थन दिया और भारी बहुमत से मुझे विजयी बनाया। उस इंसान को जो बनारस में 60 मिनट से ज्यादा समय नहीं दे पाया और नामांकन भरने के बाद तो बड़ी मुश्किल से कार्यालय पहुंच पाया। इसके बाद भी मुझे भारी समर्थन से जीत दिलाई।

मां गंगा की सेवा करना मेरे भाग्य में लिखा था। हम सबका संकल्प होना चाहिए कि हम देश के लिए जिएंगे। छोटा-सा भी काम करूंगा तो वह देश के लिए होगा। आजादी के बाद कांग्रेस की सरकारें रहीं। पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार पूर्ण बहुमत से आई है। अब तक गठबंधन करके सरकारें चलती थीं। पहली बार ऐसा हुआ है कि गठबंधन से विपक्ष बनाना पड़ेगा। विपक्षियों पर देश की जनता ने ऐसा चांटा मारा है। हमें देश के लिए जीने का सौभाग्य मिला है। यह युग-परिवर्तन का संधिकाल है। संधिकाल इसलिए क्योंकि पहली बार आजाद देश में पैदा हुए व्यक्ति को देश का नेतृत्व करने का मौका मिल रहा है। मुझे आजादी की जंग में देश के लिए मरने का सौभाग्य भले ही नहीं मिला लेकिन देश के लिए जीने का सौभाग्य मिला है।

मोदी ने कहा कि मैं बहुत सारे सपने संजोकर आपके पास आया हूं। मुझे सिर्फ वोट नहीं आपका साथ चाहिए। काशी में छोटे-छोटे काम शुरू करके बहुत बड़े काम करने हैं। अब हम काशी को गंदा नहीं होने देंगे। उन्होंने चंद्र यान यात्री नील आर्म स्ट्रांग का जिक्र करते हुए कहा कि नील ने अपनी डायरी पर लिखा था कि जब मैं चांद पर जा रहा था तो आकाशयात्राी था, लेकिन जब मैं लौट रहा हूं तो पूरे ब्रह्मांड के एक छोटे से जीव के रूप में लौट रहा हूं। उसी तरह मैं बनारस की ओर एक उम्मीदवार बनकर आया था, लेकिन इस पावन धरा पर जब मैंने अपना नामांकन फार्म भरा, मैं इस धरती का बेटा बन गया। मां गंगा ने मुझे बुलाया। ये मेरे भीतर से उठे शब्द थे, बल्कि शायद मेरे भीतर चल रहे भाव थे कि आज मुझे मां गंगा ने बेटा बना लिया है। मां गंगा की सेवा करना मेरे भाग्य में लिखा था।

मोदी ने गुजरात में जन्मे क्रांतिकारी श्याम कृष्ण वर्मा का जिक्र करते हुए बताया कि उनकी मौत विदेश में 1930 में हुई थी। वह चाहते थे कि देश आजाद हो तो उनकी अस्थियां भारत आएं। कई सरकारें आई लेकिन कोई उनकी अस्थियां जिनेवा से भारत नहीं ला पाया। जब मैं मुख्यमंत्री बना तब 2003 में उनकी अंतिम इच्छा पूरी की। ईश्वर की इच्छा के बिना ऐसा सौभाग्य प्राप्त नहीं होता है। शायद मां गंगा की सेवा करना भी मेरे नसीब में ही लिखा है। औरों ने किया या नहीं किया, यह कोई मुद्दा नहीं, मैं करूंगा।

मोदी ने कहा कि एक समय था जब भारत आध्यात्मिक, आर्थिक संपन्नता की ऊंचाइयों पर था। आध्यात्मिक ऊंचाई आएगी तो वैभव भी प्राप्त होगा। 2019 यानी पांच साल के बाद महात्मा गांधी की 150वीं जयंती आएगी। वह सफाई से कोई समझौता नहीं करते थे। उनकी 150वीं जयंती पर क्या देश उनके सफाई के आग्रह को पूरा सकता है? मेरा एक सपना है, जो मैं काशी से शुरू करना चाहता हूं। लेकिन वह काम सरकार नहीं, काशी के नागरिक कर सकते हैं। जब तक बनारस राष्ट्र गुरु नहीं बनता, तब तक भारत विश्व गुरु कैसे बन सकता है। उन्होंने कहा कि मैं उस गांव से आता हूं जहां से बुद्घ के समय बहुत बड़ा बौद्घ आंदोलन चलता था। आज ऐसी धरती पर हूं जहां काशी विश्वनाथ भी हैं और बौद्ध भी।

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