Posted in भारत गौरव - Mera Bharat Mahan

यदि भारत को बचाना है तो भारतीय भाषाओँ की रक्षा का संकल्प ले


**यदि भारत को बचाना है तो भारतीय भाषाओँ की रक्षा का संकल्प ले**
    भारत देश का नाम भारतीय संस्कृति के कारण जाना जाता था यदि भारतीय संस्कृति नष्ट हो गई तो भारत नहीं बचेगा सिर्फ इण्डिया रह जायेगा।अंग्रेजों द्वारा दिए गयी पाश्चात्य सभ्यता से युक्त देश का नाम इण्डिया है और संस्कारों से युक्त देश का नाम भारत है। यदि भारतीय संस्कृति और संस्कार की नहीं बचेंगे तो भारत भी नहीं बचेगा ।
     भारतीय संस्कृति की रक्षा भारतीय भाषाओँ और भारतीय शिक्षा पद्धति की रक्षा के बिना संभव ही नहीं है। अतः  भारत माँ के सचे पूत हम तभी माने जायेगें जब हम भारत की संस्कृति की रक्षा हेतू भारतीय भाषाओँ और शिक्षा पद्धति की रक्षा का संकल्प लेंगें।

     भारतीय भाषा-अभियान पन्ना(पेज) फेसबुक पर भारतीय भाषाओं,भारतीय शिक्षा पद्धति , भारत का स्वर्णिम इतिहास एवम् भारतीयताकी जानकारी से भारतीय नागरिकों को जागरूक करने के लिए तैयार किया है। इस पन्ना से जरुर जुड़े(like करें) https://m.facebook.com/bharateeybhasha

**यदि भारत को बचाना है तो भारतीय भाषाओँ की रक्षा का संकल्प ले**
भारत देश का नाम भारतीय संस्कृति के कारण जाना जाता था यदि भारतीय संस्कृति नष्ट हो गई तो भारत नहीं बचेगा सिर्फ इण्डिया रह जायेगा।अंग्रेजों द्वारा दिए गयी पाश्चात्य सभ्यता से युक्त देश का नाम इण्डिया है और संस्कारों से युक्त देश का नाम भारत है। यदि भारतीय संस्कृति और संस्कार की नहीं बचेंगे तो भारत भी नहीं बचेगा ।
भारतीय संस्कृति की रक्षा भारतीय भाषाओँ और भारतीय शिक्षा पद्धति की रक्षा के बिना संभव ही नहीं है। अतः भारत माँ के सचे पूत हम तभी माने जायेगें जब हम भारत की संस्कृति की रक्षा हेतू भारतीय भाषाओँ और शिक्षा पद्धति की रक्षा का संकल्प लेंगें।

भारतीय भाषा-अभियान पन्ना(पेज) फेसबुक पर भारतीय भाषाओं,भारतीय शिक्षा पद्धति , भारत का स्वर्णिम इतिहास एवम् भारतीयताकी जानकारी से भारतीय नागरिकों को जागरूक करने के लिए तैयार किया है। इस पन्ना से जरुर जुड़े(like करें) https://m.facebook.com/bharateeybhasha

Posted in भारतीय मंदिर - Bharatiya Mandir

जगन्नाथ मंदिर


पुरी में जगन्नाथ मंदिर केे कुछ आश्चर्यजनक तथ्य:-

1. मन्दिर के ऊपर स्थापित ध्वज सदैव हवा के विपरीत दिशा में लहराता है।

2. पुरी में किसी भी स्थान से आप मन्दिर के ऊपर लगे सुदर्शन चक्र को देखेंगे तो वह आपको सदैव अपने सामने ही

लगा दिखेगा।

3. सामान्य दिनों के समय हवा समुद्र से जमीन की तरफ आती है, और शाम के दौरान इसके विपरीत, लेकिन पुरी में

इसका उल्टा होता है ।

4. पक्षी या विमानों को मंदिर के ऊपर उड़ते हुए नहीं पायेगें।

5. मुख्य गुंबद की छाया दिन के किसी भी समय अदृश्य ही रहती है ।

6. मंदिर के अंदर पकाने के लिए भोजन की मात्रा पूरे वर्ष के लिए रहती है। प्रसाद की एक भी मात्रा कभी भी व्यर्थ

नहीं जाती, चाहे हजार लोगों से 20 लाख लोगों को खिला सकते हैं ।

7. मंदिर की रसोई में प्रसाद पकाने के लिए 7 बर्तन एक-दूसरे पर रखा जाता है और सब कुछ लकड़ी पर ही पकाया

