Posted in श्रीमद्‍भगवद्‍गीता

हर काम में मैनेजमेंट


 

भगवान श्रीकृष्ण द्वारा श्रीमद् भागवत गीता में कहे गए ज्ञान का हर एक वाक्य हमें कर्म करने और जीने की कला सिखाता है। हमें हर काम में मैनेजमेंट की बेहद ज्यादा जरूरत है। यही कारण है कि श्रीकृष्ण ने हर काम मैनेजमेंट से किया इसलिए वह सफल रहे।

कान्हा की बुद्धिमत्ता, चातुर्य, युद्धनीति, आकर्षण, प्रेमभाव, गुरुत्व, सुख-दुख आदि में खुश रहना और विशेष योग्यता के चलते उन्हें मैनेजमेंट गुरु कहा जाता है। आप भी मुरलीवाले के मैनेजमेंट को आजमाकर सफलता के नए आयाम रच सकते हैं।

1. अगर कंपनी मैनेजर श्रेष्ठ हो, तब वह किसी भी प्रकार के कर्मचारियों से काम करवा सकता है।

2. कंपनी के पास केवल श्रेष्ठ कर्मचारी हैं और नेतृत्वकर्ता को खुद ही सही दिशा का ज्ञान नहीं है ऐसे में सभी कर्मचारी अपनी बुद्धि के अनुसार काम तो करेंगे तो बेहतर होगा।

3. गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं कि ‘युद्ध नैतिक मूल्यों के लिए भी लड़ा जाता है। कौरव व पांडव के बीच युद्ध के दौरान अर्जुन को कौरवों के रूप में अपने ही लोग नजर आ रहे थे। ऐसे में वह धनुष उठाने से मनाकर देते हैं। तब श्रीकृष्ण यद्ध के मैदान में ही अर्जुन को अपने उपदेशों के माध्यम से नैतिकता और अनैतिकता का पाठ पठाते हैं,और युद्ध के लिए प्रोत्साहित करते हैं।’ कहने का आशय हर काम को प्रोत्साहित जरूर करें ऐसे में उत्पाद पर फर्क जरूर आता है।

4. प्रबंधकों को भी असंभव लक्ष्य पूरा करने के लिए दिए जाते है। ऐसे में कृष्ण जैसे प्रोत्साहनकर्ता की भी जरूरत है। गीता में कहा गया है कि ‘अहंकार के कारण नुकसान होता है। कई बार प्रबंधक लगातार सफलता प्राप्त करने के बाद अपनी ही पीठ ठोंकता रहता है। यह समझने लगता है कि अब सफलता उसके बाएं हाथ का खेल है। इसके बाद जब उसे असफलता मिलती है।’

5. प्रबंधन में रहते हुए प्रबंधक को उद्दण्ड तथा अक्षम सहायक को भी क्षमा करना चाहिए तथा बार-बार उसे आगाह करते रहना चाहिए परंतु जब वह सीमा पार करने लगे और दण्ड देने के अतिरिक्त कोई चारा न हो तो ऐसा दण्ड दिया जाना चाहिए जो दूसरों के लिए भी उदाहरण का काम करे। प्रबंधनकर्ता को हमेशा धैर्य से काम लेना चाहिए।

6. छोटी-छोटी चीजों पर उसे अपना आपा नहीं खोना चाहिए, जल्दबाजी से दूर ही रहें। प्रबंधक को विशाल ह्वदय का होना चाहिए। यही आज की आवश्यकता पडने पर अनुशासन को बनाए रखने के दृष्टिकोण से किसी तरह की कोमलता भी नहीं दिखानी चाहिए।

7. महाभारत के युद्ध के दौरान जब अर्जुन के मन में कृष्ण के को लेकर सवाल पैदा होता है और श्रीकृष्ण से वह पूछ बैठते हैं कि प्रभु आप कौन हैं? इस प्रश्न पर कृष्ण अपना दिव्य स्वरूप प्रकट करते हैं। श्रीकृष्ण के इस विराट स्वरूप वाले दृश्य से हमें यह सीख मिलती है कि मैनेजर को अपना स्वरूप कैसा रखना चाहिए।

दरअसल,कृष्ण ने संपूर्ण सौंदर्य के बारे में कहा है कि मन की शुद्धता के साथ ही तन का वैभव भी नजर आना चाहिए।

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