जाता है । इस प्रक्रिया में शीर्ष बर्तन में सामग्री पहले पकती है फिर क्रमश: नीचे की तरफ एक के बाद एक पकती

जाती है।

8. मन्दिर के सिंहद्वार में पहला कदम प्रवेश करने पर ही (मंदिर के अंदर से) आप सागर द्वारा निर्मित किसी भी ध्वनि

नहीं सुन सकते, आप (मंदिर के बाहर से) एक ही कदम को पार करें जब आप इसे सुन सकते हैं, इसे शाम को स्पष्ट

रूप से अनुभव किया जा सकता है।

साथ में यह भी जाने:-
—————–

मन्दिर का रसोईघर दुनिया का सबसे बड़ा रसोईघर है।

प्रति दिन सांयकाल मन्दिर के ऊपर स्थापित ध्वज को मानव द्वारा उल्टा चढ़ कर बदला जाता है।

मन्दिर का क्षेत्रफल चार लाख वर्ग फिट में है।

मन्दिर की ऊंचाई 214 फिट है।

विशाल रसोई घर में भगवान जगन्नाथ को चढ़ाने वाले महाप्रसाद का निर्माण करने हेतु 500 रसोईये एवं उनके 300

सहायक-सहयोगी एक साथ काम करते है। सारा खाना मिट्टी के बर्तनो मे पकाया जाता है !

हमारे पूर्वज कितने बढे इंजीनियर रहें होंगे

अपनी भाषा अपनी संस्कृति अपनी सभ्यता पर गर्व करो
गर्व से कहो हम हिन्दुस्तानी है

ॐ ॐ

पुरी में जगन्नाथ मंदिर केे कुछ आश्चर्यजनक तथ्य:-

1. मन्दिर के ऊपर स्थापित ध्वज सदैव हवा के विपरीत दिशा में लहराता है।

2. पुरी में किसी भी स्थान से आप मन्दिर के ऊपर लगे सुदर्शन चक्र को देखेंगे तो वह आपको सदैव अपने सामने ही 

लगा दिखेगा।

3. सामान्य दिनों के समय हवा समुद्र से जमीन की तरफ आती है, और शाम के दौरान इसके विपरीत, लेकिन पुरी में 

इसका उल्टा होता है ।

4. पक्षी या विमानों को मंदिर के ऊपर उड़ते हुए नहीं पायेगें।

5. मुख्य गुंबद की छाया दिन के किसी भी समय अदृश्य ही रहती है ।

6. मंदिर के अंदर पकाने के लिए भोजन की मात्रा पूरे वर्ष के लिए रहती है। प्रसाद की एक भी मात्रा कभी भी व्यर्थ 

नहीं जाती, चाहे हजार लोगों से 20 लाख लोगों को खिला सकते हैं ।

7. मंदिर की रसोई में प्रसाद पकाने के लिए 7 बर्तन एक-दूसरे पर रखा जाता है और सब कुछ लकड़ी पर ही पकाया 

जाता है । इस प्रक्रिया में शीर्ष बर्तन में सामग्री पहले पकती है फिर क्रमश: नीचे की तरफ एक के बाद एक पकती 

जाती है।

8. मन्दिर के सिंहद्वार में पहला कदम प्रवेश करने पर ही (मंदिर के अंदर से) आप सागर द्वारा निर्मित किसी भी ध्वनि 

नहीं सुन सकते, आप (मंदिर के बाहर से) एक ही कदम को पार करें जब आप इसे सुन सकते हैं, इसे शाम को स्पष्ट 

रूप से अनुभव किया जा सकता है।

साथ में यह भी जाने:-
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मन्दिर का रसोईघर दुनिया का सबसे बड़ा रसोईघर है।

प्रति दिन सांयकाल मन्दिर के ऊपर स्थापित ध्वज को मानव द्वारा उल्टा चढ़ कर बदला जाता है।

मन्दिर का क्षेत्रफल चार लाख वर्ग फिट में है।

मन्दिर की ऊंचाई 214 फिट है।

विशाल रसोई घर में भगवान जगन्नाथ को चढ़ाने वाले महाप्रसाद का निर्माण करने हेतु 500 रसोईये एवं उनके 300 

सहायक-सहयोगी एक साथ काम करते है। सारा खाना मिट्टी के बर्तनो मे पकाया जाता है !

हमारे पूर्वज कितने बढे इंजीनियर रहें होंगे

अपनी भाषा अपनी संस्कृति अपनी सभ्यता पर गर्व करो
गर्व से कहो हम हिन्दुस्तानी है

ॐ ॐ